






रात्रि ठहराव कार्यक्रम सरकार की सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक: डीसी’
डीसी वर्षा खांगवाल ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए अविलंब समाधान के दिए निर्देश’
गांव निमाणा में रात्रि ठहराव कार्यक्रम हुआ आयोजित’
बादली, 27 अक्तूबर, अभीतक: सरकार की सुशासन की अवधारणा को धरातल पर उतारने और ग्रामीणों की समस्याओं का उनके गांव में ही समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा रात्रि ठहराव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को बादली ब्लॉक के गांव निमाणा में रात्रि ठहराव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीसी वर्षा खांगवाल ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एसडीएम विशाल कुमार और सरपंच बीरमति ने डीसी वर्षा खांगवाल का कार्यक्रम में पहुंचने पर स्वागत किया। ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि रात्रि ठहराव कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि सरकार की जनसंवाद और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन गांवों तक पहुंचकर आमजन की समस्याओं को समझता है और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाता है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे पात्रता के अनुसार सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
निर्धारित समयावधि में समस्याओं का हो निपटान
डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात्रि ठहराव कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच करते हुए निर्धारित समयावधि में उनका निपटान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता जरूरी है। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिकायत पर उचित कार्रवाई हो और संबंधित नागरिक को समाधान की स्थिति की जानकारी भी मिले।
ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रति किया जागरूक
इस अवसर पर डीसी वर्षा खांगवाल ने विभिन्न विभागों की स्टाल का अवलोकन किया। कार्यक्रम में अधिकारियों ने ग्रामीणों को अपने-अपने विभाग से संबंधित जनकल्याणकारी योजनाओं, सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी दी। साथ ही पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं ग्रामीण
डीसी ने बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं संस्कार देने, गांव में स्वच्छता बनाए रखने और विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी आने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाएं, ताकि समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके। निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने डायल112, नशा मुक्ति अभियान, साइबर सुरक्षा को लेकर विस्तार से जानकारी दी वहीं खेल, कृषि सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने अपने विभाग की योजनाओं की जानकारी सांझा की। मंच संचालन शिक्षाविद कृष्ण वशिष्ठ ने किया।
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर एडीसी जगनिवास, एसडीएम बादली विशाल कुमार, जिला परिषद के सीईओ मनीष फौगाट, डीआरओ मनवीर सांगवान, डीडीपीओ निशा तंवर, गांव की सरपंच बीरमति देवी, सरपंच प्रतिनिधि मलखान सिंह, बीडीपीओ सुमित बेनीवाल, सुनील निमाणा, सुनील गुलिया, धर्मपाल प्रधान, बादली सरपंच आनंद गुलिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
गांव निमाणा में आयोजित रात्रि ठहराव कार्यक्रम में ग्रामीणों की समस्याएं सुनते डीसी वर्षा खांगवाल।
गांव निमाणा में आयोजित रात्रि ठहराव कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं पर आधारित स्टाल का अवलोकन करती डीसी वर्षा खांगवाल।

अवैध पटाखा निर्माण के दो ठिकानों पर झज्जर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, करीब 2 करोड़ रुपये का माल बरामद
874 पेटियों में 1.73 लाख पायरो अनार बम बरामद, पटाखा बनाने की मशीनें, रसायन व कच्चा माल भी मिला
डीसीपी क्राइम शुभम सिंह के दिशा-निर्देशन में सीआईए-2 बहादुरगढ़ व थाना सदर बहादुरगढ़ की संयुक्त कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार
बहादुरगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: आमजन की सुरक्षा, संभावित अग्निकांड की रोकथाम और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के मद्देनजर झज्जर पुलिस ने अवैध पटाखा निर्माण व भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस की संयुक्त टीम ने गांव सौलधा में दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर कुल 874 पेटियों में रखे 1,73,000 पायरो अनार बम सहित भारी मात्रा में कच्चा माल, रसायन, पैकिंग सामग्री और पटाखे बनाने वाली मशीनें बरामद की हैं। बरामद माल की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये है। पुलिस उपायुक्त क्राइम शुभम सिंह के दिशा-निर्देशन में सीआईए-2 बहादुरगढ़ में तैनात उप निरीक्षक पुनीत कुमार की पुलिस टीम और थाना सदर बहादुरगढ़ की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों ठिकानों पर छापेमारी की। मामले की जानकारी देते हुए सीआईए बहादुरगढ़ प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव सौलधा में बिना लाइसेंस व परमिट के पटाखों का निर्माण, भंडारण और बिक्री की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्परता से कार्रवाई की।पहले गोदाम से 95 पेटियां बरामद हुईं, जिनमें कुल 19,000 पायरो अनार बम रखे थे। प्रत्येक पेटी में 20 डिब्बे तथा प्रत्येक डिब्बे में 10 पायरो अनार बम थे। इसके अतिरिक्त फैविकोल के छह ड्रम, पटाखे बनाने का कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और बिना नंबर प्लेट की एक ई-रिक्शा भी बरामद की गई।दूसरे गोदाम से 770 पेटियां बरामद हुईं, जिनमें कुल 1,54,000 पायरो अनार बम थे। यहां से रसायन से भरे 30 ड्रम, 20 खाली ड्रम और पटाखे बनाने वाली तीन मशीनें भी बरामद की गईं। दोनों स्थानों से कुल 874 पेटियां और 1,73,000 पायरो अनार बम बरामद किए गए। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों श्यामजी गुप्ता, प्रियांशु उर्फ लाला, शिवम यादव, अंकित कुमार यादव और राहुल को गिरफ्तार किया। मामले में आगामी कार्रवाई उप निरीक्षक पवनवीर द्वारा अमल में लाई गई। जांच अधिकारी ने आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।झज्जर पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण से उत्पन्न होने वाले संभावित अग्निकांड, विस्फोट और प्रदूषण के खतरे को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। झज्जर पुलिस आमजन की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।



भारत सरकार ने टोल प्लाजा के पास रहने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए रियायती स्थानीय पास की शुरुआत की
नगरपालिका या स्थानीय शहरी सीमा के बाहर स्थित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र गैरवाणिज्यिक वाहन स्वामी 1500 रुपए प्रति वर्ष की दर से रियायती स्थानीय पास हासिल कर सकते हैं जबकि नगरपालिका या स्थानीय शहरी सीमा के भीतर स्थित टोल प्लाजा के दायरे में रहने वाले पात्र गैरवाणिज्यिक वाहन स्वामियों को रियायती स्थानीय पास के लिए प्रति वर्ष 3000 रुपए खर्च करने होंगे
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर, अभीतक: राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा के पास रहने वाले नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा से 20 किमी के दायरे में रहने वाले पात्र गैरवाणिज्यिक वाहन मालिकों के लिए श्रियायती स्थानीय पासश् शुरू किया है। यह नियम 01 नवंबर 2026 से लागू होगा। रियायती स्थानीय पास का वार्षिक शुल्क नगर पालिका या स्थानीय शहर क्षेत्र के बाहर स्थित टोल प्लाजा के लिए 1,500 रुपये और इन सीमाओं के भीतर स्थित टोल प्लाजा के लिए 3,000 रुपये होगा। नए प्रावधान के तहत, वैध और चालू फास्ट टैग वाले और 20 किमी के दायरे में रहने वाले पात्र गैरवाणिज्यिक वाहन मालिक किसी विशिष्ट टोल प्लाजा से आवाजाही के लिए मौजूदा मासिक पास और रियायती स्थानीय पास में से किसी एक को चुन सकते हैं। यह पास केवल उसी विशिष्ट टोल प्लाजा के लिए मान्य होगा और इसे किसी अन्य टोल प्लाजा पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा। यह रियायती स्थानीय पास उन राष्ट्रीय राजमार्गों या एक्सप्रेसवे पर उपलब्ध नहीं होगा जहाँ टोल शुल्क संग्रह क्लोज्ड यूजर-फी कलेक्शन सिस्टम (दूरी-आधारित टोल टैक्स वसूली प्रणाली) पर आधारित है। इसके अलावा, यह उन स्थानों पर भी जारी नहीं किया जाएगा जहाँ यात्रियों के उपयोग के लिए सर्विस रोड या कोई वैकल्पिक सड़क उपलब्ध है। वार्षिक स्थानीय पास पात्र टोल प्लाजाओं पर 01.11.2026 से उपलब्ध होगा। इसके अलावा, यह वार्षिक स्थानीय पास 01.12.2026 से राजमार्गयात्रा ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध होगा। यह संशोधन राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। इन दरों को केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष संशोधित किया जा सकता है, ये बदलाव 01 अप्रैल से लागू होंगे। देश भर में 13 करोड़ से अधिक जारी किए गए फास्ट टैग के साथ, इस नए प्रावधान का उद्देश्य टोल प्लाजा के पास रहने वाले पात्र निवासियों को एक ऐसा विकल्प प्रदान करना है जिससे उनकी यात्रा अधिक किफायती बन सके और स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन आसान बन सके।

संस्कारम् विश्वविद्यालय ने लाहली गाँव में घरेलू हिंसा पर कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किया
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: संस्कारम् विश्वविद्यालय, झज्जर की विधिक सहायता समिति द्वारा रोहतक जिले के लाहली गाँव में घरेलू हिंसा के विषय पर कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को घरेलू हिंसा के प्रति जागरूक करना तथा महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम में विधिक सहायता समिति के संयोजक डॉ. संदीप लाल, सह-संयोजक डॉ. रितु यादव तथा सुश्री अवनिका शर्मा उपस्थित रहे। इस दौरान ग्रामीणों को घरेलू हिंसा के विभिन्न स्वरूपों, जैसे शारीरिक, मानसिक, मौखिक और आर्थिक उत्पीड़न के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत महिलाओं को प्राप्त अधिकारों और कानूनी संरक्षण के उपायों के बारे में भी बताया गया। शिविर का मुख्य आकर्षण विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत घरेलू हिंसा पर आधारित लघु नाटक रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने घरेलू हिंसा के दुष्प्रभावों, महिलाओं के अधिकारों और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के जरिए समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के माननीय चांसलर डॉ. महिपाल यादव के मार्गदर्शन में सामाजिक उत्तरदायित्व और कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य के अनुरूप आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अवसर पर उपस्थित शिक्षकों ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता और जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुँचाने के महत्व को रेखांकित किया। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को समाज की समस्याओं को समझने और सकारात्मक सामाजिक बदलाव में योगदान देने का अवसर मिला। संस्कारम् विश्वविद्यालय, झज्जर, कानूनी साक्षरता, महिला सशक्तिकरण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है।






महाविद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी भाषा की आवश्यकता विषय पर व्याख्यान
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: राजकीय महाविद्यालय बिरोहड़ में प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ०) दलबीर सिंह के दिशा निर्देशन एवं प्रशासनिक प्रभारी डॉ० सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान प्लेसमैन्ट सैल प्रभारी नरेंद्र सिंह एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसका विषय प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी भाषा की आवश्यकता रहा। प्रशासनिक प्रभारी डॉ० सुरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा के शब्द-ज्ञान, व्याकरण, पठन एवं लेखन कौशल विकसित करने के लिए नियमित अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होंने समाचार-पत्र पढ़ने और अंग्रेजी में संवाद करने के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाने पर बल दिया। मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ० श्री ओम, राजकीय महाविद्यालय मातनेहल ने बताया कि अंग्रेजी भाषा एक अंतराष्ट्रीय भाषा के रूप में अपना स्थान बना चुकी है। परीक्षा से संबंधित अंग्रेजी भाषा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को अपने शब्द कोश में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए तथा व्याकरण के नियमों का पालन करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए। जिसमें पेपर का पढना, उसका गहन विश्लेषण करना, टाईम मैनेजमैंट करते हुए परीक्षा की तैयारी करना इत्यादि शामिल थे। इसके अतिरिक्त पैराग्राफ, आर्टिकल, प्रस्ताव, प्रार्थना पत्र राईटिंग पर विद्यार्थियों को टिप्स दिए गए। प्लेसमेंट सैल प्रभारी डॉ० नरेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं तथा निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने के लिए महत्त्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। अंत में डॉ० नरेंद्र सिंह ने प्राचार्य, प्रशासनिक प्रभारी, मुख्य वक्ता एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर मृणाल, अजय सिंह, डॉ० सतपाल सिंह सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

वायु प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, सभी विभाग गंभीरता से करें कार्य: डीसी
डीसी वर्षा खांगवाल ने संबंधित अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश’
रोड डस्ट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और निर्माण स्थलों पर नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी कार्रवाई
डीसी ने दिए निर्देश-प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के चालान के साथ किए जाएं इंपाउंड, होटल व ढाबों पर तंदूर से होने वाले प्रदूषण पर भी रखें नजर’
डीसी की जनता से अपील-कचरा न जलाएं, निर्माण सामग्री ढककर रखें और प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासन का सहयोग करें’
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए डीसी वर्षा खांगवाल ने सभी संबंधित विभागों को गंभीरता से कार्य करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और सभी विभाग अपने- अपने क्षेत्र में नियमित निगरानी करते हुए ठोस कार्रवाई करें। डीसी ने निर्देश दिए कि सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। रोड डस्ट वाले क्षेत्रों की पहचान कर नियमित आवश्यकता अनुसार पानी का छिड़काव तथा धूल नियंत्रण के अन्य उपाय सुनिश्चित किए जाएं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान किए जाएं और कचरे के अनुचित निस्तारण पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण, उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश
डीसी वर्षा खांगवाल ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण स्थलों की नियमित साइट विजिट करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान धूल उड़ने से रोकने के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। निर्माण सामग्री को ढक कर रखने, धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने तथा निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करने की जांच की जाए। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के चालान और इंपाउंडिंग सुनिश्चित करें
डीसी ने यातायात और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उनके चालान किए जाएं। आवश्यक कानूनी प्रावधानों के तहत ऐसे वाहनों को इंपाउंड करने की कार्रवाई भी की जाए। वाहन प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित जांच और निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
होटल और ढाबों में तंदूर से होने वाले प्रदूषण पर भी नजर रखें
डीसी ने होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तंदूर के इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण पर भी निगरानी रखने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारी सुनिश्चित करें कि तंदूर और ईंधन का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुरूप हो तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। डीसी ने कहा कि झज्जर जिला में ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी यदि कूड़ा करकट जलता है तो सम्बन्धित सरपंच जिम्मेदार होंगे।
डीसी की अपील-प्रदूषण रोकने में निभाएं अपनी जिम्मेदारी
डीसी वर्षा खांगवाल ने आमजन से अपील की कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में प्रशासन का सहयोग करें और पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी समझें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि कूड़ा-कचरा और पत्तियां खुले में न जलाएं, कचरे का उचित निस्तारण करें, निर्माण सामग्री को ढक कर रखें और अनावश्यक धूल उड़ने से रोकने में सहयोग दें। वाहन चालकों से अपील है कि अपने वाहनों की नियमित सर्विसिंग कराएं और प्रदूषण संबंधी निर्धारित मानकों का पालन करें। होटल, ढाबा संचालक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी प्रदूषण नियंत्रण नियमों की पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। जनसहभागिता और विभागीय समन्वय से ही स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। सभी नागरिक नियमों का पालन करें और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सके।






किसानों को बीज उपलब्ध करवाने के लिए बिक्री केंद्र पर वितरण जारी’
झज्जर स्थित किसान सदन केंद्र पर पहुंच रहे किसानों को नियमित मिल रहा गेहूं का बीज’
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: जिला मुख्यालय पर हरियाणा बीज विकास निगम के बिक्री केंद्र पर किसानों को नियम अनुसार बीज वितरण का कार्य प्रभावी रूप से जारी है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसएमएस डॉ. देवेंद्र ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि गेहूं के बीज की जिला में कोई कमी नहीं है। किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बीज वितरण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है। एसएमएस डॉ. देवेंद्र ने बताया कि बिक्री केंद्र पर गत 21 सितंबर से बीज वितरण किया जा रहा है। केंद्र पर किसानों के लिए नौ किस्मों का बीज उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने बताया कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अधिक बीज प्राप्त हुआ, जिसमें से किसानों को नियमानुसार वितरित किया जा चुका है। फिलहाल उपलब्ध स्टॉक में से 310.80 क्विंटल बीज शेष हैं, जिसका वितरण भी नियमों के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को बीज उपलब्ध करवाने के लिए वितरण प्रक्रिया नियमित रूप से जारी है। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार बिक्री केंद्र पर पहुंचकर बीज प्राप्त कर रहे हैं। किसानों को खेती के लिए समय पर बीज उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से बिक्री केंद्र पर बीज वितरण की व्यवस्था निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित की जा रही है।

संस्कारम् विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने लाहौल-स्पीति में साहसिक शिविर में लिया भाग
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: संस्कारम् विश्वविद्यालय, पटौदा के दो छात्रों ने हरियाणा राज्य एनएसएस सेल के तत्वावधान में हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में आयोजित 10 दिवसीय साहसिक शिविर में भाग लेकर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। यह शिविर अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान में आयोजित किया गया, जहाँ विद्यार्थियों ने विभिन्न साहसिक गतिविधियों के माध्यम से अपने कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को विकसित किया। विश्वविद्यालय के बी.टेक (सीएसई-एआईएमएल) द्वितीय वर्ष के छात्र साई चरण तथा बी.फार्मेसी पंचम सेमेस्टर के छात्र तुलसी राम का चयन राज्य एनएसएस इकाई द्वारा किया गया था। दोनों छात्रों को एनएसएस में सक्रिय भागीदारी, शारीरिक क्षमता और अनुशासन के आधार पर इस शिविर में शामिल होने का अवसर मिला। दोनों छात्र 7 अक्टूबर को विश्वविद्यालय से रवाना हुए और पंचकूला स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-1 में रिपोर्टिंग की। इसके बाद 8 अक्टूबर को हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों के एनएसएस स्वयंसेवकों का दल लाहौल-स्पीति के लिए रवाना हुआ और 9 अक्टूबर की सुबह ।ठटप्ड।ै परिसर पहुँचा। शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की पर्वतीय ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग तथा नदी पार करने जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने साहस, धैर्य, शारीरिक सहनशक्ति और टीम भावना का अनुभव प्राप्त किया। गमूर गाँव की यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को स्थानीय समुदाय की संस्कृति और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिला। वहीं, यारकी मठ की यात्रा के दौरान उन्होंने लद्दाखी-तिब्बती बौद्ध संस्कृति की झलक देखी। शिविर में पर्वतीय वातावरण में भोजन तैयार करने जैसी सामूहिक गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। अचानक हुई बर्फबारी के कारण एक दिन बाहरी गतिविधियाँ स्थगित रहीं। इस दौरान ।ठटप्ड।ै के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने पर्वतारोहण, उच्च ऊँचाई पर स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों, नक्शा पठन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। इस प्रकार शिविर ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश दिया। 19 अक्टूबर को दोनों छात्र मनाली भ्रमण के बाद वापस लौटे। इस शिविर में उनकी भागीदारी ने उनके व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, साहस और सामूहिक कार्य करने की क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के कुलपति ने दोनों विद्यार्थियों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के साहसिक शिविर विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारम् विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय के एनएसएस प्रभारी डॉ. नवीन कुमार ने दोनों विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि साई चरण और तुलसी राम की भागीदारी अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ युवाओं को चुनौतियों का सामना करने, जिम्मेदारी निभाने और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करती हैं। वहीं, एनसीसी अधिकारी डॉ. निशांत ने भी दोनों छात्रों को उनके साहस, अनुशासन और उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अनुभव विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के गुण विकसित करते हैं तथा उन्हें जीवन की विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। संस्कारम् विश्वविद्यालय, झज्जर, विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा, साहसिक गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभवों के अवसर प्रदान कर उनके सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।




पुलिस स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लडरावन व गांव खैरपुर में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पुलिस की भूमिका के प्रति किया जागरूक’
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: पुलिस स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में पुलिस उपायुक्त मुख्यालय झज्जर फैसल खान के दिशा-निर्देशन में झज्जर पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लडरावन के विद्यार्थियों तथा गांव खैरपुर के मौजिज व्यक्तियों को समाज में पुलिस की भूमिका, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया।इस दौरान कम्युनिटी पुलिसिंग से उप निरीक्षक सत्य प्रकाश ने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों से संवाद करते हुए बताया कि पुलिस केवल अपराधियों को पकड़ने और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि आम नागरिक की सुरक्षा, विश्वास और सहायता का महत्वपूर्ण आधार भी है। पुलिस और जनता का संबंध आपसी विश्वास, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित है। संकट की स्थिति में जरूरतमंदों की सहायता करना तथा अपराधों की रोकथाम के लिए आमजन को जागरूक करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने, साइबर ठगी से सतर्क रहने, नशे से दूर रहने, महिलाओं का सम्मान करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि वे पुलिस को अपना सहयोगी समझें और क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय योगदान दें।इस अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेना एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमा पर तैनात जवान देश की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में डटे रहते हैं, वहीं पुलिस के जवान आंतरिक सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिन-रात कर्तव्य निभाते हैं। इन सभी जवानों का त्याग, समर्पण और बलिदान राष्ट्रसेवा की प्रेरणादायक मिसाल है।कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि पुलिस और जनता के बीच आपसी विश्वास एवं सहयोग मजबूत होने से समाज को अधिक सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाया जा सकता है। झज्जर पुलिस आमजन की सेवा, सुरक्षा और सहयोग के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

चंडीगढ़: मधुमक्खी पालकों के लिए बड़ी राहत
हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में किया शामिल: कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा
अब जोखिम और नुकसान की चिंता से मिलेगी मुक्ति
इस नीति से मधुमक्खी पालन का व्यवसाय करने वाले उद्यमियों और किसानों के मन से प्राकृतिक आपदाओं और अनहोनी के कारण होने वाले नुकसान की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत बाढ़ की स्थिति में मधुमक्खी के बक्से और कॉलोनियों के पानी में डूब जाने, आग लगने से उनके नष्ट होने, तथा ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) के दौरान दुर्घटना के कारण होने वाले नुकसान को कवर किया जाएगा, बशर्ते यह दुर्घटना हरियाणा राज्य के भीतर हुई हो और इसकी आधिकारिक एफआईआर या डीडीआर दर्ज कराई गई हो।
इसके अलावा, मधुमक्खियों में किसी प्रकार की महामारी के कारण होने वाले नुकसान की स्थिति में भी मुआवजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

हरियाली एवं ग्रीनहाउसिज को बढ़ावा देने को लेकर युवा उद्यमी जगमोहन यदुवंशी को किया सम्मानित
क्षेत्र में आरआरटीएस प्रोजेक्ट को धरातल पर जल्द लाने के लिए आवाज बुलंद करेगा लोक सेवा मंच
रेवाड़ी, 27 अक्तूबर, अभीतक: अधिकाधिक हरियाली बढ़ाने के प्रति लोगों को जागरूक करने एवं अरावली क्षेत्र में किफायती ग्रीनहाउस उपलब्ध कराने के सर्वे में जुटी स्वयंसेवी संस्था ग्रेट हाॅलो डेवलपर्स के संस्थापक जगमोहन यदुवंशी को राष्ट्रीय प्रगतिशील चिंतक एवं समाजविद अशोक प्रधान लोक सेवा मंच के हाथों माल्यार्पण करके सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित अनेक लोगों ने जगमोहन यदुवंशी को पुष्प गुच्छ प्रदान करके उनके सामाजिक कार्यों की खुलकर प्रशंसा की तथा उनके 45वें जन्मदिवस पर बधाइयां भी व्यक्त कीं। स्थानीय सेक्टर-5 के कोनसीवास रोड. स्थित जेएमजी चैक के नजदीक आयोजित समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान लोक सेवा मंच ने कहा कि बढ़ते वायु,ध्वनि एवं जल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है ताकि प्राणियों के जीवन को खतरे से बचाया जा सके। युवा उद्यमी जगमोहन यदुवंशी लोगों को ग्रीन हाउस के प्रति जागरुक करते हुए इस कार्य को पूरी लगन से करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि अरावली प्रदेश को फिर से हरा-भरा करने की तुरंत आवश्यकता है, इसलिए लोगों को अधिकाधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिएं। समारोह में लोगों ने सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया कि नई दिल्ली के सराय काले खां से गुड़गांव, मानेसर, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, शाहजहांपुर, नीमराना तक प्रस्तावित आरआरटीएस मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को तुरंत अमल में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में हो रही अनावश्यक देरी का तुरंत संज्ञान लेकर हरियाणा व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों सहित पीएम मोदी को जनहित में हस्तक्षेप करना चाहिए। अपने संबोधन में जगमोहन यदुवंशी ने कहा कि ग्रेट हाॅलो डेवलपर्स के बैनर से हरियाली तथा ग्रीन हाउसेस के प्रति जागरूक करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगतिशील विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान के नेतृत्व में सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच की ओर से ज्वलंत जनसमस्याओं की आवाज बुलंद करने को लेकर अपना जोरदार सहयोग-समर्थन भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं लोक सेवा मंच के अथक सामाजिक प्रयासों से प्रेरित होकर जनहित कार्यों के प्रति उत्साहित है। इस अवसर पर विकास यादव, जितेंद्र कुमार, रवि इंजीनियर, राजेंद्र सिंह, विकास कुमार, अजीत सिंह,सुरेश शर्मा, वीरभान, कृष्ण कुमार, सतीश यादव, अजय कुमार आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।







महाराजा अग्रसेन के सिद्धांत समानता, सहयोग और सामाजिक एकता के प्रतीक: विपुल गोयल
राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर में महाराजा अग्रसेन जयंती पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत
रेवाड़ी, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा सरकार में राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन के आदर्श समानता, अहिंसा, सामाजिक एकता और परस्पर सहयोग की प्रेरणा देते हैं। उनकी ‘एक ईंट-एक रुपया’ की परंपरा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सहयोग देने और जरूरतमंदों को सशक्त बनाने का संदेश देती है। लगभग पांच हजार वर्ष पहले महाराजा अग्रसेन द्वारा दिए गए मूलमंत्र आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। राजस्व मंत्री विपुल गोयल मंगलवार को इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर में महाराजा अग्रसेन जयंती के उपलक्ष्य में ‘आधुनिक युग में अग्रसेन का दर्शन रू सामाजिक जिम्मेदारी से लेकर स्टार्टअप और पेशेवर उत्कृष्टता तक’ विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के अध्यक्ष एवं सोनीपत के मेयर राजीव जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी, कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. वंदना पोपली और नगर परिषद की चेयरपर्सन विनीता पीपल भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि अग्रवाल समाज ने सदैव सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को आगे बढ़ाने तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग महाराजा अग्रसेन के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं और सहयोग व सेवा की भावना से समाज को सशक्त बनाएं। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी महाराजा अग्रसेन के सिद्धांतों से प्रेरित होकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अग्रोहा धाम के लिए 40 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे वहां खुदाई कार्य को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी और महाराजा अग्रसेन के जीवन, उनके विचारों तथा मानव कल्याण के लिए किए गए कार्यों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे।
महाराजा अग्रसेन पीठ के शोधार्थियों को मिलेगी छात्रवृत्ति
मंत्री ने विश्वविद्यालय में स्थापित महाराजा अग्रसेन पीठ की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से महाराजा अग्रसेन के विचारों और सिद्धांतों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने पीठ में शोध कार्यों के लिए आरक्षित पीएचडी सीट का लाभ बताते हुए शोध सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि उनके आदर्शों और योगदान को अधिक विस्तार से समाज तक पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर उन्होंने महाराजा अग्रसेन पीठ के अंतर्गत शोध कार्य करने वाले शोधार्थियों को 15-15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की। साथ ही, समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले समाजसेवियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मंत्री विपुल गोयल ने विश्वविद्यालय में बनाई जा रही यज्ञशाला का भी अवलोकन किया।
अग्रसेन दर्शन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि राजीव जैन ने भी महाराजा अग्रसेन के आदर्शों और सामाजिक एकता के महत्व पर विचार रखे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने शिक्षा एवं शोध के माध्यम से महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता सीए नवीन सिंगल ने सेमिनार के विषय पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए। महाराजा अग्रसेन पीठ की प्रभारी डॉ. ममता अग्रवाल ने पीठ की गतिविधियों और शोध कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर डीएमसी प्रदीप अहलावत, तहसीलदार रमन कुंडू, हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के सचिव दुर्गा दत्त गोयल, जिला अध्यक्ष बृजलाल गोयल, रिपुदमन गुप्ता, अजय मित्तल सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

हरियाणा सरकार से रिटायर्ड पेंशनरों को नवंबर में देना होगा जीवन प्रमाण पत्र
खजाना या उप खजाना कार्यालयों से पेंशन ले रहे पेंशनरों के लिए अंग्रेजी वर्णमाला से शुरू होने वाले नाम के अक्षर के अनुसार निर्धारित किए दिन
रेवाड़ी, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा सरकार से पेंशन प्राप्त कर रहे रिटायर्ड पेंशनरों को अपनी पेंशन जारी रखने के लिए नवम्बर माह में जीवित होने का प्रमाण पत्र देना है। इसकी प्रक्रिया खजाना कार्यालय और उप खजाना कार्यालयों में 1 नवम्बर से शुरू होगी। जिला कोषाधिकारी अंजली ने बताया कि सन् 2012 के बाद रिटायर हुए और खजाना या उप खजाना कार्यालयों से पेंशन ले रहे पेंशनरों को खजाना कार्यालय में बायो मैट्रिक जीवन प्रमाण पत्र देना है, जबकि बैंक से पेंशन लेने वाले पेंशनर अपना प्रमाण पत्र बैंक में जमा करवाएंगे। जिन पेंशनरों का नाम ए, बी, सी और डी से शुरू होता है, वे 2, 3, 4 और 5 नवंबर को, ई, एफ, जी, एच, आई और जे से शुरू होने वाले नाम वाले पेंशनर 6, 10, 11 और 12 नवंबर कोय के, एल, एम, एन, ओ, पी, क्यू और आर वाले पेंशनर 13, 16, 17, 18 और 19 नवंबर कोय एस, टी, यू, वी, डब्ल्यू, एक्स, वाई और जेड वाले पेंशनर 20, 23, 25, 26 और 27 नवंबर को अपना प्रमाण पत्र जमा करवा सकते हैं। जो पेंशनर किसी कारणवश तय तिथि पर नहीं आ पाए, वे 30 नवम्बर को अपना प्रमाण पत्र जमा करवा सकते हैं। उपखजाना कोसली और बावल से पेंशन लेने वाले पेंशनर अपना प्रमाण पत्र उन्हीं उपखजानों में जमा करवाएंगे। कोषाधिकारी ने बताया कि प्रमाण पत्र देने जाते समय पेंशनर अपने साथ पैन कार्ड, पीपीओ, आधार कार्ड और आधार से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाईल नम्बर जरूर लेकर जाएं। इसके साथ ही पारिवारिक पेंशनरों को पुनः विवाह न करने का प्रमाण पत्र भी देना होगा, और पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहे आश्रित बच्चों को परिवार पहचान पत्र के अनुसार अपना आय प्रमाण पत्र भी जमा करवाना जरूरी है। जो पेंशनर कार्यालय या बैंक नहीं आ सकते, उनके लिए घर बैठे सुविधा भी उपलब्ध है। वे स्मार्ट फोन में प्ले स्टोर से आधार फेस आरडी और जीवन प्रमाण फेस एप डाउनलोड करके अपने जीवित होने का प्रमाण दे सकते हैं। बीमार और बुजुर्ग पैंशनर, जो कहीं आने जाने में असमर्थ हैं, इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के प्रतिनिधि के माध्यम से डिजीटल लाईफ सर्टिफिकेट दे सकते हैं, जिसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क लागू होगा। यह सेवा
https://www.ippbonline.com/web/ippb/digital&life&certificate 1. पर उपलब्ध है। सभी पेंशनरों से अनुरोध है कि वे तय तिथियों पर ही कार्यालय आएं। सभी शनिवार, रविवार और 9 व 24 नवंबर को खजाना और उपखजाना कार्यालयों की छुट्टी रहेगी।


विशेष अभियान-6 के तहत जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में चलाया गया स्वच्छता अभियान
रेवाड़ी, 27 अक्तूबर, अभीतक: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार विशेष अभियान-6 के अंतर्गत जिला रेवाड़ी के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, साफ-सफाई एवं स्वास्थ्यकर वातावरण बनाए रखने के लिए विशेष गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया के मार्गदर्शन तथा उप सिविल सर्जन डॉ. जोगेंद्र तंवर की देखरेख में जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में कायाकल्प कार्यक्रम के तहत स्वच्छता एवं साफ-सफाई संबंधी गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अस्पताल परिसर, ओपीडी, वार्डों, प्रतीक्षालयों एवं शौचालयों की गहन सफाई, जैव चिकित्सा अपशिष्ट का उचित निस्तारण, हाथों की स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण के नियमों की पालना तथा जैव चिकित्सा अपशिष्ट के उचित प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों के आसपास के वातावरण को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन, रेवाड़ी ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता बनाए रखना मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों से अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी नियमित कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाएं और अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। डॉ. जोगेंद्र तंवर, उप सिविल सर्जन, रेवाड़ी ने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता संबंधी निर्धारित मानकों का पालन किया जाना चाहिए। जैव चिकित्सा अपशिष्ट का उचित प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण के नियमों की पालना तथा अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना सभी संबंधित कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य विभाग, रेवाड़ी ने जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ, सुरक्षित एवं स्वास्थ्यकर वातावरण सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।




त्योहारों की खुशियों में सुरक्षा का रखें ध्यान, बाजारों में अपने सामान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें: पुलिस अधीक्षक जींद
जींद, 27 अक्तूबर, अभीतक: त्योहारी सीजन एवं करवा चैथ के मद्देनजर बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ रही है। विशेषकर महिलाएं बड़ी संख्या में बाजारों में पहुंच रही हैं। ऐसे में आमजन की सुरक्षा एवं किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पुलिस अधीक्षक जींद ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस अधीक्षक जींद श्रीमती उपासना, आईपीएस ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि बाजारों में खरीदारी करते समय अपने पर्स, मोबाइल फोन, गहने एवं अन्य कीमती सामान का विशेष ध्यान रखें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर छोटी-सी लापरवाही भी चोरी, जेबकतरी अथवा सामान गुम होने का कारण बन सकती है।
जींद पुलिस की आमजन से अपील है कि निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेः
पर्स व मोबाइल का रखें ध्यान: बाजारों में भीड़ के दौरान अपना पर्स, मोबाइल फोन और नकदी सुरक्षित रखें। सामान को ऐसी जगह न रखें, जहां से कोई आसानी से निकाल सके।
गहने पहनते समय बरतें सावधानी: खरीदारी के लिए जाते समय अनावश्यक रूप से अधिक कीमती आभूषण पहनने से बचें तथा अपने आभूषणों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें।
बच्चों को अकेला न छोड़ें: बाजार में खरीदारी करते समय बच्चों को अपने साथ रखें। छोटे बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें और उन्हें परिवार के सदस्यों का मोबाइल नंबर याद करवाएं।
वाहन सुरक्षित स्थान पर पार्क करें: अपने वाहन को निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़ा करें और वाहन लॉक करना न भूलें। वाहन में पर्स, मोबाइल, नकदी अथवा अन्य कीमती सामान खुला न छोड़ें।
अनजान व्यक्तियों से रहें सतर्क: किसी अनजान व्यक्ति की बातों में आकर अपना सामान उसके हवाले न करें। खरीदारी के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें।
ऑनलाइन भुगतान में सावधानी बरतें: डिजिटल भुगतान करते समय भुगतान की राशि और प्राप्तकर्ता का नाम जांच लें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
यातायात नियमों का करें पालन: बाजारों में अनावश्यक रूप से वाहन खड़ा न करें, यातायात बाधित न करें और पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।
संदिग्ध गतिविधि की तुरंत दें सूचना: बाजार में कोई संदिग्ध व्यक्ति, लावारिस वस्तु या चोरी जैसी घटना दिखाई देने पर स्वयं जोखिम उठाने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करें।
जींद पुलिस का संदेश
जींद पुलिस की आमजन से अपील है कि त्योहारों की खुशियों के बीच सुरक्षा के प्रति लापरवाही न बरतें। थोड़ी-सी सतर्कता आपकी खरीदारी को सुरक्षित और सुखद बना सकती है। महिलाओं सहित सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे जागरूक रहें, अपने सामान की सुरक्षा का ध्यान रखें और किसी भी आपात स्थिति में डायल 112 पर पुलिस की सहायता लें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। आपकी सुरक्षा जींद पुलिस की प्राथमिकता है।

मधुमक्खी पालकों को बागवानी बीमा योजना से मिलेगी आर्थिक सुरक्षा: डीसी
प्रति मधुमक्खी पालक 250 कॉलोनियों और बक्सों तक बीमा का लाभ, 50 रुपये प्रति कॉलोनी व बॉक्स निर्धारित किया गया शुल्क
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़े किसानों और उद्यमियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने मधुमक्खी पालन को मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के दायरे में शामिल किया है। इससे मधुमक्खी पालकों को प्राकृतिक आपदाओं और अन्य निर्धारित परिस्थितियों में होने वाले नुकसान से आर्थिक राहत मिल सकेगी। डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि यह पहल मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहन देने और किसानों की आय को सुरक्षित बनाने में सहायक होगी। डीसी ने बताया कि योजना के तहत बाढ़ के कारण मधुमक्खियों की कॉलोनियों और बक्सों के पानी में डूबने, आग लगने से नुकसान होने तथा परिवहन के दौरान दुर्घटना के कारण होने वाली क्षति को बीमा कवर में शामिल किया गया है। परिवहन के दौरान दुर्घटना का बीमा लाभ लेने के लिए आवश्यक है कि दुर्घटना हरियाणा राज्य के भीतर हुई हो और उसके संबंध में आधिकारिक एफआईआर या डीडीआर दर्ज कराई गई हो। इसके अलावा, मधुमक्खियों में महामारी के कारण होने वाले नुकसान की स्थिति में भी योजना के प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
प्रति कॉलोनी और बॉक्स के लिए 50 रुपये बीमा शुल्क
डीसी वर्षा खांगवाल ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए प्रति मधुमक्खी पालक अधिकतम 250 मधुमक्खी कॉलोनियों और बक्सों की सीमा निर्धारित की गई है। इसके लिए मधुमक्खी पालकों का भावांतर भरपाई योजना-शहद के तहत पंजीकरण होना अनिवार्य है। साथ ही, प्रत्येक बॉक्स पर भावांतर भरपाई योजना का यूनिट नंबर देना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रति कॉलोनी 50 रुपये और प्रति बॉक्स 50 रुपये बीमा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके बदले में पात्र मधुमक्खी पालकों को प्रति कॉलोनी 1,250 रुपये और प्रति बॉक्स 1,250 रुपये की बीमा राशि का प्रावधान है। अधिकतम बीमा राशि निर्धारित पात्रता और योजना के नियमों के अनुसार प्रति कॉलोनी तथा प्रति बॉक्स 3,12,500 रुपये तक हो सकती है।
मधुमक्खी पालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम
डीसी वर्षा खांगवाल ने जिला के मधुमक्खी पालकों से आह्वान किया कि वे सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवश्यक पंजीकरण और औपचारिकताएं समय पर पूरी करें। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस प्रकार की योजनाओं से व्यवसाय में संभावित जोखिमों के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।उन्होंने बताया कि योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए मधुमक्खी पालक जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय झज्जर से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उद्यान विभाग, हरियाणा के टोल-फ्री नंबर 1800-180-2021 पर कॉल करके भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है




धान व बाजरा उपज का निर्धारित समयावधि में उठान जरूरी: सीईओ
बाजरा व धान खरीद व्यवस्था को लेकर जिला परिषद के सीईओ मनीष फोगाट ने किया मातनहेल मंडी का दौरा
झज्जर, 27 अक्तूबर, अभीतक: खरीफ फसलों की खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और किसानों को मंडियों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला परिषद के सीईओ मनीष फोगाट ने मातनहेल अनाज मंडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंडी में खरीद व्यवस्था का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिला परिषद के सीईओ मनीष फोगाट ने कहा कि मंडियों में खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और फसल की खरीद से जुड़ी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज की खरीद से लेकर उसके उठान और भंडारण तक सभी व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से संचालित की जाए, ताकि खरीद सीजन के दौरान किसानों और आढ़तियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने मंडी में फसलों की आवक, खरीद व्यवस्था, भंडारण तथा खरीदी गई उपज के समय पर उठान को लेकर आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
गुरुग्राम की सड़कों को धूल-मिट्टी से मुक्त करें, नियमित हो पानी का छिड़काव – राव नरबीर सिंह’
28 अक्टूबर से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए 100 वाहन उतारने की तैयारी, कुल 875 वाहनों की होगी तैनाती’
बंधवाड़ी में 42.95 लाख मीट्रिक टन लीगेसी वेस्ट का निस्तारण’
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्यिक मंत्री राव नरबीर सिंह ने नगर निगम गुरुग्राम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर की सभी सड़कों को धूल-मिट्टी से मुक्त बनाया जाए। सड़कों की डीप क्लीनिंग करवाने के साथ नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए, ताकि धूल के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को कम किया जा सके। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने, कचरा प्रबंधन में तेजी लाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। उद्योग मंत्री सोमवार को गुरुग्राम के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर लीगेसी वेस्ट के निस्तारण, सड़क सुधार और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि सड़कों पर जमा धूल-मिट्टी को हटाने के लिए नियमित रूप से विशेष सफाई अभियान चलाए जाएं। संबंधित अधिकारी डीप क्लीनिंग और पानी के छिड़काव की नियमित निगरानी करें, ताकि इन कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके और नागरिकों को प्रदूषण से राहत मिले। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं परिवहन के लिए पांच वर्ष की अवधि और दो वर्ष के विस्तार प्रावधान वाला दीर्घकालिक टेंडर आवंटित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर-1 में मैसर्स दिल्ली एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशंस लिमिटेड और क्लस्टर-2 में मैसर्स बीवीजी इंडिया लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों क्लस्टरों में कुल 875 वाहनों की व्यवस्था की गई है, जिनमें 675 लाइट कमर्शियल वाहन (एलसीवी), 184 ई-रिक्शा और 16 कॉम्पैक्टर शामिल हैं। वाहनों की तैनाती 28 अक्टूबर से शुरू करने की योजना है, जिसके पहले चरण में 100 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर लीगेसी वेस्ट प्रबंधन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 20 अक्टूबर 2026 तक कुल 58.50 लाख मीट्रिक टन कचरा प्राप्त हुआ है, जिसमें से 42.95 लाख मीट्रिक टन का निस्तारण किया जा चुका है। बैठक में सड़क सुधार एवं नागरिक शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। 24-आवर चैलेंज के तहत प्राप्त 3,815 शिकायतों में से 3,041 का निस्तारण किया जा चुका था, जबकि 774 शिकायतें लंबित थीं। 100 रोड्स चैलेंज के तहत कार्य की भौतिक प्रगति 29.3 प्रतिशत और 10 आइकॉनिक रोड्स परियोजना की प्रगति 35.8 प्रतिशत दर्ज की गई। इस अवसर पर निगमायुक्त प्रदीप दहिया, अतिरिक्त निगमायुक्त अंकिता चैधरी, यश जालुका एवं रविन्द्र यादव, चीफ इंजीनियर विजय ढाका, संयुक्त आयुक्त डॉ. प्रीतपाल सिंह सहित नगर निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



जिला स्तरीय मेगा रोजगार मेले में 668 युवाओं को मिले ऑफर लेटर
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने वितरित किए ऑफर लेटर, 65 कंपनियों ने लिया भाग
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। युवाओं को अपने हुनर को निखारते हुए आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वे अनुभव और कौशल के आधार पर भविष्य में अपना उद्योग या व्यवसाय स्थापित कर सकें और अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। राव नरबीर सिंह सोमवार को राजकीय महिला महाविद्यालय, सेक्टर-14, गुरुग्राम में आयोजित जिला स्तरीय मेगा रोजगार मेले में उपस्थित युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक के साथ उद्योगों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को लगातार बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए उद्योग स्थापित होने और निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने और गुरुग्राम को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में योगदान देने की अपील की। मेगा रोजगार मेले में 65 कंपनियों ने भाग लिया। इस दौरान 1,456 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 980 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया और 668 युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए।
दिवाली मेला भारतीय संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का है सशक्त माध्यम, भविष्य में इसे और भव्य स्वरूप दिया जाएगा- केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल
सुशासन, पारदर्शिता और अंत्योदय के संकल्प के साथ हरियाणा ने विकास के नए आयाम किए स्थापित केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल
सूरजकुंड दिवाली मेले के समापन समारोह में बोले केंद्रीय मंत्री, कहा- ‘बिना पर्ची-बिना खर्ची’ रोजगार व्यवस्था हरियाणा के सुशासन की है पहचान
वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत कर रहा है सूरजकुंड दिवाली मेला- पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: केंद्रीय विद्युत आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि 26 अक्टूबर 2014 का दिन हरियाणा के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसी दिन प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा के संकल्प के साथ नई सरकार ने कार्यभार संभाला था। सरकार ने प्रदेश के सवा दो करोड़ से अधिक लोगों को अपना परिवार मानकर उनकी सेवा करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा में बिना पर्ची-बिना खर्ची के योग्यता के आधार पर नौकरियां मिलना व्यवस्था परिवर्तन का प्रमाण है। केंद्रीय मंत्री सोमवार को फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला परिसर में आयोजित तीसरे सूरजकुंड दिवाली मेले के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा सरकार के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, पर्यटन विभाग के आयुक्त डॉ. अमित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त सत्येंद्र गुप्ता, पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता, जिला परिषद के अध्यक्ष विजय लोहिया, हरियाणा महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेनू भाटिया, अजय गौड़ सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं अधिकारी उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्हें देश की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए। इसी सोच के साथ अंत्योदय की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया है। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का आकलन कर जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की इस व्यवस्था को आज दूसरे प्रदेश भी समझने और अपनाने में रुचि ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और बिना किसी भेदभाव के विकास को प्राथमिकता दी है। गरीब परिवारों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और जरूरतमंद लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उनका उद्देश्य है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
दिवाली मेले को और भव्य स्वरूप देने की दिशा में होंगे प्रयास
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इतने सुंदर परिसर का उपयोग केवल कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी सोच के साथ दिवाली मेले की शुरुआत की गई, ताकि परिसर में वर्ष के अन्य समय भी सांस्कृतिक गतिविधियों और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने बताया कि इस बार दिवाली मेले में एक सप्ताह के दौरान लगभग 50 हजार लोगों के पहुंचने की जानकारी मिली है। यह उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में मेले को और आकर्षक बनाने के लिए लाइट एंड साउंड कार्यक्रम, खेल गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा अन्य मनोरंजक आयोजनों की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इससे फरीदाबाद के साथ-साथ दिल्ली, गुरुग्राम और पलवल सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग भी बड़ी संख्या में मेले में पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देने से आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत होगी तथा कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को नए अवसर मिलेंगे।
दिवाली का संदेश है समाज के हर वर्ग के जीवन में खुशियों का प्रकाश पहुंचाना
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दीपावली केवल दीप जलाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, आशा और सकारात्मकता का संदेश देने का अवसर भी है। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीपमाला की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि त्योहारों की खुशियां समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ साझा करें। जो परिवार आर्थिक कठिनाइयों के कारण उत्सव नहीं मना पाते, उनकी सहायता करना हम सभी का सामाजिक दायित्व है। पड़ोस, गांव और मोहल्लों में सभी लोगों को साथ लेकर त्योहार मनाने से सामाजिक एकता और भाईचारा मजबूत होता है। उन्होंने भगवान वाल्मीकि को नमन करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और दिवाली मेले में प्रस्तुति देने वाले सभी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला केवल खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल और विकसित भारत-2047 के संकल्प को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है। इस मेले के जरिए देश के विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को एक मंच मिल रहा है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ा रही है। सूरजकुंड मेले को नई पहचान देने और इसे व्यापक स्तर पर विकसित करने में मनोहर लाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित मनोहर लाल का स्वागत करते हुए उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। पर्यटन मंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ सहित विभिन्न मंचों के माध्यम से वोकल फॉर लोकल का संदेश दिया है। इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। दीपावली जैसे त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेले में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जहां देश की विविध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की झलक देखने को मिली। मेले के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने आयोजन को सफल बनाया। इसके लिए उन्होंने पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, कलाकारों, शिल्पकारों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के आयुक्त डॉ. अमित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त सत्येंद्र गुप्ता, मुख्यमंत्री के पूर्व राजनैतिक सचिव अजय गौड़, पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा, पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता, पूर्व हरियाणा महिला अध्यक्ष रेणु भाटिया अन्य कई गणमान्य व्यक्तिगण मौजूद रहे।
हरियाणा में अब तक 37.27 लाख मीट्रिक टन धान की हुई आवक और 30.69 लाख मीट्रिक टन की हुई खरीद – राजेश नागर
कुल आवक का 82 प्रतिशत धान खरीदा गया, 23.34 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ पूराय 2,22,154 किसानों को मिला लाभ, एमएसपी के तहत 4,263 करोड़ रुपये से अधिक का हुआ भुगतान
निजी व्यापारियों ने भी खरीदा 38,770 मीट्रिक टन धान, औसत भाव 2,516 रुपये प्रति क्विंटल
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री श्री राजेश नागर ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की धान की फसल की सुचारू, पारदर्शी और समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान प्रदेश की मंडियों में धान की आवक, खरीद, उठान और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकार का विशेष ध्यान इस बात पर है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले। मंत्री श्री राजेश नागर ने बताया कि 26 अक्टूबर को सुबह 8 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में कुल 37.27 लाख मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई है और 30.69 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। इस प्रकार कुल आवक का लगभग 82 प्रतिशत धान खरीदा जा चुका है। प्रदेश में भारत सरकार द्वारा निर्धारित 58 लाख मीट्रिक टन के खरीद लक्ष्य के मुकाबले अब तक लगभग 53 प्रतिशत खरीद पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि एक दिन में लगभग 1.01 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 0.36 लाख मीट्रिक टन की खरीद दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि खरीदे गए धान में से 23.34 लाख मीट्रिक टन का उठान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का लगभग 76 प्रतिशत है। एक दिन में लगभग 1.38 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया गया। मंत्री ने कहा कि मंडियों में खरीदे गए धान का समय पर उठान सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मंडियों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे और फसल लेकर आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। श्री नागर ने बताया कि प्रदेश में अब तक 2,22,154 किसानों को धान खरीद प्रक्रिया का लाभ मिला है तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत किसानों को लगभग 4,263 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए कि भुगतान संबंधी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर पूरी की जाए, ताकि किसानों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ लिमिटेड (हैफेड) तथा हरियाणा राज्य भंडारण निगम (एचएसडब्ल्यूसी) के माध्यम से धान की खरीद की जा रही है। उपलब्ध एजेंसीवार आंकड़ों के अनुसार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने 16.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जो उसके 23.20 लाख मीट्रिक टन के निर्धारित लक्ष्य का लगभग 71 प्रतिशत है। विभाग द्वारा 12.90 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। इसी प्रकार, हैफेड ने 9.29 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जो उसके 23.20 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य का लगभग 40 प्रतिशत है। हैफेड द्वारा 7.21 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। वहीं, हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने 4.87 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जो उसके 11.60 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य का लगभग 42 प्रतिशत है। निगम द्वारा 3.23 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है। तीनों एजेंसियों द्वारा कुल 30.69 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद और 23.34 लाख मीट्रिक टन का उठान किया गया है। 25 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, कुरुक्षेत्र में 8.23 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 7.64 लाख मीट्रिक टन की खरीद दर्ज की गई है। जिले में 6.47 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है, जो कुल खरीद का लगभग 84.75 प्रतिशत है। कैथल में 6.76 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 5.94 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है, जबकि 4.55 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठान किया गया है। करनाल में 5.60 लाख मीट्रिक टन की आवक, 4.32 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक का उठान दर्ज किया गया है। जिला-वार रिपोर्ट के अनुसार, अंबाला में 4.13 लाख मीट्रिक टन धान की आवक, 3.60 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 2.91 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है। फतेहाबाद में 3.62 लाख मीट्रिक टन से अधिक की आवक और 2.50 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद दर्ज की गई है। यमुनानगर में 3.09 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 2.70 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है, जबकि 2.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठान किया जा चुका है। यमुनानगर में कुल खरीद के मुकाबले उठान लगभग 85.78 प्रतिशत रहा है। हिसार, जींद, सिरसा, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पलवल, झज्जर, हांसी और फरीदाबाद सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी खरीद प्रक्रिया जारी है। जिला-वार रिपोर्ट में उठान की स्थिति के संबंध में मंत्री ने कहा कि संबंधित अधिकारी मंडियों में धान के उठान की नियमित समीक्षा करें। जिन जिलों में उठान की गति अपेक्षाकृत कम है, वहां खरीद एजेंसियों को आवश्यक कदम उठाकर उठान में तेजी लानी चाहिए, ताकि मंडियों में फसल रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे और किसानों को अपनी उपज लाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। एजेंसीवार भुगतान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा किसानों को लगभग 2,375.62 करोड़ रुपये, हैफेड द्वारा 1,329.76 करोड़ रुपये तथा हरियाणा राज्य भंडारण निगम द्वारा 558.38 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कुल भुगतान लगभग 4,263.76 करोड़ रुपये दर्शाया गया है। मंत्री ने कहा कि किसानों को भुगतान में तेजी लाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। श्री राजेश नागर ने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियों के अतिरिक्त निजी व्यापारियों द्वारा भी धान की खरीद की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, निजी व्यापारियों ने अब तक 38,770 मीट्रिक टन धान खरीदा है। निजी व्यापारियों द्वारा खरीदे गए धान का औसत भाव 2,516 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जबकि विभिन्न लेन-देन में भाव 2,461 रुपये से 2,965 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा है। मंत्री ने कहा कि मंडियों में खरीद व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए, किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए और खरीद कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही, खरीदे गए धान के उठान और भुगतान प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाए। मंत्री श्री राजेश नागर ने कहा कि किसानों का हित प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसानों की फसल की खरीद निर्धारित नियमों के अनुसार हो, उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिले और भुगतान समय पर किया जाए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप अपनी फसल मंडियों में लेकर आएं और खरीद प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग करें। मंत्री ने कहा कि सभी खरीद एजेंसियों, मंडी अधिकारियों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के दौरान धान की खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगी तथा प्रदेश के किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा का प्रतिनिधिमंडल गुजरात में निवेशकों से करेगा संवाद, प्रदेश में निवेश के नए अवसरों पर रहेगा फोकस
प्रवासी मिलन समारोह और निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें और हरियाणा इन्वेस्टमेंट रोडशो के माध्यम से निवेशकों को हरियाणा में निवेश के लिए किया जाएगा आमंत्रित’
हरियाणा की औद्योगिक क्षमता, निवेश अनुकूल नीतियों और विकास की संभावनाओं से रूबरू होंगे उद्योग जगत के प्रतिनिधि’
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा में निवेश को आकृषित करने, औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने और प्रदेश में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों से देश-विदेश के निवेशकों को अवगत कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 27 और 28 अक्टूबर, 2026 को गुजरात के सूरत और गांधीनगर का दौरा करेगा। इस दौरान निवेशकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें और हरियाणा इन्वेस्टमेंट रोडशो के माध्यम से प्रदेश की औद्योगिक एवं आर्थिक संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा और निवेशकों को हरियाणा में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहेंगे। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि 27 अक्टूबर को सूरत में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। इन बैठकों में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विस्तार और हरियाणा में व्यवसाय स्थापित करने से जुड़े अवसरों पर चर्चा की जाएगी। इसके उपरांत प्रवासी मिलन समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में हरियाणा के प्रवासी समुदाय के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रमुख व्यक्तियों के साथ संवाद होगा। कार्यक्रम में हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और औद्योगिक संभावनाओं को निवेशकों के समक्ष प्रदर्शित किया जाएगा।
गांधीनगर में हरियाणा इन्वेस्टमेंट रोडशो’
डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि 28 अक्टूबर को गांधीनगर में हरियाणा इन्वेस्टमेंट रोडशो आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपति, निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस रोडशो का उद्देश्य हरियाणा में निवेश की व्यापक संभावनाओं से उद्योग जगत को अवगत कराना, निवेशकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना तथा प्रदेश में नए औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के दौरान हरियाणा में उपलब्ध औद्योगिक अवसंरचना, निवेश के अनुकूल नीतिगत वातावरण, मजबूत कनेक्टिविटी, कुशल मानव संसाधन और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद व्यावसायिक अवसरों को रेखांकित किया जाएगा। साथ ही, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ निवेश प्रस्तावों, संभावित परियोजनाओं और व्यावसायिक साझेदारियों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा तथा निवेश संबंधी समझौता ज्ञापनों (डवन्े) की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026 से निवेश और रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ लागू की है। राज्य सरकार का लक्ष्य इन नीतिगत पहलों के माध्यम से वर्ष 2030-31 तक लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना और 10 लाख से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन करना है। इससे हरियाणा में औद्योगिक विस्तार, तकनीकी नवाचार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि सूरत और गांधीनगर का यह दौरा हरियाणा की औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है। हरियाणा सरकार का यह प्रयास प्रदेश को देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में और अधिक सशक्त बनाने, घरेलू एवं वैश्विक निवेशकों का विश्वास बढ़ाने तथा उद्योगों के विस्तार के लिए अनुकूल अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से प्रदेश में नए औद्योगिक उपक्रमों की स्थापना, मौजूदा उद्योगों के विस्तार, रोजगार के नए अवसरों के सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

संयुक्त घोषणा-पत्र को अंगीकृत करने के बाद नई दिल्ली में 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच संपन्न हुआ
संयुक्त घोषणा-पत्र में नई दिल्ली घोषणा-पत्र (छक्क्) की सहमति को दोहराया गयाय वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ के अधिक प्रतिनिधित्व और यूएनएससी (न्छैब्) सुधारों का समर्थन किया गया
संयुक्त घोषणा-पत्र में सीमापार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों की निंदा की गयीय जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंडों से बचने की बात कही गयी
वैश्विक चुनौतियों के स्थायी समाधान संवाद, शांति और सहयोग में निहित हैं: लोक सभा अध्यक्ष
लोक सभा अध्यक्ष ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में संप्रभु समानता और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर बल दिया
जनता के विश्वास को सुरक्षित रखने के लिए संसदों को पारदर्शी, जन-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित होना चाहिए : लोक सभा अध्यक्ष
तकनीक और एआई का जिम्मेदारी से उपयोग संसदों को सशक्त बना सकता है और सांसदों की दक्षता बढ़ा सकता है : लोक सभा अध्यक्ष
लोक सभा अध्यक्ष ने चीन को सौंपी ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच, जिसका उद्घाटन कल लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने किया था, आज एक संयुक्त घोषणा-पत्र को अंगीकृत करने के बाद संपन्न हो गया। इस घोषणा-पत्र में औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतर्राष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। भारत की अध्यक्षता के अंतर्गत देश के बढ़ते राजनयिक प्रभाव को परिलक्षित करते हुए, संयुक्त घोषणा-पत्र नई दिल्ली की मुख्य रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है। घोषणा-पत्र में सदस्य संसदों ने वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (न्छैब्)में सुधारों का स्पष्ट समर्थन किया – जिसका उल्लेख नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 13 में किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में भारत के कड़े रुख को आतंकवाद के सशक्त विरोध के रूप में बड़ी सफलता मिलीय नई दिल्ली घोषणा के पैराग्राफ 40 के अनुसार इस घोषणा-पत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों की निंदा की गई, जबकि जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंडों को समाप्त करने की मांग की गई। घोषणा में भारत के नेतृत्व वाले विकासात्मक और जलवायु एजेंडे को भी दृढ़ता से शामिल किया गया, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (क्च्प्) रिपोजिटरी का विस्तार, नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (।प्) प्रशासन, समान लेकिन पृथक उत्तरदायित्वों (ब्ठक्त्-त्ब्) के सिद्धांत का पालन और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए सर्वसम्मति से समर्थन शामिल है। समापन भाषण में , लोक सभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान संघर्ष के बजाय केवल संवाद, शांति और सहयोग के माध्यम से ही किया जा सकता है। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के पीठासीन अधिकारियों, प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों और अंतर्राष्ट्रीय सांसदों को संबोधित करते हुए, श्री बिरला ने दो दिनों की गहन चर्चाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यद्यपि भाग लेने वाले देशों की पृष्ठभूमि, परिस्थितियां और चुनौतियाँ अलग-अलग हैं, फिर भी मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति उनकी ब्रिक्स की साझा प्रतिबद्धता ही इस गठबंधन की शक्ति है। अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्षों के वर्तमान वैश्विक माहौल को रेखांकित करते हुए, श्री बिरला ने भारत के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थायी समाधान युद्ध में नहीं बल्कि संवाद मेंय संघर्ष में नहीं बल्कि शांति मेंय और प्रतिस्पर्धा में नहीं बल्कि सहयोग में है। उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति पूर्ण सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और सभी के लिए समान विकास अवसरों पर आधारित एक वैश्विक व्यवस्था का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ष्वैश्विक शांति का अर्थ सुरक्षा, सम्मान, न्याय और सभी के लिए – विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए – एक बेहतर भविष्य का आश्वासन है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि आने वाली पीढ़ियाँ वर्तमान नेताओं का मूल्यांकन उसी सुरक्षा और समृद्धि के आधार पर करेंगी जो वे पीछे छोड़कर जाएंगे। लोकतांत्रिक संस्थाओं की बदलती जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि संवाद, आम सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास के जीवंत केंद्र हैं। उन्होंने वैश्विक विधानमंडलों से अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन -केंद्रित बनकर बदलते समय के अनुकूल स्वयं को ढालने का आग्रह किया। आधुनिक साधनों के समावेशन के बारे में बात करते हुए, श्री बिरला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक का उपयोग संसदीय कार्यप्रणाली को काफी हद तक सुगम बना सकता है और नागरिकों की भागीदारी को बढ़ा सकता है, बशर्ते इसका विकास मानवीय मूल्यों, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के अनुरूप हो। श्री बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स की सफलता इस बात में है कि सदस्य देशों की प्रगति से आगे बढ़कर व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को लाभ पहुंचाया जाना चाहिए, जिससे वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच सफलतापूर्वक संपन्न होने के अवसर पर श्री बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन को सौंपते हुए उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं, और विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में सहयोग निरंतर फलता-फूलता रहेगा। मंच का समापन दुनिया भर की संसदों से शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए बुलंद आवाज के रूप में कार्य करने के आह्वान के साथ हुआ।
राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया
ब्रिक्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह मंच वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया, जहाँ विविध संस्कृतियाँ, समृद्ध इतिहास और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएँ एक संतुलित, समावेशी एवं समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच इन प्रयासों को और मजबूत करेगा तथा सदस्य एवं साझेदार देशों में आकार ले रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: राज्यसभा के सभापति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग ले रहे ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं के लिए दोपहर भोज का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरलाय ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों की संसदों के माननीय अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारीय माननीय केंद्रीय मंत्रीय राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंशय राज्यसभा एवं लोकसभा के महासचिवों के साथ-साथ ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का भारतीय संसद में स्वागत करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि वे एक ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर एकत्रित हुए हैं, जो भारत के संसदीय लोकतंत्र का केंद्रबिंदु है। भारत का संसदीय लोकतंत्र समय के साथ जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक विकसित हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के लिए लोकतंत्र कोई नई अवधारणा नहीं है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि उत्तर में वैशाली जैसे स्थानों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था विद्यमान थी, जबकि दक्षिण भारत में चोल शासकों ने “कुडावोलाई” प्रणाली अपनाई थी। लोकतंत्र की इसी गहरी ऐतिहासिक विरासत के कारण भारत को सही मायने में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। ब्रिक्स के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह समूह वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने ब्रिक्स को एक ऐसे समूह के रूप में वर्णित किया, जहाँ विविध संस्कृतियाँ, समृद्ध इतिहास और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएँ एक संतुलित, समावेशी एवं समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के दौरान हुए विचार-विमर्श और चर्चाएँ वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदस्य एवं साझेदार देशों के सामूहिक संकल्प को दर्शाती हैं। यह संकल्प एकजुटता, संवाद और आपसी विश्वास के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की साझा प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त करता है। सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए गए दृष्टिकोण का स्मरण करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस बात को रेखांकित किया था कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। श्री राधाकृष्णन ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 12वां ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन इन प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा तथा सदस्य एवं साझेदार देशों में विकसित हो रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। इस आयोजन के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए, राज्यसभा के सभापति ने कहा कि भारतीय परंपरा में अतिथियों के लिए दोपहर भोज का आयोजन करना केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आत्मीयता और आपसी सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि साथ बैठकर भोजन करने से नेताओं को नीतियों और शासन से आगे बढ़कर आपसी मानवीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिलता है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल आधार हैं। इस अवसर पर आशा व्यक्त करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह दोपहर भोज सभी प्रतिनिधियों को अनौपचारिक रूप से विचारों के आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और गहरा बनाने का सुखद अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कामना की कि भारतीय व्यंजनों की सोंधी सुगंध, भारतीय आतिथ्य की आत्मीयता और दोपहर का यह सुहावना समय सभी विशिष्ट अतिथियों के मन में एक अमिट छाप छोड़ेगी। अंत में, राज्यसभा के सभापति ने कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कामना की कि भारत में बिताए गए समय तथा इस सम्मेलन के दौरान पुनः प्रगाढ़ हुए और नए बने मैत्री संबंधों की स्मृतियाँ सभी के लिए सुखद एवं अविस्मरणीय रहें। उन्होंने सभी अतिथियों को भोज का आनंद लेने के लिए आमंत्रित किया और दीर्घकालिक मैत्री संबंधों की कामना के साथ अपने संबोधन का समापन किया।


अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार के उत्साहजनक संकेत
सामुदायिक आयुर्वेद हस्तक्षेप के बाद जीवन गुणवत्ता, अग्निबल और अस्थि खनिज घनत्व में सुधार दर्जय विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई परियोजना की रिपोर्ट
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (।प्प्।), नई दिल्ली की ओर से हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बुजुर्गों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए चलाए गए सामुदायिक आयुर्वेद कार्यक्रम में उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। परियोजना के नतीजों के अनुसार, हस्तक्षेप के बाद बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता, अग्निबल और अस्थि खनिज घनत्व में सुधार दर्ज किया गया। संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के आकलन में भी सकारात्मक बदलाव के संकेत मिले। इसके अतिरिक्त, सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन, डीएचईए और विटामिन डी जैसे कुछ जैविक संकेतकों के स्तरों में सुधार दर्ज हुआ। इन नतीजों को 24 अक्टूबर को ।प्प्। में आयोजित एक कार्यशाला में प्रस्तुत किया गया और परियोजना की रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई। संस्थान की जन-स्वास्थ्य पहल (च्नइसपब भ्मंसजी प्दपजपंजपअमकृच्भ्प्) के तहत तीन महीनों में फरीदाबाद जिले के 60 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 5,594 बुजुर्गों की स्क्रीनिंग की गई और उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं। इसके अतिरिक्त, डिमेंशिया (मनोभ्रंश) पर केंद्रित एक अन्य घटक के अंतर्गत चार महीनों में 200 मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें आयुर्वेद आधारित औषधियां दी गईं। “हरियाणा राज्य के फरीदाबाद जिले की वृद्ध आबादी में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए सामुदायिक आयुर्वेद हस्तक्षेप” शीर्षक वाली इस परियोजना का उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद आधारित उपचार की संभावनाओं का अध्ययन करना और स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के उपायों का आकलन करना था। कार्यक्रम के प्रारंभिक आकलन में बुजुर्गों के स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आईं। इनमें 67.73 प्रतिशत प्रतिभागियों में दृष्टि संबंधी समस्या, 43.05 प्रतिशत में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85 प्रतिशत में संज्ञानात्मक क्षमता में कमी दर्ज की गई। इसके अलावा, कई बुजुर्गों में उच्च रक्तचाप, रैंडम ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर, अस्थि खनिज घनत्व में कमी, कब्ज और नींद संबंधी समस्याएं भी पाई गईं। परियोजना के पहले भाग में 60 दिनों तक किए गए हस्तक्षेप के बाद जीवन गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन गुणवत्ता आकलन (ॅभ्व्फव्स्) का कुल स्कोर 292.0 से बढ़कर 326.3 हो गया। आयुर्वेद में पाचन और चयापचय संबंधी क्षमता के आकलन से जुड़े अग्निबल के सभी छह मानकों में भी सुधार देखा गया। इसके साथ ही अस्थि खनिज घनत्व में भी सुधार दर्ज किया गया। संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर केंद्रित दूसरे भाग में मिनी मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन (डडैम्) के स्कोर में सामान्य स्तर की ओर बदलाव देखा गया। वहीं, 6-सीआईटी आकलन में भी संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार के संकेत मिले। इस भाग में जीवन गुणवत्ता का स्कोर 277.4 से बढ़कर 364.2 दर्ज किया गया। इसके अलावा, सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन (।ब्ी), डीएचईए और विटामिन क् के स्तरों में भी सुधार पाया गया। ये परिणाम सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद आधारित हस्तक्षेपों की संभावित उपयोगिता को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। हालांकि, इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन, निरंतर सुरक्षा निगरानी और आगे के अध्ययन आवश्यक हैं। कार्यशाला में आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि ।प्प्। के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय ने कहा कि बुजुर्गों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए उनके साथ सार्थक सामाजिक जुड़ाव जरूरी है। उन्होंने वृद्धजनों को शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। साथ ही, बेहतर स्वास्थ्य परिणाम हासिल करने के लिए ऐसी पहलों में अधिक निवेश की आवश्यकता भी रेखांकित की। प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने जन-स्वास्थ्य पहल से जुड़ी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभवों का व्यवस्थित अध्ययन और उनके निष्कर्षों का व्यापक प्रसार आवश्यक है। उन्होंने इस तरह की पहलों को अधिक से अधिक वृद्धजनों तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। कार्यशाला में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली की सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं निदेशक प्रोफेसर डॉ. सुनीला गर्गय सीएसआईआरदृराष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (छप्ैबच्त्) के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुमन रायय और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेश सिंह शेखावत ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर हॉलिस्टिक अप्रोच फॉर हेल्दी एजिंग पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) मंजूषा राजगोपाल, डीन (क्न्)य प्रो. (डॉ.) महेश व्यास, डीन (च्ी.क्.)य प्रो. (डॉ.) आर. के. यादव, डीन (च्ळ)य और प्रो. (डॉ.) योगेश बडवे, चिकित्सा अधीक्षक सहित संस्थान के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (।प्प्।), नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। संस्थान आयुर्वेद के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, नैदानिक सेवाओं और जन-स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से कार्य करता है।

आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई ने खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और निरंतर बागवानी प्रबंधन को बढ़ावा दिया
पूर्वी चंपारण में आयोजित किसान जागरूकता कार्यक्रम में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण, फसल विविधीकरण तथा संसाधनों के कुशल उपयोग के साथ आम और लीची की खेती पर जोर दिया गया
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के अंतर्गत बिहार के मोतिहारी स्थित आईसीएआरदृमहात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई) ने 27 अक्टूबर, 2026 को पूर्वी चंपारण के मेहसी प्रखंड के कोठिया हरिराम गांव में खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत किसान जागरूकता एवं क्षेत्रीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण, फसल विविधीकरण तथा आम और लीची के बागों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में कुल 29 किसानों और प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा बागों की उत्पादकता और संसाधनों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों पर वैज्ञानिकों के साथ चर्चा की। कार्यक्रम का नेतृत्व आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई के वैज्ञानिक डॉ. अमोल के. जाधव ने किया। उन्होंने बागों की उत्पादकता और मृदा की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग खेती की लागत बढ़ा सकता है और पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा कर सकता है। इसके विपरीत, मृदा परीक्षण के परिणामों, फसलों की आवश्यकताओं और बागों की परिस्थितियों के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ सकती है और निरंतर उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। संवाद के दौरान किसानों को पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों, जैसे फसल अवशेषों, गिरी हुई पत्तियों, गोबर की खाद और कंपोस्ट के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। डॉ. जाधव ने बताया कि इन सामग्रियों का पुनर्चक्रण मृदा में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, मृदा की संरचना और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करने तथा बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने आम और लीची की सतत खेती के लिए जैविक संसाधनों को संतुलित खनिज उर्वरकों के साथ उपयोग करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ाने और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर सृजित करने हेतु फलदार बागों में अंतरवर्तीय खेती और फसल विविधीकरण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। किसानों को बागों की आयु, वृक्षों के छत्र विस्तार, मौसमी नमी की उपलब्धता और फसलों की अनुकूलता के आधार पर उपयुक्त अंतरवर्ती फसलों, विशेष रूप से दलहनी फसलों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल अन्य फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन पद्धतियों से उपलब्ध संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग करने के साथ-साथ कृषि आय के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों ने उर्वरकों के प्रयोग, बागों की मृदा के स्वास्थ्य, जैविक संसाधनों के प्रबंधन और अंतरवर्तीय खेती से संबंधित अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। संवादात्मक चर्चाओं से फल आधारित कृषि प्रणालियों की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक, आर्थिक रूप से व्यवहार्य तथा पर्यावरण की दृष्टि से सतत दृष्टिकोणों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली। खेत बचाओ अभियान 2026 के माध्यम से आईसीएआर-एमजीआईएफआरआई वैज्ञानिकों और कृषक समुदायों के बीच प्रत्यक्ष संवाद के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सतत बागवानी पद्धतियों और प्राकृतिक संसाधनों के कुशल प्रबंधन को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। यह पहल बिहार के पूर्वी चंपारण के आम और लीची उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल कृषि आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों को और मजबूत करती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी, 28 अक्टूबर को विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 के विजेताओं को सम्मानित करेंगे
विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 आधिकारिक तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे बड़ी नवाचार समाधान प्रतियोगिता के तौर पर दर्ज,
देशभर से 2,87,967 परियोजना प्रस्तुतियां मिली
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: शिक्षा मंत्रालय कल 28 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 का भव्य समापन और सम्मान समारोह आयोजित करेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी विजेता छात्र नवोन्मेषकों को सम्मानित करेंगे। विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 को भारत में स्कूली शिक्षा और जमीनी स्तर पर नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, आधिकारिक तौर पर सबसे बड़ी नवाचार समाधान प्रतियोगिता के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाणन प्राप्त हुआ है और भारत के युवाओं को वैश्विक मंच पर पहचान मिली है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर पर विजेता 10 टीमों और नवोन्मेषकों को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर उनके परिवर्तनकारी समाधान और मॉडल प्रदर्शित किये जाएंगे। कार्यक्रम में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रमाणन प्रदान किए जाने का आधिकारिक समारोह भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा उल्लास दृ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षक शिक्षा संस्थानों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए जाएंगे। मंत्रालय के दोनों विभागों-स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (क्वैम्स्) और उच्च शिक्षा विभागकृद्वारा छठे विशेष अभियान के तहत की गई पहल भी प्रस्तुत किये जाएंगे। इनमें ई-कचरे के प्रति जागरूकता और ई-कचरा संग्रहण के प्रयासों को दर्शाया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चैधरी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग सचिव श्री टी. के. अनिल कुमार, अपर सचिव श्री धीरज साहू, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. टी. जी. सीताराम, शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वायत्त निकायों के प्रमुख प्रतिनिधि एवं प्रमुख, राज्योंध्केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों तथा सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सहयोग से आयोजित विकसित भारत बिल्डाथॉन 2025 स्कूली विद्यार्थियों में रचनात्मक समस्या-समाधान, उद्यमशीलता और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरंभ की गई थी। आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और समृद्ध भारत नामक चार मूलभूत स्तंभों पर केंद्रित इस पहल को जमीनी स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली। इसके अंतर्गत आइडिया और प्रोटोटाइप ट्रैक दोनों में कुल 2,87,967 परियोजना प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गईं। विकसित भारत बिल्डाथॉन भारत में स्कूली नवाचार के निरंतर विकसित होते पारितंत्र को बढ़ाता है। यह युवा विद्यार्थियों को कक्षा में सीखने वाले विद्यार्थियों से आगे बढ़कर समस्या-समाधानकर्ता, पेटेंट धारक और भविष्य उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होंगे।


केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 मनाया
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 का शुभारंभ आज सुबह 11 बजे नई दिल्ली के सतर्कता भवन में हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय सतर्कता आयुक्त श्री ए. एस. राजीव और सतर्कता आयुक्त श्री प्रवीण वशिष्ठ ने केंद्रीय सतर्कता आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाई। इस वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्ताह 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक मनाया जा रहा है जिसका विषय है – सत्यनिष्ठा से समृद्धि। आयोग ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों को 17 अगस्त से 16 नवंबर, 2026 तक तीन माह का निवारक सतर्कता अभियान चलाने की भी सलाह दी है। सतर्कता प्रशासन पर सार्थक प्रभाव डालने के उद्देश्य से इस अभियान में निम्न प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगारू (प) लंबित शिकायतों का निपटान, (पप) लंबित मामलों का निपटान, (पपप) क्षमता निर्माण कार्यक्रम, (पअ) डिजिटल पहल और (अ) अनुबंध प्रबंधन। सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के अंतर्गत आयोग ने 30 अक्टूबर, 2026 को “प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिवर्तन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है।
शिल्प समागम मेला-2026, 1 नवंबर से 15 नवंबर तक नई दिल्ली के दिल्ली हाट में आयोजित होगा
प्रकाश और परंपरा: ज्योति से ज्योति जलाएं विषय पर, भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, उत्सवी प्रकाश और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया जाएगा
सात विषयगत क्षेत्रों के माध्यम से शिल्पकारों के उत्पाद, पारंपरिक शिल्पकला प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे
नई दिल्ली़, 27 अक्तूबर, अभीतक: शिल्प समागम मेला 2026, अगले महीने 1 से 15 नवंबर तक राष्ट्रीय राजधानी में आईएनए के दिल्ली हाट में आयोजित होगा। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय पखवाड़े भर चलने वाले यह मेला आयोजित करेगा। प्रकाश और परंपरा दृ ज्योति से ज्योति जलाएं विषयवस्तु पर आधारित यह आयोजन शिल्पकारों के उत्पादों, शिल्पकला के सजीव प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, उत्सवी प्रकाश और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाएगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मेला आकांक्षी समूहों और समुदायों को उनकी रचनात्मकता, प्रतिभा तथा पारंपरिक शिल्पकौशल प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने का निरंतर प्रयास है। साथ ही, यह शिल्पकारों को अपने उत्पादों के विपणन और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक पहुंच बनाने के अवसर भी प्रदान करता है। अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक शिल्प समागम मेलों से एक हजार से अधिक शिल्पकार लाभान्वित हुए हैं। अधिकारी ने कहा कि इस वर्ष सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग पहली बार संयुक्त रूप से शिल्प उत्सव आयोजित करेगा। इसके अंतर्गत भारत ट्यूलिप और पर्पल फेस्ट के तहत लगभग 150 स्टॉल लगाए जाएंगे। इस सहयोग द्वारा पारंपरिक शिल्पकारों, रचनात्मक प्रतिभाओं और समावेशी सहभागिता को साझा मंच मिलेगा। अधिकारी ने बताया कि मेले को सात विषयगत क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें भारत की शिल्पकला, परंपरा, खान-पान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां प्रदर्शित की जाएंगी। अधिकारी ने कहा कि पारंपरिक शिल्पकार आजीविका संवर्धन कार्यक्रम -भारत ट्यूलिप पहल का उद्देश्य ई-कॉमर्स मंचों द्वारा आकांक्षी समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को भारत और विदेशी उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से भारत की पारंपरिक कला और शिल्प संरक्षण में योगदान के साथ ही आर्थिक सशक्तीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पर्पल फेस्ट दिव्यांगता, रचनात्मकता, प्रतिभा और समान सहभागिता का बहुआयामी उत्सव है। इसमें दिव्यांगजन, संगठन, संस्थान, व्यवसाय जगत के प्रतिनिधि, कलाकार, पेशेवर और अन्य हितधारक शामिल होते हैं, ताकि उपलब्धियां सामने लाकर, सहभागिता को प्रोत्साहित और समावेशन के प्रति व्यापक समझ विकसित की जा सके। मंत्रालय का उद्देश्य, शिल्प समागम मेला 2026 के माध्यम से पारंपरिक शिल्पकारों और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव तथा शिल्पकला, रचनात्मकता और समावेशी सहभागिता के प्रति आम लोगों की भागीदारी प्रोत्साहित करना है।
