




देश के प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ कृषक उद्यमशीलता पर हसनपुर में करेंगे मंथन
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी करेंगे कृषि मेले में सेमिनार का शुभारंभ
ग्रामीण आँचल में पहली बार होगा एग्री लीडरशिप समिट, किसानों हाजिरी रचेगी नया इतिहास
पूर्व कृषि मंत्री एवं हसनपुर कृषि मेले के संयोजक औम प्रकाश धनखड़ ने लिया कार्यकर्ताओं संग जायजा
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: खेती किसानी के इतिहास में पहली बार ग्रामीण आँचल में कृषक उद्यमशीलता विषय पर देश भर के प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एम आर स्कूल हसनपुर में 23 अक्टूबर को आयोजित कृषि मेले में एक मंच पर अपने विचार साझा करेंगे। क्षेत्र से हजारों की संख्या किसान, पशु पालक मछली पालक, कृषि उद्यमी मेले में पहुंचेंगे। पूर्व कृषि मंत्री एव कृषि मेले के संयोजक औम प्रकाश धनखड़ ने हसनपुर में मेला साइट का जायजा लेते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि मेले की तैयारियां जोरो से चल रही है। मेले की तैयारियों में पार्टी कार्यकर्ता, किसान संगठन, खाप प्रतिनिधि सब टीम भावना से जुड़े हुए है। यह कृषि मेला अपने आप में किसानों की भलाई की सोच को आगे बढ़ाने और हाजिरी के हिसाब नया इतिहास रचेगा। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिक बख्शीराम यादव, पाशा पटेल ,सुगनकर राव, रामावतार लाम्बा, पदम श्री सुल्तान सिंह, आईसीएआर से राजबीर बरार,गुरदयाल सिंह, एम जे खान सहित अन्य कई जाने माने नाम अपने विचार सेमिनार में रखेंगे। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ पैरी अर्बन एग्री, डायरेक्ट मार्केटिंग,मॉडर्न डेयरी, फिशरीज, बागवानी, फूल की खेती महिला कृषि में अग्रणी आदि विषयों पर मंथन करेंगे। उन्होंने बताया कि सभी मेहमानों का हरियाणवी संस्कृति में सम्मान किया जाएगा। खाप प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि मेहमानों को कृषि मेले में हरियाणवी संस्कृति से रूबरू कराने के लिए प्रसिद्ध लोक कलाकार मासूम शर्मा,पदम श्री महाबीर गुड्डू, जोगिंदर कुंडु, बिंदर दिनोदा, प्रदीप हुड्डा। सहित अन्य कलाकार भी पहुंचेंगे और अपनी प्रस्तुति देगे। इस अवसर पर धनखड़ परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह, जिला अध्यक्ष विकास वाल्मीकि, जिप चेयरमैन कप्तान बिरधाना, वरिष्ठ भाजपा नेता संजय कबलाना, दिनेश कौशिक, नप चेयरमैन सरोज राठी सहित काफी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हसनपुर में कृषि मेला साइट का जायजा लेते हुए पूर्व कृषि मंत्री औम प्रकाश धनखड़।
कॉमनवेल्थ खेल 2030 हरियाणा में कराए जाएँ: दीपेन्द्र हुड्डा
बीजेपी सरकार ने खिलाड़ियों के हित की ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति को बंद कर खिलाड़ियों को उनके हक से वंचित किया – दीपेन्द्र हुड्डा
कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में होंगे तो लाखों करोड़ का बजट यहाँ खर्च होगा। स्टेडियम बनेंगे, एकेडमी बनेगी, मेट्रो रेल बनेंगी, हाईवे बनेंगे, स्पोर्ट्स विलेज बनेंगे- दीपेन्द्र हुड्डा
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: सांसद दीपेन्द्र हुड्डा आज बादली हलके के गाँव भिंडावास में जनशक्ति युवा क्लब द्वारा विजयदशमी के अवसर पर आयोजित पाँचवीं एथलेटिक्स चैंपियनशिप एवं खेल प्रतियोगिता में शामिल होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कॉमनवेल्थ खेल 2030 हरियाणा में कराने की मांग करते हुए कहा कि हरियाणा के गाँव-गाँव में खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं। इसी को पहचानकर चै. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने खिलाड़ियों के हित में ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति लागू की। इस नीति के तहत मेडल विजेता प्रतिभाशाली खिलाडियों को सीधे डीएसपी व अन्य सम्मानजनक सरकारी पदों पर नौकरियां मिलने के कारण प्रदेश के युवाओं में खेल को करियर बनाने का नया जुनून तैयार हुआ था। जिसका परिणाम ये हुआ कि ओलिंपिक, कामनवेल्थ, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में हरियाणा के खिलाडियों ने सबसे ज्यादा मेडल जीतकर देश की झोली में डाले और पूरी दुनिया में देश-प्रदेश का नाम रोशन किया। लेकिन बीजेपी सरकार ने इस उम्दा खेल नीति को बंद कर दिया और पदक विजेता खिलाड़ियों को उनके हक से वंचित भी कर दिया। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत माता की झोली को पदकों से भरने वाले हरियाणा में खेल सुविधाओं के नाम पर बास्केट बाल स्टेडियम में जंग लगे पोल लटक रहे हैं। कुछ समय पूर्व मेरे लोकसभा क्षेत्र में दो बास्केट बॉल खिलाड़ियों के ऊपर जंग लगे पोल गिरने से उनकी जान चली गई। अगर कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में होते हैं तो खेल सुविधाएं बढ़ेंगी। हरियाणा पदकों के अंबार लगा देगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हुड्डा सरकार ने स्कूली बच्चों में शुरुआती उम्र से ही खेल प्रतिभा को निखारने की दृष्टि से अनिवार्य ‘स्पैट’ नीति बनाई, जिसके तहत शीर्ष प्रदर्शन करने वाले बच्चों को 1500-2000 रुपये का मानदेय मिलता था। ग्रामीण स्तर पर खेल स्टेडियमों की व्यवस्था की गयी, उनमें कोच आदि की नियुक्ति की गयी। कांग्रेस की हुड्डा सरकार ने पूरे प्रदेश में 232 राजीव गांधी खेल स्टेडियम, 6 अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम बनवाए। लेकिन पिछले 10 साल में बीजेपी सरकार ने प्रदेश भर के स्टेडियमों और खेल नर्सरियों की दुर्दशा कर डाली, 10 साल में एक भी कोच की नियुक्ति नहीं की। जो हरियाणा खेल-खिलाड़ियों में नंबर 1 था वो आज नशे में नंबर 1 बन गया है। आज पूरे प्रदेश में खिलाड़ियों को खेल सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान विधायक कुलदीप वत्स मौजूद रहे। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली काँग्रेस सरकार के समय की श्पदक लाओ पद पाओश् नीति को दोबारा बहाल किया जाए, ताकि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित बने और आगे आने वाली पीढ़ी में खेलों के प्रति रुझान बना रहे। दीपेन्द्र हुड्डा ने आगे कहा कि देश की कुल आबादी की 2% आबादी वाले हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स में भारत को मिले 21 में से 15 गोल्ड मेडल (71%) या तो हरियाणा के खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत जीते या विजेता टीम के खिलाड़ी के रूप में मुख्य भूमिका निभाई, फिर भी कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में क्यों नहीं हो रहे। अंतर्राष्ट्रीय खेलों में मेडल जीते हरियाणा और इनाम मिले गुजरात को, ये कहाँ का न्याय है? उन्होंने कहा कि जब हमने कॉमनवेल्थ गेम्स हरियाणा में कराने की मांग करी तो हरियाणा की पूरी बीजेपी हमारे पीछे पड़ गयी। कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में होंगे तो लाखों करोड़ का बजट यहाँ खर्च होगा। स्टेडियम बनेंगे, एकेडमी बनेगी, मेट्रो रेल बनेंगी, हाईवे बनेंगे, स्पोर्ट्स विलेज बनेंगे। लेकिन, बीजेपी सरकार सब कुछ गुजरात ले जा रही है। बुलेट ट्रेन गुजरात में, कॉमनवेल्थ खेल कराने हों तो गुजरात में, ओलंपिक खेल कराने हों तो गुजरात में। अगर 70% से ज्यादा गोल्ड मेडल हरियाणा के खिलाड़ी जीतकर ला रहे हैं तो मेरिट के आधार पर कॉमनवेल्थ खेल हरियाणा में होने चाहिए।









राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी महोत्सव सम्पन्न
संघ के विजयादशमी महोत्सव का राष्ट्र वंदना और अनुशासित संघ दर्शन के साथ पथ संचलन
फरीदाबाद पश्चिम महानगर में दत्तात्रेय होसबाले,सरकार्यवाह के सान्निध्य में हुआ मुख्य आयोजन
फरीदाबाद, 20 अक्तूबर, अभीतक: फरीदाबाद पश्चिम महानगर के विवेकानंद नगर की केशव बस्ती में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विजयादशमी महोत्सव का आयोजन किया गया।’ कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विजयादशमी के महत्व, संघ की स्थापना के उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान तथा संघ के विभिन्न सेवा प्रकल्पों पर प्रकाश डाला गया। एनएच-4 एयर फोर्स मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अधिकारियों के रूप में आदरणीय दत्तात्रेय होसबाले जी, माननीय सरकार्यवाहय आदरणीय जयकिशन जी, माननीय सह विभाग संघचालकय आदरणीय संजय जी, माननीय महानगर संघचालक तथा श्रीमान त्रिलोक जी, सह विभाग कार्यवाह उपस्थित रहे। अन्य उपस्थित अधिकारियों में श्रीमान राकेश, सह प्रांत कार्यवाहय श्रीमान श्री किशन, अखिल भारतीय संपर्क टोली सदस्य तथा श्रीमान देव प्रसाद, अध्यक्ष विद्या भारती प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्रीमान त्रिलोक, सह विभाग कार्यवाह का बौद्धिक हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में संघ की स्थापना के उद्देश्य, विजयादशमी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा राष्ट्र और समाज के प्रति स्वयंसेवकों के दायित्वों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। यह पर्व समाज में साहस, अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संघ के विभिन्न सेवा एवं सामाजिक प्रकल्पों की चर्चा करते हुए बताया कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में निरंतर कार्य करने के उद्देश्य से अनेक संगठन और संस्थान कार्यरत हैं। इनमें वनवासी कल्याण आश्रम, विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती, सेवा भारती तथा अन्य सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने संघ के शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया।
संघ के पंच परिवर्तन पर विशेष चर्चा
अपने बौद्धिक में उन्होंने संघ द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बताए गए पंच परिवर्तन के विषयों पर भी प्रकाश डाला। इनमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
आपातकाल और संघ के कार्य-विस्तार का उल्लेख
उन्होंने देश में आपातकाल के समय संघ पर लगाए गए प्रतिबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वयंसेवकों ने संगठनात्मक कार्यों को जारी रखने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले संगठनों और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से सामाजिक कार्यों का विस्तार हुआ, जिससे राष्ट्र एवं समाज के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने में सहायता मिली।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर लगे आरोपों का संदर्भ
उद्बोधन में महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाए गए आरोपों और उस समय उत्पन्न परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। वक्ता ने इस प्रसंग को संघ के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी भी संगठन के विषय में निष्कर्ष निकालते समय तथ्यों और प्रमाणों को महत्व दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक एकता, अनुशासन, सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना रहा। विजयादशमी महोत्सव ने उपस्थित स्वयंसेवकों को समाजहित में कार्य करने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।







स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल के नाम पर सड़क का नामकरण, कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने किया लोकार्पण
आजादी के महानायकों का त्याग और बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता, आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा उनका संघर्ष: डॉ. अरविंद शर्मा
स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवशाली विरासत को सहेजना और उनके सपनों का भारत बनाना हम सभी का दायित्व: डॉ. अरविंद शर्मा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और विरासत के संरक्षण को मिल रही प्राथमिकता
बहादुरगढ़, 20 अक्टूबर। हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मंगलवार को बहादुरगढ़ के गांव टांडा हेड़ी में महान स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल के नाम पर सड़क का नामकरण किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, तपस्या और बलिदान भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। आज हम जिस स्वतंत्र और सशक्त भारत में सांस ले रहे हैं, उसकी नींव हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने संघर्ष और बलिदान से रखी थी। ऐसे महान सपूतों का सम्मान करना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है, उन्होंने गांव स्थित मंदिर में भी पूजा अर्चना की। कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नाम पर सड़क का नामकरण करना उनके संघर्ष, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब इस सड़क से गुजरने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल के योगदान को याद करेगा। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यह जानने और समझने का अवसर मिलेगा कि देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे पूर्वजों ने कितने संघर्ष किए और कितनी कुर्बानियां दीं।
स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी: डॉ. अरविंद शर्मा
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान केवल समारोह आयोजित करने या स्मारक बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों, विचारों और राष्ट्रसेवा की भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना जरूरी है। स्वतंत्रता सेनानियों ने जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था। उनका जीवन हमें एकता, भाईचारे, देशप्रेम और समाजसेवा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में महापुरुषों की विरासत को मिल रहा सम्मान
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपने स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार भी स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और उनके योगदान को चिरस्थायी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृतकाल में हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को याद करना चाहिए, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
गांवों का विकास सरकार की प्राथमिकता, जनभावनाओं का रखा जाएगा सम्मान
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों की पहचान केवल उनके विकास कार्यों से नहीं, बल्कि उनके गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और महान विभूतियों से भी होती है। स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल के नाम पर सड़क का नामकरण इसी गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना है। स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को जीवित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और महान पूर्वजों के योगदान से परिचित हो सकें। आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी चैधरी हजारीलाल के योगदान को याद किया गया। कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने ग्रामीणों से स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में एकता, भाईचारे तथा राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। इस अवसर पर कपूर सिंह दलाल, आजाद दलाल, रणधीर दलाल, धर्मपाल वशिष्ठ, संतराम शर्मा, भगत लाल सरपंच, कृष्णा नंबरदार, पंकज जैन, भीम सिंह प्रणामी, विनोद जून, कृष्ण भारद्वाज, देवेंद्र जून आदि उपस्थित रहे।

एकमुश्त कर निपटान योजना की अंतिम तिथि 30 नवम्बर: डीसी’
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा- हरियाणा सरकार की एकमुश्त निपटान योजना व्यापारियों के लिए लाभकारी’
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: हरियाणा सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों को लाभ देने के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान स्कीम को व्यापारियों ने प्राथमिकता देते हुए उसका भरपूर लाभ उठाया है। इस स्कीम की अभूतपूर्व कामयाबी को देखते हुए सरकार द्वारा एक बार फिर निपटान योजना की तिथि को बढ़ाकर अब 30 नवम्बर कर दिया है। व्यापारी वर्ग अब 30 नवम्बर 2026 तक इस योजना का लाभ उठाकर पुराने बकाया करों का भुगतान सकते हैं। यह जानकारी डीसी वर्षा खांगवाल ने दी। डीसी ने बताया कि इससे जीएसटी में कम से कम बकाया राशियों के साथ आगे बढ़ा जाए ताकि जीएसटी संग्रह को बढ़ाने में अधिक से अधिक समय और ध्यान दिया जा सके। डीसी ने बताया कि सरकार द्वारा गत 1 जून से एक मुश्त निपटान स्कीम, 2026 शुरू की है। जिसके तहत सात कराधान अधिनियमों के तहत निर्धारित बकाया देय राशि के निपटान का प्रावधान है। यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे इस स्कीम में आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। उसका उस वर्ष के लिए उस अधिनियम में संपूर्ण कर, ब्याज एवं जुर्माना राशि माफ हो जाएगी। आवेदक अपने बकाया देय राशि के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम में किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकता है। पूर्ववर्ती हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत बकाया राशि के निपटान के लिए विशेष छूट उपलब्ध है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 को 1 अप्रैल, 2003 से हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 के लागू होने के साथ निरस्त कर दिया गया था। हरियाणा सामान्य बिक्री कर के तहत बकाया देय बहुत पुराने हैं, इसलिए 1 लाख से अधिक कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
वैधानिक प्रपत्रों के जमा न करने के कारण बड़ी संख्या में बकाया राशि का होगा भुगतान
उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त सेल्स अजय कुमार ने बताया कि फार्म सी, फार्म एफ, फार्म एच, फार्म ई1, फार्म ई2, टैक्स इनवॉइसध्वैट सी-4, वैट डी1, वैट डी2 आदि जैसे वैधानिक प्रपत्रों के न जमा करने के कारण बड़ी संख्या में बकाया राशि देय है। इन बकाया को विशेष रूप से लक्षित करने के लिए एक नई छूट प्रस्तावित की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति अब ऐसे प्रपत्र प्रस्तुत करने में सक्षम है, तो उसके कर की मांग उन प्रपत्रों के प्रस्तुत करने से प्राप्त होने वाली छूट की राशि से घटा कर कम कर दी जाएगी, बशर्ते ये प्रपत्र तीन महीने के भीतर सत्यापित हो जाएं। यह लाभ ऐसे फर्जीध्नकली फर्मों को उपलब्ध नहीं होगा जिनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई है। यह लाभ उन वैधानिक प्रपत्रों के लिए भी उपलब्ध नहीं होगा जिन्हें पहले प्राधिकरणों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। यह केवल हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 और केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 से संबंधित बकाया राशि पर लागू होगा। उन्होंने बताया कि स्कीम के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत प्रदान की गई कर छूट में एक रुपए से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, अन्य मामले में कर छूट का 70 प्रतिशत है। अन्य अधिनियमों के अधीन उपलब्ध छूट में एक रुपये से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, 1 लाख से 10 लाख तक 60 प्रतिशत, 10 लाख से 1 करोड़ तक 50 प्रतिशत, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत, 10 करोड़ रुपये से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत, 30 करोड़ रुपये से 60 करोड़ तक 30 प्रतिशत, 60 करोड़ रुपये से अधिक पर 0 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत ब्याज तथा जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी गई है।
बकाया कर राशि की स्लैब तक मिलेगा पूर्ववर्ती स्लैब में दी गई छूट का पूर्ण लाभ’
डीईटीसी ने बताया कि आवेदक को प्रत्येक पूर्ववर्ती स्लैब में दी गई छूट का पूर्ण लाभ उसके बकाया कर राशि की स्लैब तक मिलेगा। बकाया राशि निर्धारित करने वाले किसी भी आदेश के विरूद्ध अपील या मुकदमे में शामिल आवेदक भी लंबित अपीय या मुकदमे को वापस लेने की शर्त के साथ इस स्कीम के तहत आवेदन कर सकते है। निपटान की राशि का भुगतान किस्तों में करने की भी सुविधा स्कीम में दी जा रही है। पांच लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए कोई किस्त नहीं। पांच लाख रुपए से अधिक और पच्चीस लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए दो समान किस्तें। एक किस्त आवेदन जमा करते समय और दूसरी अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर। पच्चीस लाख रुपए से अधिक के निपटान की राशि के लिए तीन किस्तें होगी। आवेदन जमा करते समय निपटान राशि का 40 प्रतिशत, अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर दूसरी किस्त, निपटान राशि का 30 प्रतिशत और अंतरिम आदेश की तिथि से 120 दिनों के भीतर शेष राशि की तीसरी किस्त। ऐसे मामलों में जहां निपटान के लिए आवेदन सही पाया गया है और स्वीकार कर लिया गया है तो आवेदक के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।




डीसी आज बहादुरगढ में सुनेंगी नागरिकों की समस्याएं’
सुबह 11 बजे लघु सचिवालय स्थित कैंप कार्यालय में होगी जनसुनवाई, सभी विभागों के अधिकारी रहेंगे मौजूद’
बहादुरगढ़, 20 अक्तूबर, अभीतक: बहादुरगढ क्षेत्र के नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए बुधवार, 21 अक्टूबर को लघु सचिवालय बहादुरगढ स्थित कैंप कार्यालय में जनसुनवाई होगी। डीसी वर्षा खांगवाल बुधवार सुबह 11 बजे नागरिकों की समस्याएं सुनेंगी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगी। जनसुनवाई के दौरान सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे, ताकि नागरिकों की शिकायतों पर उचित कार्रवाई की जा सके। नागरिकों से अपील है की कि वे निर्धारित समय पर पहुंचकर अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखते हुए समाधान करवाएं।

पराली प्रबंधन स्कीम का लाभ उठाएं किसान: डीसी’
’फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर प्रशासन सख्त, क्विक रेस्पॉन्स टीमें सक्रिय’
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: जिलाभर में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ ही पराली जलाने व प्रदूषण फैलाने वाले घटकों पर प्रभावी रोक लगाने और वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है। डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करते हुए फील्ड में नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने संभावित पराली जलाने की घटनाओं की तत्काल सूचना और प्रभावी कार्रवाई के लिए क्विक रेस्पॉन्स टीम सक्रिय रखने के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। इसलिए किसानों को निरंतर जागरूक करते हुए पराली न जलाने और फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक एवं वैकल्पिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
’फील्ड विजिट के साथ संभावित क्षेत्रों पर रखें पैनी नजर’
डीसी ने संबंधित अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने और पराली जलाने की आशंका वाले क्षेत्रों में पहले से प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले संभावित स्रोतों की निगरानी के लिए आवश्यकता अनुसार ड्रोन का उपयोग करने तथा संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा। उन्होंने भुवन एप और सीआरएम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
पराली प्रबंधन अपनाने पर किसानों को प्रति एकड़ मिलेगी 1200 रुपये प्रोत्साहन राशि
डीसी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पराली को खेत में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना सहित फसल अवशेष प्रबंधन की उपलब्ध तकनीकों की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए। उन्होंने पंचायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा किसानों के साथ निरंतर संवाद करने के निर्देश दिए। किसानों को पराली प्रबंधन से होने वाले पर्यावरणीय और कृषि संबंधी लाभों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
स्वच्छ पर्यावरण के लिए प्रत्येक व्यक्ति निभाए सक्रिय भागीदारी
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए पराली जलाने की समस्या का प्रभावी समाधान जरूरी है। जिला प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करते हुए फसल अवशेष न जलाएं और उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।





ग्राम जहाजगढ़ में धूमधाम से मनाया गया दशहरा पर्व, हनुमान स्वरूप की अगुवाई में निकली शोभायात्राय आकर्षण का केंद्र रही श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी
जहाजगढ़, 20 अक्तूबर, अभीतक: गांव जहाजगढ़ में विजयदशमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। दशहरे के अवसर पर पूरे गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों और हनुमान भक्तों ने मिलकर इस पारंपरिक पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण एकता और आपसी भाईचारे की झलक भी देखने को मिली। इस अवसर पर श्री प्रवीण वर्मा ने हनुमान स्वरूप धारण किया। आकर्षक वेशभूषा और पारंपरिक श्रृंगार में सजे हनुमान स्वरूप ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। इसके साथ ही प्रभु श्रीराम एवं लक्ष्मण की मनमोहक झांकी भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया और वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हनुमान स्वरूप एवं प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए निकली और विभिन्न मार्गों की परिक्रमा करते हुए स्कूल ग्राउंड तक पहुंची। इस दौरान ग्रामीणों और हनुमान भक्तों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने पूरे उल्लास के साथ आयोजन में भाग लिया और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। शोभायात्रा के स्कूल ग्राउंड पहुंचने के बाद दशहरा उत्सव के मुख्य कार्यक्रम के अंतर्गत रावण दहन किया गया। रावण के पुतले का दहन होते ही उपस्थित ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। इस आयोजन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाने वाला विजयदशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में सत्य, मर्यादा और सदाचार के आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। कार्यक्रम के दौरान हनुमान भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में सहभागिता निभाई। गांव के मुख्य मार्गों से निकली शोभायात्रा, प्रभु श्रीराम एवं लक्ष्मण की आकर्षक झांकी और स्कूल ग्राउंड में हुआ रावण दहन दशहरा उत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे। आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने सामूहिक सहयोग और सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया। इस अवसर पर उदय सिंह (सरपंच प्रतिनिधि), जय भगवान वर्मा, कृष्ण यादव, रमेश यादव, पप्पे, लवकेश खुराना, रमेश कुमार, मनोज कुमार और विपिन नारंग सहित अनेक हनुमान भक्त एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने उत्सव में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। ग्राम जहाजगढ़ में आयोजित दशहरा पर्व ने धार्मिक परंपराओं के प्रति ग्रामीणों की आस्था और उत्साह को प्रदर्शित किया। प्रभु श्रीराम एवं लक्ष्मण की झांकी, हनुमान स्वरूप की अगुवाई में निकली शोभायात्रा और रावण दहन के साथ यह पर्व गांव में श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे का संदेश देकर संपन्न हुआ।

घर में चोरी के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, दो दिन के पुलिस रिमांड पर’
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: पुलिस उपायुक्त झज्जर धारणा यादव के दिशा-निर्देशन में कार्रवाई करते हुए थाना माछरौली की पुलिस टीम ने घर में चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। मामले के अनुसंधानकर्ता सहायक उपनिरीक्षक सुनील कुमार की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुमित उर्फ मोनू निवासी गांव खुडन, जिला झज्जर तथा विनय कुमार निवासी नरेला, दिल्ली के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को दो दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।थाना प्रबंधक माछरौली उपनिरीक्षक संदेश कुमार ने बताया कि गांव खुडन निवासी सत्यबीर ने 6 सितंबर 2026 को शिकायत दी थी कि 5-6 सितंबर की रात को वह अपने घर में अकेला सो रहा था। सुबह उठकर देखा तो घर में रखे संदूक का कुंडा टूटा हुआ था। जांच करने पर संदूक में रखे उसकी पत्नी के सोने-चांदी के आभूषण गायब मिले। शिकायत के आधार पर थाना माछरौली में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू की गई थी।मामले की जांच के दौरान सहायक उपनिरीक्षक सुनील कुमार की टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से चोरीशुदा आभूषणों तथा वारदात में प्रयुक्त साधन की बरामदगी के संबंध में पूछताछ की जाएगी।झज्जर पुलिस अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और चोरीशुदा संपत्ति की बरामदगी के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस द्वारा प्रत्येक शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मामलों की गहनता से जांच की जाती है, ताकि अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके।




अपराधियों का महिमामंडन करने वालों पर रहेगी झज्जर पुलिस की विशेष नजर
डीसीपी मुख्यालय फैसल खान ने बताया- सोशल मीडिया पर अपराधियों को हीरो बनाने वालों के खिलाफ होगी नियमानुसार कार्रवाई
झज्जर, 20 अक्तूबर, अभीतक: सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का महिमामंडन करने वालों पर झज्जर पुलिस की विशेष नजर रहेगी। पुलिस ऐसे लोगों की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी,जो अपराधियों को हीरो के रूप में प्रस्तुत कर युवा पीढ़ी को गलत दिशा में प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। इस संबंध में डीसीपी मुख्यालय फैसल खान ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर अपराधियों का महिमामंडन करना समाज और युवाओं के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है। फैसल खान ने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे और अपराध से दूर रखने के लिए हरियाणा सरकार और पुलिस विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियानों में सभी लोगों को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज के समय में जनमानस को प्रभावित करने का एक प्रमुख माध्यम है। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सकारात्मक संदेश देने और युवाओं को सही दिशा दिखाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया या किसी अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का महिमामंडन करता पाया जाता है,तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।डीसीपी मुख्यालय ने कहा कि भयमुक्त और सुरक्षित समाज का निर्माण करना पुलिस के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है। सभी लोगों को अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए युवाओं को अपराध से दूर रखने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहयोग देना चाहिए।




मसानी स्कूल में पीटीएम व दशहरा उत्सव का आयोजन, विद्यार्थियों ने किया रामलीला का मंचन
मसानी, 20 अक्तूबर, अभीतक: मसानी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) एवं दशहरा उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्वयं रावण का स्वरूप तैयार कर रामलीला का मंचन किया और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया। कार्यक्रम में अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे विद्यार्थियों को त्योहारों के महत्व को समझने तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है। विद्यालय की प्राचार्या डॉ. नम्रता सचदेवा ने बताया कि निपुण टीम की पहल के तहत प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों द्वारा रामलीला का मंचन कराया जा रहा था। इसी क्रम में विद्यालय के बच्चों ने भी रामलीला प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करती हैं। उत्सव के दौरान विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने गरबा नृत्य की प्रस्तुति भी दी। इसके माध्यम से बच्चों को गुजरात की सांस्कृतिक परंपराओं और नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के महत्व से अवगत कराया गया। विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को देश की विविध परंपराओं को समझने का अवसर मिला। पीटीएम के दौरान शिक्षकों और अभिभावकों ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति एवं सर्वांगीण विकास पर भी विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा।





सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर की दशहरा परंपरा के 76 गौरवशाली वर्ष पूरे : डॉ. राजेश भाटिया
फरीदाबाद, 20 अक्तूबर, अभीतक: सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर सनातन धर्म महावीर दल एवं पंजाबी सभा, फरीदाबाद द्वारा आयोजित 76वें भव्य दशहरा महोत्सव को सफल बनाने में शहर की विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इसके साथ ही नगर निगम फरीदाबाद का भी आयोजन में सराहनीय सहयोग रहा। सभी संस्थाओं एवं नगर निगम के सहयोग से दशहरा महोत्सव श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, बड़खल के विधायक धनेश अदलक्खा, पूर्व विधायक चंदर भाटिया उपस्थित रहे। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर एवं इससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा इतने वर्षों से धार्मिक आयोजनों की परंपरा को बनाए रखना सराहनीय है। धार्मिक संस्थाएं समाज को जोड़ने, सेवा कार्यों को प्रोत्साहित करने और हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए सभी पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं को बधाई दी। बड़खल के विधायक धनेश अदलक्खा ने कहा कि दशहरा पर्व हमें सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर द्वारा 76 वर्षों से दशहरा महोत्सव की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाना सराहनीय है। ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हमारी नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पूर्व विधायक चंदर भाटिया ने कहा कि सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर का दशहरा महोत्सव फरीदाबाद की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। 76 वर्षों से इस परंपरा का निरंतर निर्वहन करना संस्थापक सदस्यों, मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं के समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, सद्भाव और एकता को मजबूत करते हैं तथा हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं एवं शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंदिर संस्था के प्रधान डॉ. राजेश भाटिया ने कहा कि सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर की दशहरा परंपरा के 76 गौरवशाली वर्ष पूरे होना हम सभी के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है। यह लंबी परंपरा श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, संस्थापकों के समर्पण और समाज के सहयोग का प्रतीक है। संस्था का निरंतर प्रयास रहा है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से हमारी समृद्ध विरासत को संजोकर रखा जाए और आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना संस्था के सभी सदस्यों और श्रद्धालुओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। पंजाबी सभा के प्रधान राज कुमार वोहरा ने कहा कि दशहरा महोत्सव फरीदाबाद की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी सहयोग, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के योगदान की सराहना की। समारोह के दौरान श्रद्धा एवं उत्साह का वातावरण रहा। आयोजक संस्थाओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।






एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक: रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया
आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता, इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जा सकता और आतंकवाद के समर्थकों के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता
कनेक्टिविटी सभी देशों के साथ परामर्श तथा उनकी संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए: राजनाथ सिंह
एससीओ की सफलता युवाओं, उद्यमियों, किसानों और छोटे व्यवसायों के लिए अवसर सृजित करने में निहित है
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने आतंकवाद को शांति और विकास के समक्ष सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया है। वे 20 अक्टूबर, 2026 को ताजिकिस्तान के दुशान्बे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) की 25वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा है कि आतंकवाद के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है और निवेश तथा व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह समाज में कट्टरता को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए और आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। श्री राजनाथ सिंह ने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन की चर्चाओं का उल्लेख किया। उस दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुरक्षा, संपर्क और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर संगठन द्वारा ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। रक्षा मंत्री ने भारत के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि आर्थिक सहयोग समावेशी होना चाहिए और सभी सदस्य देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत का मानना है कि एससीओ को संप्रभु समानता, आम सहमति और आपसी सम्मान के सिद्धांतों के पालन के लिए प्रतिबद्ध एवं दृढ़ रहना चाहिए। संस्थानों की संख्या बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि उपलब्धियां भी बढ़ेंगी। श्री सिंह ने कहा कि नई व्यवस्थाओं को स्पष्ट रूप से पहचानी गई आवश्यकताओं पर केंद्रित होना चाहिए, कार्यों की पुनरावृत्ति से बचना चाहिए और सदस्य देशों को व्यावहारिक लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। रक्षा मंत्री ने भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार व आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं तथा उभरते तकनीकी विभाजनों से उत्पन्न अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के लिए एससीओ में आम सहमति बनाने और उसे ठोस कार्रवाई में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश को सुगम बनाने और विकास को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की आवश्यकता रेखांकित की। इस बात पर जोर देते हुए कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए, श्री सिंह ने वर्ष 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना अपनाने के भारत के समर्थन की पुष्टि की। श्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में लिए गए उन निर्णयों का स्वागत किया, जिनके तहत ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशान्बे में मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को संगठन के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों की प्रभावशीलता उनके बेहतर समन्वय, कार्यकुशलता और निर्धारित समय पर कार्यों के निष्पादन पर निर्भर करेगी। रक्षा मंत्री ने साझा समृद्धि के लिए संपर्क व्यवस्था के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत ऐसी गतिविधियों का समर्थन करता है, जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को सुगम बनाती हैं और विकास के नए अवसर खोलती हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और चाबहार बंदरगाह जैसी पहल मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि संपर्क व्यवस्था सभी देशों के साथ परामर्श तथा उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों पर आधारित न होने वाली परियोजनाएं टिकाऊ नहीं हो सकतीं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरे क्षेत्र में व्यापार की लागत कम करने के लिए केवल भौतिक संपर्क व्यवस्था तक सीमित रहने के स्थान पर व्यापक उपाय अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में सुधार करना और ऐसे डिजिटल समाधान अपनाना जरूरी है, जो आपस में सहज रूप से जुड़ सकें तथा प्रभावी ढंग से काम कर सकें। रक्षा मंत्री ने इस महीने की शुरुआत में मुंबई में आयोजित मध्य एशिया में अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण पर संगोष्ठी का उल्लेख किया और इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए मध्य एशियाई देशों तथा एससीओ के साझेदारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पहली बार आयोजित एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद के आयोजन का भी जिक्र किया। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सफलता का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि हम युवाओं के लिए कितने अवसर सृजित करते हैं, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खोलते हैं, किसानों और छोटे कारोबारियों को किस प्रकार की तकनीकें उपलब्ध कराते हैं तथा विभिन्न समाजों के बीच किस तरह के संबंध विकसित करते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का विकास अनुभव दर्शाता है कि तकनीक और नवाचार में विकास को गति देने तथा समस्याओं के समाधान उपलब्ध कराने की अपार क्षमता है। उन्होंने देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उल्लेख किया, जिसने सार्वजनिक सेवाओं के वितरण की प्रक्रिया को बदलने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दिया है। श्री सिंह ने कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक विकसित किया है। साथ ही, महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर देश का जोर इस मान्यता पर आधारित है कि विकास की दिशा निर्धारित करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन जैसी भारत की वैश्विक पहल किफायती स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग को प्रोत्साहित करता है, जबकि ‘वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन’ स्वच्छ एवं अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देता है। रक्षा मंत्री ने एससीओ से आग्रह किया कि वह पिछले 25 वर्षों में स्थापित मजबूत नींव को और सुदृढ़ करे तथा आम सहमति पर आधारित सहयोग व ठोस परिणामों पर केंद्रित भविष्योन्मुखी रूपरेखा तैयार करे। उन्होंने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। श्री सिंह ने सदस्य देशों को इस वर्ष के अंत में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। बैठक में एससीओ सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक की संयुक्त घोषणा को अपनाया। इसमें वर्ष 2027 के लिए एससीओ के बजट, संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों तथा वर्ष 2026-2030 के लिए पीएमटीईसी की कार्ययोजना को शामिल किया गया है। एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद इस संगठन का एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है। भारत वर्ष 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है और संगठन के विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।



दिल्ली में विजय दशमी समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: सियावर रामचंद्र की जय ! सियावर रामचंद्र की जय ! सियावर रामचंद्र की जय !
विजयदशमी के इस पावन पर्व पर मैं प्रभु श्रीराम, माँ जानकी और बजरंग बली के चरणों में प्रणाम करता हूँ। इस पवित्र वातावरण में, मैं सभी देशवासियों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
साथियों,
आज भारत का कोना-कोना राममय है। गाँव-गाँव, शहर-शहर रामलीला के रस में देश डूबा हुआ है। देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास, हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं है, ये भारत की प्राण ऊर्जा है। इसलिए, आज जब देश का जन-जन अधर्म पर धर्म की विजय का उद्घोष कर रहा है, तो आइये, फिर एक बार मेरे साथ बोलिए –
सियावर रामचंद्र की जय!
सियावर रामचंद्र की जय!
सियावर रामचंद्र की जय!
साथियों,
इस देश ने, इसकी संस्कृति ने और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि, श्रीराम ने राक्षसराज रावण का अंत किया था। ये आस्था इसलिए भी है, क्योंकि प्रभु राम ने हमें ऐसे आदर्श दिये, जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय है।
साथियों,
प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में कितनी ही कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने सच्चाई और नीति का रास्ता कभी नहीं छोड़ा। उनका चरित्र ही ऐसा है, ‘प्रसन्नतां या न गत अभिषेकतः तथा,न मम्ले वनवास दुःखतः अर्थात्, प्रभु राम के चेहरे पर न राजपद पाने की प्रसन्नता हुई, और न वन जाने से उन्हें कोई दुख हुआ। उन्होंने हर संकट को सहकर भी धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। जब हमारे राम जंगल गए, तो वहाँ उन्होंने निषादराज को गले लगाया, माता शबरी को सम्मान दिया। उन्होंने दया, करुणा, प्रेम और सौहार्द के मानदंड स्थापित किए। और जब वापस आकर प्रभु राम अयोध्या के राजा बने, तो ऐसे रामराज्य की स्थापना की, जो आज भी सुशासन का, गवर्नेंस का मानदंड माना जाता है। रामराज्य अर्थात् ऐसा शासन, जहां किसी के प्रति भेदभाव नहीं हो, जहां सबको न्याय मिले, जहां सबको समान अवसर मिलें, जहाँ सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, जन-कल्याण का हो। और इसलिए ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा था – दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा यही मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का आदर्श है। इसलिए हमें हमेशा जनता को जनार्दन मानकर, नागरिक देवो भव के मंत्र पर आगे बढ़ना है। हमें गरीब, वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है।
साथियों,
प्रभु राम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। संकट कितना भी बड़ा क्यों ना हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों ना हो, हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है, हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है, हमें अपने संसाधनों पर विश्वास करना है, अपने संकल्प को शक्ति बनाना है, और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। प्रभु राम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयाँ, हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था। इसलिए राम जी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया, उपलब्ध संसाधनों को जोड़ा। और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। यही सफलता का मूल मंत्र है। अपनी शक्ति पर विश्वास, अपने सामर्थ्य पर भरोसा, अपने संसाधनों का सही उपयोग और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प। आज हमें भी इसी मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है। हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है, हमारे सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है। हमें जनशक्ति से जनकल्याण करते हुए, जनता की हर आकांक्षाओं को पूरा करना है और इसके लिए भी हमें भगवान राम से ही प्रेरणा भी लेनी है।
साथियों,
एक राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान का भाव होता है। और इस आत्मसम्मान में बहुत बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है। इसलिए, आज देश अपनी विरासत और पहचान को भी संरक्षित करने में जुटा है। सदियों तक हमारी धरोहरों को लूटकर विदेश ले जाया गया, लेकिन आज हम अपनी उन धरोहरों को वापिस ला रहे हैं। बीते 12 वर्षों में साढ़े छह सौ से ज्यादा प्राचीन मूर्तियों को भारत वापिस लाया गया है। इसी तरह, भारत अपने सांस्कृतिक केन्द्रों को दुनिया में नई पहचान दिलवा रहा है। बीते वर्षों में, हमारे कितने ही स्थानों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया है। पिछले साल दीपावली को भी यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। ये करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है। हमें इसी निष्ठा से आगे भी काम करना है।
साथियों,
विजयदशमी, विजय का पर्व है, जीत का पर्व है। ये पर्व हमें साहस देता है कि शत्रु कितना भी बड़ा क्यों न हो, लेकिन जब हम सच्चाई और मानवता के साथ होते हैं, तो अंत में जीत हमारी होती है। विजयदशमी की यही भावना हमेशा से भारत की विचारधारा रही है। हमारे ऋषियों ने हमें प्रेरणा दी है – ‘समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।’ अर्थात्, हमारे विचार समान हों, हमारी समितियां,अर्थात् राष्ट्र की सभी संस्थाएं, सभी राजनीतिक दल, राष्ट्रहित के लिए एक साथ खड़े हों। हमें इसी भावना पर चलना होगा, हमें देश के दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ना होगा। देश के मान-सम्मान को चोट पहुंचाने वाली ताकतें, समाज को बांटने वाले लोग, हमारी संस्कृति से नफरत करने वाले की मानसिकता, ये देश के दुश्मन हैं। आज विजयदशमी के शुभ पर्व पर हमें अपना संकल्प फिर दोहराना है, हमें मॉं भारती के शत्रुओं को पहचानना होगा, उन्हें परास्त करना होगा। और राष्ट्र प्रथम का संकल्प लेते हुए, सबको एक साथ आना होगा। मुझे विश्वास है, अयोध्या मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान ‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ की जो संकल्पना हमने की है, उसे हम जरूर पूरा करेंगे। मैं एक बार फिर सभी देशवासियों को दशहरे की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।
जय सिया राम !
जय सिया राम !
जय सिया राम !
भारत माता की जय।
भारत माता की जय।
बहुत-बहुत धन्यवाद।


भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए समर्पितय परमाणु ऊर्जा एआई-आधारित भविष्य को ऊर्जा प्रदान करेगी
डॉ. होमी भाभा का दृष्टिकोण भारत की शांतिपूर्ण परमाणु यात्रा का मार्गदर्शक है, जब देश ऊर्जा सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा हैरू डॉ. जितेंद्र सिंह
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने के लिए व्यक्ति का समझदार होना जरूरी है”, डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में एआई के जिम्मेदार एवं इंसानों के नेतृत्व वाले उपयोग पर बल दिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों को गैर-सरकारी कंपनियों के लिए खोल दिया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए व्यापक अवसर प्राप्त हुए हैं
भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, परमाणु ऊर्जा भरोसेमंद, स्वच्छ बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगारू डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम युद्ध के लिए नहीं बल्कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने उस दृष्टिकोण की पुनः पुष्टि की जिसने शुरुआत से ही देश की परमाणु यात्रा का मार्गदर्शन किया है। श्री सिंह ने श्ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026श् के दौरान एक विशेष बातचीत में कहा कि भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा सेंटरों के लिए जरूरी भरोसेमंद उर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करना भी शामिल है। भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा के दृष्टिकोण को याद करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण कार्यों एवं राष्ट्रीय विकास के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता देश की कार्यनीति के केंद्र में है जबकि देश अपनी उभरती विकासात्मक एवं तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। मंत्री ने कहा कि भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को उसके दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों एवं स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धताओं के रूप में देखा जाना चाहिए। देश ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, इसलिए परमाणु ऊर्जा अन्य ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर निरंतर एवं भरोसेमंद स्वच्छ उर्जा की आपूर्ति करेगी। परमाणु ऊर्जा को तकनीकी विकास के अगले चरण से संबद्ध करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटरों के विस्तार के लिए उर्जा के ऐसे भरोसेमंद स्रोतों की आवश्यकता होगी जो उनकी बढ़ती एवं निरंतर ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के अन्य ऊर्जा कार्यक्रमों की पूरक बनेगी और तकनीकी पर तेजी से निर्भर होती अर्थव्यवस्था की उर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान देगी। केंद्रीय मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई को केवल एक अलग क्षेत्र के रूप में नहीं बल्कि एक ऐसे उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए जिसका उपयोग सभी क्षेत्रों में किया जा सके। अंतरिक्ष एवं जीवन विज्ञान से लेकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास के अन्य क्षेत्रों तक, एआई एक अत्यंत आवश्यक उपकरण बनता जा रहा है। इसके उपयोग में मानवीय समझ के महत्व पर बल देते हुए श्री सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने के लिए व्यक्ति का खुद भी समझदार होना जरूरी है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एआई कई क्षेत्रों में बहुत फायदेमंद है लेकिन इसका सही उपयोग सुनिश्चित करना और साथ ही यह ध्यान रखना कि कोई व्यक्ति या अन्य पक्ष इसका गलत इस्तेमाल न करे, एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हालांकि नियम-कानून मौजूद हैं लेकिन फिर भी यह सुनिश्चित करने के लिए कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो, व्यक्तिगत एवंराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर ईमानदारी होना बहुत जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं। केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार द्वारा महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों को गैर-सरकारी कंपनियों के लिए और अधिक खोलने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण से उन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी का दायरा बढ़ा है जो पहले बहुत सीमित थे। इससे उद्योगों को तकनीकी प्रगति, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के अवसर प्राप्त हुए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह की टिप्पणियां भारत के विकास मार्ग के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ लाती हैं, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा को मजबूत करना और एआई जैसी उभरती तकनीकों का जिम्मेदारी के साथ एवं इंसानों के मार्गदर्शन में उपयोग करना शामिल है। जैसे-जैसे भारत 2047 के अपने विकास लक्ष्यों और 2070 के नेट जीरो के संकल्प की ओर आगे बढ़ रहा है, देश की तकनीकी एवं आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना और रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण होगी।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ईआईएसीपी ने 20 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया, नागरिकों से पटाखे-मुक्त दिवाली मनाने की अपील की
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ -इंडिया के प्रोग्राम सेंटर – रिसोर्स पार्टनर (पीसी-आरपी) ने 20.10.2026 से 08.11.2026 तक एक राष्ट्रव्यापी ग्रीन दिवाली अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे पटाखे न जलाएं और मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के अनुरूप एक स्वच्छ और हरित दिवाली मनाएं। यह अभियान स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचेगा। इसमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत आने वाले 130 शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस अभियान के तहत, नागरिकों को ग्रीन दिवाली यानी पर्यावरण-अनुकूल दिवाली का संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें पटाखे न जलाना, अपने परिवार और पड़ोसियों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना, दीयों और कम बिजली खपत वाली लाइटों का उपयोग करना, सिंगल-यूज प्लास्टिक से बचना, कचरे को अलग-अलग छांटना और स्थानीय उत्पादों को चुनना शामिल है। शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक समूहों से आग्रह है कि वे असेंबली, कक्षाओं, रैलियों और सामुदायिक बैठकों के दौरान संकल्प अभियान आयोजित करें। नागरिकों को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के कार्बन फुटप्रिंट सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे समझ सकें कि उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां और उपभोग पर्यावरण पर कैसा असर डालते हैं और इसके तहत वे अधिक स्थाई आदतें अपना सकें। यह सर्वे यहाँ उपलब्ध है: ीजजचेरूध्ध्ूूपिदकपंूमइहपेण्पदध्ब्ंतइवदऋथ्ववजचतपदजध्ब्ंतइवदऋथ्ववजचतपदजण्ीजउस इस अभियान में हिस्सा लेने वाले स्कूलों, कॉलेजों, ईआईएसीपी केंद्रों, सामुदायिक समूहों और व्यक्तियों से अनुरोध है कि वे अपनी गतिविधियों का विवरण इस ऑनलाइन फॉर्म के जरिए साझा करेंरू ीजजचेरूध्ध्कवबेण्हववहसमण्बवउध्वितउेध्कध्15ीक्इर्रइु्रमव68ाछर।गमभ्फ।ऋैडप्फ7सन्सच्कअब्प्प-हअूकल्ध्अपमूवितउ
जानकारी जमा करते समय संस्थान या संगठन का नाम और स्थान, गतिविधि का विवरण और तारीख, संकल्प लेने वाले प्रतिभागियों की संख्या, जियो-टैग की गई तस्वीरें और एक संक्षिप्त रिपोर्ट शामिल होने चाहिए। चुनी गई प्रविष्टियों को ईआईएसीपी की वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जा सकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज लुधियाना, पंजाब में विजयदशमी उत्सव में भाग लिया और ‘चिट्टे के प्रतीकात्मक रावण’ का दहन किया
बचपन से सुनता आया था कि रावण दहन देखना है तो लुधियाना में जाकर देखो,200 साल से यहाँ पर रामलीला कमेटी रावण दहन का कार्यक्रम करती है
गृह मंत्री ने पंजाब के तीन स्थानों पर नशे के खिलाफ लड़ाई में अपने बेटों को खोने वाले परिवारों से मुलाकात की
परिजनों की आँखों के आँसू, उनके सवाल और वेदना किसी भी व्यक्ति को झंझोड़ कर रख देने वाली है
पंजाब सरकार ने एक हत्या की जाँच ब्ठप् को सौंपी है, उसे बाकी दो हत्याओं की जांच भी ब्ठप् को सौंपे, इन हत्याओं में कितना भी बड़ा व्यक्ति संलिप्त हो, मोदी सरकार उसे ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे डाल देगी
आज विजयदशमी के दिन हम यह संकल्प लेते हैं कि 31दिसंबर 2029 तक पूरे पंजाब को नशे के कारोबार से मुक्त कर एक नशामुक्त पंजाब बनाएंगे
पंजाब की जनता छंतबवजपबे ब्वदजतवस ठनतमंन की जवसस-तिमम ीमसचसपदम पर नशे के कारोबार की सूचना देगी तो मोदी सरकार उस पर कार्रवाई करेगी
मोदी सरकार का रिकॉर्ड है कि हमने जो कहा है, वह करके दिखाया है
धारा 370 और 35 ए चली गई, आतंकवाद समाप्ति की कगार पर है और नक्सलवाद को समाप्त कर दिया है, अब हम नशे को भी समाप्त कर देंगे
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज लुधियाना पंजाब में विजयदशमी उत्सव में भाग लिया और ‘चिट्टे के प्रतीकात्मक रावण’ का दहन किया। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी परंपरा में रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। विजयदशमी का दिन हर व्यक्ति को अपने अंदर के अहंकार, मद, लोभ और अन्य बुराईयों को समाप्त करने का दिन है। आज ही के दिन हजारों साल पहले प्रभु श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और तब से पूरी दुनिया बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में प्रभु श्री राम की विजय को मनाती है। उन्होंने कहा कि वह बचपन से सुनते आए थे कि रावण दहन देखना है तो लुधियाना में जाकर देखो, 200 साल से यहाँ पर रामलीला कमेटी रावण दहन का कार्यक्रम करती है।

श्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने पंजाब के तीन स्थानों पर नशे के खिलाफ लड़ाई में अपने बेटों को खोने वाले परिवारों से आज मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उन परिजनों की आँखों के आँसू, उनके सवाल और वेदना किसी भी व्यक्ति को झंझोड़ कर रख देने वाली है। श्री शाह ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक हत्या की जाँच ब्ठप् को सौंपी है। उन्होंने पंजाब सरकार से कहा कि बाकी दो हत्याओं की जांच भी ब्ठप् को सौंप दे। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन मामलों में न्याय होकर रहेगा। एक बार ब्ठप् को जांच सौंपने के बाद इन हत्याओं में कितना भी बड़ा व्यक्ति संलिप्त हो, मोदी सरकार उसे ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे डाल देगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज विजयदशमी के दिन ही यह संकल्प लेते हैं कि 31 दिसंबर 2029 तक हम पूरे पंजाब को नशे के कारोबार से मुक्त कर एक नशामुक्त पंजाब बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अपनी जान गंवाने वाले तीनों बहादुरों को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कोई नहीं हो सकती। श्री शाह ने कहा कि पंजाब की जनता छंतबवजपबे ब्वदजतवस ठनतमंन की जवसस-तिमम ीमसचसपदम पर नशे के कारोबार की सूचना देगी तो मोदी सरकार उस पर कार्रवाई करेगी। श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का रिकॉर्ड है कि हमने जो कहा है, वह करके दिखाया है। धारा 370 और 35 ए चली गई, आतंकवाद समाप्ति की कगार पर है और नक्सलवाद को हमने समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब हम नशे के कारोबार को भी समाप्त कर देंगे।



कर्नाटक के मैसूरु में 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न
पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले मेले में 12 राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों के हजारों लोगों ने शिरकत की
मेले में 83 स्टॉल लगाए गए, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों के थे जिनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं
मंत्री रामदास आठवले और केन्द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने मैसूरु में शिल्प समागम मेले का दौरा किया
नई दिल्ली, 20 अक्तूबर, अभीतक: कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 हजारों लोगों की सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मेले का आयोजन सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया था। इस मेले का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों के लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। इनमें मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत तीन राष्ट्रीय निगमों के सहयोग से लाभान्वित कारीगर भी शामिल थे। ये तीन निगम हैंकृराष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी)। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) के उप महाप्रबंधक श्री रजनीश बैंकर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाजार संपर्क को मजबूत बनाना, पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देना और लक्षित समूहों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर सृजित करना है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है और अब तक आयोजित ऐसे 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं। श्री बैंकर ने कहा कि मैसूरु में आयोजित यह मेला वित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम मेला था।



अधिकारी ने बताया कि मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए थे। इनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं। आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले खाद्य स्टॉल भी लगाए गए थे। उन्होंने आगे बताया कि मेले में 12 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के कारीगरों ने भाग लिया। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल थे। उप महाप्रबंधक ने बताया कि प्रदर्शनी में पारंपरिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इनमें हस्तशिल्प की वस्तुएं, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्तियां, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट वाले उत्पाद, कांजीवरम साड़ियां, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग एवं पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बने दीवार पर सजाने वाले उत्पाद तथा बेडशीट और कुशन कवर शामिल थे। यह मंच कारीगरों को अपने उत्पादों को बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने और संभावित ग्राहकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने में भी सहायक है। अधिकारी ने आगे बताया कि शिल्प समागम मेला सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा इसके तीन राष्ट्रीय निगमोंकृराष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी)कृकी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्रसारित करने का मंच भी है। इस पहल का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों के लिए उपलब्ध सहायता और विकास के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा उद्यमिता और आर्थिक सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना है। मंत्रालय ने भारत और विदेशों में विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लक्षित समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगर आजीविका उन्नयन कार्यक्रम) भी शुरू किया है। इस पहल के अंतर्गत उत्पादों की दृश्यता बढ़ाने और उनकी ऑनलाइन बिक्री को सुगम बनाने के लिए उन्हें ‘भारत ट्यूलिप’ ब्रांड के तहत प्रस्तुत किया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण करते हुए कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ करना और भारत की समृद्ध शिल्पकला को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है। अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराकर तथा यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन और दोपहर एवं रात्रि के भोजन सहित अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करके मेले में उनकी भागीदारी को सुगम बनाता है। इस सहायता से कारीगर स्टॉल का किराया और भागीदारी से संबंधित निर्धारित खर्च वहन किए बिना मेले में शामिल हो सकते हैं तथा अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकते हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले ने शिल्प समागम मेले के दौरे के दौरान समाज के कमजोर वर्गों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के प्रति केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर किया। मंत्री ने मेले में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, जहां हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्तियां, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट वाली वस्तुएं, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बनी दीवार सजावट की वस्तुएं तथा बेड और कुशन कवर सहित विविध प्रकार के उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। उन्होंने पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले खाद्य स्टॉलों का भी दौरा किया, जिन्होंने आगंतुकों के अनुभव को और भी बेहतर बनाया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केन्द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने भी मेले का दौरा किया। मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान के दौरे के दौरान सचिव ने स्टॉलों का निरीक्षण किया और स्टॉल प्रबंधकों तथा आगंतुकों के साथ बातचीत की। केन्द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत मंत्रालय की कार्यान्वयनाधीन योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों की व्यापक समीक्षा करने के लिए राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के साथ बैठक हेतु मैसूरु के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर थे। श्री पंत ने कहा कि ऐसी पहलों के माध्यम से मंत्रालय बाजार तक पहुंच को सुदृढ़ करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिल्प समागम मेले ने आगंतुकों को भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को देखने-परखने के साथ-साथ कारीगरों की आजीविका को सहयोग देने का अवसर प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान मंत्रालय गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में अतिरिक्त शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है। मंत्रालय और इसके तीनों राष्ट्रीय निगम प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लेंगे। इनमें 14 से 27 नवम्बर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2026 तथा फरवरी 2027 में फरीदाबाद में आयोजित होने वाला सूरजकुंड मेला शामिल हैं। शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय लक्षित समूहों के कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच, उद्यमिता और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। साथ ही, मंत्रालय भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्पों के संरक्षण तथा उन्हें व्यापक पहचान दिलाने के प्रयासों को भी समर्थन प्रदान कर रहा है।
