https://www.facebook.com/share/v/1DXnb2cpJ3/

बैरागी समाज की मासिक बैठक में नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट नितिन बैरागी और जिला बार एसोसिएशन प्रधान अजय डागर अधिवक्ता सम्मानित
झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: बैरागी समाज की मासिक बैठक जिला प्रधान कुलदीप स्वामी की अध्यक्षता में जोश और उत्साह के साथ आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में बैरागी समाज की जिला कार्यकारिणी के तमाम सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समाज के उत्थान, युवाओं की प्रगति तथा आपसी भाईचारे को मजबूत करने जैसे विभिन्न अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान खेल जगत में समाज का नाम रोशन करने वाले युवा बॉक्सर नितिन बैरागी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। बॉक्सिंग में नेशनल गोल्ड मेडल हासिल करने पर समाज की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया, ताकि उनकी इस उपलब्धि से समाज के अन्य बच्चों का भी मनोबल बढ़े और वे खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हों। कार्यक्रम के दौरान मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा, गत 11 सितंबर 2026 को जिला बार एसोसिएशन के प्रधान पद पर निर्वाचित हुए अधिवक्ता श्री अजय डागर का अभिनंदन। बैरागी समाज की तरफ से उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर और पगड़ी बांधकर शानदार बधाई दी गई। इस अवसर पर बार एसोसिएशन प्रधान अजय डागर के साथ-साथ अधिवक्ता विजय डागर, अधिवक्ता सुखबीर कादयान और साल्हावास ब्लॉक के बैरागी समाज के प्रधान एवं अधिवक्ता विक्रम बैरागी का भी समाज के पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया गया। बैठक के अंत में सभी वक्ताओं ने समाज को शिक्षा, खेल और न्याय के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। इस मौके पर समाज के कई गणमान्य लोग और कार्यकारिणी के सदस्य मौजूद रहे।

डॉग स्क्वाड की मदद से डिघल गांव में चला सघन सर्च अभियान’
नशे के कारोबार व अवैध हथियारों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस की कार्रवाई

झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: पुलिस कमिश्नरेट झज्जर में नशीले पदार्थों की रोकथाम तथा अवैध हथियारों की धरपकड़ को लेकर पुलिस द्वारा लगातार सर्च अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पुलिस उपायुक्त धारणा यादव के दिशा-निर्देशन में रविवार को डिघल गांव में डॉग स्क्वाड की सहायता से सघन सर्च अभियान चलाया गया।चैकी प्रभारी डिघल सहायक उप निरीक्षक संदीप कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस टीम द्वारा गांव में विभिन्न घरों, दुकानों तथा संदिग्ध स्थानों को चिन्हित कर डॉग स्क्वाड की सहायता से गहनता से जांच की गई। अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री व तस्करी तथा अवैध हथियारों से जुड़े लोगों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।उन्होंने बताया कि सर्च अभियान के दौरान पुलिस टीम ने संवेदनशील एवं संदिग्ध स्थानों पर विशेष निगरानी रखते हुए जांच की। डॉग स्क्वाड की मदद से उन स्थानों की भी बारीकी से तलाशी ली गई, जहां नशीले पदार्थ अथवा अन्य आपत्तिजनक सामान छिपाए जाने की आशंका हो सकती है। झज्जर पुलिस द्वारा क्षेत्र में नशा तस्करों, अवैध हथियार रखने वालों तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। पुलिस का उद्देश्य अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत करना है।

एल. ए. सी. से. स्कूल में मुकेश शर्मा ने बच्चों के साथ मिलकर एक मानव श्रंखला का निर्माण कर भगवान गणेश स्वरूप बनाया झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: एल. ए. सी. से. स्कूल में भूगोल प्राध्यापक मुकेश शर्मा ने बच्चों के साथ मिलकर एक 60×40 फिट कि मानव श्रंखला का निर्माण कर भगवान गणेश स्वरूप बनाया। इस मानव श्रंखला का उदेश्य भगवान गणेश चतुर्थी पर बच्चों को साथ में लेकर सभी को शुभकामनायें देना रहा। इन त्यौहारों से बच्चों के अंदर एक आध्यात्मिकता का विकास करके उनको पढ़ाई के प्रति जोड़ना रहा। स्कूल संचालक जगपाल गुलिया, जयदेव दहिया, अनीता गुलिया, नीलम दहिया ने बच्चों के साथ रहकर इस त्यौहार के महत्व के बारे में बताया। स्कूल प्राचार्या निधि कादयान ने बताया कि बच्चों को अध्यात्मिकता व संस्कारों के उत्थान के लिए हमें हर त्यौहार मनाना चाहिए। स्कूल प्रबंधक के. एम. डागर ने इस मानव श्रंखाल के बनाने में सहयोग देने वाले बच्चों व अध्यापकों का आभार जताया। भूगोल प्रध्यापक मुकेश शर्मा व म्यूजिक टीचर जितेंद्र का इस कला में विशेष योगदान रहा। इस अवसर सभी अध्यापक गण मौजूद रहे।

गुप्त स्मृति समारोह को लेकर तैयारियां तेज
परिषद् की बैठक में सौंपे गए विभिन्न प्रभार

झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: हिंदी पत्रकारिता के मूर्धन्य पत्रकार बाबू बालमुकुंद गुप्त की स्मृति में 18 सितम्बर को झज्जर में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों की अंतिम रूप दिया गया। परिषद् के पदाधिकारियों की एक बैठक का आयोजन गूगल मीट पर किया गया। परिषद् की ओर से संरक्षक नरेश चैहान, अध्यक्ष ऋषि सिंहल, महासचिव सत्यवीर नाहड़िया इस बैठक में रेवाड़ी से जुड़े। झज्जर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संयोजक एवं परिषद् के महासचिव डॉ प्रवीण खुराना के अलावा साहित्यकार खेमचंद सहगल, दलवंती सहरावत, डॉ गौरी अरोड़ा, रामकुमार सांपला सहित अन्य ने इस कार्यक्रम बारे अपनी राय व्यक्त की। आज आयोजित बैठक में संरक्षक नरेश चैहान ने कहा कि यह परिषद् राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़ी हुई है और इसी के चलते पिछले करीब 3 दशक से समर्पित भाव से गुप्त जी के लिये कार्य कर रही है। महासचिव सत्यवीर नाहड़िया ने कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत करवाया। झज्जर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के संयोजक डॉ प्रवीण खुराना ने अब तक तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में खेमचंद सहगल, रामकुमार, दलवंती सहरावत व डॉ गौरी अरोड़ा ने भी अपने सुझाव रखे।

समाज का विश्वास और आशीर्वाद ही मेरे जीवन की असली पूंजी: प्रो. कुलताज सिंह
कौशिक-कादयान फार्म हाउस पर हुआ जोरदार स्वागत
इलाके की तरफ से तख्त सिंह कादयान व खाप प्रधान राजपाल कादयान ने पगड़ी पहनाई

बेरी, 13 सितम्बर, अभीतक: कुश्ती के अखाड़े से लेकर खेल के मैदान तक और समाजसेवा के हर क्षेत्र में इस इलाके की जनता ने मुझे जो सहयोग, सम्मान और आशीर्वाद दिया है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मैं इसके लिए आजीवन समाज का ऋणी रहूंगा। समाज के प्रबुद्धजनों द्वारा किया गया सम्मान मेरे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारी का संदेश है। यह बात महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के खेल निदेशक प्रोफेसर कुलताज सिंह ने बेरी स्थित कोशिक-कादयान फार्महाउस में आयोजित सम्मान समारोह में प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए कही। प्रो. कुलताज सिंह ने कहा कि उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में लगभग चार दशक तक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में पूरी निष्ठा, समर्पण और जुनून के साथ सेवाएं दी हैं। इस लंबे सफर में समाज, खिलाड़ियों, पहलवानों और युवाओं का निरंतर सहयोग उन्हें मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की विशेष पहचान यह है कि यहां लगभग हर घर में खिलाड़ी, पहलवान अथवा सैनिक देखने को मिलता है। ऐसे क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेलों के विकास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है और वह समाज के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पहले से भी अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तथा युवा शक्ति को खेलों से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि यहां की मिट्टी से सत्यवान, सत्यव्रत, साक्षी मलिक, सुनीला डबास जैसी पदम श्री अर्जुन अवार्ड तथा ओलंपियन पहलवान, द्रोणाचार्य अवार्डी पैदा हुए हैं।अतः युवाओं को नशे से दूर रखकर खेलों के क्षेत्र में यह इलाका बहुत बड़ा योगदान दे सकता है. उन्होंने कहा कि समाज द्वारा उनकी खेल सेवाओं का पगङी से सम्मान नई पीढ़ी को भी खेल और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। सम्मान की सूचक पगड़ी की गरिमा को मैं कम नहीं होने दूंगा। इस अवसर पर एमडीयू गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार शर्मा, खाप प्रधान राजपाल कादयान, दूबलधन कॉलेज सुधार समिति के अध्यक्ष सुखचंद कादयान, पूर्व कालेज प्रिंसिपल रणबीर कादयान, बाकरा के सरपंच सुरेंद्र सिंह, जाट संस्था पर प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य प्रिंसिपल पवन कादयान, प्रोफेसर अजय कादयान,प्रवीण पूर्व सरपंच बाघपुर, जयपाल कादयान, प्रोफेसर समंद्र कौशिक, मास्टर हवा सिंह, मास्टर जय भगवान पूर्व जिला पार्षद, विनोद सरपंच माजरा, समाजसेवी जोगेंद्र उर्फ जोगी, एनटीए के पूर्व प्रधान राजकुमार शर्मा, कुलदीप बेरी, महावीर सिंह माजरा, ज्ञान डीघल मनोज बहराना, सोमबीर वजीरपुर, पुरुषोत्तम कौशिक, सरताज सिंह, अशोक कादयान पूर्व प्रधान दूबलधन कॉलेज, लीला चिमनी, नरेंद्र चिमनी, रोहतास बहराणा, सूबे सिंह, पं मदन मोहन वजीरपुर, आनंद मदाना, सतपाल कादयान आदि सहित सैंकङो गणमान्य जन उपस्थित रहे।

बाबा कांशीगिरी के वार्षिकोत्सव समापन अवसर पर बाबा की महाआरती में शिरकत करते श्रद्धालुजन।
बाबा कांशीगिरी मंदिर के वार्षिकोत्सव अवसर पर मधुर भजनों की प्रस्तुति देते कलाकार।
रिटायर्ड बीईओ वीके नरूला द्वारा संकलित पुस्तक का विमोचन करते प्रबुद्धजन।

महाआरती से बाबा कांशीगिरी के वार्षिकोत्सव का भव्य समापन
समापन अवसर पर हुआ अटूट भंडारा भी
कृष्ण भक्ति में जमकर झूमे श्रद्धालु
अनुकरणीय विचारो पर संकलित पुस्तक का भी हुआ विमोचन
गुड़गांव, दिल्ली सहित दूर-दराज के शहरों से मन्नतें मांगने पहुंचे लोग
देश विभाजन से चली आ रही परंपरा का था 80वाँ आयोजन

झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: बीते पांच रोज से नगर की प्रसिद्ध शक्तिपीठ मंदिर बाबा कांशीगिरी का 80वाँ वार्षिकोत्सव रविवार को बाबा की महाआरती के बाद संपन्न हो गया। समापन अवसर पर मंदिर में अटूट भंडारे का आयोजन भी किया गया। इससे पूर्व मंदिर में रविवार को हुए कार्यक्रम की शुरुआत भी बाबा कांशीगिरी की आरती से हुई। एसीपी वीपी नागपाल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर कार्यक्रम का आगाज किया। वही दिल्ली, गुड़गांव, रोहतक, सोनीपत, बहादुरगढ़ आदि दूर दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा कांशीगिरी का पूजन अर्चन किया।
मन्नते पूरी होने पर बाबा को अर्पण की पगड़ियां

देश विभाजन के बाद से ही परम्परा रही है कि जिन भक्तों की बाबा के समक्ष मांगने से मन्नतें पूरी होती है वे वार्षिकोत्सव अवसर पर बाबा को पगड़ी अर्पित कर आभार प्रकट करते हैं। रविवार को भी अलसुबह से ही बाबा के दर्शनों और पगड़ी अर्पित करने वाले श्रधालुओं की कतार नजर आई।
कृष्ण भक्ति में झूमे श्रद्धालु
वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत ही श्री राधा बल्लभ परिवार पानीपत द्वारा राधा नाम संकीर्तन किया गया। भजन सम्राट रवि आहुजा ने एक के बाद एक भजनों की प्रस्तुति दी जिन पर श्रद्धालुजन जमाकर थिरके।
पुस्तक का हुआ विमोचन
मंदिर के संरक्षक एवं रिटायर्ड बीईओ वीके नरूला द्वारा संकलित जीवन में अनुकरणीय विचार पुस्तक का विमोचन भी वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के दौरान किया गया। नप चेयरमैन जिलेसिंह, पंडित पवन शर्मा, हरिद्वार धाम के प्रधान हरीश खुराना, संरक्षक नरेंद्र मदान, डाक्टर गौतम आर्य, डॉक्टर रामलाल व अन्य प्रबुद्धजनों ने संयुक्त रूप से इस पुस्तक का विमोचन किया।
ये रहे मौजूद
पांच दिवसीय वार्षिकोत्सव को सफल आयोजन बनाने के लिए मदिर प्रधान सुधांशु हंस ने नगरवासियों का आभार व्यक्त किया। सभी कार्यक्रमों में रूपचंद अरोड़ा, वीके शर्मा, देवराज भुगड़ा, लक्ष्मी नारायण, प्रदीप काठपलिया, विकास नरूला, आशीष चावला, मनीष मेहता, प्रिंस सेठी, रिंकू नंदा, राजू चुग, पदम खट्टर, योगेश रंजन, नरेंद्र चावला, हरमिलाप सभा के प्रधान महेश काठपलिया, महिला मंडल की सभी सदस्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए नागरिकों ने दर्ज कराए दावे एवं आपत्तियां: डीसी’
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत रविवार को बूथों पर मौजूद रहे बीएलओ’
मतदाताओं ने अपने नाम व विवरण की जांच कर आवश्यक संशोधन के लिए दिए आवेदन’
26 व 27 सितंबर को भी चलेगा विशेष अभियान, 30 सितंबर तक दर्ज कराए जा सकेंगे दावे एवं आपत्तियां’
बूथों पर मौजूद रहे बीएलओ, मतदाताओं से प्राप्त किए दावे-आपत्तियां’

झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी एवं अद्यतन बनाने के लिए जिला में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रविवार को जिला के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मौजूद रहे। बीएलओ ने मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले नागरिकों एवं छात्र मतदाताओं से मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाई। यह जानकारी डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने दी।
मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जागरूकता जरूरी
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि अद्यतन एवं शुद्ध मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के साथ-साथ अपने विवरण की भी जांच करनी चाहिए। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि वे प्रारंभिक मतदाता सूची में अपना तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों का नाम अवश्य जांचें।
नाम, पता और अन्य विवरण की जांच करें मतदाता
डीसी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम, पता, आयु, फोटो अथवा अन्य विवरण सही दर्ज होना आवश्यक है। नागरिक विशेष अभियान के दौरान अपने मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं और आवश्यकता अनुसार दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
नाम छूटा है तो फॉर्म-6 से करें आवेदन
डीसी ने बताया कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज एवं घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर नाम शामिल करवाने के लिए दावा प्रस्तुत किया जा सकता है। पात्र नागरिक इस सुविधा का लाभ उठाकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाएं।
विवरण में त्रुटि होने पर फॉर्म-8 से करवाएं संशोधन
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची में नाम, पता, आयु, फोटो अथवा अन्य किसी विवरण में त्रुटि होने पर नागरिक निर्धारित दस्तावेज एवं घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-8 भरकर संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि वे अपने विवरण की जांच करें और किसी प्रकार की गलती पाए जाने पर समय रहते उसे दुरुस्त करवाएं।
अपात्र या मृत मतदाता का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7
डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि किसी अपात्र, मृत, स्थानांतरित अथवा अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। नागरिक अपने दावे एवं आपत्तियां संबंधित बूथ लेवल अधिकारी अथवा निर्वाचक पंजीयन अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं।
26 व 27 सितंबर को भी आयोजित होगा विशेष अभियान
डीसी ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए 26 व 27 सितंबर को भी जिला के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान आयोजित किया जाएगा। इन दिनों भी बीएलओ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहेंगे और नागरिकों से मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करेंगे।
30 सितंबर तक प्रस्तुत किए जा सकेंगे दावे एवं आपत्तियां
जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने बताया कि मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं। नागरिक अपने क्षेत्र के संबंधित बीएलओ अथवा निर्वाचक पंजीयन अधिकारी से संपर्क कर मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां निर्धारित समय सीमा में दर्ज करवाएं।
झज्जर जिला में रविवार को मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान के दौरान मतदाताओं के दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करते बीएलओ।’

एकमुश्त कर निपटान योजना का लाभ उठाएं व्यापारी: डीसी’
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा- हरियाणा सरकार की एकमुश्त निपटान योजना व्यापारियों के लिए लाभकारी’
28 सितंबर तक चलने वाली एकमुश्त निपटान स्कीम के तहत पुराने बकाया करों का होगा निपटान

झज्जर, 13 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों को लाभ देने के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान स्कीम को व्यापारियों ने प्राथमिकता देते हुए उसका भरपूर लाभ उठाया है। इस स्कीम की अभूतपूर्व कामयाबी को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर निपटान योजना लागू की है। व्यापारी वर्ग नियमानुसार इस योजना का लाभ उठाकर पुराने बकाया करों का भुगतान सकते हैं। यह जानकारी डीसी वर्षा खांगवाल ने दी। डीसी ने बताया कि इससे जीएसटी में कम से कम बकाया राशियों के साथ आगे बढ़ा जाए ताकि जीएसटी संग्रह को बढ़ाने में अधिक से अधिक समय और ध्यान दिया जा सके। डीसी ने बताया कि सरकार द्वारा गत 1 जून से 120 दिनों के लिए 28 सितंबर 2026 तक एक मुश्त निपटान स्कीम, 2026 शुरू की है। जिसके तहत सात कराधान अधिनियमों के तहत निर्धारित बकाया देय राशि के निपटान का प्रावधान है। यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे इस स्कीम में आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। उसका उस वर्ष के लिए उस अधिनियम में संपूर्ण कर, ब्याज एवं जुर्माना राशि माफ हो जाएगी। आवेदक अपने बकाया देय राशि के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम में किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकता है। पूर्ववर्ती हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत बकाया राशि के निपटान के लिए विशेष छूट उपलब्ध है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 को 1 अप्रैल, 2003 से हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 के लागू होने के साथ निरस्त कर दिया गया था। हरियाणा सामान्य बिक्री कर के तहत बकाया देय बहुत पुराने हैं, इसलिए 1 लाख से अधिक कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
वैधानिक प्रपत्रों के जमा न करने के कारण बड़ी संख्या में बकाया राशि का होगा भुगतान
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त अजय कुमार ने बताया कि फार्म सी, फार्म एफ, फार्म एच, फार्म ई1, फार्म ई2, टैक्स इनवॉइसध्वैट सी-4, वैट डी1, वैट डी2 आदि जैसे वैधानिक प्रपत्रों के न जमा करने के कारण बड़ी संख्या में बकाया राशि देय है। इन बकाया को विशेष रूप से लक्षित करने के लिए एक नई छूट प्रस्तावित की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति अब ऐसे प्रपत्र प्रस्तुत करने में सक्षम है, तो उसके कर की मांग उन प्रपत्रों के प्रस्तुत करने से प्राप्त होने वाली छूट की राशि से घटा कर कम कर दी जाएगी, बशर्ते ये प्रपत्र तीन महीने के भीतर सत्यापित हो जाएं। यह लाभ ऐसे फर्जीध्नकली फर्मों को उपलब्ध नहीं होगा जिनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई है। यह लाभ उन वैधानिक प्रपत्रों के लिए भी उपलब्ध नहीं होगा जिन्हें पहले प्राधिकरणों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। यह केवल हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 और केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 से संबंधित बकाया राशि पर लागू होगा। उन्होंने बताया कि स्कीम के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत प्रदान की गई कर छूट में एक रुपए से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, अन्य मामले में कर छूट का 70 प्रतिशत है। अन्य अधिनियमों के अधीन उपलब्ध छूट में एक रुपये से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, 1 लाख से 10 लाख तक 60 प्रतिशत, 10 लाख से 1 करोड़ तक 50 प्रतिशत, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत, 10 करोड़ रुपये से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत, 30 करोड़ रुपये से 60 करोड़ तक 30 प्रतिशत, 60 करोड़ रुपये से अधिक पर 0 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत ब्याज तथा जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी गई है।
बकाया कर राशि की स्लैब तक मिलेगा पूर्ववर्ती स्लैब में दी गई छूट का पूर्ण लाभ
डीईटीसी ने बताया कि आवेदक को प्रत्येक पूर्ववर्ती स्लैब में दी गई छूट का पूर्ण लाभ उसके बकाया कर राशि की स्लैब तक मिलेगा। बकाया राशि निर्धारित करने वाले किसी भी आदेश के विरूद्ध अपील या मुकदमे में शामिल आवेदक भी लंबित अपीय या मुकदमे को वापस लेने की शर्त के साथ इस स्कीम के तहत आवेदन कर सकते है। निपटान की राशि का भुगतान किस्तों में करने की भी सुविधा स्कीम में दी जा रही है। पांच लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए कोई किस्त नहीं। पांच लाख रुपए से अधिक और पच्चीस लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए दो समान किस्तें। एक किस्त आवेदन जमा करते समय और दूसरी अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर। पच्चीस लाख रुपए से अधिक के निपटान की राशि के लिए तीन किस्तें होगी। आवेदन जमा करते समय निपटान राशि का 40 प्रतिशत, अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर दूसरी किस्त, निपटान राशि का 30 प्रतिशत और अंतरिम आदेश की तिथि से 120 दिनों के भीतर शेष राशि की तीसरी किस्त। ऐसे मामलों में जहां निपटान के लिए आवेदन सही पाया गया है और स्वीकार कर लिया गया है तो आवेदक के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।
वर्षा खांगवाल, डीसी झज्जर।

कांग्रेस मना रही संगठन सृजन वर्ष, लोकतंत्र और भविष्य की रक्षा के लिए कैडर का विस्तार: दीपेंद्र हुड्डा
दीपेंद्र हुड्डा को सोशल मीडिया के माध्यम से हरियाणा सरकार के मंत्रियों ने घेरा, दीपेंद्र हुड्डा ने दिया ब्यौरा, बताया कारण, क्यो घेरा: सांसद दीपेंद्र हुड्डा
जैन-जी आंदोलन के बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूलों में चलाए जा रहे चैकिंग अभियान पर भी बोले: भाजपा कार्यकाल में भाजपा दफ्तरों का हुआ विकास, स्कूल बदहाल
पूरी कैबिनेट को एक ही स्क्रिप्ट देकर कराया गया बयानों का हमला, सिर्फ बदले गए चेहरे: दीपेंद्र हुड्डा
भिवानी में कांग्रेस का कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित, जिले के एकमात्र कांग्रेस विधायक रहे नदारद

सुपवा में एफटीवी 2019 बैच क्लीयर होने का रास्ता साफ
डिग्री फिल्म प्रोजेक्ट शूट का शेड्यूल जारी, 18 सितंबर से शुरुआत
94 दिन तक लगातार चलने वाले शूट में तैयार होंगी 9 शॉर्ट फिल्म

रोहतक, 13 सितम्बर, अभीतक: दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के फिल्म एवं टेलीविजन (एफटीवी) फैकेल्टी के साल 2019 बैच के क्लीयर होने का रास्ता साफ हो गया है। इनके लंबित चल रहे डिग्री फिल्म प्रोजेक्ट के शूट का शेड्यूल जारी हो गया है। 18 सितंबर को पहली डिग्री फिल्म का शूट शुरू हो जाएगा। लगातार 94 दिन तक चलने वाले शूट में 9 शॉर्ट फिल्म तैयार की जाएंगी। एफसी महेश टीपी ने बताया कि कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने पिछले दिनों एफटीवी में डिग्री स्टूडेंट्स के लंबित चल रहे बैच का बैकलॉग जल्द से जल्द खत्म करने के आदेश दिए थे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जो बैच समय पर चल रहे हैं, उनकी टाइम लाइन किसी भी सूरत में मिस नहीं होनी चाहिए। इसलिए 2019 बैच को क्लीयर कराने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उनके डिग्री फिल्म प्रोजेक्ट के शूट का शेड्यूल जारी कर दिया है। ये शूट पूरे होने के बाद पोस्ट प्रॉडक्शन का कार्य शुरू होगा। इसके बाद इन छात्रों की ज्यूरी होगी और उसमें उत्तीर्ण होने पर इनकी डिग्री कंपलीट हो जाएगी। इससे पहले 11 सितंबर को 2022 बैच को आगे बढ़ाते हुए उनके म्यूजिक वीडियो शूट शुरू कराए गए हैं। ये दोनों शूट शेड्यूल समानांतर चलते रहेंगे। इनके लिए कैमरा, लाइट आदि का अलग-अलग इंतजाम किया गया है। महेश टीपी ने बताया कि डिग्री फिल्म प्रोजेक्ट के शूट शुरू होने से 2019 बैच के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि छात्रों का कोर्स वर्क कंपलीट होने में पूर्व में जो भी लेट-लतीफी रही है, वह अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसलिए सभी 9 डिग्री फिल्म शूट के लिए अलग-अलग यूनिट मैनेजर भी तैनात कर दिए हैं, जबकि इसके लिए जरूरी कैमरे, लाइट, जनरेटर आदि की व्यवस्था यूनिवर्सिटी के स्तर पर कर ली गई है। शूट 94 दिन तक नॉन स्टॉप चलते रहें, इसलिए ही लाइट ब्वॉयज, मेकअप, स्पॉट बॉय, कारपेंटर आदि का इंतजाम अभी से कर लिया गया है। अलग-अलग शॉर्ट फिल्म के लिए 2019 बैच के डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग, ऑडियोग्राफी कोर्स में पढ़ रहे छात्रों की टीमें गठित कर दी गई हैं। ये टीमें ही अपने-अपने शूट के लिए तमाम जिम्मेदारियां संभालेंगी। इन टीम में शामिल छात्र एडिटर, डायरेक्टर, सिनेमेटोग्राफर, ऑडियोग्राफर के तौर पर अपनी शॉर्ट फिल्म को शूट कराएंगे। महेश टीपी ने बताया कि एफटीवी छात्रों के कोर्स का बैकलॉग खत्म करने के लिए कुलगुरु डॉ अमित आर्य पूरी तरह से गंभीर हैं। उनके प्रयासों से ही साल 2018 बैच की डिग्री मार्च महीने में पूर्ण हुई। अब 2019 व 2022 बैच के शूट एक साथ चलेंगे। जबकि, अन्य लंबित चल रहे बैच की पढ़ाई को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम शुरू हो चुका है। अभी कुछ और शूट शुरू कराने की प्लानिंग पर काम चल रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और अधिक रफ्तार नजर आनी शुरू हो जाएगी।

समाज का विश्वास और आशीर्वाद ही मेरे जीवन की असली पूंजी: प्रो. कुलताज सिंह
इलाके की तरफ से तख्त सिंह कादयान व खाप प्रधान राजपाल कादयान ने पगड़ी पहनाई

बेरी, 13 सितम्बर, अभीतक: कुश्ती के अखाड़े से लेकर खेल के मैदान तक और समाजसेवा के हर क्षेत्र में इस इलाके की जनता ने मुझे जो सहयोग, सम्मान और आशीर्वाद दिया है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मैं इसके लिए आजीवन समाज का ऋणी रहूंगा। समाज के प्रबुद्धजनों द्वारा किया गया सम्मान मेरे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारी का संदेश है। यह बात महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के खेल निदेशक प्रोफेसर कुलताज सिंह ने बेरी स्थित पुरुषोत्तम-जयभगवान फार्महाउस में आयोजित सम्मान समारोह में प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए कही। प्रो. कुलताज सिंह ने कहा कि उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में लगभग चार दशक तक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में पूरी निष्ठा, समर्पण और जुनून के साथ सेवाएं दी हैं। इस लंबे सफर में समाज, खिलाड़ियों, पहलवानों और युवाओं का निरंतर सहयोग उन्हें मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की विशेष पहचान यह है कि यहां लगभग हर घर में खिलाड़ी, पहलवान अथवा सैनिक देखने को मिलता है। ऐसे क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेलों के विकास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है और वह समाज के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पहले से भी अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तथा युवा शक्ति को खेलों से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा उनकी खेल सेवाओं का पगङी से सम्मान नई पीढ़ी को भी खेल और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। सम्मान की सूचक पगड़ी की गरिमा को मैं कम नहीं होने दूंगा। इस अवसर पर एमडीयू गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार शर्मा, खाप प्रधान राजपाल कादयान, दूबलधन कॉलेज सुधार समिति के अध्यक्ष सुखचंद कादयान, पूर्व कालेज प्रिंसिपल रणबीर कादयान, बाकरा के सरपंच सुरेंद्र सिंह, जाट संस्था पर प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य प्रिंसिपल पवन कादयान, प्रोफेसर अजय कादयान, प्रवीण पूर्व सरपंच बाघपुर, जयपाल कादयान, प्रोफेसर समंद्र कौशिक, मास्टर हवा सिंह, मास्टर जय भगवान पूर्व जिला पार्षद, विनोद सरपंच माजरा, समाजसेवी जोगेंद्र उर्फ जोगी, एनटीए के पूर्व प्रधान राजकुमार शर्मा, कुलदीप बेरी, महावीर सिंह माजरा, ज्ञान डीघल मनोज बहराना,सोमबीर वजीरपुर, पुरुषोत्तम कौशिक, सरताज सिंह, अशोक कादयान पूर्व प्रधान दूबलधन कॉलेज, लीला चिमनी, नरेंद्र चिमनी, रोहतास बहराणा, सूबे सिंह,पं मदन मोहन वजीरपुर,आनंद मदाना,सतपाल कादयान आदि सहित सैंकङो गणमान्य जन उपस्थित रहे।

कैथल: कलायत सीआईए पुलिस की बड़ी कार्रवाई… अवैध पटाखों से भरा ट्रक व पिकउप गाड़ी पकड़ी
इसके तुरंत बाद पटाखा फेक्ट्री पर भी की रेड
ट्रक से 571 कार्टूनों में 23 हजार बॉक्स बरामद हुए जिनमें विस्फोटक दीवाली वाले पटाखे भरे हुए थे
पटाखा फेक्ट्री से भी भारी मात्रा में पटाखे बनाने का कच्चा माल बरामद
पुलिस ने फेक्ट्री को सील कर ट्रक व पिकउप को कब्जे में लेते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है
गुप्त सूचना के आधार पर करनाल रोड़ पर सुबह करीब 3ः30 बजे पकड़ा ट्रक व पिकउप और उसके बाद फेक्ट्री पर मारी थी रेड

सोनीपत: सोनीपत के गांव गोपालपुर में निजी कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चैटाला
सरकार और मुख्यमंत्री नायब सैनी पर दुष्यंत चैटाला ने जमकर चलाए जुबानी बाण
बोले ना मुख्यमंत्री का माइंडसेट है, ना ही उनके पास कोई नीति है
पिछले दो साल में हरियाणा में एक भी नया बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला पाए मुख्यमंत्री
दुष्यंत चैटाला का सीएम नायब सैनी पर जुबानी हमला बोले- हरियाणा से ज्यादा पंजाब चुनाव पर मुख्यमंत्री का ध्यान
पंजाब के चुनावी ध्यान में बीजेपी ने हरियाणा को बर्बाद करने का किया काम

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पति की आंतें निकालने वाली पत्नी को शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। विमला ने 21 अगस्त को पति राजेश को सीने से प्राइवेट पार्ट तक चीर दिया था। उसकी आंतें, दाईं किडनी और लीवर बोरी में भर दिए। मकान मालिक को आता देख वह छत से कूद गई थी। पिछले 22 दिन से उसका कुरुक्षेत्र के स्छश्रच् सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा था।

दशहरा उत्सव शहर के सहयोग से होगा भव्य: डॉ. राजेश भाटिया
फरीदाबाद, 13 सितम्बर, अभीतक: सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, मार्केट नंबर-1 में मन्दिर के प्रधान डॉ राजेश भाटिया एवं पंजाबी सभा के अध्यक्ष राज कुमार वोहरा द्वारा आगामी दशहरा उत्सव की तैयारियों को लेकर शहर की विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं तथा आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में दशहरा महोत्सव को भव्य एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष भरत मिलाप का आयोजन सायंकाल किया जाएगा तथा दशहरा पर्व से संबंधित विभिन्न शोभायात्राओं के मार्ग एवं व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। लंका दहन की शोभायात्रा रविवार दिनांक 18 अक्टूबर सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, मार्केट नंबर-1 से दोपहर 3 बजे प्रारंभ होकर कल्याण सिंह चैक, आर्य समाज रोड, नाथी चैक, फाफड़ा सिंह चैक, 1-2 चैक, लखानी धर्मशाला, हनुमान मंदिर नंबर-2, विद्या निकेतन स्कूल, एनआईटी-3 मार्किट तथा हनुमान मंदिर 3 डी -42 होते हुए दशहरा ग्राउंड पहुंचेगी।
वहीं दशहरा की शोभायात्रा मंगलवार 20 अक्टूबर
सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, मार्केट नंबर-1 से दोपहर 3 बजे रवाना होकर कल्याण सिंह चैक, आर्य समाज रोड, बीकानेर मिष्ठान भंडार मार्ग से होते हुए दशहरा ग्राउंड पहुंचेगी। इसके अतिरिक्त भरत मिलाप की शोभायात्रा बुधवार दिनांक 21 अक्टूबर मिलाप समिति हनुमान मंदिर नंबर-3 डी 42 से दोपहर 3 बजे प्रारंभ होकर एनआईटी-3 मार्केट, संतोष हॉस्पिटल, प्रयाग मेडिकल, चिमनी बाई चैक, 4-5 चैक, शिव मंदिर नंबर-5, निरंकारी चैक, बिजली बोर्ड, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा रोड नंबर-5, नीलम चैक पेट्रोल पंप तथा बी.के. चैक से होते हुए दशहरा ग्राउंड पहुंचेगी। मंदिर के प्रधान डॉ. राजेश भाटिया ने कहा कि दशहरा पर्व हमारी भारतीय संस्कृति, धर्म और आदर्शों का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का दशहरा उत्सव पूरे शहर के सहयोग से भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। डॉ. राजेश भाटिया ने केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद कृष्ण पाल गुर्जर, विधायक धनेश अधलखा, पूर्व विधायक चंद्र भाटिया, पंजाबी सभा के अध्यक्ष राज कुमार वोहरा तथा सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रधानों और पदाधिकारियों का विशेष रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और मार्गदर्शन से ही यह विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होगा। पंजाबी सभा के अध्यक्ष राज कुमार वोहरा ने कहा कि दशहरा उत्सव में शहरवासियों की भागीदारी ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी नागरिकों से परिवार सहित शोभायात्राओं एवं दशहरा कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह आयोजन हमारी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम है। बैठक में उपस्थित सभी धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दशहरा उत्सव को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।

वैश्विक क्षितिज पर हिंदी का बढ़ता वर्चस्व’
(हिंदी दिवस पर विशेष आलेख)

सम्माननीय हिंदी प्रेमियों, जैसाकि कहा गया है : ष्भाषा राष्ट्रीय शरीर की आत्मा है।ष् अतः हिंदी हमारे भारत की राष्ट्रीय संस्कृति की आत्मा है। हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं और हमें गर्व है अपनी मातृभाषा हिंदी पर। हिंदी के उन्नयन की दिशा में कार्य करने के लिए हम सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। ष्हिंदी एक प्राचीन भाषा है और संस्कृत की उन धाराओं में से एक है जो आज भी जीवित है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचार, कि हृदय की कोई भाषा नहीं है, हृदय-हृदय से बातचीत करता है और हिंदी हृदय की भाषा है, हिंदी दिवस के उपलक्ष में बहुत प्रासंगिक हैं क्योंकि हिंदी भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान, शान और गर्व की भाषा है।
हिंदी का भविष्य और सांस्कृतिक पहचान
ष्हिंदी दिवस हमें हिंदी भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित करता है।ष् ष्हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है, और हमें इसे बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए।ष् इस बात से यह स्पष्ट होता है कि हिंदी भाषा न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, समाज और देश की पहचान भी है। हिंदी दिवस हमें इसकी महत्ता को समझने और इसके प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर प्रदान करता है। आज भारत में हिंदी साहित्य की भाषा है, सिनेमा की भाषा है, मनोरंजन की भाषा है। ये हम सभी जानते है, लेकिन इसके पीछे का कारण ये है कि हिंदी सिर्फ भाषा ही नहीं, हमारी भावना भी है। ये हमारी आत्मा का हिस्सा है, और हमारी पहचान है। भारत, विविधताओ का देश है, जहां जितनी संस्कृतियां है, उतनी भाषाएं हैं और उतनी ही बोलिया बोली जाती हैं। इसलिए, हमारा देश भाषाओं का गढ़ है। भारत में लगभग 20,000 भाषाएं बोली जाती हैं। प्रत्येक भाषा की अपनी खासियत और खूबसूरती है, अपनी मधुरता है। भारत देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाली हिंदी को राजभाषा का गौरव प्राप्त है। हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने और इसके महत्व से भारतीयों को अवगत कराने के लिए हर वर्ष 1 से 15 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन भी किया जाता है। हम सब जानते हैं कि हिंदी भाषा विश्व में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।
भावनात्मक एकता का सूत्र
ष्हिंदी महज भाषा नहीं बल्कि यह हमको रचती हैष्….. आशुतोष जी की यह पंक्ति हिंदी भाषा पर सटीक बैठती है। हिंदी को मन की भाषा कहा जाता है, यह मन के बंद ताले को खोल सकती है। हमारी आत्मा और ज्ञान का पथ खोल सकती है। यह महज भाषा नहीं बल्कि भारतीयों को एकता के सूत्र में पिरोती है। यह विश्वभर में बसे भारतीयों को भावनात्मक रूप से एक साथ जोड़ने का काम करती है।
संवैधानिक यात्रा और ऐतिहासिक संघर्ष
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत 14 सितम्बर, 1949 को हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा घोषित किया गया है। तदोपरांत 14 सितंबर 1953 में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की सिफारिश पर प्रत्येक वर्ष ष्14 सितंबरष् को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। हिंदी और भारतीय संविधान के परिपेक्ष्य में बी.एन. राव ने कहा कि “भारत के नए संविधान के निर्माण में सबसे कठिन समस्याओं में से एक, भाषाई प्रांतों की मांग और समान प्रकृति की अन्य मांगों को पूरा करना होगा”। इस मुद्दे ने संविधान सभा को उसके तीन साल के जीवनकाल तक परेशान किया। भारत का संविधान राष्ट्रभाषा के मुद्दे पर मौन है। इस प्रकार, हिंदी भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में से एक है, न कि हमारी राष्ट्रीय भाषा। अभी तक विश्व के अनेक देशों में राजभाषा स्वीकृत नहीं हुई है। इसी तरह राष्ट्रभाषा का भी मामला अनेक देशों में लंबित है। भारत के संदर्भ में राजभाषा हिंदी को संविधान लागू होने से पहले स्वीकृत किया गया था। यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को स्वीकृत किया गया जबकि राजभाषा हिंदी को 14 सितंबर 1949 को स्वीकार किया गया था। यह भाषा सम्बन्धित मामला भारत जैसे बहुभाषिक देश में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। जिस तरह एक देश, एक ध्वज, एक राष्ट्र गीत एवं एक राष्ट्र भाषा की संकल्पना को विश्व में स्वीकार किया जाता है उसी तरह हमारे देश में राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए।
महापुरुषों की दृष्टि में हिंदी
सुमित्रानंदन पंत जी ने मातृभाषा हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है और हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। उन्होंने कहा: मैं कुंजी कहता हिंदी को खुलता जिससे सामूहिक मन, क्षेत्रवृति से उठकर ही हम कर सकते जन राष्ट्र संगठन।
मैथिलीशरण गुप्त जी ने भी मातृभाषा हिंदी के महत्व के बारे में कुछ यूं बयां किया
है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी भरी।
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी
मानस भवन में आर्यजन जिसकी उतारें आरती।
भगवान भारतवर्ष में गूंजे हमारी भारती
रामधारी सिंह दिनकर जी की हिंदी भाषा के महत्व के बारे में कुछ यादगार पंक्तियाँ इस प्रकार हैं
हिंदी हमारी मातृभाषा, हिंदी भारत की अभिलाषा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने हिंदी को राष्ट्रीय एकता की आवश्यक शर्त बताते हुए हुंकार भरी
यदि हम लोगों ने तन मन धन से प्रयत्न किया तो वह दिन दूर नहीं है जब भारत स्वाधीन होगा और उसकी राष्ट्रभाषा होगी -हिंदी।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के अनुसार
हिंदी को ऊंची से ऊंची शिक्षा का माध्यम होना चाहिए
तकनीक और डिजिटल माध्यमों में हिंदी का उदय

जैसा कि सर्वविदित है कि भारतीय संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी थी। 21वीं सदी के पहले दशक में ही गूगल न्यूज, गूगल ट्रांसलेट तथा ऑनलाइन फोनेटिक टाइपिंग जैसे साधनों ने वेब की दुनिया में हिंदी के विकास में महत्त्वपूर्ण सहायता की। हिंदी की पकड़ इंटरनेट पर दिन-प्रतिदिन मजबूत हो रही है जिससे निश्चय ही हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है! सामाजिक संचार माध्यम अर्थात सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और तकनीकी विकास, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफार्मों पर हिंदी सामग्री का बढ़ता प्रचार-प्रसार इसे एक महत्वपूर्ण भाषा बनाता है। सोशल मीडिया, ब्लॉग, और ऑनलाइन समाचारों में हिंदी की उपस्थिति में लगातार वृद्धि हो रही है। हिंदी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व न केवल इसकी व्यापकता में है, बल्कि इसके माध्यम से सांस्कृतिक, आर्थिक, और सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने में भी है। यह भारतीय पहचान और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर फैलाने का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे हिंदी एक प्रभावी और जीवंत भाषा बनती जा रही है।
सोशल मीडिया: एक लोकतांत्रिक मंच
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा व साहित्य के विकास में जिस क्रांतिकारी भूमिका का निर्वहन पिछले लगभग एक दशक में किया है उसने सबको विशेषतः परंपरागत प्रिंट मीडिया के पक्षधरों को अचंभित कर दिया है। जहां आज सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके नवोदित लेखक हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में प्रवेश कर रहे हैं वहीं स्थापित हिंदी साहित्यकार भी सोशल मीडिया को माध्यम बनाकर अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। सोशल मीडिया के आगमन का सबसे सकारात्मक प्रभाव यह रहा है कि अब समाचार पत्र व पत्र पत्रिकाओं के संपादकों की कृपा दृष्टि की आवश्यकता नहीं और न ही उनकी लेखन दृष्टि का अनुसरण कर लिखने की द्य पारंपरिक मीडिया में अक्सर ऐसा होता था कि अगर किसी पत्रिका का संपादक एक विशेष धर्म-जाति, राजनीतिक दल, विचारधारा, लेखन-शैली या साहित्य-विधा के प्रति अधिक मोह रखता था तो वह पत्रिका में उन्हीं लेखकों की रचनाओं को शामिल करता था जो उसकी विचारधारा के अनुकूल होते थे परंतु सोशल मीडिया ने संपादकों की इस तानाशाही प्रवृत्ति को नकारा है।
तकनीकी समाधान और हिंदी की चमक
फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के लोकप्रिय प्लेटफार्म हों या फिर ब्लाग, वेबसाइट अथवा वेब पोर्टल, इंटरनेट के हर कोने में हिंदी चमक रही है। स्मार्टफोन के आने से लोगों की जीवन शैली में बहुत बदलाव आया, ढेरों ऐसे कीबोर्ड ऐप आ चुके हैं जो देवनागरी हिंदी लेखन को बढ़ावा देने में सहायक हैं। हिंदी लंबे समय तक फॉंट की समस्या से जूझती रही, लेकिन बढ़ती जरूरत के बीच हिंदी गूगल इनपुट, यूनीकोड और मंगल जैसे फॉंट के विकास ने हिंदी को नया जीवन प्रदान किया। आज के समय में इंटरनेट पर हिंदी साहित्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
आरंभिक दौर में प्रिंट मीडिया ने इस भूमिका का बखूबी निर्वहन किया द्य आज भी किसी भाषा को समुन्नत करने में मीडिया की भूमिका सर्वोपरि है परंतु आज प्रिंट मीडिया को कहीं पीछे छोड़ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अन्य भाषाओं की भांति हिंदी के प्रचार-प्रसार व समुन्नयन में महती भूमिका निभाई है। यह ऐतिहासिक सत्य है कि जब भी कोई भाषा पुराने तटबंधो को तोड़कर नये क्षेत्र में प्रवेश करती है तो शुद्धतावादी तत्व उससे चिंतित हो जाते हैं।
हिंदी : स्वीकार्यता का राजमार्ग
सच तो यह है कि हिंदी इस समय स्वीकार्यता के राजमार्ग पर सरपट दौड़ रही है और हिंदी अश्वमेध के घोड़ों को रोक पाना किसी के बस में नहीं है। सोशल मीडिया इस दौड़ को और गतिशील बना रहा है। आज का सच यह है कि जिस तरह हिंदी को अपने प्रसार के लिए मीडिया की जरूरत है उसी तरह मीडिया को अपने विस्तार के लिए हिंदी की आवश्यकता हैं।
एक कटु सत्य और चिंतन की आवश्यकता
लेकिन क्षुब्द मन से कहना पड़ रहा है कि हम हिंदी दिवस तो हर वर्ष मना रहे हैं लेकिन हमारे सभी प्रशासनिक, सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों में लगभग सभी कार्य अंग्रेजी भाषा में किये जा रहे हैं जो कि भारतीय संस्कृति की आत्मा पर कुठाराघात है। अतः राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन का विषय है।
हिंदी दिवस की पुनीत बेला पर मैं भारतेंदु हरिश्चंद्र की शाश्वत पंक्तियां उद्धृत करना चाहूंगा
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।
उपसंहार : वैश्विक क्षितिज पर हिंदी
हिंदी की संवैधानिक स्थिति भारतीय संघ की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संविधान में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई है, और इसके विकास और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, भाषायी विविधता के कारण कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें संतुलित नीति और जनजागरूकता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। आज वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का महत्व और भी बढ़ गया है। हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। आज विदेशों में अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही हैं। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। निश्चय ही हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हम संकल्प लें कि हम हिंदी को केवल दिवसों तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन, तकनीक और कार्यक्षेत्र की मुख्य भाषा बनाएंगे।

सेवा संकल्प अभियानश् 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक होगा आयोजन
सेवा संकल्प अभियान’ में होंगे जनकल्याण से जुड़े 12 प्रमुख कार्यक्रम, आशीर्वाद का दीया’ से होगा शुभारंभ

रेवाड़ी, 13 सितम्बर, अभीतक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियानश् का आयोजन किया जाएगा। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि अभियान का व्यापक उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर सेवा, सहयोग और सहभागिता की संस्कृति को मजबूत करना है। इसके साथ ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने तथा राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को रेखांकित करने की दिशा में भी अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि श्सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ मॉड्यूल एक से होगी। इसी तरह 12 मॉड्यूल के तहत कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार जिला में ‘सेवा संकल्प अभियानश् के प्रमुख कार्यक्रमों में ‘आशीर्वाद का दीयाध्रक्तदान’, ‘मेरे सपनों का भारतदृचित्र सेवा’, ‘नमो सेवादृअनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रादृविकसित भारत का संकल्प’, ‘वडनगर वाराणसी सेवा यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘सेवा के रंग, राष्ट्र के संग’, ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ तथा ‘सुशासन सेवा संवाद’ शामिल हैं। डीसी ने बताया कि इन कार्यक्रमों के जरिए सेवा को केवल एक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा। रक्तदान जैसे जनसेवा कार्यों से जरूरतमंदों की मदद को प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं चित्र सेवा और अनकही कहानियों जैसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और सेवा भावना को सामने लाने का माध्यम बनेंगे। इसी तरह ‘सेवा ज्योति कलश यात्रादृविकसित भारत का संकल्प’ और ‘सेवा सेतु अभियान’ के माध्यम से जनभागीदारी को व्यापक रूप देने पर जोर रहेगा। वहीं ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के जरिए सेवा कार्यों में नए विचार और नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। ‘सुशासन सेवा संवाद’ के माध्यम से सेवा, सुशासन और जनकल्याण के बीच संबंध को मजबूत करने का प्रयास होगा। डीसी ने संबंधित नोडल अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि ‘सेवा संकल्प अभियानश् से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत समाज में सेवा, सहयोग और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। अभियान के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सेवा कार्यों से जोड़ने और जनकल्याण की भावना को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।

हरियाणा ने रक्तदान के क्षेत्र में लगातार तीसरी साल पूरे देश में पाया पहला स्थान
चंडीगढ, 13 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा ने रक्तदान के क्षेत्र में लगातार तीसरी साल पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ई-रक्तकोष पोर्टल पर दर्ज सत्यापित आंकड़ों के अनुसार प्रति 10 लाख आबादी पर रक्तदान के मामले में हरियाणा सभी राज्यों में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर चंडीगढ़, तीसरे पर त्रिपुरा और चैथे स्थान पर उत्तर प्रदेश है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चरखी दादरी में ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिलने के बाद अब प्रदेश के सभी 22 जिलों में कम से कम एक लाइसेंस प्राप्त सरकारी ब्लड सेंटर उपलब्ध है। राज्य में ब्लड सेंटरों की संख्या बढ़कर 163 हो गई है। इनमें 34 सरकारी और 129 निजी सेंटर हैं। इनमें से 150 सेंटरों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 79 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त तक 92 प्रतिशत हो गई है। यह 95 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक के बेहद करीब हैं। विभाग के अनुसार, ऑनलाइन निगरानी और ब्लड सेंटरों के साथ सीधे समन्वय से स्वैच्छिक रक्तदान में सुधार हुआ है।
1 अक्टूबर को मिलेगा सम्मान
भारत सरकार की ओर से 1 अक्तूबर को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस कार्यक्रम में हरियाणा को सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले 2024 और 2025 में भी हरियाणा प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है।
मरीजों को मिल रहा फायदा
आभा आधारित डोनर रजिस्ट्रेशन शुरू होने के दो महीने में 89 ब्लड सेंटर इससे जुड़ चुके हैं। वहीं, 134 सेंटर ई-रक्तकोष पर रक्त की उपलब्धता और अन्य जानकारी नियमित रूप से अपडेट कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त और रक्त अवयव मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। पात्र बीपीएल और डेंगू मरीजों को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स भी मुफ्त मिलते हैं। राज्य में 1,443 थैलेसीमिया और 1,018 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार, इन मरीजों को जरूरी उपचार संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पीजीआईएमएस रोहतक में लगेगी खास मशीन
हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग रक्त की सुरक्षा और जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पीजीआईएमएस रोहतक के ब्लड सेंटर में आईडी नॉट मशीन लगाने की मंजूरी दी गई है। इस मशीन की मदद से रक्त में संक्रमण फैलाने वाले वायरस की अधिक प्रभावी तरीके से जांच की जा सकेगी। इससे मरीजों को और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से अलग नई दिल्ली में मुलाकात की
नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री सिरिल रामाफोसा से 13 सितम्बर, 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से अलग नई दिल्ली में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की और भारत तथा दक्षिण अफ्रीका के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच घनिष्ठ और दीर्घकालिक संबंध साझा ऐतिहासिक संघर्षों, मजबूत सांस्कृतिक समानताओं, सुदृढ़ आर्थिक संबंधों तथा दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित हैं। दोनों नेताओं ने आपसी हित के विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। दक्षिण अफ्रीका से भारत में चीतों के सफल स्थानांतरण के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने दक्षिण अफ्रीका को इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में शामिल होने पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया। राष्ट्रपति रामाफोसा ने उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल को प्रदान किए गए गर्मजोशीपूर्ण आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करनेष् पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की
नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ष्समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की। अपने वक्तव्य में, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने के मामले में सबसे अग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे। हमें “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलना होगा। वैश्विक शासन में आज की वास्तविकताओं को दर्शाना चाहिए, जिसमें विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है। ग्लोबल साउथ को केवल नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाले की भूमिका में लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ब्रिक्स के माध्यम से, हम ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता प्रदान कर सकते हैं। समुद्री नाविक, वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी संकट के समय उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने समुद्री नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य का समापन यह कहते हुए किया कि चूंकि हमारा भविष्य साझा है, इसलिए उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए – आवाज उठाने से लेकर प्रभाव छोड़ने तक, और विशेषाधिकार से लेकर साझेदारी तक। प्रधानमंत्री का प्रारंभिक वक्तव्य यहां देखा जा सकता है। सत्र का समापन नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ, जो भविष्य में ब्रिक्स सहयोग की साझा प्राथमिकताओं, प्रतिबद्धताओं और दिशा को तय करता है। यह घोषणापत्र यहां देखा जा सकता है।

काजरी द्वारा विकसित मोठ की किस्मों ने एल नीनो वर्ष में अद्भुत प्रतिकूलता-सहनशीलता दिखाई है
खरीफ 2026 के दौरान 35 दिन की बारिश की कमी के बावजूद काजरी की मोठ की किस्मों ने अपनी सहनशीलता साबित की

नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: पश्चिमी राजस्थान के गर्म शुष्क इलाकों की प्रमुख दलहनी फसल मोठ बीन लगभग 10 लाख हेक्टेयर में बोई जाती है। इसके बावजूद, इसकी पैदावार महज 350 किग्रा प्रति हेक्टेयर के आसपास ही सिमट कर रह जाती है। इसकी बड़ी वजह हैकृ150 से 250 एमएम जैसी नाममात्र और अनिश्चित बारिश, 20-30 दिनों का लंबा सूखा और मिट्टी में नमी की भारी कमी। ऐसे कठिन माहौल में फसल की पैदावार तभी मुमकिन है, जब उसकी किस्म में नमी की कमी को झेलने, अपनी वृद्धि बनाए रखने और सही समय पर फलने-फूलने की गजब की क्षमता हो। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषददृकेंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर ने एक दीर्घकालिक मोठ बीन ब्रीडिंग और आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम चलाया है। इसका उद्देश्य शुष्क क्षेत्रों के कठोर और अनिश्चित माहौल के अनुकूल ऐसी किस्में विकसित करना है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल सकें, मुश्किल हालात झेलने में अधिक सक्षम हों और बेहतर पैदावार दे सकें। पिछले तीन वर्षों में संस्थान ने चार किस्मेंकृकाजरी मोठ-4, काजरी मोठ-5, काजरी मोठ-6 और काजरी मोठ-7कृजारी की हैं। मौजूदा अल नीनो वर्ष (खरीफ 2026) के दौरान, लगभग 35 दिनों के लंबे सूखे और नमी की भारी कमी के बावजूद, इन किस्मों ने मैदान में अपनी अद्भुत सहनशीलता और मजबूती का प्रदर्शन किया है। 10 जुलाई से 2 सितंबर 2026 के फसल चक्र के दौरान कुल वाष्पीकरण लगभग 317 एमएम दर्ज किया गया। 3 अगस्त को हुई अच्छी बारिश के बाद मानसून अचानक थम गया, जिससे फसल के बढ़ने और फलने-फूलने के ऐन वक्त पर बारिश का एक लंबा सूखा दौर शुरू हो गया। 3 अगस्त से 7 सितंबर के बीच पड़े इस 35 दिनों के सूखे के दौरान ही अकेले 180 एमएम वाष्पीकरण हो चुका था। फसल को जो पानी मिला, वह बस शुरुआत में जमने और बढ़ने के दौरान ही मिला था। शुरुआती दौर में पत्तों का फैलाव, मिट्टी को पकड़कर रखने की क्षमता और जड़ों के आसपास की मिट्टी में नमी बनाए रखने की खूबी ने फसल को जमने में मदद की और पौधों को लंबे सूखे दौर का सामना करने में सहायता दी। 2 अगस्त को हुई 86 एमएम की आखिरी अच्छी बारिश तक 0-10 सेमी की ऊपरी मिट्टी में नमी का स्तर 15-16 प्रतिशत बना हुआ था। पर इसके बाद, एक महीने से भी लंबे सूखे और 2.5 एमएम से भी कम की तीन-चार नाममात्र की बूंदाबांदी के कारण ऊपरी मिट्टी की नमी सिमटकर महज 5-6 प्रतिशत रह गई। राहत की बात यह रही कि 10-40 सेमी की निचली परत में नमी 23 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत पर आई, जिससे फसल की पानी की जरूरत को पूरा करने और सूखे का मुकाबला करने में लगातार मदद मिलती रही। काजरी की किस्मों के इस शानदार फील्ड प्रदर्शन के पीछे सही फसल प्रबंधन तकनीक का भी बड़ा हाथ रहा। इसमें जुलाई में मानसून आते ही समय पर बुआई, 45 × 10 सेमी की उपयुक्त पौधों की दूरी, नमी बनाए रखने के लिए बुआई के 20 दिन बाद यांत्रिक गुड़ाई, मशीनों के साथ-साथ हाथों से निराई-गुड़ाई द्वारा खरपतवार नियंत्रण और उपलब्ध नमी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए पत्तों का सही फैलाव शामिल था। यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि प्रयोगात्मक खेतों की उर्वरता काफी कमजोर थीकृजहाँ जैविक कार्बन महज 0.13-0.18 प्रतिशत, मिट्टी का चभ् 7.9-8.1, उपलब्ध नाइट्रोजन 90-100 किग्राध्हेक्टेयर, उपलब्ध फास्फोरस 10-15 किग्राध्हेक्टेयर और उपलब्ध पोटेशियम 250-260 किग्राध्हेक्टेयर ही था। हाल ही में विकसित की गई काजरी की इन चारों मोठ बीन किस्मों का बीज उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2026 के लिए साथी पोर्टल के माध्यम से मांगी गई 23.32 क्विंटल बीज की मांग को पूरा करने के लिए फिलहाल काजरी रिसर्च फार्म की सात हेक्टेयर जमीन पर बीज उत्पादन का काम चल रहा है। इससे पहले साल 2025 में, साथी पोर्टल के जरिए इन चारों किस्मों के लिए कुल 63.2 क्विंटल बीज की मांग दर्ज की गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, एक क्विंटल ब्रीडर बीज से लगभग 1,000 से 1,400 क्विंटल सर्टिफाइड बीज तैयार होता है। जब इसे सही तरीके से बढ़ाकर सर्टिफाइड बीज के तौर पर बेचा जाता है तो सर्टिफाइड बीज लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई के लिए काफी है। अगर इस क्षमता का आधा यानी 50 फीसदी भी हासिल कर लिया जाए, तो राजस्थान में इन किस्मों के विस्तार से राज्य के कुल मोठ बीन रकबे का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इसके दायरे में लाया जा सकता है। वर्तमान में इस बीज का उत्पादन राजस्थान राज्य बीज निगम (आरएसएससी), राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) और कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। इन किस्मों की यह कामयाबी इसलिए और भी मायने रखती है क्योंकि बारिश की यह लंबी कमी ठीक उसी वक्त हुई जब फसलों में फूल आ रहे थे, फलियाँ पक रही थीं और दाने बन रहे थे। इतने लंबे समय तक पानी की एक बूंद न मिलने के बाद भी, बुआई के करीब 55 दिनों बाद खेत में लहलहाती हरियाली, बेहतरीन फैलाव और फलियों से लदे पौधे साफ नजर आ रहे थे। काजरी में दस साल से भी ज्यादा की कड़ी मेहनत, व्यवस्थित ब्रीडिंग और आनुवंशिक सुधारों के बल पर तैयार इन किस्मों को खास तौर पर पश्चिमी राजस्थान के कड़े और अनिश्चित मौसम के हिसाब से ढाला गया है। बारिश न होने की लंबी अवधि के दौरान भी सक्रिय वानस्पतिक बढ़त और फलने-फूलने के सिलसिले को टूटने न देने की इनकी यह काबिलियत साबित करती है कि सूखा झेलने और सूखे के माहौल में टिके रहने का इनकी जेनेटिक क्षमता वाकई लाजवाब है। इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत इनकी डेवलपमेंटल प्लास्टिसिटी है। ये किस्मों बुआई के महज 30 दिनों के भीतर ही फलने-फूलने लगती हैं और मिट्टी में मौजूद नमी के हिसाब से अपनी बढ़त और पकने के समय को खुद-ब-खुद ढाल लेती हैं। यह काबिलियत पश्चिमी राजस्थान जैसे इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ बारिश की मात्रा, समय और फैलाव में काफी उतार-चढ़ाव होता रहता है। उपलब्ध नमी का पूरा इस्तेमाल करते हुए तेजी से फलने-फूलने की तरफ बढ़ना और साथ में सही फसल प्रबंधन मिलनाकृयही वजह है कि ये किस्में बारिश पर निर्भर शुष्क इलाकों में खेती के लिए सबसे बेहतरीन और सतत विकल्प साबित हो रही हैं। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि मोंठ बीन थार मरुस्थल की एक अनूठी फसल है। इसमें काजरी की अत्यधिक जलवायु-अनुकूल मोंठ की किस्में थार मरुस्थल को अधिक समृद्ध बनाने, किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा करने और दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बारिश न होने के बावजूद वृद्धि और फलियों के विकास को बनाए रखने की इन किस्मों की क्षमता यह दर्शाती है कि आनुवंशिक सुधार जलवायु-अनुकूल कृषि का एक महत्वपूर्ण घटक बन सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी इन किस्मों को अपनी आनुवंशिक क्षमता का पूर्ण लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन प्रथाओंकृजैसे कि पौधों की उपयुक्त संख्या, समय पर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और नमी-संरक्षण के उपायकृकी एक पूरी प्रणाली अनिवार्य है।

भारत 15 से 18 सितंबर, 2026 के दौरान गांधीनगर में श्सर्कुलर इकोनॉमी : लोगों और समृद्धि के लिए बदलावश् थीम के साथ वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 की मेजबानी करेगा
यह फोरम अलग-अलग सेक्टर के बीच साझेदारी के लिए एक वैश्विक प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य सर्कुलर फाइनेंस को बढ़ावा देना और सर्कुलरिटी के लिए नवाचार को प्रोत्साहन देना है
इसमें 65 से ज्यादा देशों के 2,000 से ज्यादा हितधारक हिस्सा लेंगेय साथ ही, इंटरनेशनल एक्सपो में 125 से ज्यादा एग्जिबिटर्स सर्कुलरिटी से जुड़े समाधान पेश करेंगे

नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: भारत 15 से 18 सितंबर, 2026 तक गांधीनगर (गुजरात) में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (डब्ल्यूसीईएफ) 2026 की मेजबानी करेगा। दक्षिण एशिया में पहली बार हो रहे इस फोरम का उद्घाटन 15 तारीख को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल संयुक्त रूप से करेंगे। यह फोरम श्सर्कुलर इकोनॉमीरू लोगों और समृद्धि के लिए बदलावश् (ट्रांजिशन फॉर पीपुल एंड प्रॉस्पेरिटी) थीम पर आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन सत्र में शामिल होने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में गुजरात के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री अर्जुनभाई मोढवाडियाय भारत में फिनलैंड के राजदूत महामहिम श्री मिक्को किविकोसकीय नीदरलैंड के आर्थिक मामलों और जलवायु मंत्रालय की सुश्री मैरीके स्पाइकरबोअर के साथ-साथ भारत सरकार और गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सर्कुलैरिटी का उद्देश्य मौजूदा सामग्रियों और उत्पादों का दोबारा इस्तेमाल, उन्हें ठीक करके फिर से काम के लायक बनाना और रीसाइकिल करना है, ताकि उन्हें कीमती संसाधनों के तौर पर अर्थव्यवस्था में वापस लाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत पर्यावरण से जुड़े कामकाज के तरीकों में बड़े बदलाव की अगुवाई कर रहा है और एक आधुनिक सर्कुलर इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), फिनिश इनोवेशन फंड सिट्रा, फिनलैंड सरकार, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी), गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) द्वारा किया जा रहा है। डब्ल्यूसीईएफ 2026 का उद्देश्य सर्कुलैरिटी को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बेहतर बनाने के लिए भारत की पहलों को दिखाना है। इस कार्यक्रम में 65 से ज्यादा देशों के 2000 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों के हितधारक हिस्सा लेंगे, जिनमें बिजनेस लीडर, उद्यमी, इनोवेटर, शोधकर्ता, नीति निर्माता, शिक्षाविद, बदलाव लाने वाले और अन्य लोग शामिल होंगे। यह फोरम वैश्विक सहयोग और श्ग्लोबल साउथश् के साथ बेहतर जुड़ाव को मुमकिन बनाएगाय सर्कुलर फाइनेंस और निजी क्षेत्र के निवेश को जुटाने में मदद करेगाय पॉलिसी पर बातचीत और अलग-अलग सेक्टर के बीच भागीदारी को बढ़ावा देगाय साथ ही सर्कुलैरिटी के लिए नवाचार, डिजिटलीकरण और तकनीक को आगे बढ़ाएगा। 15-16 सितंबर 2026 को होने वाले इस फोरम में एआई के इस्तेमाल, रोजगार की संभावनाओं, ऊर्जा उत्पादन, वित्त, शासन, टिकाऊ उत्पादों, औद्योगिक समाधान, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और युवा नेतृत्व जैसे विषयों पर 4 मुख्य सत्र और 16 समानांतर विषय-आधारित सत्र होंगे। इसके अलावा, इस कार्यक्रम में 125 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों की एक प्रदर्शनी भी होगी, जिसमें स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित व्यावहारिक सर्कुलर समाधान और निवेश के लिए तैयार नवाचार दिखाए जाएंगे। डब्ल्यूसीईएफ के साथ-साथ, श्भारत को सतत् उपभोग एवं उत्पादन प्रतिरूपों पर 10-वर्षीय कार्यक्रम रूपरेखा (10वाईएफपी) का बोर्ड 15 सितंबर को गांधीनगर में अपनी प्रत्यक्ष बैठक करेगा। भारत ने हाल ही में 10 वाईएफपी बोर्ड के सह-अध्यक्ष की भूमिका संभाली है, जो टिकाऊ उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा देने में उसकी लंबे समय से चली आ रही नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है। 17-18 सितंबर 2026 को, वैश्विक सहयोगी गांधीनगर और दुनिया भर के अन्य स्थानों पर ऑनलाइनध्हाइब्रिड और प्रत्यक्ष रूप से 80 एक्सेलेरेटर सत्रों का स्वतंत्र रूप से आयोजन करेंगे। समापन समारोह में गुजरात के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री अर्जुनभाई देवाभाई मोधवाडिया शामिल होंगे। इस मौके पर फिनलैंड की जलवायु और पर्यावरण मंत्री सुश्री सारी मुलतालाय गुजरात के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री प्रवीणभाई मालीय एसआईटीआरए के डायरेक्टर (इंटरनेशनल प्रोग्राम्स) श्री क्रिस्टो लेहटोनेन के साथ-साथ भारत सरकार और गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। समारोह का समापन एसआईटीआरए के डायरेक्टर (इंटरनेशनल प्रोग्राम) द्वारा अगले मेजबान को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपने के साथ होगा। साथ ही, यह संदेश भी दिया जाएगा कि सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाकर दुनिया एक ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था बना सकती है जो ज्यादा टिकाऊ, मजबूत और समृद्ध हो।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (डीसीडी) ने दिल्ली में लंपी स्किन डिजीज की स्थिति की समीक्षा की। समन्वित टीकाकरण और रोग नियंत्रण उपायों पर जोर दिया
नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने आज दिल्ली पशुपालन प्राधिकरण के समन्वय से दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) की स्थिति की समीक्षा की। इस समीक्षा में रोग की वर्तमान स्थिति, टीकाकरण , निगरानी, उपचार और रोकथाम एवं रोग नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। 13 सितंबर, 2026 को पशुपालन आयुक्त (एएचसी), डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा ने दिल्ली पशुपालन अधिकारियों के साथ रोग की स्थिति की समीक्षा की और निरंतर टीकाकरण, सक्रिय निगरानी और रोग नियंत्रण उपायों के समय पर कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने गौशालाओं और आवारा पशुओं के प्रभावी प्रबंधन और टीकाकरण तथा जैव सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय पर भी बल दिया। दिल्ली में एलएसडी छिटपुट रूप से फैल रहा है और फिलहाल नियंत्रण में है। प्रभावित पशुओं में रोग की गंभीरता कम है और वे जल्दी ठीक हो रहे हैं। प्रभावित पशुओं में किसी की मृत्यु नहीं हुई है। 13 सितंबर 2026 तक , लगभग 584 सक्रिय मामले सामने आए हैं जिनमें मुख्य रूप से बिना टीकाकरण वाले और संवेदनशील पशु शामिल हैं जैसे कि सह-रोगग्रस्त, कमजोर पोषण स्थिति वाले या तनावग्रस्त पशु। 2026 के दौरान दिल्ली में 45,950 से अधिक जानवरों को एलएसडी के खिलाफ टीका लगाया गया है। टीकाकरण और अन्य रोग नियंत्रण उपाय जारी हैं जिनमें समय पर टीकाकरण, निगरानी, संक्रमित जानवरों को अलग रखना, वेक्टर नियंत्रण, कीटाणुशोधन और जैव सुरक्षा पर जोर दिया गया है। समीक्षा के दौरान, डीएएचडी ने दिल्ली अधिकारियों को टीकाकरण, उपचार और पशु प्रबंधन पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया और आवारा पशुओं के प्रभावी प्रबंधन और टीकाकरण, प्रभावित पशुओं के अलगाव, वेक्टर नियंत्रण, कीटाणुशोधनध्स्वच्छता और जैव सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), गौशालाओं और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय को मजबूत करने की सलाह दी जिसमें आवागमन नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों में भौतिक चेक-पोस्ट की स्थापना भी शामिल है। पशुपालकों, स्थानीय प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, स्कूलों और अन्य हितधारकों को शामिल करते हुए व्यापक जागरूकता गतिविधियों पर भी जोर दिया गया ताकि टीकाकरण और पशुपालन की अच्छी प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा सके। विभाग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखता है, स्थिति की नियमित समीक्षा करता है और एलएसडी की प्रभावी रोकथाम, नियंत्रण और रोकथाम के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करता है। देश भर में इस बीमारी की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना
नई दिल्ली, 13 सितम्बर, अभीतक: हर घर के लिए स्वच्छ और किफायती पाइप से आपूर्ति की जाने वाली खाना पकाने की गैस
संक्षिप्त विवरण
पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का विस्तार भारत की स्वच्छ घरेलू ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा की ओर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरों तक पीएनजी पहुंचाना सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विकास का हिस्सा है। इस तरह के नेटवर्क में पाइपलाइन और उससे जुड़ी सुविधाएं होती हैं, जो घरों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को सेवा देती हैं। इसे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा अधिकृत संस्थाओं द्वारा विकसित किया जाता है। पीएनजीआरबी ने 309 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) में संस्थाओं को अधिकृत किया है। इन क्षेत्रों में देश के पूरे मुख्य भू-भाग शामिल हैं। 18 अगस्त 2026 तक देशभर में 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध थे। पीएनजी कवरेज को और बढ़ाने के लिए, 18 अगस्त 2026 को घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। यह योजना 1 सितंबर 2026 से लागू हुई है।
योजना के बारे में
घरेलू पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने की प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य सक्रिय घरेलू पीएनजी कनेक्शन की संख्या बढ़ाने की गति को तेज करना है। इसका मकसद परिवारों को पाइप के जरिए स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती खाना पकाने की गैस उपलब्ध कराना है। यह योजना सीजीडी संस्थाओं को बिना बिल वाले कनेक्शन को सक्रिय, बिल वाले कनेक्शन में बदलने के लिए प्रोत्साहन देती है। यह नए क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के लिए भी प्रोत्साहन देती है। यह योजना छह महीनों की अवधि के दौरान दो चरणों में चलेगी। योजना के तहत हर भौगोलिक क्षेत्र के लिए कनेक्शन की एक न्यूनतम संख्या तय की गई है। कार्य-अवधि के दौरान, पात्र सीजीडी संस्थाओं को इस सीमा से ज्यादा बिल वाले घरेलू कनेक्शन जोड़ने होंगे। ऐसे प्रत्येक अतिरिक्त कनेक्शन के लिए, संस्था को 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एससीएम) गैस का अतिरिक्त आवंटन मिलता है। यह गैस घरेलू स्तर पर उत्पादित प्रशासित मूल्य व्यवस्था (एपीएम) गैस है, जिसकी कीमत कम होती है। अतिरिक्त आवंटन महंगी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की जगह लेगा। सीजीडी संस्थाएं अभी अपने संपीड़ित प्राकृतिक गैस (परिवहन) क्षेत्र के लिए यह एलएनजी खरीदती हैं। इसे सस्ती एपीएम गैस से प्रतिस्थापित करने पर उनकी कुल गैस लागत कम हो जाती है। इसलिए, घरेलू कनेक्शन पर खर्च की गई पूंजी की प्राप्ति की अवधि में कमी आने की उम्मीद है। उम्मीद है कि इसमें लगने वाला समय लगभग दस साल से घटकर करीब तीन साल रह जाएगा। इसलिए, कंपनियों के पास घरों तक तेजी से कनेक्शन पहुँचाने का एक मजबूत व्यावसायिक कारण है।
परिवारों के लिए पीएनजी के लाभ
पीएनजी परिवारों को कई जरूरी लाभ देता है, जैसे इस्तेमाल में आसानी, पैसे की बचत और निर्बाध आपूर्ति।
पीएनजी का घरेलू उपयोग करने वालों के लिए मुख्य लाभ इस प्रकार हैं
सुरक्षितः गैस कम दबाव पर जमीन के नीचे की पाइपलाइन से आती है, इसलिए सिलेंडर को रखने या संभालने की जरूरत नहीं होती। हवा से हल्की होने के कारण, यदि कभी लीकेज होती भी है, तो यह ऊपर उठकर तेजी से फैल जाती है।
दैनिक सुविधा: सिलेंडर की बुकिंग करने, जमा रखने या बदलने की कोई जरूरत नहीं होती। गैस घर पर चैबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। बिल इस्तेमाल के आधार पर मीटर से आता है, जैसे बिजली या पानी का बिल।
कम लागतरू घर वाले सिर्फ उतनी ही गैस का पैसा देते हैं, जितनी वे असल में इस्तेमाल करते हैं। प्रति-यूनिट ऊर्जा के आधार पर, पीएनजी की लागत आमतौर पर एलएनजी से कम होती है। इसलिए समय के साथ ईंधन का मासिक खर्च कम हो जाता है।
स्वच्छ पर्यावरण: पीएनजी खाना पकाने वाले पारंपरिक ईंधनों की तुलना में ज्यादा साफ जलती है और कम प्रदूषण फैलाती है। घर के अंदर की हवा ज्यादा सेहतमंद रहती है और कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
भरोसेमंद आपूर्ति: पाइपलाइन से लगातार आपूर्ति होती है और इसमें सिलेंडर डिलीवरी की लॉजिस्टिक्स की जरूरत नहीं होती। ऊंची इमारतों और भीड़-भाड़ वाली शहरी कॉलोनियों में रहने वाले घरों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलता है।
पीएनजी विस्तार के लिए पहल
पीएनजी विस्तार को त्वरित मंजूरी, तर्कसंगत टैक्स और सुव्यवस्थित अवसंरचना विकास जैसे उपायों से बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और जागरूकता अभियानय परिवारों में पीएनजी अपनाने की प्रक्रिया को आसान, त्वरित और सुलभ बना रहे हैं
सुव्यवस्थित विनियामक मंजूरी: प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं को बिछाने, बनाने, चलाने और विस्तार करने के माध्यम से) आदेश, 2026 के तहत एक त्वरित मंजूरी प्रक्रिया जारी की गयी है। यह आदेश पाइपलाइन मार्गाधिकार (आरओडब्लू) के लिए एक समान शुल्क भी लागू करता है, जिसमें पीएनजी पाइपलाइन बिछाने के लिए जमीन या सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल करने की अनुमति शामिल है। अब आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर और तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
कम मूल्य वर्धित टैक्स (वैट): राज्यों को प्राकृतिक गैस पर वैट घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कई राज्यों ने पहले ही ऐसा कर दिया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए पाइप वाली गैस सस्ती हो गई है।
राष्ट्रीय पीएनजी अभियान 2.0: सभी भौगोलिक क्षेत्रों में डीपीएनजी कनेक्शन की रफ्तार बढ़ाने के लिए 1 जनवरी से 30 जून 2026 तक देशव्यापी अभियान चलाया गया।
एकीकृत पीएनजी पंजीकरण पोर्टल: एक एकल-खिड़की डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इससे नए कनेक्शन के लिए आवेदन करना और उनकी निगरानी करना आसान और तेज हो जाएगा।
स्वच्छ और आपूर्ति सुविधा वाले घरों की ओर
घर पर खाना पकाने के लिए साफ ईंधन हर परिवार के आराम, स्वास्थ्य और सम्मान को बढ़ाता है। अब लागू हो चुकी नई योजना गैस कंपनियों के व्यावसायिक हितों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ जोड़ती है। जैसे-जैसे पाइपलाइनें ज्यादा इलाकों और ज्यादा रसोईघरों तक पहुँच रही हैं, सिलेंडरों पर निर्भरता लगातार कम हो रही है। इस तरह, पाइप से आपूर्ति की जाने वाली गैस भारत में दैनिक जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा बनने जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *