




अमन जाजी ने संस्कारम विश्वविद्यालय में किया आजाद सिंह का प्रमोशन
फिल्म की पूरी टीम ने विद्यार्थियों से किया संवाद, अमन जाजी के गीतों पर जमकर झूमे छात्र-छात्राएं
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: संस्कारम विश्वविद्यालय झज्जर में विद्यार्थियों के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रममें चर्चित हरियाणवी फिल्मआजाद सिंहकी टीम फिल्म के प्रमोशन के लिए विश्वविद्यालय पहुंची। फिल्म केहीरो एवं लोकप्रिय हरियाणवी गायक अमन जाजीके साथ निर्देशककुलदीप राठी, लेखक राकेश माजरिया, निर्माता मिनी दांगी, विलेन संदीप गोयत तथा अभिनेत्रियां प्रिश्का सोलंकी एवं मिस्ट्री भारद्वाजने विद्यार्थियों से मुलाकात की और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत फिल्म की टीम के स्वागत के साथ हुई। कलाकारों ने फिल्म निर्माण, अभिनय, निर्देशन और लेखन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। टीम के सदस्यों ने फिल्म को लेकरविद्यार्थियों के साथ अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम का विशेष आकर्षण अभिनेता एवं गायकअमन जाजी की लाइव प्रस्तुतिरही। उन्होंने विद्यार्थियों की फरमाइश पर अपने लोकप्रिय हरियाणवी गीत प्रस्तुत किए। उनके गीतों पर संस्कारम विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं जमकर झूमे । अमन जाजी ने विद्यार्थियों के साथ हरियाणवी अंदाज में बातचीत करते हुए अपने संगीत और अभिनय के सफर से जुड़े अनुभव भी साझा किए।वहींप्रिश्का सोलंकी, मिस्ट्री भारद्वाज और संदीप गोयतने भी अपने किरदारों एवं फिल्म से जुड़े अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। फिल्म की टीम ने विद्यार्थियों से 18 सितंबर को फिल्म देखने का भी आग्रह किया। संस्कारम विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. महिपाल यादव ने बताया की इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों कोसिनेमा, संगीत, अभिनय एवं अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी कलाकारों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान करनाथा। विश्वविद्यालय का मानना है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ उन्हें विभिन्न रचनात्मक एवं व्यावहारिक क्षेत्रों से जोड़ना भी आवश्यक है। इस अवसर परविश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजित सिंहने कहा कि संस्कारम विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ऐसे अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जो उनके व्यक्तित्व, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि फिल्म एवं संगीत जगत के कलाकारों के साथ इस तरह का संवाद विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण और प्रेरणा प्रदान करता है। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल रहा। विद्यार्थियों ने फिल्म की टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया और अमन जाजी की प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम के अंत में संस्कारम विश्वविद्यालय की ओर सेफिल्म आजाद सिंहकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया गया।

समाधान शिविरों से जनसमस्याओं का हो रहा स्थाई समाधान: एसडीएम
सोमवार को जिला मुख्यालय और उपमंडल स्तर पर आयोजित हुए समाधान शिविर
जिला स्तरीय समाधान शिविर में एसडीएम रवि मीणा ने सुनी जनसमस्याएं
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के अनुरूप डीसी वर्षा खांगवाल के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किए जा रहे समाधान शिविर नागरिकों की समस्याओं के स्थाई निदान का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। यह बात एसडीएम रवि मीणा ने सोमवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर के दौरान कही। एसडीएम झज्जर रवि मीणा ने बताया कि डीसी वर्षा खांगवाल के मार्गदर्शन में इन शिविरों में आने वाली हर शिकायत का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि आमजन को शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली का सीधा और मौके पर लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसेवा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी शिकायत के समाधान में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीएम ने जानकारी दी कि नागरिकों की सुविधा के लिए प्रत्येक सोमवार व गुरुवार (वीरवार) को सुबह 10 से 12 बजे तक ये शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य यह है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। एक ही छत के नीचे संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में राजस्व विभाग,परिवार पहचान पत्र, जनस्वास्थ्य विभाग, पुलिस और बिजली विभाग जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं का मौके पर ही निदान किया जा रहा है।
उपमंडल स्तर पर भी हो रहा जनसमस्याओं का समाधान
एसडीएम रवि मीणा ने बताया कि जिला मुख्यालय के साथ-साथ उपमंडल स्तर पर भी बहादुरगढ़, बादली और बेरी में एसडीएम की अध्यक्षता में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। आज आयोजित शिविर में शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।





पात्र युवा मतदाता बनने के लिए 30 सितंबर तक भरें फार्म-6: डीसी
मतदाता सूची में नाम जांचना जरूरी, त्रुटि होने पर फार्म-8 के माध्यम से कराएं सुधार
डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने पात्र नागरिकों से की अपील
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी वर्षा खांगवाल ने पात्र युवाओं और नागरिकों से आह्वान किया है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांचें। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज नहीं है, तो वह 30 सितंबर 2026 तक फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करे। इसी प्रकार नाम, पता अथवा अन्य विवरण में त्रुटि होने पर निर्धारित फार्म के माध्यम से सुधार करवाया जा सकता है। डीसी ने कहा कि हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में दर्ज हो, यह जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने का कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है।
पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा
डीसी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है। केवल पुराने मतदाता रिकॉर्ड अथवा किसी दस्तावेज के उपलब्ध न होने के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता। नाम हटाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के तहत ही की जाएगी। जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने बताया कि जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे फार्म-6 भरकर आवेदन कर सकते हैं। वहीं मतदाता सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में संशोधन के लिए फार्म-8 का उपयोग किया जा सकता है। दोनों प्रपत्र 30 सितंबर 2026 तक संबंधित निर्वाचक पंजीयन अधिकारी अथवा बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा करवाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने अथवा स्थानांतरण से संबंधित आवेदन के साथ निर्धारित घोषणा-पत्र भी देना होगा। इसमें पूर्व विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची में स्वयं अथवा माता-पिताध्दादा-दादी के विवरण की जानकारी उपलब्ध होने पर उसका उल्लेख किया जा सकता है।
वोटर के जन्म वर्ष के आधार पर दस्तावेज होंगे मान्य
डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि जिन पात्र नागरिकों के पास पिछली मतदाता सूची का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वे अपने जन्म वर्ष के अनुसार निर्धारित दस्तावेजों के माध्यम से पात्रता संबंधी प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्ति सांकेतिक सूची में शामिल किसी भी निर्धारित दस्तावेज के माध्यम से अपनी पात्रता का प्रमाण दे सकते हैं। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति को अपना तथा माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज देना होगा। वहीं 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति को स्वयं, पिता और माता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यदि माता-पिता भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो जन्म के समय उनके वैध वीजा और पासपोर्ट की प्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।
इन दस्तावेजों से प्रस्तुत किया जा सकता है प्रमाण
डीसी ने बताया कि निर्धारित दस्तावेजों की सांकेतिक सूची में सरकारी अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा जारी पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश, जन्म प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक अथवा अन्य शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, स्थायी निवास प्रमाण-पत्र, वन अधिकार प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, परिवार रजिस्टर तथा सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि वे एसआईआर अथवा मतदाता सूची को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित किसी भी अफवाह और भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें। किसी प्रकार की शंका या समस्या होने पर संबंधित बूथ लेवल अधिकारी, निर्वाचक पंजीयन अधिकारी अथवा सहायक निर्वाचक पंजीयन अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 पर भी जानकारी ली जा सकती है।
झज्जर में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई के लिए बिजली अदालत आज
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) द्वारा अधीक्षण अभियंता कार्यालय में मंगलवार 08 सितंबर को बिजली अदालत व उपभोक्ता कष्ट निवारण फोरम की बैठक का आयोजन किया जाएगा। बिजली अदालत तथा उपभोक्ता कष्ट निवारण फोरम की बैठक का आयोजन सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक किया जाएगा। यह अदालत फोरम के चेयरमैन एवं बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता ऑपरेशन सर्कल झज्जर की अध्यक्षता में होगी। प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों को झज्जर कार्यालय में सुना जाएगा। इस दौरान बिजली बिल, कनेक्शन और अन्य तकनीकी समस्याओं से जुड़े परिवादों की समीक्षा की जाएगी।




पर्यावरण के असली पहरेदार हैं सफाईकर्मी: विक्रम कादयान
सफाई कर्मियों की जायज मांगों को पूरा करे सरकार : विक्रम कादयान
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: आज प्रदेश के हर वर्ग में असंतोष व्याप्त है। किसी भी कर्मचारी, मजदूर और कम वेतन पाने वाले व्यक्ति की आजीविका सुरक्षित नहीं है। सफाई कर्मियों के साथ भी सरकार उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रही है। जिस हरियाणा को कभी प्राकृतिक सौंदर्य और स्वच्छ वातावरण के लिए जाना जाता था, आज वह जगह-जगह कूड़े के ढेरों की समस्या से जूझ रहा है। यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विक्रम कादयान ने सफाई कर्मियों की जायज मांगों का समर्थन करते हुए कही। विक्रम कादयान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को दो वर्ष के भीतर नियमित करने की ठोस नीति बनाई गई है, जबकि हरियाणा सरकार कर्मचारियों और सफाई कर्मियों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में कर्मचारियों के हित सुरक्षित थे और हरियाणा विकास के अनेक क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल था। उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हर क्षेत्र में नंबर वन रहने वाला हरियाणा आज गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रदेश पर लगभग 5 लाख 53 हजार करोड़ रुपये का कर्ज होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि पुराने कर्ज की अदायगी के लिए भी नया कर्ज उठाना पड़ रहा है। विक्रम कादयान ने आरोप लगाया कि सरकार के अनेक विभागों को ठेके और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में इतिहास विभाग सहित कई विभागों में फैकल्टी की कमी के कारण शैक्षणिक और शोध कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की अपेक्षा लोग निजी अकादमियों और संस्थानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बेरोजगारी की मार से पीड़ित युवा शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों से वंचित हो रहे हैं। इससे प्रदेश में सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं तथा नशाखोरी और अपराध का ग्राफ भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। विक्रम कादयान ने कहा कि नई शिक्षा नीति की व्यापक समीक्षा समय की जरूरत है, ताकि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि सरकार सफाई कर्मियों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। सफाईकर्मी वास्तव में पर्यावरण और स्वच्छता के असली पहरेदार हैं। उनके बिना स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। विक्रम कादयान ने सरकार से मांग की कि सफाई कर्मियों को जल्द से जल्द नियमित किया जाए और उनकी सभी जायज मांगों को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सम्मान और सुरक्षित भविष्य देकर ही प्रदेश में स्वच्छता का बेहतर वातावरण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा को अपने स्थापना दिवस और भविष्य के विकास का उत्सव तभी सही मायनों में मनाना चाहिए, जब कर्मचारी, सफाईकर्मी और समाज का हर वर्ग खुशहाल, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा हो।



मेगा रोजगार मेले में युवाओं को मिले मौके पर ही नियुक्ति पत्र
विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने युवाओं को किया प्रोत्साहित
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: जिला रोजगार कार्यालय रेवाड़ी एवं राजकीय प्रौद्योगिक संस्थान रेवाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को बाल भवन, रेवाड़ी में मेगा रोजगार मेले का आयोजन किया गया। रोजगार मेले में रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. वंदना पोपली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने युवाओं एवं नियोक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने उपस्थित युवाओं एवं नियोक्ताओं को विकसित भारत-2047 की प्रतिज्ञा दिलाई तथा युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, कौशल और सकारात्मक सोच के माध्यम से युवा अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. वंदना पोपली ने कहा कि रोजगार मेले युवाओं और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता और कौशल का निरंतर विकास करने का आह्वान करते हुए कहा कि आज युवाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने नियुक्ति पाने वाले युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जिला रोजगार अधिकारी दिनेश तंवर ने बताया कि मेगा रोजगार मेले में हीरो टेक्निको, निप्पोन, जीएलएस, मोल्ड-टेक सहित 20 से अधिक प्रतिष्ठित नियोक्ताओं ने भाग लिया। रोजगार मेले में करीब 800 युवाओं ने अपनी प्रतिभागिता दर्ज कराई, जिनमें से 750 युवाओं को विभिन्न कंपनियों द्वारा मौके पर ही नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर एडीसी राहुल मोदी, एसडीएम रेवाड़ी दलबीर सिंह, भाजपा जिला महामंत्री कुलदीप चैहान आदि उपस्थित रहे।



नशा मुक्ति केंद्र रेवाड़ी का किया दौरा
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पंचकूला के निर्देशानुसार डॉ. रेनू सोलखे, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कम सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेवाड़ी ने सोमवार को नशा मुक्ति केंद्र रेवाड़ी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नशा मुक्ति केंद्र के कार्यों की समीक्षा की। नशा मुक्ति केंद्र में संदीपा काउंसलर ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र में 6 रोगी फिलहाल उपस्थित हैं। रोगियों की समय समय पर काउंसलिंग की जाती है व उन्हें नशा छोड़ने के प्रति जागरूक किया जाता है। इस निरीक्षण में सीजेएम डॉ. रेनू सोलखे ने बताया कि कानूनी सहायता और उनकी सेवाओं के बारे में सभी को जागरूक किया जाए ताकि कानून की सहायता का लाभ उठा सके। विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के लिए निशुल्क कानूनी सेवाओं की पेशकश करना व साथ में उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने का प्रयास करता है। इस दौरान डॉ. रेनू सोलखे ने सभी को नशा न करने के बारे में प्रेरित किया तथा उससे होने वाले नुकसान के बारे में उनको अवगत करवाया।

समाधान शिविर: प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का किया जा रहा निवारण – डीसी
डीसी अभिषेक मीणा ने सुनी समाधान शिविर में आमजन की समस्याएं
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में जनसेवा को समर्पित समाधान शिविर नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कारगर साबित हो रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक सोमवार व गुरुवार को लगाए जा रहे समाधान शिविर में शिकायतों का निवारण करते हुए लोगों को राहत प्रदान की जा रही है। डीसी अभिषेक मीणा ने सोमवार को आयोजित समाधान शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आमजन की शिकायतों को सुनते हुए समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया। गांव जैतड़ावास में मकान से हाई वोल्टेज लाइन को हटवाने की शिकायत पर डीसी ने डीएचबीवीएन के अधिकारियों को उचित कार्यवाही करते हुए लाइन हटवाने के निर्देश दिए। विजय नगर गली नंबर-15 में अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण की शिकायत पर डीसी ने नगर परिषद के अधिकारियों को अतिक्रमण हटवाने के निर्देश दिए। गांव मामडिया आसमपुर में रास्ते के बीच में पोल को हटवाने की शिकायत पर डीसी ने डीएचबीवीएन के अधिकारियों को रास्ते से पोल हटवाने के निर्देश दिए। इसके अलावा समाधान शिविर में जमीनी विवाद, अवैध कब्जे, बिजली, पानी, रास्ते पक्का करवाने, पुलिस विभाग सहित अन्य शिकायते सामने आई जिनका डीसी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। समाधान शिविर में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) स्टेट कोऑर्डिनेटर डा. सतीश खोला ने परिवार पहचान पत्र से संबंधित शिकायतों को सुना और मौके पर ही कई शिकायतों का समाधान करवाया। डीसी ने शिकायतकर्ताओं को आश्वासन दिया कि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस अवसर पर एडीसी राहुल मोदी, सीटीएम जितेंद्र कुमार, डीएसपी पवन कुमार सहित विभिन्न विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।




राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर को
लोक अदालत में आपसी सहमति से निपटाए जाएंगे मामले – सीजेएम डा. रेनू सोलखे
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सीजेएम डा. रेनू सोलखे ने बताया कि जिला में रेवाड़ी, कोसली और बावल न्यायिक परिसर में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से मामलों का निपटारा करवाया जाएगा। डालसा सचिव एवं सीजेएम डा. रेनू सोलखे ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी समझौते के माध्यम से त्वरित निपटारा करवाना है। लोक अदालत में ट्रैफिक चालान, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम, पारिवारिक विवाद, दीवानी एवं फौजदारी मामले, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली-पानी के बिलों तथा राजस्व आदि का निपटारा किया जाएगा। सीजेएम डॉ. रेनू सोलखे ने आमजन से अपील की है कि शनिवार, 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर का लाभ उठाएं। कोर्ट में अपने लंबित मामलों को आपसी सहमति से हल करवा लेने में ही फायदा है, जिससे कि समय कम लगे और मामूली खर्च में ही विवाद का निपटारा हो जाए। कोई भी केस में कोर्ट में चलता है तो लोगों को उसके लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं और धन व समय भी खर्च होता है। लोक अदालत में आदमी आकर विवाद को सुलझा ले तो यह वहीं समाप्त हो जाता है।


रेवाड़ी में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाएगा सेवा संकल्प अभियान
जन-जन तक सेवा, जागरूकता, जनभागीदारी और विकास से जुड़ी गतिविधियां होंगी आयोजित
सेवा संकल्प अभियान को लेकर डीसी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर तय की जिम्मेदारियां
17 सितंबर को ‘‘आशीर्वाद का दीया’’ कार्यकम से होगा अभियान का शुभारंभ
सभी विभाग आपसी समन्वय और प्रभावी दस्तावेजीकरण के साथ समयबद्ध करे आयोजन-डीसी
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि जिला में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले एक माह के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत जन-जन तक सेवा, जागरूकता, जनभागीदारी और विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएगी। डीसी अभिषेक मीणा ने सोमवार को सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। डीसी ने सभी विभागों को अपने-अपने मॉड्यूल के तहत निर्धारित गतिविधियों की समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय के साथ अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाने के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि यह अभियान केवल विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे व्यापक जन अभियान का स्वरूप दिया जाए। अभियान के तहत अलग-अलग मॉड्यूल के माध्यम से सेवा, जागरूकता, जनभागीदारी, रचनात्मक गतिविधियों एवं विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गतिविधि में विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, लाभार्थियों और आम नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा अभियान का शुभारंभ
डीसी अभिषेक मीणा ने कहा कि 17 सितंबर की शाम बूथ स्तर पर प्रमुख सरकारी योजनाओं एवं कोविड-19 टीकाकरण के लाभार्थियों द्वारा ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित कर अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही जिले में उन स्थानों पर भी ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित किया जाएगा, जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा परियोजनाओं का उद्घाटन अथवा शिलान्यास किया गया है। अमृत सरोवरों पर भी ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित किए जाएंगे। इसी प्रकार गांव स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को अभियान से जोड़ा जाएगा।
सपनों का भारत’ में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मिलेगा मंच
डीसी ने बताया कि अभियान के तहत ‘सपनों का भारतध्इंडिया ऑफ द ड्रीम्स’ मॉड्यूल में सरकारी एवं निजी विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थी विकसित भारत के अपने सपनों और भविष्य की कल्पना को रचनात्मक माध्यमों से अभिव्यक्त करेंगे। स्कूल स्तर के बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिला एवं राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी तथा विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस दौरान विद्यार्थियों की रचनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें अभिभावकों, स्थानीय ग्रामीणों एवं आमजन को आमंत्रित किया जाएगा।
नमो सेवा गाथा’ से लेकर ‘आंगन का उत्सव’ तक, सेवा और जनभागीदारी पर जोर
नमो सेवा गाथा’ मॉड्यूल के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों तथा सामुदायिक केंद्रों में 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा कल्याणकारी योजनाओं तथा विकासात्मक बदलावों को प्रदर्शित करने वाली सरल भावनात्मक एवं संगीत आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं ‘आंगन का उत्सव’ के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें माताओं, बच्चों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भागीदारी रहेगी। पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण संबंधी जानकारी का प्रसार करने के साथ बच्चों के लिए खेल, चित्रकला एवं गीत जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी। फल एवं मिठाई वितरण, बाल पोषण से संबंधित कॉमिक पुस्तकों का वितरण तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं एवं आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने जैसी गतिविधियां भी होंगी।
कहानी बदलाव की’ में सामने आएगी सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर
डीसी ने बताया कि ‘कहानी बदलाव की’ मॉड्यूल के तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। सभी विभाग अपने-अपने योजनागत लाभार्थियों की पहचान कर उनके अनुभव रिकॉर्ड करवाएंगे। इन वीडियो के माध्यम से सरकारी योजनाओं से लाभार्थियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को सामने लाया जाएगा।
गांवों से जिला मुख्यालय तक पहुंचेगी ‘सेवा ज्योति यात्रा’
सेवा ज्योति यात्रा’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक मशाल यात्रा आयोजित की जाएगी। इसके लिए यात्रा का रूट निर्धारित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सेवा मेरा योगदान’ से हर विधानसभा क्षेत्र में बढ़ेगी जनभागीदारी
उन्होंने कहा कि ‘सेवा मेरा योगदान’ मॉड्यूल के तहत नगर निकाय के सहयोग से जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दो स्थानों पर सेवा एवं जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य जांच शिविर, डिजिटल साक्षरता, साइबर जागरूकता, रक्तदान, पौधारोपण, वृद्धाश्रमों में सेवा सहित विभिन्न गतिविधियां शामिल होंगी। इन कार्यक्रमों में कला, साहित्य, मीडिया, धार्मिक क्षेत्र तथा पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी जोड़ा जाएगा। डीसी अभिषेक मीणा ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। उन्होंने सभी विभागों को अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने तथा प्रत्येक कार्यक्रम की उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए। बैठक में एडीसी राहुल मोदी, डीएमसी प्रदीप अहलावत, एसडीएम रेवाड़ी दलबीर सिंह, सीटीएम जितेंद्र कुमार, डीईओ राजेंद्र शर्मा, डीईईओ प्रदीप दहिया, डीएसडब्ल्यूओ रेनू बाला, जिला महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी शालू यादव और डीआईपीआरओ बिजेंद्र कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।





ज्ञान से अवसर तक: The Talent Farm के Annual Appreciation Day में 21 UPSC सफल युवाओं समेत प्रतिभाओं का किया सम्मान’
झज्जर, 07 सितम्बर, अभीतक: ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ स्थापित The Talent Farm का Annual Appreciation Day 2026 रविवार को “ज्ञान से अवसर तक” थीम पर उत्साह और गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में UPSC सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल युवाओं और शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में The Talent Farm के संस्थापक श्री सचिन अहलावत, IRS (बैच 2016) की विशेष भूमिका रही। उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी सम्मानित अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम को अंतिम रूप देने और सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, निरंतर मेहनत करने और लक्ष्य के प्रति अनुशासित रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री दीपक कुमार, कमिश्नर, Customs and Indirect Taxes रोहतक रहे। विशिष्ट अतिथि श्री अजय तेवतिया, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रोहतक तथा श्री कप्तान सिंह सोलंकी, अध्यक्ष, महाराजा सूरजमल एजुकेशनल सोसाइटी, दिल्ली रहे। संस्था के मार्गदर्शक एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी श्री करनाल सिंह एवं श्री अमित दहिया IRS (मेंटर) की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में न्यायिक, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज राणा (झज्जर), सीजेएम विशाल (झज्जर), सीजेएम श्री एम.डी. शगीर (रोहतक), IRSअधिकारीगण श्री विकास सांगवान, श्री अंकित नैन, AAG श्री सौरभ गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम सिंह तथा अधिवक्ता शिवांक प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। The Talent Farm ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. नीतू दहिया ने स्वागत संबोधन में विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन और निरंतर सीखने का संदेश दिया।
21 UPSC सफल युवाओं का सम्मान बना आकर्षण
समारोह का प्रमुख आकर्षण हाल ही में UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 21 विद्यार्थियों का सम्मान रहा। मंच पर इन सफल युवाओं को सम्मानित करते हुए अतिथियों ने उनके संघर्ष और उपलब्धियों की सराहना की तथा राष्ट्रसेवा के लिए शुभकामनाएं दीं। डीघल गांव के साहिल अहलावत को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। साहिल ने न्च्ैब् परीक्षा में 735वीं रैंक प्राप्त कर अपने गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम में सबसे प्रेरणादायी दृश्य तब देखने को मिला जब UPSC में सफल युवाओं ने स्वयं समारोह में मौजूद विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। सफलता प्राप्त कर चुके युवाओं को अपने सामने देखकर बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। उनके अनुभवों और संघर्ष ने कई विद्यार्थियों को UPSC सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
25 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि
समारोह में The Talent Farm से जुड़े 25 विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इनमें 20 विद्यार्थी कक्षा 12वीं और 5 विद्यार्थी कक्षा 10वीं के हैं। 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वालों को ₹21,000, 90 से 95 प्रतिशत वालों को ₹11,000, 85 से 90 प्रतिशत वालों को ₹5,100 तथा 80 से 85 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वालों को ₹2,100 की प्रोत्साहन राशि दी गई।
One Book Hundred Dreamsपहल का शुभारंभ
समारोह में The Talent Farm की एक नई पहल “एक पुस्तक, सौ सपने One Book Hundred Dreams का भी शुभारंभ किया गया। संस्था के मार्गदर्शक एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी श्री कर्नल सिंह ने ज्ीम ज्ंसमदज थ्ंतउ स्पइतंतल को पुस्तकों का एक सेट भेंट कर इस पहल का अनावरण किया। इस पहल का उद्देश्य पुस्तकों और ज्ञान के माध्यम से अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक सीखने के अवसर पहुंचाना है। एक पुस्तक अनेक विद्यार्थियों के विचारों को प्रभावित कर सकती है और उनके भीतर नए सपनों को जन्म दे सकती है। इसी विचार को One Book Hundred Dreams के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। इसी अवसर पर The Talent Farm की वेबसाइट www.thetalentfarm.in का भी श्री कर्नल सिंह द्वारा अनावरण किया गया। वेबसाइट के माध्यम से संस्था की गतिविधियों, शैक्षणिक पहलों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधनों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए निःशुल्क शिक्षा और अवसर
The Talent Farm की स्थापना वर्ष 2025 में संस्थापक श्री सचिन अहलावत, प्त्ै (बैच 2016) द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से की गई, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके आसपास उपलब्ध नहीं हो पाती या जो महंगी शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते। संस्था में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को करियर काउंसलिंग, मार्गदर्शन, लाइब्रेरी में अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन भी निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। संस्था का उद्देश्य है कि इन सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के विद्यार्थियों तक पहुंचे। The Talent Farm के मेंटर श्री अमित दहिया, प्त्ै (बैच 2014) संस्था की शुरुआत से ही इससे जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों की काउंसलिंग, करियर मार्गदर्शन तथा व्यक्तिगत सलाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सचिन अहलावत के संबोधन ने जगाई नई उम्मीद
संस्थापक श्री सचिन अहलावत के संबोधन का विद्यार्थियों पर विशेष प्रभाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उसे सही दिशा, संसाधन और अवसर देने की है। उनके संबोधन के बाद कई विद्यार्थियों ने भविष्य में न्च्ैब् सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और अपने गांव एवं परिवार का नाम रोशन करने का संकल्प लिया। समारोह में ज्ीम ज्ंसमदज थ्ंतउ की श्रवनतदमलए टपेपवदए डपेेपवद, वर्ष 2025 की उपलब्धियों और संस्था के प्रभाव पर विशेष प्रस्तुति भी दी गई। इसके अलावा ज्ीम ज्ंसमदज थ्ंतउ से संबद्ध पुस्तकालय में अध्ययन करते हुए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले पांच विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।
पूरी टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में ज्ीम ज्ंसमदज थ्ंतउ की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था की अध्यक्ष डॉ. नीतू दहिया, सचिव डॉ. पारुल चैधरी तथा कोषाध्यक्ष श्री ओमवीर अहलावत के साथ स्वयंसेवक टीम के श्री दीपक अहलावत, श्री संदीप अहलावत, श्री यशवीर अहलावत, श्री बिजेंद्र अहलावत, श्री कुलदीप पंघाल, श्री नरेश अहलावत, श्री सचिन एवं श्री प्रवेश राठी ने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षक टीम में श्रीमती प्रियंका, श्रीमती सुनीता, सुश्री इंदू, सुश्री रिया, श्री जोगेंद्र, श्री रजनीश और श्री गौरव ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सम्मान समारोह के दौरान संस्थान के विद्यार्थियों ने एक जिम्मेदार स्वयंसेवक की भूमिका निभाते हुए सभी व्यवस्थाओं को कुशलतापूर्वक संभाला। उनकी इसी सक्रिय सहभागिता और निष्ठा ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित तथा पूर्णतः सफल बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और पूरी आयोजन टीम के प्रति टवजम व िज्ींदो के माध्यम से आभार व्यक्त किया गया। समारोह का समापन अगले वर्ष और बेहतर परिणाम हासिल करने के लक्ष्य, नई ऊर्जा और इस संकल्प के साथ हुआ कि ज्ञान को अवसर में बदलकर ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए सफलता के नए रास्ते तैयार किए जाएंगे।


हर शिकायत का निष्पक्ष व समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें विभागाध्यक्ष: एसडीएम’
’एसडीएम रेणुका नांदल ने उपमंडल स्तरीय समाधान शिविर में सुनी समस्याएं’
’बेरी, 07 सितम्बर, अभीतक: उपमंडल प्रशासन द्वारा आमजन की समस्याओं के शीघ्र समाधान के उद्देश्य से आयोजित समाधान शिविर में सोमवार को एसडीएम रेणुका नांदल ने नागरिकों की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए, ताकि नागरिकों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। एसडीएम रेणुका नांदल ने कहा कि समाधान शिविर जनसेवा और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को एक ही स्थान पर सुनकर उनका त्वरित समाधान किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निस्तारण में पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता बरती जाए तथा प्रत्येक मामले की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह है और नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और निर्धारित समय सीमा में उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए। शिविर में बिजली, पेयजल, सड़क, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व मामलों, पंचायत भूमि, अवैध कब्जों, बीपीएल एवं राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, परिवार पहचान पत्र तथा अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुईं। अधिकांश शिकायतों पर मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए भेजा गया। इस अवसर पर नायब तहसीलदार बेरी मनोज कुमार, पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता प्रवीण अहलावत, बिजली निगम से जेई योगेश कुमार, पटवारी पवन कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।’



’रिश्वत के 20 हजार रुपये लेते एएसआई रंगे हाथ गिरफ्तार’
एक लाख 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, पहले ही ले चुके थे 1.25 लाख रुपयेय दो अन्य पुलिसकर्मी भी मामले में नामजद’
हिसार, 07 सितम्बर, अभीतक: राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो हिसार की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डबवाली स्थित पुलिस चैकी गोल बाजार के एएसआई जगजीत सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामले में चैकी में तैनात हेड कांस्टेबल राकेश कुमार तथा एसपीओ (मुंशी) राजवीर को भी सह-आरोपी बनाया गया है। इस संबंध में एफआईआर नंबर 31, दिनांक 06.09.2026 को थाना ैट – ।ब्ठ, हिसार में धारा 308(2) बीएनएस तथा धारा 7 एवं 7। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। एएसआई जगजीत सिंह को 06 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता ने ब्यूरो को शिकायत दी थी कि एएसआई जगजीत सिंह ने अपने सहकर्मियों हेड कांस्टेबल राकेश कुमार और एसपीओ राजवीर के साथ मिलकर उसके मित्र बबलू और उसके परिवार को एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 266, दिनांक 21.08.2026 में संरक्षण देने के एवज में 1 लाख 45 हजार रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, आरोपियों द्वारा रिश्वत की 1 लाख 25 हजार रुपये की राशि पहले ही ली जा चुकी थी, जबकि शेष 20 हजार रुपये बाद में देने के लिए कहा गया था। शिकायत का सत्यापन करने के बाद ैट – ।ब्ठ की टीम ने जाल बिछाया। 06 सितंबर को ट्रैप के दौरान एएसआई जगजीत सिंह ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार की और इसके बाद यह राशि चैकी गोल बाजार, डबवाली में तैनात एसपीओ (मुंशी) राजवीर को सौंप दी। राजवीर ट्रैप की रकम लेकर मौके से फरार हो गया, जबकि एएसआई जगजीत सिंह को ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। ब्यूरो द्वारा मामले में आगे की जांच एवं अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जनहितकारी मुद्दों को लेकर लोक सेवा मंच का मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान जोरों पर’
मुद्दों के समर्थन में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करके पंजाबी समुदाय के लोगों ने की सरकार से समाधान की पुरजोर मांग’
शहर के पंजाबी भवन में अशोक प्रधान लोक सेवा मंच ने बैठक को किया संबोधित’
रेवाड़ी, 07 सितम्बर, अभीतक: मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान के तहत जनहितकारी मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच जोरदार आवाज बुलंद कर रहा है। इस सिलसिले में स्थानीय गढी बोलनी रोड स्थित पंजाबी भवन में आयोजित बैठक में अनेक मुद्दों के समर्थन में लोगों ने सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करके सरकार से समाधान की पुरजोर मांग की। शहर के पंजाबी समुदाय के नागरिकों का कुशलक्षेम पूछने सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान लोक सेवा मंच सहित कोर कमेटी के सदस्य महेश कौशिक,बीके राम सिंह,राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल,नंदलाल यादव,दयाराम आर्य,राजीव कुमार,देशराज यादव आदि पंजाबी भवन पहुंचें । सीनियर सिटीजन एवं रेलवेज के रिटायर्ड ऑफिसर नरेश कालरा ने बैठक की अध्यक्षता की । इस मौके पर राष्ट्रीय प्रगतिशील विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान लोक सेवा मंच एवं कोर कमेटी सदस्यों ने पंजाबी समाज के प्रधान सचिन मलिक एडवोकेट व उक्त समाज के अग्रणी पदाधिकारियों नरेंद्र मेहंदीरत्ता,कपिल अरोड़ा,अनिल ठकराल,प्रो. अनिल मखीजा आदि से लोक सेवा मंच की ओर से जनहित में उठाए जा रहे ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से सामूहिक चर्चा की । इसके उपरांत पंजाबी भवन में बैठक को संबोधित करते हुए अशोक प्रधान ने कहा कि राष्ट्र-समाज की आधी आबादी महिलाओं की सामाजिक बराबरी के लिए हर क्षेत्र में 50 फीसदी आरक्षित हिस्सेदारी,बेरोजगार महिलाओं को बस-ट्रेन-एरोप्लेन के टिकट किराये में 50 फीसदी रियायत,स्वरोजगार के लिए 20 करोड़ तक के लॉन्ग टर्म लोन दिये जाने चाहिए । उन्होंने सीनियर सिटीजंस के लिए सरकार से हेल्पलाइन शुरू करने,निःशुल्क मेडिकल सुरक्षा,वृद्धावस्था में हर नागरिक को गारंटिड सामाजिक सुरक्षा पेंशन,बस-ट्रेन-एरोप्लेन के किरायों में 70 फिसदी छूट देने,टोल मुक्त आवागमन,वृद्धावस्था पेंशन को न्यूनतम ₹10 हजार मासिक किये जाने का भी आग्रह किया । उन्होंने युवाओं को अधिकाधिक रोजगार-स्वरोजगार देने तथा इनसे वंचित युवा बेरोजगारों को न्यूनतम ₹20 हजार मासिक जॉब्लेस क्लेम देने की बात कही । उन्होंने आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने के लिए प्रदेश में धार्मिक- सांस्कृतिक संस्थाओं को रिपेयरिंग एवं ब्यूटीफिकेशन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए ग्रांट देने की मांग भी उठाई । बैठक में उपस्थित लोगों ने लोक सेवा मंच की ओर से लगातार बुलंद की जा रही उपरोक्त मांगों का जोरदार समर्थन करते हुए सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करके सरकार से समाधान की जोरदार मांग की । अध्यक्षीय संबोधन में नरेश कालरा ने सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच के जनहित में किये जा रहे प्रयासों को सकारात्मक बताते हुए उठाए जा रहे मुद्दों को विचारणीय बताया । उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान जनसेवा की आवाज बनकर समाज-राष्ट्र को आगे की ओर ले जाने में अहम योगदान दे रहे हैं जिसे समस्यापीड़ित लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है ।

LPG बुकिंग नियम बदला, ग्राहकों को बड़ी राहत!
LPG रीफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन से घटाकर 25 दिन किया गया
अब 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक किया जा सकेगा
ग्रामीण स्च्ळ ग्राहकों को बड़ी राहतकृ45 दिन के लंबे अंतर से छुटकारा
ग्रामीण और शहरी समेत सभी घरेलू स्च्ळ ग्राहकों के लिए 25 दिन का समान नियम
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इंटर-रीफिल बुकिंग गैप घटाने का फैसला किया
गुरुग्राम: गुरूग्राम- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पहुँचे गुरूग्राम
भौंडसी जेल में बंद संजीव अरोड़ा से मुलाकात करने पहुंचे
पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा पिछले कई महीनों से भौंडसी जेल में हैं बंद
9 मई को ईडी ने संजीव अरोड़ा को किया था गिरफ्तार
इससे पहले भी जेल में ही 23 मई को मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविन्द केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया ने संजीव अरोड़ा से कि थी मुलाकात



चंडीगढ: हरियाणा सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के मामला
मामले में प्रदेश सरकार ने की बड़ी कार्रवाई
पे रोल और भ्ज्ञत्।छ के लगभग 30 कर्मचारियों को सरकार की और से किया गया डिसमिस
एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है हरियाणा मे सफाई कर्मचारी हड़ताल पर है
फरीदाबाद :’जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस पर महिला विधायकों का प्रशिक्षण’
इस कार्यकर्म का उद्घाटन ’श्री ओम बिरला माननीय लोकसभा स्पीकर’ के द्वारा किया गया।
राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार द्वारा फरीदाबाद में महिला विधायकों के लिए ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजित की जा रही है।
इस कार्यशाला में ’श्रीमती गीता भुक्कल, विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री, हरियाणा’ ने प्रमुख रूप से उपस्थित होकर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता तथा शासन-व्यवस्था में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं विचार-विमर्श में भाग लेते हुए।
दादरी वाले विधायक सुनील सांगवान कह रहे हैं कि इस सरकार में कई मंत्री ऐसे हैं जिनसे मिलने जाओ तो मुंह सुजाए रखते हैं। अब सवाल ये है कि भला अपनी ही सरकार के विधायक से मुंह सुजाने की क्या वजह ? आखिर कौन हैं ये मुंह सुजाने वाले मंत्री..? कहीं विधायक जी का इशारा किसी महिला मंत्री की तरफ तो नहीं? किरण चैधरी जी ने तो जवाब भी दे दिया और कह रही हैं कि श्रुति के बारे में वो ऐसा कह रहे हैं तो गलतफहमी का शिकार हैं… हमने तो उनको चुनाव जितवाने में पूरजोर मदद की है।
चंडीगढ़: सीएम की अध्यक्षता में आज हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक : विद्यार्थियों के लिए 5 लाख डाटा सिम खरीद को मंजूरी दी
कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 5 लाख टेबलेट दिए जाएगें। इनके लिए डाटा सिम की खरीद की जाएगी
इसके अलावा हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के लिए 220वॉट की टयूबलर टाइप लीड एसिड बैटरी की खरीद प्रक्रिया को भी स्वीकृति प्रदान की गई, इनमें 100एएच, 200एएच तथा 120एएच सहित 5 टाईप की बैट्रियों की खरीद शामिल हैं।
एनएचएम के तहत 59 एडवांस लाइफ स्पोर्ट एम्बुलेंस सेवाओं की मंजूरी
हैफेड द्वारा संचालित असंध शुगर मिल के वार्षिक ओवरहॉलिंग, मरम्मत, रखरखाव एवं सामान सहित एक साल के लिए 11.90 करोड़ रुपए में चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई
नेशनल हैल्थ मिशन के तहत दक्षिण जॉन के लिए 33 तथा नोर्थ जॉन के लिए 26 एडवासं लाइफ स्पोर्ट एम्बुलेंस की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नागरिकों को देने के लिए मंजूरी प्रदान की गई।
एचपीपीसी बैठक में लगभग 90 करोड़ रुपए से अधिक के सेवा कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई
कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल का बयान
सरकार की अपील का प्रदेश भर में दिखा सकारात्मक असर
आज 387 सफाईकर्मी काम पर लौटे वापस
सरकार हर कदम पर अपने सफाईकर्मिंयों के खड़ी है साथ- कैबिनेट मंत्री
प्रदेशहित में काम पर लौटने वाले सभी कर्मियों का स्वागत- कैबिनेट मंत्री
बाकि बचे हुए कर्मियों से भी जल्द काम पर लौटकर प्रदेश की स्वच्छता की में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की विपुल गोयल ने की अपील






केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जनभागीदारी का आह्वान किया
पहली बार आयोजित अनोखे संवाद में एनसीआर के 63 शहरों के महापौर और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि एकजुट हुए तथा साफ हवा की शपथ ली
वायु प्रदूषण नियंत्रण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण जमीनी स्तर तक पहुंचाना आवश्यकय जनप्रतिनिधि नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं: श्री भूपेन्द्र यादव
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने महापौरों और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से स्वच्छ वायु मिशन को आगे बढ़ाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस संवाद में छब्त् के 63 शहरों के महापौरों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वायु प्रदूषण के मुद्दे पर निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय द्वारा आयोजित इस तरह के बड़े पैमाने पर संवाद का यह पहला अवसर है। श्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और डेटा-आधारित दृष्टिकोण जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए, जिसमें जनप्रतिनिधि कार्ययोजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में केन्द्रीय भूमिका निभाएं। उन्होंने महापौरों और स्थानीय प्रतिनिधियों को उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करने तथा नागरिकों को अनावश्यक प्रदूषण रोकने और स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय प्रथम प्रत्युत्तरदाता हैं और मार्गदर्शन के साथ किए गए प्रयासों से व्यापक बदलाव ला सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे पर उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहरी क्षेत्रों के तेजी से विस्तार और इसके परिणामस्वरूप ठोस अपशिष्ट की समस्या को रेखांकित करते हुए मंत्री ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 तथा निर्माण एवं विध्वंस (ब्-क्) अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2025 को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में स्थानीय निकायों की शक्तियों और जिम्मेदारियों से भली-भांति परिचित होने तथा नागरिकों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने हेतु पहले सकारात्मक कदम उठाने का आह्वान किया। श्री यादव ने स्थानीय निकायों से सड़कों के किनारे स्थानीय और सूखा-रोधी घास की प्रजातियां लगाकर हरित आवरण बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। उन्होंने प्रभावी सफाई सुनिश्चित करने, प्लास्टिक के उपयोग और बायोमास जलाने की रोकथाम तथा मानकों के अनुरूप न चलने वाले उद्योगों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण में जनभागीदारी के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने का भी आह्वान किया।



33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए रास्ते खोलेगा: लोकसभा अध्यक्ष
वह दिन दूर नहीं जब सार्वजनिक सेवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक होगी: लोकसभा अध्यक्ष
अब ध्यान सिर्फ सहायता देने से हटकर महिलाओं को नीतियां और कानून बनाने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए: लोकसभा अध्यक्ष
महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में आगे नहीं बढ़ सकता: लोकसभा अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ने फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (छब्ॅ) द्वारा आयोजित लिंग-उत्तरदायी शासन (ळमदकमत-त्मेचवदेपअम ळवअमतदंदबम) पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन किया
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी। श्री बिरला ने आज फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (छब्ॅ) द्वारा आयोजित ष्लिंग-उत्तरदायी शासनष् विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। श्री बिरला ने कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायककृलोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम सेकृमहिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों। श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें, ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं में उन कानूनों और संस्थागत तंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जो उनकी चिंताओं के समाधान के लिए उपलब्ध हैं। यह उल्लेख करते हुए कि महिलाएं हमेशा से भारत के परिवर्तन के मोर्चे पर आगे रही हैंकृस्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र-निर्माण से लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तककृश्री बिरला ने रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम महिला विधायकों को अपने अनुभवों, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने के लिए एक आवश्यक मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है। विभिन्न राज्यों इन और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि वे विधायी मंचों के माध्यम से महिलाओं की आकांक्षाओं को आवाज देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अपने कौशल को और धार देने का आग्रह किया। एक जीवंत लोकतंत्र में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा कि जनता की चुनौतियों और आकांक्षाओं का समाधान निरंतर चर्चा और विचार-विमर्श के माध्यम से सबसे अच्छे ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि संवेदनशीलता महिलाओं के नेतृत्व की एक मुख्य ताकत है, जो लोगों की चिंताओं की गहरी समझ और प्रभावी समाधान खोजने की अधिक क्षमता को बढ़ावा देती है। उन्होंने जोड़ा कि एक संवेदनशील और उत्तरदायी कार्य संस्कृति सामाजिक चुनौतियों से निपटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने अंत में कहा कि महिलाओं के नेतृत्व को आगे बढ़ाना एक सामूहिक संकल्प बना रहना चाहिए, और उन्होंने उम्मीद जताई कि निरंतर प्रयासों से महिलाएं राष्ट्रीय जीवन के हर क्षेत्र में तेजी से नेतृत्व के पदों पर आसीन होंगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकरय हरियाणा सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेश नागर और 20 राज्यों एवं 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायक उपस्थित थे।



प्रधानमंत्री 8 सितंबर को गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा करेंगे
प्रधानमंत्री वडोदरा में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, उनका उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के तीन प्रमुख खंडों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जो परियोजना के पूरा होने का प्रतीक है
प्रधानमंत्री तीन रेलवे परियोजनाओं और तीन राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का उद्घाटन करेंगे
जीएफएफ 2026 का विषय है: “प्रभाव डालने की क्षमता : एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन, क्वांटम – समावेशी वित्त के लिए विश्वसनीय, जुड़ी हुई, वैश्विक प्रणालियां”
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार 8 सितंबर 2026 को गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा करेंगे। दोपहर लगभग 12 बजे, प्रधानमंत्री वडोदरा में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे। मंगलवार की शाम करीब 5रू45 बजे प्रधानमंत्री मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 का उद्घाटन करेंगे और सभा को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री वडोदरा में
प्रधानमंत्री पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (डब्ल्यूडीएफसी) के तीन महत्वपूर्ण खंडों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनकी लंबाई 326 किलोमीटर है। इन तीनों खंडों को 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। इनमें सानंद (उत्तर)-मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-जेएनपीटी खंड शामिल हैं। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) की सीधी कनेक्टिविटी से आयात-निर्यात कार्गो की आवाजाही तेज होगी, औद्योगिक केंद्रों और बंदरगाहों के बीच संपर्क मजबूत होगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और मुंबई के रेलवे नेटवर्क पर भार कम करने में मदद मिलेगी। इन तीन खंडों के चालू होने के साथ ही, समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) नेटवर्क अपनी पूरी लंबाई में पूरी तरह से कार्यरत हो जाएगा। समर्पित माल ढुलाई अवसंरचना बहुआयामी कनेक्टिविटी में सुधार करके, पारगमन समय को कम करके और विभिन्न क्षेत्रों में माल की सुगम आवाजाही को सुविधाजनक बनाकर देश के लॉजिस्टिक्स परितंत्र को और मजबूत करेगी। प्रधानमंत्री मुंबई के न्यू सानंद (उत्तर), न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और न्यू जेएनपीटी से मालगाड़ियों की सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके अतिरिक्त, वे वडोदरा और टांडा रोड के बीच एक नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे वडोदरा, छोटा उदेपुर और अलीराजपुर जिलों के लोगों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री छोटा उदेपुर-धार परियोजना के अंतर्गत विकसित की गई जोबत-टांडा रोड नई रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह नई रेल लाइन अलीराजपुर के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। प्रधानमंत्री 329 किलोमीटर लंबी और 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन रेलवे परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इनमें वडोदरा-रतलाम तीसरी और चैथी लाइन, मियागाम करजन-चोरंडा-मलसर गेज रूपांतरण और विश्वमित्री-दभोई दोहरीकरण परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं से यात्री और माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, यातायात जाम कम होगा और गुजरात तथा मध्य प्रदेश के बीच संपर्क मजबूत होगा। प्रधानमंत्री लगभग 1,780 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इनमें एनएच-48 के कामरेज-चलथान खंड का छह लेन का निर्माणय एनएच-48 के वडोदरा-सूरत खंड पर तापी और नर्मदा नदियों पर प्रमुख पुलों सहित अतिरिक्त संरचनाओं का निर्माणय और एनएच-53 पर अभवा, मिंधोला और खजोद जंक्शनों पर ग्रेड-सेपरेटेड संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री एनएच-48 के वडोदरा-सूरत खंड पर सड़क सुरक्षा में सुधार और यातायात संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कंदारी चैकड़ी और लुवारा पाटिया में छह लेन के फ्लाईओवर का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 2,600 करोड़ रुपये की गुजरात सरकार की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे। जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी उनमें वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण रिंग रोड चरण प्प्, कडाना बांध पर 110 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना, वडोदरा नगर निगम के नए कार्यालय का निर्माण आदि शामिल हैं। उद्घाटन की जाने वाली परियोजनाओं में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत आवास परियोजनाएं और पूर्वी वडोदरा के 11 गांवों के लिए जल आपूर्ति परियोजना आदि शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मुंबई में
प्रधानमंत्री विश्व के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली वार्षिक फिनटेक सम्मेलनों में से एक, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 का उद्घाटन करेंगे। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का सातवां संस्करण 8 से 11 सितंबर 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है। 2020 से, जीएफएफ एक अंतरराष्ट्रीय विचार नेतृत्व मंच के रूप में उभरा है जो नीति निर्माताओं, नियामकों, केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों, फिनटेक कंपनियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, निवेशकों, शिक्षाविदों और अन्य वैश्विक हितधारकों को वित्त के भविष्य को आकार देने पर विचार-विमर्श करने के लिए आपस में जोड़ता है।
जीएफएफ 2026 का विषय है प्रभाव डालने की क्षमता: एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन, क्वांटम – समावेशी वित्त के लिए विश्वसनीय, जुड़ी हुई, वैश्विक प्रणालियां
जीएफएफ 2026 को नीति, विनियमन, प्रौद्योगिकी, पूंजी और उद्योग के लिए एक साझा मंच के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करना तथा संभावनाओं को वास्तविक प्रभाव में बदलना है। चर्चाओं में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि एजेंटिक एआई, प्रोग्रामेबल फाइनेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां किस प्रकार वैश्विक स्तर पर नागरिकों, उद्यमों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए विश्वसनीय, समावेशी और मापने योग्य परिणाम उत्पन्न कर सकती हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शिलांग में सार्वजनिक स्वागत समारोह में भाग लियाय 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत को साकार करने के लिए प्रत्येक राज्य, गांव और नागरिक को विकसित बनना होगा
उपराष्ट्रपति ने अपने पूर्व लोकसभा सहयोगी स्वर्गीय पी.ए. संगमा को एक महान नेता और सांसद के रूप में याद किया
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज शिलांग के सोसो थाम सभागार में मेघालय की जनता और सरकार द्वारा उनके सम्मान में आयोजित एक सार्वजनिक स्वागत समारोह में भाग लिया। उन्होंने हार्दिक स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि वे राज्य के विकास की यात्रा में मेघालय की जनता के साथ हमेशा खड़े रहेंगे। उपराष्ट्रपति ने मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और मातृसत्तात्मक परंपरा सहित अद्वितीय सामाजिक संस्थाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य की जीवंत जमीनी संस्थाएं भारत की विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं को दर्शाती हैं। अपने पूर्व लोकसभा सहयोगी, स्वर्गीय श्री पी.ए. संगमा को याद करते हुए उन्होंने उन्हें एक महान नेता और उत्कृष्ट वक्ता बताया, जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सच्ची धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है एक-दूसरे के विचारों और मान्यताओं का सम्मान करना। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ मिलकर रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विकास समावेशी होना चाहिए और समाज का कोई भी वर्ग पीछे नहीं छूटना चाहिए। कनेक्टिविटी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दूरदराज के गांवों को कस्बों और शहरों से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में पीएमजीएसवाई के तहत पूर्वोत्तर में 47,000 करोड़ रुपये से अधिक के व्यय से 46,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। उन्होंने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय के सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापन की भी सराहना की। उपराष्ट्रपति ने 1,010.95 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें शहरी चुनौती कोष के तहत नई शिलांग जल आपूर्ति योजना चरण प्प्, भाग ए (850.58 करोड़ रुपये), छम्ैप्क्ै के तहत दो सड़क संपर्क परियोजनाएं, शिलांग सिविल अस्पताल में 30 बिस्तरों वाला आयुष केंद्र और च्ड-क्मअप्छम् के तहत मावखानू में 132ध्33 केवी सबस्टेशन शामिल हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31.05 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नोंगस्टोइन स्थित प्रसूति एवं बाल अस्पताल का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि लगभग 1,042 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से मेघालय में जल आपूर्ति, संपर्क, स्वास्थ्य सेवा और बिजली की अवसंरचना को मजबूती मिलेगी। उपराष्ट्रपति ने राज्य सरकार की अवसंरचना और पर्यटन क्षेत्र में की गई पहल की सराहना की, जिनमें होमस्टे कार्यक्रम, सीएम-एलिवेट और ग्रीन मेघालय शामिल हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा, उनके मंत्रिपरिषद और मेघालय की जनता को राज्य की प्रगति के लिए बधाई दी। 2047 तक विकसित भारत के विजन पर बोलते हुए, श्री सीपी राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रगति समावेशी होनी चाहिए, समाज के किसी भी वर्ग को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए, साथ ही मेघालय के समृद्ध पर्यावरण, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी करना चाहिए। राज्य के जीवित जड़ों वाले पुलों और सोहरा और मावसिनराम के परिदृश्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेघालय प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने के बहुमूल्य सबक प्रदान करता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा, उपमुख्यमंत्री श्री प्रेस्टोन टिनसॉन्ग और श्री स्नियावभलंग धर, मंत्री श्री सनबोर शुल्लई, मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


आलू और शकरकंद अनुसंधान में वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान से मिले ब्प्च् के महानिदेशक, आगरा केंद्र बनेगा नवाचार का हब
पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केवल दक्षिण एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया के हित में भारत का काम- केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान
आगरा में स्थापित हो रहा सीसार्क (ब्ै।त्ब्) केंद्र बदलेगा खेती की तस्वीररू कृषि भवन में ब्प्च् नेतृत्व और कृषि मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक
काम का दोहराव न हो, नई तकनीक और जर्मप्लाज्म से किसानों को मिले सीधा लाभरू कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने ब्प्च् को दिया स्पष्ट विजन
सुपरफूड बनेगा शकरकंद, हाइब्रिड आलू से सशक्त होंगे किसान: भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (ब्प्च्) मिलकर करेंगे काम- श्री शिवराज सिंह
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में भारत आज कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी दिशा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चैहान से आज कृषि भवन, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (ब्प्च्) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (प्ब्।त्) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित हो रहे सीसार्क (ब्ै।त्ब्) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में आगरा स्थित दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की प्रगति, आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों, उन्नत जर्मप्लाज्म और किसानों की आय वृद्धि से जुड़े रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत व सकारात्मक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चैहान ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का विजन अत्यंत व्यापक है। उन्होंने रेखांकित किया कि हमारा लक्ष्य केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि हम इस साझेदारी और समन्वय के जरिए पूरी दुनिया की भलाई और वैश्विक आबादी के हित में काम करना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र जैसी वैश्विक संस्थाएं इस वैश्विक सहयोग और समन्वय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। केंद्रीय मंत्री श्री चैहान ने बैठक के दौरान एक स्पष्ट सुझाव देते हुए कहा कि प्ब्।त् और ब्प्च् के कार्यों में किसी भी प्रकार का दोहराव नहीं होना चाहिए। दोनों संस्थाओं के बीच कार्य का स्पष्ट विभाजन हो ताकि संसाधनों की बर्बादी न हो और कुछ नया व अनूठा नवाचार निकलकर सामने आए। उन्होंने जोर दिया कि आगरा केंद्र के माध्यम से वैश्विक स्तर का नया और उन्नत जर्मप्लाज्म देश में आना चाहिए, जिससे यहां की कृषि परिस्थितियों के अनुकूल नई किस्में विकसित हों और देश के आलू उत्पादक किसानों को उसका सीधा लाभ मिल सके। सीआईपी के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को आश्वस्त किया कि आगरा में स्थापित हो रहा सीसार्क केंद्र पूरे दक्षिण एशिया- विशेषकर भारत, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक मंच के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि यह केंद्र हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलों और जलवायु-सहिष्णु किस्मों जैसी वैश्विक वैज्ञानिक उपलब्धियों को भारतीय प्राथमिकताओं से जोड़ेगा। इससे आलू की बीज उत्पादन प्रणाली में क्रांतिकारी तेजी और सटीकता आएगी, साथ ही निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा। चर्चा के दौरान शकरकंद (स्वीट पोटैटो) के पोषण और आर्थिक महत्व पर विशेष मंथन किया गया। बैठक में तय हुआ कि आयरन, जिंक और विटामिन-ए से भरपूर श्ऑरेंज-फ्लेश्डश् बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि शकरकंद को अब पारंपरिक सोच से बाहर निकालकर एक आधुनिक ष्सुपरफूडष् के रूप में बड़े पैमाने पर ब्रांडिंग करने की आवश्यकता है, जिससे शहरी और ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग बढ़े और छोटे किसानों को उनकी उपज का अधिक से अधिक लाभ मिल सके। बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चैहान ने सीआईपी के प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और भरोसा जताया कि कृषि मंत्रालय, प्ब्।त् और ब्प्च् का यह साझा प्रयास न केवल भारत और दक्षिण एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के कृषि परिदृश्य में एक नया सकारात्मक अध्याय लिखेगा। बैठक में केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एमडी श्री कपिल मीणा के साथ ही यानमिन शी, निदेशक, सीआईपी-चाइना सेंटर फॉर एशिया एंड द पैसिफिकय जॉयस मारू, क्षेत्रीय निदेशक, अफ्रीका, अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्रय वियन पोलर, क्षेत्रीय निदेशक, लातिन अमेरिका, अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्रय तथा नीरज शर्मा, कंट्री मैनेजर, भारत, अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र भी उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने राज्यों की अधिक भागीदारी के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्रों को मजबूत करने के लिए कार्य योजना की समीक्षा की
मार्च 2027 तक 300 कृषि विज्ञान केन्द्रों के उन्नयन और दिसंबर 2028 तक सभी केंद्रों में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्रों की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया गया है
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने आज नई दिल्ली में राज्यों की भागीदारी बढ़ाने के माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को मजबूत करने के लिए कार्य योजना की समीक्षा के लिए बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्य सचिवों के 5वें सम्मेलन 2025 से उभरने वाले केवीके से संबंधित प्रमुख सिफारिशों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चैधरी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जाट और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक के दौरान वर्ष 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 केवीके के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के उन्नयन पर चर्चा की गई। श्री शिवराज सिंह चैहान ने निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और समय पर समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव ने प्राथमिकता वाले केवीके के उन्नयन के लिए वित्तीय और संस्थागत सहायता जुटाने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ बातचीत की। कई राज्यों ने अपने-अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कार्ययोजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू की है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और छत्तीसगढ़ ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत की है, जबकि अन्य राज्य तैयारी और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। बैठक में दिसंबर 2028 तक सभी केवीके में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र स्थापित करने के कार्य बिंदु को भी शामिल किया गया। इस पहल के तहत, केवीके का कृषि-आधारित उद्यमों, तकनीकी भागीदार संस्थानों और जिला-विशिष्ट कृषि अवसरों के साथ मानचित्रण किया जा रहा है। वित्त पोषण और कार्यान्वयन सहायता के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केवीके-वार योजनाएं विकसित की जा रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कर्मियों के संबंध में सुधारों पर आगे विस्तृत चर्चा की गई। केवीके कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुधारों को व्यय विभाग (डीओई) से मंजूरी मिली है। केवीके कर्मचारियों के लिए एनपीएस योगदान और सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने में राज्य सरकारों की भूमिका पर भी जोर दिया गया। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे केवीके के प्रभावी कामकाज और उनकी अनिवार्य गतिविधियों के वितरण के लिए पर्याप्त जनशक्ति सुनिश्चित करने के लिए खाली पदों पर समय पर भर्ती करें। बैठक के दौरान विशेष रूप से मौसमी कृषि कार्यक्रमों के लिए केवीके को समय पर धन जारी करने के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि नियोजित गतिविधियों को उपयुक्त कृषि विंडो के भीतर लागू किया जा सके। वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन कार्यक्रम पर क्लस्टर फ्रंटलाइन प्रदर्शन (सीएफएलडी) के तहत, 12,349 हेक्टेयर के लक्ष्य क्षेत्र के साथ 353 केवीकेध्जिलों के माध्यम से 24 राज्यों में गतिविधियों को लागू किया जा रहा है। 9,750 हेक्टेयर क्षेत्र पहले ही हासिल किया जा चुका है। कुछ राज्यों में फंड-फ्लो मैपिंग और धन जारी करने में देरी से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। राज्यों से अनुरोध किया गया कि वे एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट और केवीके स्तरों तक धन के सुचारू और समय पर प्रवाह की सुविधा प्रदान करें, अनुशंसित गुणवत्ता वाले बीजों और किस्मों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करें और प्रदर्शनों की योजना और निष्पादन के दौरान समन्वय को मजबूत करें। समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम डीडीकेवाई) का समर्थन करने में केवीके की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। राज्यों से अनुरोध किया गया कि वे पीएम-डीडीकेवाई के तहत अपनी अनिवार्य गतिविधियों के साथ-साथ जिला-विशिष्ट कार्य योजनाओं को लागू करने के लिए केवीके को पर्याप्त धन सहायता प्रदान करें। क्षमता विकास कार्यक्रमों के अलावा, जिला स्तर पर केवीके की गतिविधियों की व्यापक निगरानी, रिपोर्टिंग और परिणामों को मूल्यांकन के लिए निर्दिष्ट पोर्टल पर अपलोड करने पर भी बल दिया गया। श्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि केवीके में परिवर्तन के लिए मजबूत केंद्र-राज्य अभिसरण, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त जनशक्ति और जिला-विशिष्ट कार्य योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र कृषक समुदाय की प्रभावी ढंग से सेवा करने और कृषि में उभरती चुनौतियों का जवाब देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन और संस्थागत सहायता से लैस हैं। मजबूत केवीके वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों, उन्नत किस्मों, कौशल, नवाचार और उद्यमिता के अवसरों की किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सहमत कार्य बिंदुओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने और केंद्र और अन्य हितधारकों के साथ तालमेल को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया ताकि केवीके कृषि प्रौद्योगिकी के प्रसार, कौशल विकास, नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता के लिए प्रभावी मंच के रूप में उभर सकें, जिससे एक विकसित और समृद्ध कृषि क्षेत्र में योगदान दिया जा सके।
बिजली क्षेत्र में रेक लोडिंग 6 सितंबर, 2026 को बढ़कर 444 रेक हो गई, जो दिन-प्रतिदिन की स्थिर वृद्धि को दर्शाती है
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: पिछले चार दिनों में विद्युत क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो 3 सितंबर, 2026 को 370 रैक से बढ़कर 6 सितंबर, 2026 को 444 रैक हो गई, यानी प्रतिदिन 74 रैक की शुद्ध वृद्धि हुई, जिसमें अकेले 6 सितंबर 2026 को 31 रैक की वृद्धि शामिल है। यह कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), उसकी सहायक कंपनियों, एससीसीएल और कैप्टिव माइन ऑपरेटरों द्वारा विद्युत क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
विद्युत क्षेत्र में रेक लोडिंग का दिन-वार रुझान
पिछले चार दिनों में विद्युत क्षेत्र में कुल रेक लोडिंग में लगातार सुधार हुआ है:
3 सितंबर, 2026 : 370 रेकध्दिन
4 सितंबर, 2026 : 387 रेकध्दिन (पिछले दिन की तुलना में 17 अधिक)
5 सितंबर, 2026 : 413 रेकध्दिन (पिछले दिन की तुलना में 26 अधिक)
6 सितंबर, 2026 : 444 रेकध्दिन (पिछले दिन की तुलना में 31 अधिक)
यह चार दिनों की अवधि में 74 रेकध्दिन (लगभग 20 प्रतिशत) की संचयी वृद्धि को दर्शाता है, जिसमें 6 सितंबर, 2026 को लोडिंग 444 रेकध्दिन तक पहुंच गई।
6 सितंबर, 2026 को कंपनी-वार सुधार
लगभग सभी कोयला उत्पादक कंपनियों ने 6 सितंबर, 2026 को पिछले दिन की तुलना में रैक लोडिंग में सुधार दर्ज किया
एमसीएल ने एक ही दिन में सबसे तेज सुधार दर्ज किया, जिसमें 12 रेक की वृद्धि होकर 111 रेकध्दिन हो गया। कैप्टिव ब्लॉक लोडिंग में 6 रेक की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 72 रेक प्रति दिन हो गई। बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता में 8 रेक की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 25 रेक प्रति दिन हो गई। एनसीएल में 3 रेक की वृद्धि होकर 35 रेकध्दिन हो गया, और प्राइवेट वाशरी (पीडब्ल्यू) और गुडशेड्स में 3 रेक की वृद्धि होकर 42 रेकध्दिन हो गया। सीसीएल और एसईसीएल ने भी क्रमशः 2 और 1 रेक की वृद्धि दर्ज की, जिससे उनकी लोडिंग बढ़कर क्रमशः 36 और 46 रेकध्दिन हो गई। ईसीएल और डब्ल्यूसीएल ने क्रमशः 23 और 29 रेकध्दिन के अपने पिछले दिन के लोडिंग स्तर को बनाए रखा। परिणामस्वरूप, 6 सितंबर, 2026 को कुल सीआईएल साइडिंग लोडिंग बढ़कर 305 रेकध्दिन हो गई, जो पिछले दिन की तुलना में 26 रेक की वृद्धि है।
महत्वपूर्ण संयंत्रों की सक्रिय रूप से निगरानी की जा रही है
आवश्यक ताप विद्युत संयंत्रों (जिनमें कोयले का भंडार मानक आवश्यकता के 25 प्रतिशत से कम है) की संख्या पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, और इन संयंत्रों की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए कोयले की आपूर्ति संबंधी सुधारात्मक उपाय पहले से ही लागू किए जा चुके हैं। कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड विद्युत क्षेत्र में कोयले की आपूर्ति में हो रहे इस सुधार को बनाए रखने और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत को एक वैश्विक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा के गंतव्य के रूप में उभरने का आह्वान किया
भारत का एफटीए नेटवर्क स्वास्थ्य सेवा उद्योग के लिए बाजार पहुंच के अवसरों का विस्तार करता है: श्री गोयल
भारत को मेडटेक इनोवेशन, इनक्यूबेशन और बौद्धिक संपदा इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहिए: श्री गोयल
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत से श्विश्व की फार्मेसीश् के रूप में अपना दर्जा कायम करने और वैश्विक चिकित्सा तथा स्वास्थ्य सेवा के गंतव्य के रूप में उभरने का आह्वान किया। नई दिल्ली में फार्मा मैकटेक और लैबनेक्स्ट एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए, श्री गोयल ने उपचार से परे स्वास्थ्य सेवा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें रोकथाम, कल्याण, देखभाल, निदान, प्रयोगशाला क्षमता, चिकित्सा उपकरण, टेलीमेडिसिन, टेलीकंसल्टेशन, डिजिटल स्वास्थ्य समाधान, नई दवाओं और आधुनिक उपकरणों के लिए नवाचार और अनुसंधान और विकास शामिल हैं। श्री गोयल ने उद्योग जगत से भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से उत्पन्न होने वाले अवसरों का उपयोग करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले, भारत के मुक्त व्यापार समझौतों में सामूहिक रूप से लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद वाली अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था, जबकि पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में अंतिम रूप दिए गए नौ मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में लगभग 60 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा बातचीत इस कवरेज को लगभग 75 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ा सकती है, जो तरजीही कम-शुल्क बाजार पहुंच, सेवाओं और आवागमन के अवसर प्रदान करती है। श्री गोयल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं और एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय भागीदार के रूप में भारत के दर्जे को मजबूत किया है। उन्होंने हितधारकों से देश की विकास यात्रा में भाग लेने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और फार्मास्युटिकल मशीनरी, उपभोग्य सामग्रियों और संबंधित क्षेत्र व्यापारिक निर्यात, आयात प्रतिस्थापन और सेवाओं के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण संभावनाओं के साथ एक बढ़ते क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम में विशेष रूप से मेडटेक क्षेत्र में करोड़ों रोजगार, व्यापार के हजारों अवसर और लाखों नए स्टार्टअप उद्यम पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता में योगदान करते हुए युवाओं के लिए व्यापार के अवसर, रोजगार और आय पैदा कर सकता है। श्री गोयल ने डिजाइन, कॉपीराइट, पेटेंट कानूनों और बौद्धिक संपदा इकोसिस्टम में सुधार के साथ-साथ मेडटेक, चिकित्सा उपकरण और उपभोग्य सामग्रियों के लिए स्टार्टअप इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने अन्य देशों में अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित किया, वैश्विक नवप्रवर्तकों और बड़ी दवा कंपनियों को भारत में आमंत्रित किया और देश में डिजाइन केंद्र स्थापित किए। श्री गोयल ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी साझेदारी, मजबूत क्रेता-विक्रेता संबंध और संयुक्त उद्यमों का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को इस कदम को फिर से शुरू करने की जरूरत नहीं है और भारतीय प्रौद्योगिकियों को वैश्विक बाजारों में ले जाते हुए भारत में उपयुक्त वैश्विक प्रौद्योगिकियां ला सकता है। उन्होंने सह-डिजाइनिंग, साथ मिलकर विकास, लाइसेंसिंग, ज्ञान साझा करने और ज्ञान हस्तांतरण को भी प्रोत्साहित किया। श्री पीयूष गोयल ने अनुसंधान, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग हितधारकों को इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए सामर्थ्य और अवसरों में सुधार के लिए वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) में संशोधन किया गया है। उन्होंने अनुसंधान और विकास, नवाचार और वित्त पोषण के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला और हितधारकों से नए उपकरणों, नवीन दवाओं और दवाओं को विकसित करने के लिए इन अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। श्री गोयल ने उपकरणों के अधिक स्वदेशीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ऑक्सीजन नेटर और वेंटिलेटर की कमी सहित कोविड-19 के दौरान अनुभव को याद करते हुए, उन्होंने अनुभव से सीखने और मानकों पर शून्य समझौते के साथ उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। श्री गोयल ने कहा कि भारत को न केवल प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का लक्ष्य रखना चाहिए, बल्कि भारत से दुनिया को कल्याण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना भी होना चाहिए। उन्होंने भारतीय चिकित्सा उपकरण और फार्मास्यूटिकल, भारतीय डॉक्टरों द्वारा रोगी देखभाल, नर्सिंग और देखभाल करने वाले, तकनीशियनों, अस्पताल प्रशासकों, प्रबंधन कर्मियों और इंजीनियरिंग कर्मचारियों से युक्त एक एकीकृत स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम की संभावना पर प्रकाश डाला। श्री गोयल ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिक दक्षता लाएगा और स्वास्थ्य पेशेवरों को अपने काम को बेहतर, स्मार्ट और तेजी से करने में सहायता करेगा, जबकि मानव देखभाल और नर्सिंग आवश्यक बनी रहेगी। श्री पीयूष गोयल ने अनुसंधान और विकास में भारत के लागत संबंधी लाभ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योग, शिक्षाविदों, मेडिकल कॉलेजों, आईआईटी और अन्य उत्कृष्टता केंद्रों के बीच अधिक सहयोग अनुसंधान और विकास के पैमाने का काफी विस्तार कर सकता है। उन्होंने देश में विनिर्माण उपकरणों के साथ-साथ भारत में नवाचार, डिजाइन और नैदानिक परीक्षणों की क्षमता पर प्रकाश डाला। श्री गोयल ने कहा कि स्वचालित मार्ग के माध्यम से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दवा उद्योग मात्रा से मूल्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों के माध्यम से महत्वपूर्ण घटक इकोसिस्टम और घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने साझा परीक्षण बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के निर्माण का प्रस्ताव रखा, जहां भारतीय उपकरणों का परीक्षण किया जा सकता है, दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के मुकाबले बेंचमार्क किया जा सकता है, वैश्विक ग्राहकों को प्रमाणित और प्रदर्शित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार सरकार द्वारा प्रायोजित या विश्वविद्यालय प्रयोगशालाओं में ऐसी सुविधाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीकी परीक्षण उपकरणों के अधिग्रहण का समर्थन करेगी। श्री पीयूष गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग, उद्यमियों, स्टार्टअप, अनुसंधानकर्ताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयास 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में योगदान दे सकते हैं।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने हील इन इंडिया गेटवे में प्रशिक्षित देखभाल कर्ताओं और अस्पतालों की व्यापक भागीदारी का आह्वान किया
श्री गोयल ने मरीजों के निर्बाध आवागमन, भारतीय स्वास्थ्य सेवा के वैश्विक प्रचार और राज्यों में गुणवत्ता-केंद्रित विस्तार के महत्व पर बल दिया
भारत को सालाना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के इच्छुक 10 मिलियन पर्यटकों को लक्षित करना चाहिएरू श्री गोयल
भारत की नैदानिक उत्कृष्टता, उन्नत प्रौद्योगिकियां और स्वास्थ्य देखभाल पर 60-80 प्रतिशत कम लागत दुनिया की सेवा करने की अपार क्षमता प्रदान करती है
श्री गोयल ने स्वास्थ्य सेवा प्रमाणन में गुणवत्ता, पेशेवर निष्ठा और भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस पर जोर दिया
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज भारत के चिकित्सा मूल्य पर्यटन इकोसिस्टम को मजबूत करने और देश को उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने के लिए पांच सूत्री कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की। नई दिल्ली में भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 में संजीवनी 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि पहली प्राथमिकता देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित और प्रमाणित करना तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों की स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में सक्षम कुशल कार्यबल विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरा बिंदु यह होना चाहिए कि अधिक से अधिक अस्पतालों को हील इन इंडिया गेटवे में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और ईमानदार एवं पारदर्शी उपचार पैकेज सामने लाए जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अस्पतालों को नैतिक तौर-तरीकों का पालन करना चाहिए और कभी भी रोगियों को धोखा देने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक गलत कार्रवाई से भारत के लिए सद्भावना, व्यवसाय और विश्वसनीयता का नुकसान हो सकता है। तीसरे बिंदु के रूप में, श्री गोयल ने बीमाकर्ताओं और स्वास्थ्य-तकनीक कंपनियों से ऐसे उत्पाद और प्लेटफॉर्म बनाने का आह्वान किया जो रोगी की यात्रा को अधिक सहज बनाते हैं, समय पर प्रतिपूर्ति और कैशलेस भुगतान की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि टेलीकंसल्टेशन और टेलीमेडिसिन को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटन संबंधी आवागमन के प्रारंभिक हिस्से के रूप में बड़े पैमाने पर शामिल किया जा सकता है। चैथा बिंदु दुनिया भर में प्रदर्शनियों और प्रस्तुतियों को आयोजित करने, विश्व स्तर पर अस्पतालों के साथ सुविधाप्रदाताओं को जोड़ने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) द्वारा सक्षम, सत्यापित और पैनल वाले अस्पतालों को विदेश से आने वाले रोगियों के इलाज की अनुमति दी जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनएबीएच को बिना किसी कमी के साथ उच्चतम मानकों को बनाए रखना चाहिए। पांचवें बिंदु के रूप में, श्री पीयूष गोयल ने राज्यों से अस्पतालों और कल्याण केंद्रों में गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने, अपने नेटवर्क का विस्तार करने, विश्व स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाली सुविधाएं तैयार करने और रोगियों के कल्याण के लिए इन सुविधाओं का विपणन करने का आग्रह किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटन का महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तार करने, रोजगारों, अवसरों और बुनियादी ढांचे का सृजन करने के साथ-साथ देश के रोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवा को उन्नत करने में मदद करने का आह्वान किया। श्री गोयल ने विभिन्न देशों से आने वाले और विभिन्न भाषाएं बोलने वाले रोगियों के लिए दुभाषियों का एक पूल बनाने का भी सुझाव दिया, ताकि उनमें अधिक आत्मविश्वास हो और रोगियों तथा चिकित्सा प्रणाली के बीच संवाद आसान हो सके। श्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा भारतीयों और विदेशियों के लिए अलग-अलग नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक भारतीय रोगी को दुनिया भर से आने वाले किसी भी व्यक्ति के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा मिले। उन्होंने कहा कि देश को अपने भाइयों और बहनों को वह देना चाहिए जो वह खुद प्राप्त करना चाहता है और अमीर और गरीब के बीच भेदभाव किए बिना भारत या विदेश के प्रत्येक व्यक्ति को समान गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करनी चाहिए। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि जो लोग यहां इलाज के लिए यहां आकर अपना जीवन भारत को सौंपते हैं, उनके साथ सर्वश्रेष्ठ देखभाल, चिंता और करुणा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के लिए विदेश यात्रा करने वाले मरीज, चाहे वे अफ्रीका, एशिया, अमेरिका या यूरोप से हों, एक नए देश में प्रवेश करने के लिए चिंता का अनुभव करते हैं और स्पष्टता, गरिमा, नैतिक सर्वोत्तम प्रणालिओं और उच्च निष्ठा की तलाश करते हैं। वे अपनी स्वास्थ्य सेवा यात्रा के हर चरण में भारत पर भरोसा करते हैं। भारत के चिकित्सा मूल्य पर्यटन क्षेत्र की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत में नैदानिक उत्कृष्टता, उन्नत प्रौद्योगिकियां और स्वास्थ्य देखभाल की लागत दुनिया के अन्य हिस्सों, विशेष रूप से विकसित दुनिया की तुलना में 60-80 प्रतिशत कम है। उन्होंने कहा कि भारत में भी अत्यधिक करुणा है और देश भर के चिकित्सा पेशेवरों द्वारा छोटे नर्सिंग होम और डॉक्टरों के क्लीनिकों से लेकर बड़े नगरपालिका, निजी और सरकारी अस्पतालों तक द्वारा प्रदर्शित देखभाल और चिंता की सराहना करता है, जबकि अक्सर काफी बाधाओं के तहत काम करते हैं। श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग, मेडटेक क्षेत्र, डायग्नोस्टिक्स, आयुर्वेद, योग और यूनानी सहित पारंपरिक दवाएं, डॉक्टर, तकनीशियन, नर्स, देखभाल करने वाले और अस्पताल सामूहिक रूप से देश की ताकत हैं और चिकित्सा मूल्य पर्यटन को दुनिया की सेवा करने के लिए एक शक्तिशाली साधन बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों के निर्माण, इन उत्पादों की डिलीवरी, अस्पताल के बुनियादी ढांचे और डॉक्टरों, शिक्षकों, नर्सों, तकनीशियनों और अन्य पेशेवरों के लिए रोजगार में बड़ी संख्या में नौकरियों और व्यवसाय के अवसर पैदा करते हुए भारत को दुनिया में ले जाने, सद्भावना अर्जित करने और वैश्विक स्तर पर लोगों की सेवा करने की क्षमता है। श्री गोयल ने कहा कि पिछले सात वर्षों में भारत के गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटन इकोसिस्टम से 3.5 मिलियन रोगियों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे देश का लक्ष्य एक वर्ष में 10 मिलियन रोगियों के आगमन का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास इसे हासिल करने की संभावना, क्षमता, सही डॉक्टर और सही इकोसिस्टम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च मानकों, नैतिकता, निष्ठा और ईमानदारी को बनाए रखा जाना चाहिए और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से अंतरराष्ट्रीय रोगियों की देखभाल में अतिरिक्त प्रयास करने का आग्रह किया। बदलते वैश्विक स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य के बारे में चर्चा करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि दुनिया भर में औसत आयु बढ़ रही है, जबकि भारत युवा है और दुनिया भर में नए दौर की कई बीमारियां फैल रही हैं। स्वास्थ्य देखभाल की लागत बढ़ रही है और दुनिया के कई हिस्सों को डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों और रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्तियों के साथ-साथ तृतीयक देखभाल की कमी के लिए भी लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिन देशों के साथ भारत एफटीए और व्यावसायिक चर्चाओं के माध्यम से जुड़ रहा है, वे बड़ी संख्या में भारत से उच्च गुणवत्ता वाली फार्मास्यूटिकल, डॉक्टर, तकनीशियन, नर्स और देखभाल करने वाले चाहते हैं। श्री गोयल ने केरल में आयुर्वेद और देश भर में इसके प्रसार, पर्वतीय क्षेत्रों में कल्याण केंद्रों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में काम करने वाले नर्सों और युवा पुरुषों और महिलाओं द्वारा प्रदान की जाने वाली देखभाल के बारे में बताते हुए निवारक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण इकोसिस्टम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वह भूमि है जो सबसे अच्छी सेवा कर सकता है और हितधारकों से आग्रह किया कि वे गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र द्वारा प्रस्तुत अवसर को न चूकें। सहयोग पर जोर देते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत हेल्थ का उद्देश्य पूरे अलग-अलग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को एक साथ लाना है और हितधारकों से सहयोगी के रूप में और एक टीम के रूप में एक-दूसरे के सहयोग से काम करने का आह्वान किया। श्री गोयल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र सहयोग और सहयोग की आवश्यकता का एक आदर्श उदाहरण है, क्योंकि एक छोटी सी त्रुटि के भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उच्च गुणवत्ता वाले मानक बनाए रखने चाहिए और रोगियों के लिए गुणवत्ता को प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने उच्च मानकों को बनाए रखने में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटन को बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को दुनिया में कहीं भी उपलब्ध उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं का प्रवेश द्वार बनना चाहिए। श्री गोयल ने कहा कि दुनिया उच्च गुणवत्ता वाले फार्मास्यूटिकल, डॉक्टरों, तकनीशियनों, नर्सों और देखभाल करने वालों के लिए भारत की ओर देख रही है और भारत में इस मांग को पूरा करने की क्षमता है। उन्होंने दोहराया कि यह क्षेत्र आर्थिक अवसर और सामाजिक लाभ पैदा करते हुए दुनिया की सेवा करने का अवसर प्रदान करता है। भारतीयों के लिए स्वास्थ्य सेवा पर, श्री गोयल ने आयुष्मान भारत पर प्रकाश डाला, जिसके तहत गरीब लोगों और उनके परिवारों को बीमार पड़ने पर स्वास्थ्य देखभाल खर्चों के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि सरकार उनकी स्वास्थ्य देखभाल के लिए भुगतान करती है। उन्होंने 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों के लिए 5 लाख रुपये का अतिरिक्त स्वास्थ्य कवर प्राप्त करने के प्रावधान पर भी प्रकाश डाला। श्री गोयल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के प्रति भारत का दृष्टिकोण हमेशा दुनिया की सेवा करने के सिद्धांत द्वारा निर्देशित रहा है। उपनिषद अभिव्यक्ति सर्वेसन्तु निरामयाष्, जिसका अर्थ है ष्सभी प्राणी बीमारी से मुक्त होंष् का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी स्वास्थ्य सेवा को केवल देश की सीमाओं के भीतर नहीं देखा है और हजारों वर्षों से स्वास्थ्य सेवा को पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी के रूप में माना है। उन्होंने इस बुनियादी लोकाचार के हिस्से के रूप में ष्एक विश्व, एक स्वास्थ्यष् का वर्णन किया। कोरोना काल के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत ने उन देशों को मुफ्त में टीके प्रदान किए जो उन्हें खरीद नहीं सकते थे और दूसरों को बहुत कम कीमत पर टीकों की आपूर्ति की। जहां विकसित देशों के टीके लगभग 25-30 डॉलर में बेचे जाते थे, वहीं भारतीय टीके लगभग 2-3 डॉलर प्रति खुराक पर उपलब्ध थे। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ने कभी भी किसी और के दुख की कीमत पर मुनाफा नहीं कमाया। श्री गोयल ने याद दिलाते हुए कहा कि जब भारत में कोविड के दौरान आवश्यक दवाएं उपलब्ध थीं, तो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उस समय उपयोग की जा रही दवाओं पर निर्यात प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि हालांकि कोविड के इलाज के लिए बहुत कम दवाएं साबित हुई थीं, लेकिन पैरासिटामोल, कुछ अन्य दवाएं, इंजेक्शन और उपभोग्य सामग्रियों की आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि भारत की दवाओं के स्टॉक को बेईमान व्यापारियों, कुछ कंपनियों या अमीर देशों द्वारा खरीदे जाने या हड़पने से बचाने के लिए निर्यात नियंत्रण शुरू किया गया था। अन्यथा, केवल अमीरों को ही इलाज मिल सकता था, जबकि गरीब और कम सुविधाओं वाली आबादी, विकासशील देश और भारत की गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग की आबादी इन दवाओं से वंचित हो सकती थी। श्री गोयल ने कहा कि भारत ने न केवल यह सुनिश्चित किया कि देश में हर किसी को दवाएं मिले, बल्कि दुनिया भर के देशों में उपलब्ध दवाओं और उपकरणों का समान वितरण भी सुनिश्चित किया जाए, चाहे वे अमीर हों या गरीब। 100 से अधिक देशों को निरूशुल्क दवाएं मिलीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपने पास जो कुछ भी है उससे लाभ नहीं उठाता है और दूसरों के साथ संसाधनों को मुफ्त या लागत पर साझा करता है। इसे भारत का लोकाचार बताते हुए, श्री गोयल ने कहा कि संजीवनी का तीसरा आयोजन इस बात को सामने ला रहा है कि भारत देश और दुनिया की सेवा करने में कितना संभावित योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना जारी रखना चाहिए कि अपने लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा से समझौता न किया जाए और उन्होंने विभिन्न तरीकों के बारे में बताया जिसमें गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। श्री गोयल ने स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम में गुणवत्ता, नैतिकता और निष्ठा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता भारत के भविष्य को निर्धारित करेगी और अगर भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है तो भारतीय गुणवत्ता परिषद को सबसे महत्वपूर्ण संगठनों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उच्च मानकों को बनाए रखना भारत के भविष्य के लिए केंद्रीय होगा। श्री गोयल ने प्रमाणन में पेशेवर निष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एनएबीएच प्रणाली को पेशेवर रूप से चलाया जाना चाहिए और प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय या सरकार ने एक भी मामले को संदर्भित नहीं किया है और प्रणाली को पेशेवर रूप से प्रबंधित किया गया है। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि यदि एनएबीएच या कोई प्रमाणन निकाय अनैतिक तौर-तरीकों में लिप्त है तो वे शिकायत करें और यदि ऐसे मुद्दे उत्पन्न होते हैं तो मंत्रालय से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि सरकार का एकमात्र सबसे बड़ा ध्यान भ्रष्टाचार को खत्म करना है। श्री गोयल ने अपनी बात समाप्त करते हुए यह दोहराया कि भारत को प्रत्येक भारतीय रोगी को वही उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करनी चाहिए जो वह दुनिया भर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हर व्यक्ति अपने और अपने परिवार के लिए सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवा चाहता है, उसी तरह स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम का यह कर्तव्य है कि वह अमीर और गरीब के बीच भेदभाव किए बिना भारत या विदेश के हर एक भाई-बहन को समान गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करे।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को स्वच्छ वायु दिवस 2026 के अवसर पर 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए गए
एनसीएपी के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन पद्धतियों का संकलन जारी किया गया
वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय निकायों को सर्वांगीण और समग्र समाज के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए: अध्यक्ष (एनजीटी)
वायु प्रदूषण से लड़ना एक सतत कार्यक्रम है, जिसके लिए मिशन मोड में नागरिक आंदोलन की आवश्यकता है: सचिव (ईएफसीसी)
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने आज स्वच्छ वायु दिवस 2026 का आयोजन किया। आज ही स्वच्छ आकाश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि के रूप में की। इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में सचिव (ईएफसीसी) श्री तन्मय कुमारय अध्यक्ष (सीएक्यूएम) श्री राजेश वर्माय महानिदेशक (वन) और विशेष सचिव (ईएफसीसी) श्री सुशील कुमार अवस्थीय अध्यक्ष (सीपीसीबी) श्री अमनदीप गर्गय और अवर सचिव (ईएफसीसी), श्री आशुतोष अग्निहोत्री शामिल थे। केंद्रीय मंत्रालयों और बहुपक्षीय संगठनों के अधिकारियों, पुरस्कार विजेता शहरों और वार्डों के महापौरों, जिला कलेक्टरों और नगर आयुक्तों के साथ-साथ एमओईएफसीसी, सीपीसीबी और सीएक्यूएम के अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देश भर के शहरोंध्वार्डों द्वारा वायु की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के भीतर बनाए रखने के लिए किए गए प्रयासों को मान्यता देने का अवसर है। उन्होंने कहा, “पुरस्कार विजेताओं ने यह सिद्ध किया है कि स्वच्छ वायु कोई आकांक्षा नहीं बल्कि एक व्यावहारिक लक्ष्य है जिसे उचित योजना और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन से हासिल किया जा सकता है।” एनजीटी अध्यक्ष ने जोर देते हुए कहा कि स्वच्छ वायु एक मूलभूत आवश्यकता है, विलासिता नहीं। उन्होंने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए साथ-साथ चल सकते हैं। यह प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि आने वाली पीढ़ियों को रहने के लिए स्वच्छ वातावरण मिल सके। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने वायु प्रदूषण को एक जटिल चुनौती बताया, क्योंकि प्रदूषण राजनीतिक सीमाओं को नहीं देखता और इसके कई स्रोत हैं। एनजीटी अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय दृष्टिकोण के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने वाली अग्रणी संस्थाएं शहरीध्ग्रामीण स्थानीय निकाय हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कारों के माध्यम से सरकार वायु गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में सभी हितधारकों के प्रयासों को मान्यता देती है, जो वायु गुणवत्ता को निर्धारित सीमा के भीतर बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने यह भी कहा, “यह आवश्यक है कि स्थानीय निकाय नागरिकों को जागरूक करके प्रदूषण के स्रोत को ही रोकने का प्रयास करेंय इस समस्या से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाएंय और इस मुद्दे के समाधान के लिए एक समावेशी और समग्र सामाजिक दृष्टिकोण अपनाएं।”इस अवसर पर अपने संबोधन में, ईएफसीसी सचिव श्री तन्मय कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत सरकार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बहुआयामी, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है। वायु प्रदूषण से लड़ने में नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और सभी हितधारकों के क्षमता विकास सुनिश्चित करने के लिए इस अभियान में जन प्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है। श्री कुमार ने एनसीएपी के बारे में बात की। एनसीएपी एक ऐसा ढांचा प्रदान करता है जिसके तहत शहरों को स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए अपनी रणनीतियां बनानी होती हैं, वहीं प्राण पोर्टल एनसीएपी के अंतर्गत आने वाले 130 शहरों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न मापदंडों पर नजर रखता है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटना एक सतत कार्यक्रम है, न कि एक बार का काम। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण हासिल करने के लिए नागरिकों के नेतृत्व में एक मिशन की आवश्यकता है। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी और उन्हें वायु गुणवत्ता प्रबंधन को जन-भागीदारी आंदोलन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार
इस अवसर पर, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को पुरस्कृत किया, जिन्हें 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के तहत रैंकिंग दी गई थी। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण का ढांचा 2022-23 में जारी किया गया था, जिसमें शहरों द्वारा सड़क की धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, अन्य उत्सर्जन (डीजी सेट और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान), और सूचना एवं संचार संचार (आईईसी) गतिविधियों पर उठाए गए उपायों का विवरण दिया गया था। ये पुरस्कार 3 समूहों (3 लाख से कम जनसंख्याय 3-10 लाख जनसंख्याय और 10 लाख से अधिक जनसंख्या) में सभी 130 शहरों की भागीदारी और रैंकिंग के आधार पर दिए गए थे। इस प्रक्रिया में शहरों द्वारा स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तरीय निगरानी समिति द्वारा अनुमोदन, सीपीसीबी द्वारा मूल्यांकन, स्वतंत्र समितियों द्वारा क्षेत्रीय सत्यापन और 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों का चयन शामिल था।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार विजेताओं की सूची
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियां
स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर, 24 राज्योंध्केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख पहल, एनसीएपी के तहत हुई प्रगति और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। वायु प्रदूषण निवारण उपायों को लागू करने के लिए एनसीएपी के 130 शहरों को 16,425 करोड़ रुपये का प्रदर्शन-आधारित अनुदान प्रदान किया गया है, जो महत्वपूर्ण अंतर निधि के रूप में है।
एनसीएपी ने वित्त वर्ष 2017-18 के स्तरों की तुलना में 2025-26 में पीएम 10 के स्तर में कमी लाने के संदर्भ में सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं
130 शहरों में से 108 शहरों में पीएम10 के स्तर में सुधार देखा गया है।
72 शहरों में पीएम10 की सांद्रता में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की गई है। 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।
14 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा कर लिया है।
एनसीएपी के अंतर्गत सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का संकलन
इस कार्यक्रम के दौरान, एनसीएपी के अंतर्गत सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का संकलन जारी किया गया। इसमें एनसीएपी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में शहरों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डोंध्समितियों द्वारा लागू की गई सर्वोत्तम पद्धतियों और वायु गुणवत्ता सुधार के सफल उपायों को उजागर किया गया है, जैसे कि सड़क धूल नियंत्रण, वाहन प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, ठोस और निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में जलाने पर नियंत्रण, हरियाली, प्रौद्योगिकी का उपयोग और जन जागरूकता। ये सर्वोत्तम पद्धतियां अन्य शहरों और एसपीसीबी के लिए इन्हें अपनाने में सहायक होंगी।
पारंपरिक कौशल से ग्रामीण उद्यमों तक: केवीआईसी ग्रामीण भारत में रच रहा आजीविका के नए अवसर
संघर्ष से सफलता तकरू केवीआईसी उद्यमी यात्राओं को प्रेरित कर रहा है
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: देश के ग्रामीण इलाकों में, पारंपरिक कौशल और स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधन तेजी से नए उद्यमशीलता के अवसरों का आधार बन रहे हैं। वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खी पालन और मूल्यवर्धित शहद उत्पादों से लेकर वेटिवर आधारित उद्यमों और केले के रेशे से बने उत्पादों तक, ग्रामीण उद्यमी यह प्रदर्शित कर रहे हैं कि स्थानीय ज्ञान को व्यवहार्य व्यवसायों और आजीविका के अवसरों में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अधीन खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, उन्नत उपकरण एवं प्रौद्योगिकी, बाजार समर्थन और अन्य हस्तक्षेपों के माध्यम से इस परिवर्तन में सहयोग कर रहा है। खादी विकास योजना (केवीवाई), ग्रामोद्योग विकास योजना (जीवीवाई) और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) जैसी पहलों के माध्यम से पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यम क्षमताओं के साथ मजबूत किया जा रहा है, जिससे कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को स्थायी आजीविका सृजित करने में मदद मिल रही है।
संघर्ष से सफलता तकरू प्रेरक उद्यमी यात्राएं
- श्री टी. अजिन : मधुमक्खी पालन से आजीविका निर्माण तक
तमिलनाडु के कन्याकुमारी में श्री टी. अजिन ने मधुमक्खी पालन के अपने ज्ञान को मार्तंडम हनी प्रोडक्ट्स नामक अपनी इकाई के माध्यम से एक सफल शहद व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। यह उद्यम एगमार्क प्रमाणित शहद और सूखे मेवों से मिश्रित शहद का उत्पादन करता है, जिससे पारंपरिक मधुमक्खी पालन को और अधिक महत्व मिलता है। लेकिन श्री अजिन का योगदान केवल उनके अपने उद्यम तक ही सीमित नहीं है। वे किसानों को, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अनुसूचित जातिध्अनुसूचित जनजाति समुदायों के किसानों को, आधुनिक मधुमक्खी पालन पद्धतियों का प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने राज्य, क्षेत्रीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी भाग लिया है, साथ ही ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के माध्यम से अपना ज्ञान साझा किया है। उनकी यात्रा दिखाती है कि एक उद्यमी किस तरह से एक सफल व्यवसाय के जरिए प्रभाव डाल सकता है और समुदाय में अन्य लोगों को उनकी आजीविका के मौके खोजने में मदद करके भी योगदान कर सकता है।
श्री बी. सुंदराज: वेटिवर को एक उद्यम में बदलना
श्री बी. सुंदराज के लिए, प्राकृतिक रूप से सुगंधित पौधा एक नए व्यवसाय के अवसर का आधार बन गया। अपनी प्योर हेल्थ हर्बल अगरबत्ती यूनिट के माध्यम से वे अगरबत्ती, हर्बल उत्पाद, वेटिवर अगरबत्ती और वेटिवर संबुरानी का उत्पादन करते हैं। ग्रामोद्योग विकास योजना (जीवीवाई) के तहत 2024-25 के दौरान मिले सहयोग से श्री सुंदराज ने अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया और अपने उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार किया। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे स्थानीय संसाधन, पारंपरिक ज्ञान और एक व्यावसायिक विचार मिलकर एक स्थायी ग्राम उद्यम का निर्माण कर सकते हैं। - श्री एम. मुरुगेसन : कृषि अपशिष्ट से नए अवसरों की ओर
श्री एम. मुरुगेसन ने पीएमईजीपी के अंतर्गत केले के रेशों से सजावटी वस्तुएं बनाने की इकाई स्थापित करके इसी विचार पर आधारित एक उद्यम का निर्माण किया है। ओम बनाना क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से वे केले के रेशों को आकर्षक और उपयोगी सजावटी वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं जिससे यह प्रदर्शित होता है कि कृषि संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है। उनके कार्यों के लिए उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। वे नियमित रूप से प्रदर्शनियों और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अपना ज्ञान साझा करते हैं। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि ग्रामीण उद्यम स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए नए उत्पाद विकास के माध्यम से मूल्य सृजित कर सकते हैं।
हनी मिशन : मधुमक्खी पालन से आजीविका के नए अवसर
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है हनी मिशन, जिसे 2017 में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और किसानों, आदिवासी समुदायों और बेरोजगार युवाओं के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत, लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ मधुमक्खी के बक्से, जीवित मधुमक्खी और संबंधित उपकरण भी दिए जाते हैं। इससे वे मधुमक्खी पालन शुरू कर पाते हैं और धीरे-धीरे इसे आय का स्रोत बना लेते हैं। इस पहल का पैमाना आंकड़ों से स्पष्ट होता है। केवीआईसी के अनुसार, 2017-18 और 2025-26 के बीच देश भर में लगभग 2,46,000 मधुमक्खी के बक्से और मधुमक्खी वितरित की गईं, जिसके परिणामस्वरूप 2025-26 के दौरान लगभग 5,500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ।
शहद से भी बढ़कर
मधुमक्खी पालन शहद उत्पादन से परे भी अवसर प्रदान करता है। मधुमक्खियाँ परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे मधुमक्खी पालन, कृषि और जैव विविधता के बीच एक प्राकृतिक संबंध बनता है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित कई राज्यों में मधुमक्खी पालकों द्वारा भारतीय शहद मधुमक्खियों का पालन किया जाता है और उनकी आजीविका इसी गतिविधि पर निर्भर है। इस तरह, मधुमक्खी पालन न केवल अतिरिक्त आय का साधन बन सकता है, बल्कि यह एक समृद्ध ग्रामीण उद्यम प्रणाली में प्रवेश करने का मार्ग भी खोल सकता है।
परंपरा से उद्यम तक
श्री टी. अजिन, श्री बी. सुंदराज और श्री एम. मुरुगेसन के अनुभव ग्रामीण भारत के लिए एक व्यापक अवसर को दर्शाते हैंरू जब प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी, वित्त, बाजार तक पहुंच और उद्यमिता का समर्थन प्राप्त हो, तो पारंपरिक कौशल और स्थानीय संसाधन आधुनिक उद्दमों के लिए एक आधारशिला बन सकते हैं। अपने कार्यक्रमों और पहलों के नेटवर्क के माध्यम से, केवीआईसी इस बदलाव में निरंतर सहयोग देता रहता है। यह ग्रामीण समुदायों को उनकी पारंपरिक क्षमताओं को बनाए रखने में मदद करता है और उनके लिए नए आर्थिक अवसरों को भी बढ़ावा देता है। परंपरा से उद्योग तक की यात्रा में, स्थानीय संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने और व्यक्तिगत कौशल को व्यापक आजीविका में परिवर्तित करने में भारत के ग्राम उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे देश की ग्रामीण उद्यमिता की सफलता की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने क्वांटम एंटैंगलमेंट लॉस को मात देने का तरीका खोज निकाला है
नई दिल्ली, 07 सितम्बर, अभीतक: वैज्ञानिकों ने एक सटीक समय पर की गई फ्लिप प्रक्रिया को लागू करके विस्तृत समय तक एंटैंगलमेंट को संरक्षित रखने का तरीका खोज निकाला है। इससे यह साबित होता है कि क्वांटम प्रणालियों में कौन सी प्रक्रिया लागू करनी है, उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि कब कार्रवाई करनी है। यह तकनीक भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के भीतर मौजूद नाजुक क्वांटम लिंक्स को हार्डवेयर में बिना कोई बदलाव किए लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। एंटैंगलमेंट एक ऐसा गुण है जो एक कण की अवस्था को दूसरे दूर स्थित कण की अवस्था से जोड़ता है। क्वांटम प्रणालियों में एंटैंगलमेंट एक अनिवार्य संसाधन है। हालांकि, वातावरण के साथ परस्पर क्रिया करने पर एंटैंगलमेंट क्षीण या कमजोर हो सकती है। दो परस्पर एंटैंगल कणों की कल्पना कीजिए, जिनमें से प्रत्येक दो अवस्थाओं में विद्यमान हो सकता है- एक उत्तेजित अवस्था और एक स्थिर अवस्था। यदि इन्हें अकेला छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक कण उत्तेजित अवस्था से स्थिर अवस्था में लुप्त होने लगता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कोई परमाणु अपने परिवेश में ऊर्जा खोता है। ऐसा होने पर कणों के बीच का एंटैंगलमेंट कमजोर हो जाता है। आश्चर्यजनक रूप से एंटैंगलमेंट एक निश्चित समय में समाप्त हो सकता है- लुप्च होने की प्रक्रिया पूरी होने से काफी पहले। भौतिक विज्ञानी इस अचानक लुप्त होने को श्बंधन की अचानक अंतश् कहते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई), कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस लुप्त होने की प्रक्रिया को टालने की चुनौती स्वीकार की। इस अध्ययन को आंशिक रूप से डीएसटी के प्रमुख राष्ट्रीय क्वांटम मिशन द्वारा वित्त पोषित किया गया था। शोधकर्ताओं के एक समूह ने अचानक लुप्त होने की प्रक्रिया को टालने का एक कारगर तरीका खोज निकाला। उन्होंने सबसे पहले अपने ऑप्टिकल सेटअप में दो-स्तरीय प्रणाली की नकल की। प्रकाश में ध्रुवीकरण नामक एक गुण होता है जो प्रकाश तरंगों के दोलन की दिशा बताता है। मान लीजिए कि प्रकाश या फोटॉनकृप्रकाश के कणकृदो अलग-अलग ध्रुवीकरण रूपों में मौजूद हैं । उन्होंने ऊर्ध्वाधर ध्रुवीकरण को उत्तेजित अवस्था और क्षैतिज ध्रुवीकरण को मूल अवस्था माना। ध्रुवीकरण को बदलने के लिए उपयोग किए जाने वाले एक ऑप्टिकल उपकरण, वेवप्लेट का उपयोग करके, वे ध्रुवीकरण को ऊर्ध्वाधर से क्षैतिज में नियंत्रित कर सकते थे, जिससे कणों के मूल अवस्था में क्षय को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता था। उत्तेजित अवस्था में मौजूद कणों के प्राकृतिक क्षय से मूल अवस्था में लौटने देने के बजाय, उन्होंने एक सुनियोजित प्रक्रिया अपनाई जिससे मूल और उत्तेजित अवस्थाओं में मौजूद कणों की संख्या आपस में बदल गई। इस प्रक्रिया का प्रभाव क्षय प्रक्रिया के दौरान इसके लागू होने के समय पर निर्भर करता था । समय का चयन करके, उन्होंने सभी कणों के मूल अवस्था में क्षय को विलंबित किया या एंटैंगलमेंट के नुकसान को विलंबित किया। मेरे लिए, इस परिणाम का मूल यह है कि समय केवल एक प्रयोगात्मक विवरण नहीं हैय यह एक नियंत्रण संसाधन हो सकता है,ष् यह बात क्वांटम सूचना और कंप्यूटिंग (क्विआईसी) प्रयोगशाला के समूह प्रमुख और आरआरआई में वरिष्ठ प्रोफेसर उर्बासी सिन्हा ने कही, जिन्होंने इस अध्ययन का नेतृत्व किया। सही समय पर किया गया फ्लिप न केवल अचानक होने वाली लुप्तता को टालता है, बल्कि उसे होने से भी रोक सकता है। टीम इसे बचाव कहती है। जब आप इस प्रक्रिया को लागू कर रहे होते हैं, तो क्षय के दौरान विकास की कितनी अवधि बीतने के बाद आप इस एकल फ्लिप ऑपरेशन को लागू करते हैं, यह निर्धारित करेगा कि आप अचानक लुप्त होने से बचते हैं, उसमें देरी करते हैं या उसे तेज करते हैं,” आरआरआई में क्यूआईसी लैब के क्वांटम वैज्ञानिक और नए अध्ययन के प्रमुख लेखक सौम्या रंजन बेहरा कहते हैं। यह शोध पत्र जुलाई में अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी के फिजिकल रिव्यू ए में प्रकाशित हुआ था। क्वांटम कंप्यूटरों में, क्वांटम सूचना के क्षय होने से पहले उसके अस्तित्व की अवधि सीमित होती है। प्रयोग से पता चलता है कि इस प्रकार की सीमा की उपस्थिति में, किसी क्रिया का समय एंटैंगलमेंट के भाग्य को बदल सकता है। क्यूआईसी प्रयोगशाला में, जो सैद्धांतिक और प्रायोगिक विशेषज्ञों के सामंजस्यपूर्ण कार्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, इस अध्ययन के प्रायोगिक परिणामों ने वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर दिया। यह प्रयोग क्वांटम प्रणालियों द्वारा अपने परिवेश में सूचना खोने के दो मानक पाठ्यपुस्तक मॉडलों में से किसी में भी फिट नहीं बैठता था। इसलिए लगभग एक वर्ष तक सिद्धांतकारों ने डेटा को समझने के लिए विभिन्न विवरणों का अध्ययन किया। अंततः उन्हें एहसास हुआ कि प्रयोग श्गलतश् नहीं था। बल्कि यह ठीक उस वक्र पर स्थित था जो इन दोनों ढांचों को दोनों सिरों पर जोड़ता है। संक्षेप में, उन्होंने वह श्ट्यूनिंग पैरामीटरश् खोज लिया जो प्रयोग को दोनों ढांचों के बीच स्थानांतरित करने में सक्षम बनाता है। इसलिए अब इन दोनों ढाँचों के लिए दो अलग-अलग सेटअप नहीं हैं। यह एकल सेटअप चुने गए ट्यूनिंग पैरामीटर के आधार पर नॉयज मॉडल और उनके बीच के सभी प्रकारों का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
