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सेवा संकल्प अभियान से मजबूत होगी जनभागीदारी की भावना : डीसी
जिलाभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक होंगे जनकल्याणकारी कार्यक्रम
17 सितंबर को नए बस स्टैंड परिसर में आशीर्वाद का दीया मॉड्यूल के साथ होगा अभियान का शुभारंभ
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: समाज के प्रत्येक वर्ग को सेवा कार्यों से जोडने और जनकल्याण की भावना को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जाएगा। अभियान के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से सेवा, सहयोग और सहभागिता की संस्कृति को मजबूत किया जाएगा। साथ ही, विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को रेखांकित करने पर जोर रहेगा। डीसी वर्षा खांगवाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ 17 सितंबर को शहर के नए बस स्टैंड परिसर में आशीर्वाद का दीया मॉड्यूल के तहत किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं।
यह रहेगा कार्यक्रम का प्रारूप
डीसी ने बताया कि हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न मॉड्यूल में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें आशीर्वाद का दीयाध्रक्तदान, मेरे सपनों का भारत, चित्र सेवा, नमो सेवा ,अनकही कहानियां, आंगन मिलन सेवा, सेवा की कहानी, सेवा ज्योति कलश यात्रा, विकसित भारत का संकल्प, वडनगर वाराणसी सेवा यात्रा, सेवा मेरा योगदान, सेवा सेतु अभियान, सेवा के रंग, राष्ट्र के संग, सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज तथा सुशासन सेवा संवाद प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है। रक्तदान जैसी जनसेवा गतिविधियों से जरूरतमंदों की सहायता को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि चित्र सेवा और अनकही कहानियों जैसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच तथा सेवा भावना को सामने लाएंगे। डीसी ने कहा कि सेवा ज्योति कलश यात्रा, विकसित भारत का संकल्प और सेवा सेतु अभियान के माध्यम से जनभागीदारी को व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज, सेवा कार्यों में नए विचारों और नवाचार को बढ़ावा देगा। सुशासन सेवा संवाद के जरिए सेवा, सुशासन और जनकल्याण के बीच संबंध को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
आपसी समन्वय से तैयारियां पूरी करें विभाग
बैठक में डीसी ने सभी नोडल अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को अभियान से संबंधित तैयारियां पूरी गंभीरता और समन्वय के साथ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान समाज के हर वर्ग को सेवा कार्यों से जोडने और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से जनकल्याण को नई गति देने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर एडीसी जगनिवास, सीईओ जिला परिषद मनीष कुमार फौगाट, एसडीएम बादली विशाल कुमार, एसडीएम बेरी रेणुका नांदल व सीटीएम ऋतु सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

संस्कारम यूनिवर्सिटी में श्रद्धा और उल्लास के साथ हुई भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापना
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: संस्कारम विश्वविद्यालय परिसर में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापना श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. महिपाल के साथ विद्यार्थियों द्वारा भगवान गणेश जी की मूर्ति को पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ परिसर में लाया गया, जिसके बाद विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मूर्ति की स्थापना की गई।
मूर्ति स्थापना समारोह के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना में भाग लिया व भगवान गणेश से विश्वविद्यालय की उन्नति, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और सभी के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई।कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भगवान गणेश को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां भी दीं। भक्तिमय संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सव और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात आयोजित भव्य गणेश आरती में चांसलर, शिक्षकों, विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से भाग लिया और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. महिपाल ने सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में संस्कार, एकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के प्रतीक हैं तथा उनका आशीर्वाद विद्यार्थियों को जीवन में सफलता की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा विश्वविद्यालय परिसर “गणपति बप्पा मोरया”के जयघोष से गूंज उठा। समारोह का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। गणेश चतुर्थी के इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर में आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण स्थापित किया।




मातृ शक्ति के सशक्तिकरण के लिए जिलाभर में चलाया जा रहा है प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पंजीकरण अभियान
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत प्रत्येक गांव तक पहुंचाई जा रही है योजना की जानकारी
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: डीसी वर्षा खांगवाल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत जिलाभर में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत विशेष जागरूकता एवं पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योजना से जोड़कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल को बेहतर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी नेहा दहिया ने कहा कि स्वस्थ माँ ही स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला होती है। सरकार द्वारा चलाई जा रही मातृ वंदना योजना महिलाओं को गर्भावस्था और शिशु देखभाल के दौरान आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे वे अपने खान-पान, स्वास्थ्य और आराम का बेहतर ध्यान रख सकें। उन्होंने कहा कि जिले की प्रत्येक पात्र महिला तक योजना का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर जिला के सभी गांवों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं एवं उनके परिवारों को योजना की जानकारी दे रही हैं तथा पात्र महिलाओं का पंजीकरण भी सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पोषण, मातृ स्वास्थ्य, शिशु देखभाल और संतुलित आहार के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविरों के माध्यम से महिलाओं को योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने सभी पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से अपील की कि वे इस योजना का लाभ लेने के लिए समय पर पंजीकरण करवाएं तथा अपने स्वास्थ्य और पोषण का विशेष ध्यान रखें। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि जिला की प्रत्येक माता और शिशु तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचे।


हरियाणवी लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हुआ जिला स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव: डीसी
डीसी वर्षा खांगवाल ने किया प्रतिभागियों को प्रोत्साहित
पांचों ब्लॉक की सांस्कृतिक टीम ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां, लोकनृत्य, रागनी, सोलो डांस, ग्रुप डांस व स्किट में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
आज भी आयोजित किए जाएंगे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, विद्यार्थी मंच पर प्रस्तुत करेंगे अपनी कला
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: जिला स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर डीसी वर्षा खांगवाल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर प्रस्तुत करने के लिए शुभकामनाएं दी। जिला शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय महोत्सव में जिला के पांचों ब्लॉक से पहुंची सांस्कृतिक टीम ने विभिन्न विधाओं में भाग लेते हुए अपनी कला एवं प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। महोत्सव में सोलो डांस, ग्रुप डांस, रागनी और स्किट सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। मंगलवार को कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल को हरियाणवी लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ संस्कृति से जोड़ता है महोत्सव: डीसी
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि सांस्कृतिक महोत्सव विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हरियाणवी लोक कला, लोकनृत्य, रागनी और हमारी परंपराएं हमारी पहचान हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, रचनात्मकता और टीम भावना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा निखारने के पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी राज्य स्तर पर करेंगे जिले का प्रतिनिधित्व: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी रतिंद्र सिंह ने बताया कि जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को आगामी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में जिला का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा को पहचानना, उसे निखारना तथा लोक कला एवं संस्कृति के प्रति उनकी रुचि को बढ़ावा देना है। जिला शिक्षा अधिकारी रतिंद्र सिंह तथा जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी राजबाला मलिक ने सांस्कृतिक महोत्सव के शुभारंभ के लिए डीसी वर्षा खांगवाल का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं सहयोग से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिल रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
लोकनृत्य और रागनी की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने लोकनृत्य, हरियाणवी गायन और पारंपरिक लोक धुनों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। रागनी की पारंपरिक गायन शैली और लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं विद्यार्थियों ने स्किट के माध्यम से सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए महत्वपूर्ण संदेश भी दिए। पांचों ब्लॉक से पहुंची सांस्कृतिक टीमों के बीच विभिन्न विधाओं में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
आज भी मंच पर दिखेगा कला और प्रतिभा का रंग
डीईओ रतिंद्र सिंह ने बताया कि दो दिवसीय जिला स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएं आयोजित किए जाएंगे। पांचों ब्लॉक की सांस्कृतिक टीमें अलग-अलग विधाओं में अपनी प्रस्तुतियां देंगी। विद्यार्थियों को अपनी कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
यह रहे मौजूद
इस अवसर पर डीपीसी अनिल शर्मा, डिप्टी डीईओ रूपेंद्र नांदल, डिप्टी डीईओ देवेंद्र सिंह, बीईओ झज्जर सुनीता, बीईओ मातनहेल सुरेश पाल सुहाग, बीईओ शेर सिंह, बीईओ जयपाल दहिया, बीईओ भारती वर्मा, डीपी जयकवँर, प्राचार्य रमेश कुमार, प्राचार्य जोगिंदर सिंह, प्राचार्य राजेंद्र सिंह, प्राचार्य अजय खोखर, प्राचार्य संजीव खत्री, प्राचार्य कृष्ण धनखड़, प्राचार्य सुनील दत्त, प्राचार्य निर्मल कुमार, प्राचार्य भूप सिंह, इंफॉर्मेशन ऑफिसर रविंद्र कौशिक, डीएसएस विक्रम, संजय शर्मा, प्रवीण जाखड़, कृष्ण वशिष्ठ, डॉ. महाबीर, रवीश सुहाग, मैनावंती, सुनीता देवी, नितिका सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।




संस्कारम विद्यालय की अंशिका ने हरियाणा राज्य कुश्ती चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, मैट से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: संस्कारम विद्यालय खातीवास के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है, जब विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा अंशिका ने हरियाणा राज्य कुश्ती चैंपियनशिप (भ्ंतलंदं ैजंजम ॅतमेजसपदह ब्ींउचपवदेीपच) में शानदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-14 वर्ग की 30 किलोग्राम भार श्रेणी में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अंशिका की इस उपलब्धि ने विद्यालय व क्षेत्र दोनों का नाम रोशन किया है।
कड़ी मेहनत व समर्पण का परिणाम
गांव शिलाना निवासी श्री राकेश की पुत्री अंशिका ने अपने दमदार दांव-पेंच व बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी इस सफलता ने उनकी प्रतिभा, अनुशासन तथा कुश्ती के प्रति उनके अटूट समर्पण को एक बार फिर साबित किया है। पदक जीतकर विद्यालय पहुंचने पर अंशिका का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया, जहां उन्होंने अपने कोच व प्राचार्या के साथ अपनी खुशी साझा की।
राष्ट्रीय मंच की ओर बढ़ा कदम
राज्य स्तर पर स्वर्णिम सफलता के साथ ही अंशिका अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए अपनी तैयारियों में जुट गई हैं। मैट से राष्ट्रीय मंच तक के इस सफर में विद्यालय परिवार को पूरा विश्वास है कि अंशिका आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यालय व क्षेत्र का गौरव बढ़ाएंगी।
प्राचार्या डॉ प्रीति गोयल ने दी बधाई
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति गोयल ने अंशिका को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने अंशिका के परिवार तथा खेल प्रशिक्षकों के अथक प्रयासों की भी भरपूर सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी उपलब्धियां अन्य छात्रों को भी खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
चेयरमैन डॉ महिपाल जी ने जताया गर्व
संस्कारम शिक्षण संस्थान के चेयरमैन डॉ. महिपाल जी ने अंशिका की इस बड़ी उपलब्धि पर उन्हें, उनके अभिभावकों तथा खेल प्रशिक्षकों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि अंशिका की यह सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है तथा उन्हें पूर्ण विश्वास है कि अंशिका राष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय व क्षेत्र का नाम रोशन करेंगी। अंशिका की इस उपलब्धि से संस्कारम परिवार में उत्साह एवं गर्व का माहौल है। विद्यालय परिवार ने उन्हें आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


एल. ए. स्कूल में गणेश चतुर्थी के शुभावसर पर गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की गई
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: एल. ए. सी. सै. स्कूल झज्जर में कल 14 सितंबर, 2026 को गणेश चतुर्थी के शुभावसर पर गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की गई। सभी विधि विधानों के आधार पर इस कार्यक्रम का संचालन किया गया। स्कूल संचालक जगपाल गुलिया, जयदेव दहिया,अनिता गुलिया, नीलम दहिया, योजित गुलिया, भविष्य दहिया ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सभी जनकल्याण व समाज की सुख -शांति के लिए श्री गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित किया गया। पांच दिनों तक लगातार पूजा-पाठ करके भगवान श्री गणेश जी का आशीर्वाद ग्रहण किया जाएगा। स्कूल प्रबंधक के. एम. डागर व स्कूल प्राचार्या निधि कादयान ने बताया कि भगवान श्री गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इनका पूजन सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले किया जाता है अतः यह पर्व हम सबके लिए विशेष योगदान रखता है। भूगोल प्राध्यापक मुकेश शर्मा ने बताया की किसी भी नए कार्य के लिए श्री गणेश जी की स्तुति बहुत आवश्यक हो जाती है। दक्षिण भारत में इस पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के महत्व को हमें सभी जनमानस तक पहुँचा कर अपनी हिन्दू परम्परा को आगे बढ़ाना होगा। इस अवसर पर स्कूल एचऑडी रविंद्र लोहचब,पूजा कादयान के साथ स्कूल डीपीई अमित लोहचब, विशाल सिंह, महेंद्र सैनी उपस्थित रहे।




महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता: आशीष शर्मा
मलिकपुर व पहाड़ीपुर में आयोजित हुआ उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (च्छठ त्ैम्ज्प्), झज्जर द्वारा आज गांव मलिकपुर एवं पहाड़ीपुर में उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाओं एवं युवाओं को संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा सरकार एवं बैंकों की ऋण योजनाओं की जानकारी दी गई और मलिकपुर में शनिवार से एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जायगा। इस अवसर पर च्छठ त्ैम्ज्प् झज्जर के कार्यालय सहायक आशीष शर्मा ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का उत्थान एवं उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना समाज की प्रगति और समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएं अपनी क्षमताओं को पहचानकर उनका उपयोग करती हैं, तो इससे न केवल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, बल्कि परिवार और समाज भी मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है। शिक्षित एवं आत्मनिर्भर महिला अपने परिवार, बच्चों की शिक्षा तथा समाज को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कार्यक्रम में महिलाओं को विभिन्न ऋण योजनाओं, बैंक में खाता खुलवाने, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी गई। आशीष शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण केवल पुरुष की आय पर परिवार का संचालन करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा एवं भविष्य सुनिश्चित करने में सहायक होगा। उन्होंने बताया कि च्छठ त्ैम्ज्प् झज्जर द्वारा स्वरोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से लगभग 60 प्रकार के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम निशुल्क संचालित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात पात्र प्रशिक्षणार्थियों को बैंक द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार स्वरोजगार स्थापित करने हेतु ऋण प्राप्त करने में भी मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों, बैंकिंग सेवाओं तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर मलिकपुर गांव की सरपंच बल्केश, आशा वर्कर सुनीता देवी और प्रभात सेवा छळव् से प्रदीप स्वामी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में विशेष योगदान दिया। संस्थान की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि च्छठ त्ैम्ज्प्, पुरानी तहसील, झज्जर में कंप्यूटर अकाउंटिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इच्छुक युवक-युवतियां संस्थान से संपर्क कर इस निशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं।

इंजीनियर्स डे पर संस्कारम विश्वविद्यालय में दिखी तकनीकी प्रतिभा और नवाचार की झलक
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: संस्कारम विश्वविद्यालय, झज्जर के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा इंजीनियर्स डे-2026 का आयोजन 15 सितंबर को विश्वविद्यालय के डी एल सी ऑडिटोरियम में उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान, नवाचार, रचनात्मक सोच एवं समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों नेओपन आइडिया प्रेजेंटेशनके माध्यम से अपने नवीन एवं रचनात्मक विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने तकनीकी समस्याओं के समाधान, नवाचार तथा भविष्य की तकनीकों से संबंधित अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को मनोरंजक एवं जीवंत बना दिया।कार्यक्रम मेंटेक्निकल क्विजका भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए इंजीनियरिंग, तकनीकी ज्ञान एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। डॉ. गणेश कुमार दीक्षित एवं डॉ. निशांत जाखड़ ने क्विज एवं विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण विशेषज्ञ व्याख्यान मेंडॉ. विजय कुमार लांबा, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, गुरुग्राम विश्वविद्यालयने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने इंजीनियरिंग के बदलते स्वरूप, तकनीकी क्षेत्र में हो रहे विकास तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, स्मार्ट सिस्टम एवं एडवांस्ड कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने ज्ञान एवं कौशल को विकसित करने तथा निरंतर सीखने और नवाचार के लिए प्रेरित किया।विशेषज्ञ व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों ने डॉ. लांबा से संवाद करते हुए तकनीकी क्षेत्र, करियर एवं भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें व्यावहारिक ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर परविश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजीत सिंहने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नवाचार, रचनात्मकता एवं व्यावहारिक कौशल का विकास अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने तथा भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन मेंकार्यक्रम संयोजक सुश्री सोनिया एवं सुश्री पद्मिनीका महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।इस अवसर परस्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. (डॉ.) गणेश कुमार दीक्षितएवंकंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशांत जाखड़सहितस्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




पाकिस्तानी जासूसी एजेंसियों के डिजिटल जाल से रहें सावधान, झज्जर पुलिस ने युवाओं को किया जागरूक’
झज्जर पुलिस ने युवाओं से संदिग्ध कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑनलाइन जॉब ऑफर से सतर्क रहने की अपील की’
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई तथा पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स द्वारा डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसाने के प्रयासों को देखते हुए झज्जर पुलिस ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। पुलिस उपायुक्त मुख्यालय झज्जर फैसल खान ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।उन्होंने बताया कि युवाओं को धार्मिक एवं मजहबी भावनाओं का दुरुपयोग कर बहकाने, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के माध्यम से दोस्ती करने और बाद में ब्लैकमेल करने जैसे प्रयास किए जा सकते हैं। इसी प्रकार ़92 कोड या अन्य विदेशी नंबरों से ज्ञठब्, लॉटरी, कार अथवा भारी कैश प्राइज जीतने के फर्जी संदेश भेजकर ठगी की जा सकती है। इनाम दिलाने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस मांगने अथवा फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल की जानकारी हासिल करने का प्रयास भी किया जा सकता है।च्प्व् एजेंट पार्ट-टाइम जॉब, वर्क फ्रॉम होम, डेटा एंट्री और टेलीग्राम टास्क के नाम पर युवाओं को लालच देकर फोटो, वीडियो, लोकेशन या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। फर्जी लोन व बेटिंग ऐप्स के माध्यम से भी युवाओं को आर्थिक और ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसाया जा सकता है।डीसीपी फैसल खान ने कहा कि देशविरोधी या जासूसी गतिविधियों में संलिप्तता गंभीर अपराध है और कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो सकती है। इससे युवा का कैरियर, भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नुकसान पहुंच सकता है।झज्जर पुलिस की अपील है कि अनजान ़92 नंबरों को ब्लॉक व रिपोर्ट करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, लॉटरी या मुफ्त इनाम के नाम पर पैसे न भेजें, अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें तथा निजी फोटो, वीडियो, लोकेशन या संवेदनशील जानकारी किसी से साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
गाय, खरगोश व कबूतर आदि के बैनर पर पैसे लगाकर सट्टा पर्ची खेलने वाले चार आरोपी काबू
बहादुरगढ़, 15 सितम्बर, अभीतक: थाना शहर बहादुरगढ़ पुलिस ने सार्वजनिक स्थान पर गाय, खरगोश, कबूतर आदि के बैनर पर पैसे लगाकर सट्टा पर्ची खेलने के मामले में कार्रवाई करते हुए चार व्यक्तियों को काबू किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान योगेश, बिजेंदर, अमित और अनिल के रूप में हुई है।थाना शहर बहादुरगढ़ प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस टीम को क्षेत्र में सट्टा खेलने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मौके से चार व्यक्तियों को काबू किया। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 15,300 रुपये की सट्टा राशि बरामद की गई है। आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई की जा रही है।थाना प्रभारी ने कहा कि क्षेत्र में अवैध रूप से सट्टा एवं जुआ खेलने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों से दूर रहें और ऐसी गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें।





विद्यार्थियों को सुरक्षित और जिम्मेदार नागरिक बनने का उपनिरीक्षक सत्यप्रकाश ने संदेश देकर किया जागरूक’
बहादुरगढ़, 15 सितम्बर, अभीतक: पुलिस उपायुक्त मुख्यालय फैसल खान के दिशा-निर्देशन में झज्जर पुलिस द्वारा विद्यार्थियों को कानून, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उपनिरीक्षक सत्यप्रकाश की पुलिस टीम द्वारा सर नवयुग एसएस स्कूल, जौहरी नगर, वार्ड नंबर-5, लाइनपार बहादुरगढ़ में विद्यार्थियों के साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर विश्वास न करें तथा सोशल मीडिया और इंटरनेट का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें। अपनी निजी जानकारी, फोटो, पासवर्ड, ओटीपी और बैंक संबंधी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करने की सलाह दी गई।पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया। साथ ही सड़क पर चलते समय यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट व सीट बेल्ट के महत्व तथा आपात स्थिति में पुलिस की सहायता लेने के बारे में भी जानकारी दी गई।उपनिरीक्षक सत्यप्रकाश ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनमें सुरक्षा, अनुशासन तथा कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी परिजनों, शिक्षकों या पुलिस को देने की अपील की।
स्मैक के साथ एक आरोपी काबू’
बहादुरगढ़, 15 सितम्बर, अभीतक: एंटी नारकोटिक सेल प्रभारी उप निरीक्षक ऋषिपाल ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी एवं बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक व्यक्ति को नशीले पदार्थ स्मैक सहित काबू किया।उन्होंने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि संजीत निवासी उत्तर प्रदेश, फिलहाल बहादुरगढ़, निजामपुर मोड़, लाइन पार बहादुरगढ़ में नशीला पदार्थ लेकर उसे बेचने की फिराक में खड़ा है। सूचना पर तत्परता से कार्रवाई करते हुए एंटी नारकोटिक सेल की पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उपरोक्त व्यक्ति को काबू कर लिया। नियम अनुसार राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति में पकड़े गए व्यक्ति की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से नशीला पदार्थ स्मैक बरामद हुआ, जिसका वजन 3.42 ग्राम पाया गया। पुलिस टीम ने बरामद नशीले पदार्थ को कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ थाना लाइन पार बहादुरगढ़ में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में आगामी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। पुलिस द्वारा नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री एवं तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।




एसपीओ भर्ती प्रक्रिया के तहत 144 पूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों का हुआ साक्षात्कार’
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: झज्जर पुलिस में विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया के तहत मंगलवार को पुलिस लाइन झज्जर में आवेदकों के साक्षात्कार एवं आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। पुलिस आयुक्त सिमरदीप सिंह के दिशा-निर्देशन तथा पुलिस उपायुक्त मुख्यालय फैसल खान के मार्गदर्शन में गठित चयन कमेटी द्वारा भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया गया।पुलिस लाइन झज्जर स्थित कार्यालय में पुलिस उपायुक्त क्राइम शुभम सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त हितेश कुमार तथा निरिक्षक ऋषिपाल के अधिकारियों की टीम द्वारा एसपीओ पद के लिए आवेदन करने वाले पूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बलों के पूर्व जवानों का साक्षात्कार लिया गया। इस दौरान कुल 144 आवेदकों द्वारा साक्षात्कार दिया गया। साक्षात्कार के साथ आवेदकों द्वारा प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच की गई।इस संबंध में डीसीपी क्राइम शुभम सिंह ने बताया कि एसपीओ भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संपन्न करवाई जा रही है। साक्षात्कार एवं दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित मापदंडों के अनुसार चयनित किए जाने वाले एसपीओ कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के उपरांत चयनित एसपीओ कर्मचारियों को जिले के विभिन्न पुलिस कार्यालयों, थानों एवं अन्य आवश्यक स्थानों पर तैनात किया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराना तथा कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित कार्यों में पूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बलों के अनुशासन, अनुभव एवं कार्यकुशलता का लाभ लेना है।

सोनी पुनिया: दृष्टि गई, हौसला नहीं
बहादुरगढ, 15 सितम्बर, अभीतक: बहादुरगढ़ निवासी कुमारी सोनी पुनिया, पुत्री श्री कुलदीप सिंह पुनिया, ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनके पिता आर्मी में कार्यरत थे। सोनी पुनिया को बचपन में दवा के रिएक्शन के कारण आँखों में परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने दसवीं, बारहवीं, बी.ए., बी.एड. और एम.ए. की शिक्षा पूरी की। वर्तमान में वे न्दपअमतेपजल व िक्मसीप में पीएच.डी. स्कॉलर हैं। उन्होंने ब्ज्म्ज् और भ्ज्म्ज् के साथ-साथ न्ळब्-छम्ज् में भी सफलता हासिल की है और न्ळब्-छम्ज् में 97.9 चमतबमदजपसम प्राप्त किया है। उनकी यह उपलब्धि संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक मिसाल है।



एनसीआर में 775 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे, पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में होंगे स्थापित: परिवहन मंत्री अनिल विज
एएनपीआर कैमरों की स्थापना पर खर्च होंगे 41 करोड़ 74 लाख रुपये, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की पहचान और पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोल पंपों पर लगाए जाएंगे कैमरे: अनिल विज
चण्डीगढ़, 15 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा के परिवहन मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में परिवहन विभाग द्वारा ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि योजना के प्रथम चरण में एनसीआर के प्रमुख जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये की राशि खर्च होगी। श्री विज ने बताया कि इस संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। परिवहन मंत्री ने बताया कि एनसीआर के इन प्रमुख जिलों में जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों (म्दक-व-िस्पमि टमीपबसमेकृम्स्टे) की पहचान तथा पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत के एनसीआर क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लगभग 775 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि ऐसे पुराने वाहनों की प्रभावी पहचान की जा सके।
गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे
उन्होंने बताया कि यह कार्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (ब्वउउपेेपवद वित ।पत फनंसपजल डंदंहमउमदजकृब्।फड) द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। इस प्रकार इन चार जिलों में कुल 775 कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये की राशि खर्च होगी। श्री विज ने बताया कि प्रदेश में कुल लगभग 2,780 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। इनमें से प्रथम चरण में एनसीआर के चार प्रमुख जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत में 775 कैमरे स्थापित किए जाएंगे।
30 सितंबर तक कैमरे लगाने का लक्ष्य, ब्।फड के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जा सके’’
परिवहन मंत्री ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (ब्।फड) के निर्देशों के अनुसार एएनपीआर कैमरों की स्थापना का कार्य 30 सितंबर, 2026 तक पूरा किया जाना है। इसके पश्चात 1 अक्टूबर, 2026 से हरियाणा के एनसीआर जिलों में जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं की जानी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, ताकि ब्।फड के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जा सके।
पुराने वाहनों की प्रभावी पहचान पर जोर, एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी
श्री विज ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल एएनपीआर कैमरे स्थापित करना नहीं है, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से पुराने एवं जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की प्रभावी पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों को लागू करना है। उन्होंने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ब्।फड द्वारा जारी निर्देशों की अनुपालना हरियाणा सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि एएनपीआर तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

गुरुग्राम की 6 सड़कें बनेगी स्मार्ट मॉडल रोड़’
इन सड़कों पर लगेगा स्मार्ट सिस्टमरू जाम दिखेगा, रास्ता बताएगाय मुसीबत में एक बटन से मिलेगी पुलिस हेल्प’
इन प्रमुख सड़कों पर डिजिटल बोर्ड, पब्लिक अनाउंसमेंट और इमरजेंसी कॉल पॉइंट भी लगाए जाएँगे’
आईसीसीसी से 24 घंटे होगी निगरानी, ट्रैफिक-डायवर्जन से लेकर आपदा तक की सूचना मिलेगी’
गुरुग्राम, 15 सितम्बर, अभीतक: गुरुग्राम की सड़कों पर निकट भविष्य में ट्रैफिक व्यवस्था सिर्फ पुलिसकर्मियों और सिग्नलों के भरोसे नहीं रहेगी। ऐसा इसलिए कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) शहर की 6 प्रमुख सड़कों को स्मार्ट मॉडल रोड के रूप में विकसित करने जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जीएमडीए के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुग्राम में प्रथम चरण में एमजी रोड (इफको चैक से गोल्फ कोर्स रोड), हैमिल्टन कोर्ट रोड, व्यापार केंद्र रोड, अतुल कटारिया चैक से सिग्नेचर टावर, राजीव चैक से बख्तावर चैक (मेदांता रोड), हीरो होंडा चैक से सेक्टर-29 समेत छे प्रमुख मार्ग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शामिल किए गए हैं। इन सड़कों पर लगाए जाने वाले सभी सिस्टम को जीएमडीए के ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और सीसीटीवी निगरानी से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार इन सड़कों पर डिजिटल मैसेज बोर्ड, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और इमरजेंसी कॉल पॉइंट लगाए जाएंगे। पूरा सिस्टम जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से 24 घंटे मॉनिटर होगा। इन प्रमुख मार्गों पर स्मार्ट सिस्टम लगने के बाद सड़क पर जाम, डायवर्जन, खराब मौसम या किसी आपात स्थिति की जानकारी वाहन चालकों तक रियल टाइम में पहुंचाई जा सकेगी। इन सड़कों पर लगाए जाने वाले वेरिएबल मेसेज साइनबोर्डस (वीएमएस) पर जरूरत के मुताबिक संदेश तत्काल बदला जा सकेगा। किसी मार्ग पर जाम होने पर संबंधित स्थानों पर वैकल्पिक रास्ते की जानकारी भी प्रदर्शित की जा सकेगी।
मुसीबत में मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं होगी
उन्होंने बताया कि मॉडल रोड पर सार्वजनिक स्थानों पर इमरजेंसी कॉल प्वाइंट (ईसीपी) लगाने की तैयारी की जा रही है। दुर्घटना, सुरक्षा संबंधी खतरे या किसी अन्य आपात स्थिति में नागरिक सिर्फ बटन दबाकर पुलिस कंट्रोल रूम अथवा आईसीसीसी से सीधे बात कर सकेंगे। ईसीपी पर रात में पहचान के लिए फ्लैशिंग रेड लाइट और रिफ्लेक्टिव संकेत होंगे।
चैराहे से बाजार तक होगी सीधी घोषणा
प्रवक्ता के अनुसार शहर के महत्वपूर्ण चैराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पी ए एस) भी लगाने की योजना है। आईसीसीसी से किसी एक स्थान या जरूरत पड़ने पर सभी स्थानों पर एक साथ घोषणा की जा सकेगी। ट्रैफिक, सुरक्षा और आपदा संबंधी संदेश तत्काल प्रसारित किए जा सकेंगे। टेण्डर आवंटन के बाद लगभग चार महीनों में यह प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एसआईआर-2026: अगर आप 18 साल के हो गए हैं तो फार्म-6 भरकर प्रजातंत्र के मजबूत प्रहरी बनें: डीसी
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा-मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और सुधार का अंतिम अवसर, 30 सितंबर
आमजन को हेल्पलाइन 1950 पर मिल रहा एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित अपडेट
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: झज्जर जिला के युवा अगर आप 18 साल की आयु पूर्ण कर चुके हैं तो आप भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिला झज्जर के चारों विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)अभियान में भागीदार बनते हुए फार्म-6 भरकर प्रजातंत्र के मजबूत प्रहरी बनें। यह आवाह्न डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने जिलावासियों से किया। उन्होंने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को शुद्ध एवं अपडेट बनाने का कार्य प्रभावी रूप से जारी है। जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो तथा अपात्र नामों को हटाने और आवश्यक संशोधनों की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। उन्होंने जिला के पात्र युवा मतदाताओं से अपील की कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन करें। जिन पात्र नागरिकों का नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे निर्धारित दस्तावेजों एवं घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल करवाने के लिए भी दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिला के चारों विधानसभा क्षेत्रों के सभी मतदान केंद्रों पर 30 सितंबर तक दावे एवं आपत्ति दर्ज किए जा रहे हैं साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी अमल में लाई जा रही है। डीसी ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां 30 सितंबर तक दर्ज कराई जा सकती हैं। प्राप्त दावे-आपत्तियों का निपटान 28 अक्टूबर तक किया जाएगा जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 नवंबर को होगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपना तथा परिवार के सभी पात्र सदस्यों का नाम और विवरण प्रारंभिक मतदाता सूची में समय रहते जांच लें।
फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से कराएं आवश्यक सुधार
डीसी ने बताया कि मतदाता सूची में नाम, पता, आयु, फोटो अथवा अन्य विवरण में त्रुटि होने पर फॉर्म-8 के माध्यम से संशोधन के लिए आवेदन किया जा सकता है। वहीं, मृत, अपात्र, स्थायी रूप से स्थानांतरित अथवा अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत मतदाता के नाम के संबंध में फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
1950 पर मिल रहा एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित अपडेट
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नागरिक दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने अथवा आवेदन प्रक्रिया की जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के बीएलओ, निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) अथवा सहायक निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (एईआरओ) से संपर्क कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी आमजन के लिए उपलब्ध है। मतदाता सूची से संबंधित सहायता के लिए जहां लघु सचिवालय व ईआरओ कार्यालयों में हेल्प डेस्क स्थापित हैं वहीं आमजन को घर बैठे सुविधा प्रदान करने के लिए मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया गया है जो एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित अपडेट जानकारी कॉल करने वालों को प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, विश्वसनीय एवं अद्यतन बनाया जा सकता है। स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज होना आवश्यक है।
ऑस्कर अस्पताल में दो कर्मचारियों की संदिग्ध हालत में मौत
नर्सिंग स्टाफ सचिन और एक्सरे टेक्नीशियन विकास के शव अचेत अवस्था में मिले, नशे के इंजेक्शन लगाने की बात आई सामने
पत्नी के कई बार फोन करने पर नहीं उठा कॉल, अस्पताल पहुंचने पर दोनों को पड़ा पाया
पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों का होगा खुलासा
बहादुरगढ़, 15 सितम्बर, अभीतक: टीकरी बॉर्डर के पास स्थित ऑस्कर ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स में मंगलवार तड़के उस समय सनसनी फैल गई, जब अस्पताल के दो कर्मचारी संदिग्ध परिस्थितियों में अचेत अवस्था में मिले। दोनों को अस्पताल से सामान्य अस्पताल बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान सचिन (28) निवासी सफीदों, जींद और विकास (25) निवासी बोहर, रोहतक के रूप में हुई है। दोनों अस्पताल में नौकरी करते थे। जानकारी के अनुसार सचिन ऑस्कर अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के तौर पर कार्यरत था और प्रीत विहार, बालोर रोड पर किराये के मकान में रहता था। उसकी पत्नी शीतल बहादुरगढ़ के दीवान अस्पताल में रिसेप्शन पर काम करती है। मंगलवार रात करीब सवा 12 बजे शीतल ने सचिन को लगातार कई बार फोन किया, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं की। अनहोनी की आशंका में वह दीवान अस्पताल के स्टाफ के साथ करीब एक बजे ऑस्कर अस्पताल पहुंची। वहां सचिन और विकास दोनों अचेत हालत में पड़े मिले। सचिन को तुरंत सामान्य अस्पताल बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, विकास के बारे में बताया गया कि वह भी ऑस्कर अस्पताल में एक्सरे टेक्नीशियन था। प्रारंभिक जानकारी में उसके नशा करने और नशे के इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई है। अस्पताल में ही उसकी भी मौत हो गई। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मंगलवार सुबह सामान्य अस्पताल झज्जर भेजा गया। मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। दोनों की मौत किस वजह से हुई और क्या उन्होंने कोई नशीला पदार्थ लिया था, इसका खुलासा पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। थाना शहर एसएचओ राकेश कुमार का कहना है कि अभी मामले की जांच की जा रही है। दोनों की मौत किन परिस्थितियों में हुई है, यह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हो सकेगा। फिलहाल दोनों शवों को झज्जर के नागरिक अस्पताल भिजवाया गया है।

संस्कारम विश्वाविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर दयानंद कादयान को मिलेगा बाबू बालमुकुंद स्मृति पत्रकारिता एवं साहित्य पुरास्कर
झज्जर, 15 सितम्बर, अभीतक: बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद ने आज साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदन के लिए पुरास्कारों की घोषणा की है। जिसमें संस्कारम विश्वविद्यालय झज्जर के पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डाक्टर दयानंद कादयान को उनकी लेखनीय सेवाओं के लिए इस उत्कृष्ट सम्मान के लिए चुना गया है। जब इस अधिकारिक घोषणा की जानकारी संस्कारम विश्वविद्यालय और बेरी इलाके में पंहुची तो तो सभी सामाजिक, धार्मिक एवं अन्य संगठनों की तरफ से बधाइयों का ताता लग गया। दूबलधन कॉलेज सुधार समिति के अध्यक्ष सुखचंद कादयान ने कहा कि प्रोफेसर दयानंद कादयान की लेखनी ने दूबलधन कॉलेज की मांगो को लेखनीय सेवाएं दी है।कॉलेज की समस्याओं को प्रशासन व सरकार तक पहुंचाने में इनकी कलम का विशेष योगदान रहा है, वही प्रोफेसर अजय कादयान ने कहा कि दयानंद कादयान वास्तव में इस सम्मान के अधिकारी रहे हैं। कॉलेज सुधार समिति दूबलधन बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य संरक्षण परिषद का आभार व्यक्त करती है। अध्यापक नेता मास्टर रमेश जाखड़ ने कहा कि अध्यापन के क्षेत्र में उनकी सेवाएं अनुकरणीय रही हैं,वे जिस स्कूल में रहे, उस स्कूल को उत्कृष्टता दिलाना इनकी अध्यापन के पेशे के प्रति समर्पण का सीधा प्रमाण है। इसके लिए झज्जर व चरखी दादरी जिला प्रशासन द्वारा इन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वहीं पूर्व जिला पार्षद मास्टर जय भगवान ने कहा कि प्रोफेसर कादयान की लेखनी ने उनके पैत्रृक गांव माजरा की पेयजल, जल-भराव, स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी समस्याओं को हल कराने में विशेष योगदान दिया है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के खेल निदेशक प्रोफेसर कुलताज सिंह ने कहा कि खेल और संस्कृति के क्षेत्र में उनकी लेखनी ने पिछले तीन दशकों से सेवाएं दी है। माजरा स्थित जटेला धाम के महंत राजेंद्र दास ने अपना आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रोफेसर कादयान पिछले 30 सालों से स्वामी नितानंद के साहित्य के प्रचार प्रसार में निरंतर सेवारत और साधनारत है। नितानंद मिशन फाउंडेशन और नेतानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति जटेला धाम उन्हें साधुवाद देती है। झज्जर जिले के लेखन से जुड़े साहित्सकारों ने भी कादयान के को मिले से सम्मान के फैसले को सही करार दिया है। उनके पैत्रृक गांव माजरा दुबलधन में खुशी का माहौल बना हुआ है। वही अर्जुन अवार्डी पहलवान सत्यवान ने कहा कि कुश्ती को कलम से आवाज देने में इनका कोई मुकाबला नहीं है। संस्कारम विश्वविद्यालय के लिबरल एजुकेशन विभागाध्यक्ष डॉक्टर सविता ने कहा कि डॉक्टर कादयान को साहित्य और पत्रकारिता के लिए मिला सम्मान उनके सेवाओं का सटीक पारितोषिक है।डॉ कादयान को यह पुरस्कार पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद के द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह में झज्जर के संवाद भवन में 18 सितंबर को गुप्त जी की स्मृति में प्रदान किया जाएगा। झज्जर व चरखी दादरी इलाके में एक खुशी का माहौल बना हुआ है। वही राजस्थान के पूर्व चीफ सेक्रेटरी निहालचंद गोयल आईएएसऔर पूर्व एडीजीपी रामफल सिंह रंगा आईपीएस ने भी टेलीफोन पर डॉक्टर कादयान कोबधाई दी है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।यह सब प्रोफेसर कादयान के लेखन हुनर का सम्मान है। उल्लेखनीय है कि डॉक्टर दयानंद कादयान नारद मुनि पत्रकारिता पुरस्कार से पहले ही नबाजे जा चुके हैं। उनकी पत्रकारिता के क्षेत्र में पांच पुस्तकें तथा चार सौ से ऊपर आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति के अतिरिक्त लेखक प्रमुख हैं। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में लेखन व शोध कार्य संचारविज्ञानी प्रोफेसर बृजकिशोर कुठियाला के निर्देशन में किया है। उन्होंनेश् सिवाना गांव की समग्र सूचना व्यवस्था-एक अध्ययनश् के ऊपर उत्कृष्ट शोध कार्य करके कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। इन्हें पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्टता की सीढ़ियो तक पहुंचाने में डॉक्टर कुलबीर छिक्कारा का भी विशेष आशीर्वाद व योगदान रहा है। कादयान खाप ने भी बाबू बालमुकुंद साहित्य एवं संरक्षण परिषद का कादयान के इस पुरस्कार के चयन के लिए आभार व्यक्त किया है।



प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को जन-जन तक पहुंचाएगा सेवा संकल्प अभियान : आरती सिंह राव
17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक पूरे हरियाणा में सेवा संकल्प अभियान के तहत जनभागीदारी के साथ होंगे कार्यक्रम
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने प्रेसवार्ता कर अभियान के बारे में दी जानकारी’
रेवाड़ी, 15 सितम्बर, अभीतक: हरियाणा की स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए पूरे हरियाणा में 17 सितंबर से 17 अक्तूबर, 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने सेवा संकल्प अभियान’ के संदर्भ में मंगलवार को जिला भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता की। कार्यालय में पहुंचने पर मंत्री आरती सिंह राव और विधायक लक्ष्मण सिंह यादव का भाजपा जिला प्रभारी प्रो. मदन लाल गोयल और भाजपा जिला अध्यक्ष डा. वंदना पोपली ने स्वागत एवं अभिवादन किया। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री के सेवा-संकल्प के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, उनके जनकल्याणकारी कार्यों की जानकारी प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का व्यापक जन अभियान होगा। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘सेवा दिवस’ से होगा। इस दिन रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे और शाम को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम होगा। रेवाड़ी के माजरा एम्स में भव्य कार्यक्रम किया जाएगा। इसके साथ साथ पूरे जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने हरियाणा के प्रत्येक परिवार से आह्वान किया कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ अवश्य जलाएं। जब हर घर में सेवा और संकल्प का दीप जलेगा, तो पूरा हरियाणा प्रधानमंत्री के प्रति अपनी आत्मीयता और आभार की भावना से जगमग हो उठेगा। मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सभी विद्यालयों में चित्रकला तथा भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसी प्रकार प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की परिवर्तन यात्रा को नुक्कड़ नाटकों, संगीत, संवाद और भावनात्मक प्रस्तुतियों के जरिए गांव-गांव पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई जन-कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों परिवारों के जीवन में परिवर्तन आया है। उनकी कहानियां अक्सर सामने नहीं आ पातीं। इस दौरान, ऐसी अनकही कहानियां समाज के सामने लाई जाएंगी। आगामी 25 सितंबर से 7 अक्तूबर तक ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें माताओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी होगी। इन कार्यक्रमों में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के योगदान का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों और जिलों में अलग-अलग दिशाओं से पैदल यात्राएं और बाइक रैलियां भी निकाली जाएंगी। मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के योगदान से बनेगा। इसी भावना से सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इसमें सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक नागरिक समाज के लिए कम से कम 25 मिनट दे। कोई रक्तदान करे, कोई पौधारोपण करे, कोई स्वच्छता अभियान चलाए, कोई बुजुर्गों को डिजिटल तकनीक सिखाए और कोई जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाए। नशा मुक्ति, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण, साइबर सुरक्षा, महिला स्वास्थ्य और अंगदान के प्रति जागरूकता भी सेवा का माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों से राष्ट्र के प्रति उनकी असाधारण, अविराम एवं समर्पित सेवाओं के लिए वे उन्हें नमन करती हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह 25 वर्षों का कार्यकाल सेवा, सुशासन, संकल्प और राष्ट्र निर्माण का प्रेरणादायी अध्याय है। इस अवसर पर मास्टर हुकमचंद, रत्नेश बंसल, महामंत्री कुलदीप चैहान, मीडिया प्रभारी जतिन अनेजा, सुनील मूसेपुर आदि मौजूद रहे।
सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार-2027 के लिए आवेदन आमंत्रित
रेवाड़ी, 15 सितम्बर, अभीतक: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से सुभाष चन्द्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन अवार्डस.जीओवी.आईएन पोर्टल पर 30 सितंबर 2026 तक कर सकते हैं। डीसी अभिषेक मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि व्यक्तियों और संगठनों के अमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवा भाव को पहचानने और सम्मानित करने के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार के नाम से वार्षिक पुरस्कार दिया जाता है। इस पुरस्कार की घोषणा हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर की जाती है। केवल भारतीय नागरिक और भारतीय संस्थान ही पुरस्कार के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। संस्थान स्वैच्छिक संगठनों, कॉरपोरेट संस्थाओं, शैक्षणिक अनुसंधान संस्थानों, प्रतिक्रियाध्वर्दीधारी बलों या किसी अन्य संस्थान के लिए पुरस्कार के लिए एक संस्था के रूप में आवेदन कर सकते हैं। डीसी ने बताया कि पुरस्कार के लिए उम्मीदवार ने देश में आपदा प्रबंधन जैसे रोकथाम, शमन, तैयारी, बचाव, प्रतिक्रिया, राहत, पुनर्वास, अनुसंधानध्नवाचार या इस कार्य क्षेत्र में काम किया हो। आवेदन के साथ आपदा प्रबंधन में किए गए कार्यों का विवरण होना चाहिए। पुरस्कार के संबंध में अधिक जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के पोर्टल पर उपलब्ध है।



एडीसी राहुल मोदी ने नाहड़ खंड में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
रेवाड़ी, 15 सितम्बर, अभीतक: एडीसी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, रेवाड़ी राहुल मोदी की अध्यक्षता में आज लघु सचिवालय स्थित कार्यालय में जिला परिषद एवं डीआरडीए की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में नाहड़ खंड से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। बैठक में विभिन्न विकास योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान नाहड़ खंड में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों एवं योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यों तथा निर्धारित लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली गई। एडीसी राहुल मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने लंबित कार्यों में तेजी लाने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में सीएम विंडो एवं जन संवाद, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, जी राम जी सैचुरेटेड मोड परियोजनाओं, मुख्यमंत्री घोषणाओं, एवं हरियाणा ग्रामीण विकास योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। एडीसी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यों की मॉनिटरिंग करने और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में कार्यकारी अभियंता पंचायती राज नरेंद्र गुलिया, पी ओ अर्जुन लाल, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अनिल कुमार , जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यलय से विवेक यादव व अन्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।


केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए
यह समझौता मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” और टीम भारत के मूल मंत्र का उत्तम उदाहरण
मोदी जी के ‘संवाद से समाधान’ के मंत्र पर चार दशकों से लंबित इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सभी मुख्यमन्त्रियों का आभार
मोदी सरकार में यह दसवाँ जल विवाद आज समाप्त होने जा रहा
आज हुए समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ये सभी राज्य लाभान्वित होंगे
2018 से 2026 तक का कालखंड मोदी जी के नेतृत्व में उत्तर भारत में आपसी सहमति से जल विवादों को समाप्त करने के कालखंड के रूप में जाना जाएगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, इससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है, इसका लगभग 90ः वित्तीय भार भारत सरकार और शेष 10ः राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहाँ 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा
परियोजना के तहत 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की उपस्थिति में आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी उपस्थित थे। बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक समझौते के साक्षी बने हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना पूरी होने के बाद यह घटना इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन जाएगी। उन्होंने कहा कि आज हुए समझौते से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली किसी-न-किसी रूप में लाभान्वित होंगे। श्री शाह ने कहा कि इसमें सबसे अच्छी बात है कि छह राज्यों ने अपनी सहमति दी और समझौते पर हस्ताक्षर किए। गृह मंत्री ने परियोजना को इस अंजाम तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए छहों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और यमुना बेसिन के इन छह राज्यों के मुख्यमंत्री इस परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने के लिए कटिबद्ध हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब से श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं, आज यह दसवाँ जल विवाद समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में बीते पचास वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला है । उन्होंने कहा कि सबसे पहले अगस्त 2018 में लखवार बहुउद्देशीय परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। उसी महीने शाहपुर कंडी बांध परियोजना का विवाद सुलझा। वर्ष 2019 में ऊपरी यमुना बेसिन की रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। वर्ष 2021 में केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ, जिससे बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र को लाभ मिला। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक योजना वर्ष 2024 में आगे बढ़ी। हथिनीकुंड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से यमुना तक जल अंतरण की योजना फरवरी 2024 में स्वीकृत हुई। नर्मदा परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का विवाद जुलाई 2026 में पूर्ण हुआ। सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे का विवाद अगस्त 2026 में सुलझा, और आज अंततः किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना परियोजना पर सहमति बनी। श्री अमित शाह ने कहा कि 2018 से 2026 तक का कालखंड मोदी जी के नेतृत्व में कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक लगभग सभी जल विवादों को समाप्त करने के कालखंड के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषद की बैठकों में इनकी नींव रखी गई और इन समझौतों को जल शक्ति मंत्रालय ने कुशलतापूर्वक आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि श्री सी. आर. पाटिल ने जल शक्ति मंत्री बनने के बाद लंबे समय से लंबित विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। उन्होंने हर स्तर पर पहल की और जहाँ जिसकी मदद की आवश्यकता पड़ी, चाहे अंतर-राज्य परिषद को सक्रिय करना हो, चाहे गृह मंत्रालय को साथ लेना हो, इस कार्य को अंजाम तक पहुँचाया। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की बात करें तो 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ था कि बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएँगे। यदि वह व्यवस्था न होती, तो यह संभव नहीं होता। फिर 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं के विवाद समाप्त होने के बाद किशाऊ का कार्य आगे बढ़ा। बीते 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी। जल शक्ति मंत्रालय ने इसे आगे बढ़ाया और सभी राज्यों की सहमति के बाद, तकनीकी एवं आर्थिक पक्षों पर विचार करते हुए तथा सभी राज्यों के हितों की चिंता करते हुए, इसे समाधान तक पहुँचाया गया। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार की कुछ कठिनाइयाँ थीं। भारत सरकार की ओर से हमने उन्हें आश्वस्त किया है कि उनकी माँगों को भारत सरकार की योजनाओं के अंतर्गत समाहित करने का प्रयास किया जाएगा और आगे उत्तराखंड पर आने वाले वित्तीय भार के वहन में भी हम उनकी मदद करेंगे। श्री अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहाँ 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा। गृह मंत्री ने कहा कि जब यमुना के जल का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्धारकों की ओर से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की गणना ही नहीं की गई और जितना जल उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बाँट दिया गया। नदी के लिए जल छोड़ा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते से 25 प्रतिशत जल आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा। श्री अमित शाह ने कहा कि जब से श्रीमती रेखा गुप्ता जी दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी हैं, मोदी जी के नेतृत्व में यमुना के शुद्धिकरण के लिए निरंतर कार्य हो रहा है। यमुना जब स्वच्छ होती है, तो गंगा भी स्वच्छ होती हैय क्योंकि अंततः यमुना प्रयागराज में गंगा में ही समाहित होती है। उन्होंने कहा कि जब तक यमुना की स्वच्छता का स्वप्न पूरा नहीं होता, गंगा की स्वच्छता का स्वप्न भी अधूरा रहेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री और सभी संबंधित लोग पूर्ण सहयोग एवं मनोयोग के साथ यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की सफलता मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” और टीम भारत के मूल मंत्र का उत्तम उदाहरण है। यह भारत की उस परिकल्पना को भी दर्शाती है, जिसमें सभी साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी पक्षों ने जिस प्रकार इस समझौते में एक मन से और एक दिशा में कार्य किया है, उसी प्रकार इस परियोजना को पूर्ण करने में भी सभी राज्य एक दिशा में कार्य करेंगे। इससे हम यमुना को शीघ्र स्वच्छ कर सकेंगे और करोड़ों लोगों को पेयजल, कृषि जल, विकास एवं औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह 16 सितंबर 2026 को विशेष अभियान 6 के लिए समर्पित वेब-पोर्टल का शुभारंभ करेंगे
16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक विशेष अभियान 6 का तैयारी चरण चलेगा
2 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान 6 का कार्यान्वयन चरण चलेगा
ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भारत सरकार के सभी 84 मंत्रालयोंध्विभागों के विशेष अभियान 6 के नोडल अधिकारियों, लोक शिकायत और अपीलीय प्राधिकरणों के नोडल अधिकारियों की बैठक में विशेष अभियान 6 की प्रगति की निगरानी के लिए समर्पित ऑनलाइन वेब-पोर्टल (ीजजचेरूध्ध्ेबकचउ.दपब.पदध्ैब्क्च्ड26) का शुभारंभ करेंगे। बैठक को डीएआरपीजी के सचिव, डाक सचिव, कोयला सचिव, डीओएसईएल सचिव और खान सचिव भी संबोधित करेंगे। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग वर्ष 2021 से देश भर के सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों को कम करने के लिए प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले विशेष अभियानों के समन्वय और संचालन के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करता है। इस बार विशेष अभियान 6, 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा और उससे पहले 16 से 30 सितंबर 2026 तक इसकी तैयारी का चरण चलेगा। इस विशेष अभियान का उद्देश्य भारत सरकार के सभी कार्यालयों में स्वच्छता को व्यापक स्तर पर संस्थागत रूप देना है। यह विशेष अभियान 2021 से पांच संस्करणों (2021, 2022, 2023, 2024 और 2025) और सचिवालय सुधारों की मासिक निगरानी (जुलाई 2026 तक) के माध्यम से, 24.20 लाख से अधिक स्थलों पर चलाया गया है। इस दौरान 180.48 लाख से अधिक फाइलों को छांटाध्बंद किया गया है और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। केवल विशेष अभियान 5 ही लगभग 11.6 लाख स्थलों पर चलाया गया। इस दौरान 29.52 लाख फाइलों को छांटा गया, 233.75 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली किया गया और कबाड़ के निपटान से लगभग 833.92 करोड़ रुपये अर्जित किए गए। विशेष अभियानों के दौरान कई नवोन्मेषी पहलें की गईं जिनका प्रलेखन किया गया और दिसंबर में सुशासन सप्ताह के दौरान मूल्यांकन रिपोर्टों के रूप में जारी किया गया। मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और मंत्रालयोंध्विभागों के सचिवों ने इन विशेष अभियानों का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री के श्मन की बातश् में भी इन विशेष अभियानों की पहलों और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। कैबिनेट सचिव ने 5 अगस्त 2026 को भारत सरकार के सभी सचिवों को एक पत्र भेजा और डीएआरपीजी ने 13 अगस्त 2026 को विशेष अभियान 6 के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। विशेष अभियान 6 सभी मंत्रालयोंध्विभागों और उनके संबद्धध्अधीनस्थध्स्वायत्त कार्यालयों में चलाया जाएगा जिनमें सेवा वितरण के लिए उत्तरदायी या जनता से संपर्क रखने वाले क्षेत्रीयध्बाहरी कार्यालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशन शामिल हैं। विशेष अभियान 6 में नागरिक केंद्रित प्रथाओं, समावेशिता जैसे सर्वोत्तम तौर-तरीकों को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर ध्यान जारी रखा जाएगा। विशेष अभियान 6 की तैयारी का चरण 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। तैयारी के इस चरण के दौरान, मंत्रालयध्विभाग चयनित श्रेणियों में लंबित कार्यों की पहचान करेंगे, जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को काम पर लगाएंगे, अभियान स्थलों को अंतिम रूप देंगे, अभिलेखों की समीक्षा करेंगे, स्थान प्रबंधन योजना बनाएंगे और पहचानी गई कबाड़ सामग्री का निपटान करेंगे। इस दौरान सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को 19 से 25 दिसंबर 2026 तक चलने वाले सुशासन सप्ताह 2026 के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

पेंशन सखियां घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन सुरक्षा, सशक्त होगा ग्रामीण भारत
ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए ने महिलाओं के नेतृत्व वाले एनआरएलएम सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से पेंशन कवरेज विस्तार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: ग्रामीण परिवारों में पेंशन जागरूकता और सेवानिवृत्ति सुरक्षा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने संपूर्ण ग्रामीण भारत में श्पेंशन सखियोंश् के सामुदायिक-आधारित संपर्क तंत्र के निर्माण और समर्थन हेतु आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमित शुक्ल और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण की कार्यकारी निदेशक सुश्री सुमीत कौर कपूर ने ग्रामीण विकास विभाग सचिव श्री रोहित कंसल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) के अंतर्गत निर्मित व्यापक सामुदायिक संस्थागत नेटवर्क का लाभ उठाना है, जिसमें इसकी बैंकिंग संवाददाता सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति शामिल हैं, ताकि पेंशन जागरूकता, वित्तीय साक्षरता, नामांकन और नामांकन के बाद सहायता को ग्रामीण परिवारों के करीब लाया जा सके। इस पहल का उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की संस्थागत संरचना की शक्ति का उपयोग करके पेंशन कवरेज में एक मूलभूत चुनौती का समाधान निकालते हुए उन परिवारों तक पहुंचना जिनकी औपचारिक वित्तीय सलाह और सेवानिवृत्ति योजना सेवाओं तक सीमित पहुंच हो सकती है। इस साझेदारी के अंतर्गत, पेंशन सखियां विश्वसनीय सामुदायिक स्तर के सूत्रधार के रूप में कार्य करेंगी, विशेष रूप से एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण प्रतिभागियों तक पहुंचेंगी। वे परिवारों को पेंशन और सेवानिवृत्ति योजना संबंधी जानकारी प्रदान करेंगी, नामांकन में सहायता करेंगी और पेंशन संबंधी सेवाओं को समझने में सहायता प्रदान करेंगी। इस अवसर पर अपने संबोधन में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूह अभियान में भाग लेने वाले ग्रामीण परिवारों की बचत के विशिष्ट तरीके, आजीविका चक्र और जोखिम प्रोफाइल होते हैं, और इसलिए सामाजिक सुरक्षा को सतत समृद्धि के मिशन के व्यापक उद्देश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक सुरक्षा केवल असुरक्षा से बचाव ही नहीं है अपितु यह परिवारों को निरंतर आर्थिक उन्नति प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास और सुदृढ़ता प्रदान करने से भी जुड़ी है। श्री कंसल ने कहा कि पेंशन के प्रति जागरूकता और वित्तीय साक्षरता ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें। सुश्री ममता शंकर ने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलते जनसांख्यिकीय पैटर्न के संदर्भ में सेवानिवृत्ति नियोजन के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि यह साझेदारी औपचारिक सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा तंत्र से बाहर रहने वाले ग्रामीण परिवारों के बीच राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) सहित पेंशन उत्पादों के बारे में जागरूकता और उन्हें अपनाने में उल्लेखनीय सुधार लाएगी। इस सहयोग से डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल एवं वेब आधारित समाधानों के माध्यम से पहुंच और नामांकन की निगरानी को भी मजबूती मिलेगी, जिसमें विभाग की अपनी लोकोस प्रणाली भी शामिल है। इससे सहभागी संस्थानों को प्रगति का पता लगाने और कवरेज में कमियों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। सामुदायिक स्तर पर पहुंच को निगरानी और सेवा वितरण के लिए उपयुक्त डिजिटल प्रणालियों द्वारा समर्थित किया जाएगा। यह समझौता ज्ञापन पेंशन विनियमन और सेवानिवृत्ति सुरक्षा प्रणालियों में पीएफआरडीए की विशेषज्ञता और महिला संगठनों और प्रशिक्षित जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से डे-एनआरएलएम की अद्वितीय सामुदायिक पहुंच जैसी दो पूरक शक्तियों को एक साथ लाता है। यह साझेदारी इस संस्थागत पहुंच को ग्रामीण भारत में सतत पेंशन जागरूकता और नामांकन अभियान में परिवर्तित करने का प्रयास करती है। यह पहल मिशन के सामुदायिक कार्यकर्ताओं की भूमिका में बैंकिंग और आजीविका तक पहुंच को सुगम बनाने से लेकर ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता बनाने में सहायता करने तक एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाती है। भारत के ग्रामीण परिवार औपचारिक वित्तीय प्रणालियों में अधिकाधिक रूप से भाग ले रहे हैं, लेकिन बैंकिंग तक पहुंच का मतलब यह नहीं है कि सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त योजना भी बन जाए। कृषि, अनौपचारिक रोजगार और लघु उद्यमों पर निर्भर कई परिवारों की आय अनियमित होती है और आर्थिक झटकों से प्रभावित हो सकती है। इसलिए, जागरूकता बढ़ाना और समय रहते, सोच-समझकर पेंशन योजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना परिवारों की वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण घटक बन सकता है। यह पहल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच से आगे बढ़कर सोच-समझकर भागीदारी, दीर्घकालिक बचत और वित्तीय मजबूती की ओर ग्रामीण वित्तीय समावेशन के एजेंडे में एक व्यापक बदलाव लाने में योगदान देगी।
भ्रामक टिपिंग प्रॉम्प्ट और डार्क पैटर्न के लिए सीसीपीए ने रेपिडो 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
सीसीपीए ने रेपिडो के राइड-बुकिंग इंटरफेस में “कन्फर्म शेमिंग” और “इंटरफेस इंटरफेरेंस” की पहचान की
सीसीपीए ने रेपिडो को उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करने के लिए प्रेरित करने वाले भ्रामक प्रॉम्प्ट और कार्य प्रणालियों को बंद करने का निर्देश दिया
सीसीपीए की कार्रवाई राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्मों द्वारा अग्रिम टिपिंग और गतिशील मूल्य निर्धारण संबंधी कार्य प्रणालियों की क्षेत्रव्यापी जांच के बाद की गई
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा के नेतृत्व में राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रेपिडो का संचालन करने वाली रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई राइड की पुष्टि से पहले सवारियों को अधिक भुगतान करने के लिए प्रेरित करने के तरीके में भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार व्यवहार, अनुचित अनुबंध और डार्क पैटर्न के इस्तेमाल के लिए की गई है। यह कार्रवाई सीसीपीए द्वारा भारत में संचालित कैब और बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्मों की क्षेत्रव्यापी जांच के बाद की गई है। इस जांच का उद्देश्य राइड शुरू होने से पहले टिप देने और गतिशील मूल्य निर्धारण से संबंधित कार्य प्रणालियों की समीक्षा करना था। विभिन्न प्लेटफॉर्मों की जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि रेपिडो ऐप पर सवारी की बुकिंग अभी प्रक्रिया में होने के दौरान “कीमत जितनी अधिक होगी, राइड मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी” और “कैप्टन 60 रुपये पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ़10, ़20, ़30 जोड़कर देखें” जैसे प्रॉम्प्ट प्रदर्शित किए जा रहे थे।
सीसीपीए ने प्रॉम्प्ट को “कन्फर्म शेमिंग” की श्रेणी में माना
सीसीपीए ने पाया कि रेपिडो का एल्गोरिदम पहले सवारी के लिए एक किराया बताता था और उस किराए पर सवारी बुक किए जाने के बाद सवारी को अधिक भुगतान करने के लिए प्रेरित करता था। इसके लिए यह कारण बताया जाता था कि कैप्टन मूल कीमत पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं। सीसीपीए ने माना कि इस कार्य प्रणाली से यह गलत धारणा पैदा होती है कि सवारी जल्दी मिलने की संभावना अतिरिक्त राशि का भुगतान करने पर निर्भर करती है, ठीक उस समय जब सवारी पहले ही बुकिंग के लिए सहमत हो चुकी होती है और उसके पास बातचीत करने की सीमित गुंजाइश होती है। इस कार्य प्रणाली को “कन्फर्म शेमिंग” माना गया, जिसे डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश, 2023 के तहत एक डार्क पैटर्न के रूप में चिन्हित किया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे उपभोक्ता में जल्दबाजी की भावना और यह डर पैदा होता है कि यदि वह अधिक भुगतान करने के लिए सहमत नहीं हुआ, तो वह राइड खो सकता है।
रंग-कोड वाले मूल्य निर्धारण स्लाइडर को दूसरे डार्क पैटर्न के रूप में पाया गया
सीसीपीए ने रेपिडो के “अपनी कीमत निर्धारित करें” स्लाइडर की भी जांच की और पाया कि सवारी द्वारा कीमत निर्धारित करने के निर्णय को प्रभावित करने के लिए इसे अलग-अलग रंगों से प्रदर्शित किया गया था। कीमत बढ़ाने पर “राइड मिलने की संभावना अधिक” का संदेश हरे रंग में प्रदर्शित होता था। कीमत घटाने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी दिखाई जाती थी। स्लाइडर में कीमत घटाने की तुलना में कीमत बढ़ाने के लिए अधिक गुंजाइश दी गई थी। सीसीपीए ने माना कि यह दूसरा डार्क पैटर्न “इंटरफेस इंटरफेरेंस” था, क्योंकि इंटरफेस का डिजाइन, साथ में दिए गए पाठ से स्वतंत्र रूप से, उपभोक्ताओं को अधिक राशि का भुगतान करने की ओर दृश्य रूप से प्रेरित करता था। अग्रिम भुगतान को वास्तविक “टिप” के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। सीसीपीए ने कहा कि बुकिंग के समय सवारी को प्रदर्शित किया जाने वाला किराया पहले से ही दूरी, समय, यातायात, टोल और कैप्टन को देय राशि जैसे कारकों को ध्यान में रखता है। इस संदर्भ में, सीसीपीए ने पाया कि राइड शुरू होने से पहले उसी राइड के लिए सवारी को बाद में अतिरिक्त राशि का भुगतान करने का सुझाव देने का कोई औचित्य नहीं है। सीसीपीए ने कहा कि टिप सामान्यतः सेवा प्रदान किए जाने के बाद स्वेच्छा से किया जाने वाला भुगतान है और इसे सेवा प्रदान किए जाने की शर्त के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। सीसीपीए ने मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशा-निर्देश, 2025 का भी उल्लेख किया, जिनके अनुसार टिप देने की सुविधा केवल राइड पूरी होने के बाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए, न कि बुकिंग के समय या राइड के दौरान। रेपिडो ने तर्क दिया था कि टिप स्वैच्छिक है, सवारी द्वारा अतिरिक्त राशि का भुगतान किए जाने या न किए जाने के बावजूद उसका मैचिंग एल्गोरिदम काम करता रहता है और ये प्रॉम्प्ट केवल वास्तविक समय में होने वाली बातचीत को दर्शाते हैं, जो सवारी और चालक के बीच ऑफलाइन बातचीत के समान है। सीसीपीए ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि प्रॉम्प्ट का समय और उनका डिजाइन सवारी पर उसी समय दबाव डालता था, जब सवारी राइड प्राप्त करने के लिए प्लेटफॉर्म पर सबसे अधिक निर्भर थी। सीसीपीए ने आगे कहा कि रेपिडो ने ऐसा कोई आंकड़ा रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया, जिससे यह प्रमाणित हो कि अतिरिक्त राशि का भुगतान करने से वास्तव में सवारी को राइड मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, इस दावे को निराधार और भ्रामक माना गया।
राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्मों की क्षेत्रव्यापी जांच
रेपिडो के खिलाफ यह कार्रवाई सीसीपीए द्वारा राइड-हेलिंग और बाइक-टैक्सी प्लेटफॉर्मों पर अग्रिम टिप और डार्क पैटर्न से संबंधित कार्य प्रणालियों की व्यापक जांच का हिस्सा है। सीसीपीए ने इससे पहले उबर, ओला, रेपिडो और नम्मा यात्री सहित विभिन्न प्लेटफॉर्मों को नोटिस जारी करते हुए उन्हें डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश, 2023 का अनुपालन करने तथा अनुपालन के संबंध में स्व-घोषणाएं प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इस संबंध में उबर और ओला की सीसीपीए द्वारा जांच वर्तमान में जारी है।
सीसीपीए ने उपभोक्ता संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 के तहत प्राप्त अपने वैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हुए सीसीपीए उपभोक्ताओं के सामूहिक हितों की रक्षा करने, अनुचित व्यापार व्यवहार को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाता रहा है कि वस्तुओं या सेवाओं के संबंध में कोई झूठा या भ्रामक विज्ञापन न किया जाए। भ्रामक विज्ञापनों, अनुचित व्यापार व्यवहार या डार्क पैटर्न से संबंधित शिकायत या समस्या वाले उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के 1915 नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं या सीसीपीए को बवउ-बबचंख्ंज,हवअख्कवज,पद पर लिख सकते हैं।
अंतिम आदेश सीसीपीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
देश भर में विधिक माप-तौल सत्यापन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जीएटीसी नेटवर्क का विस्तार
उद्योग, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों से नए आवेदन प्रक्रियाधीन
51 सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों को पहले ही मान्यता दी जा चुकी हैय नेटवर्क का और विस्तार होगा
कई राज्यों ने संशोधित केंद्रीय ढांचे के अनुरूप जीएटीसी नियमावली को अधिसूचित किया
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का उपभोक्ता मामले विभाग, सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (जीएटीसी) के विस्तारित नेटवर्क के माध्यम से देश के विधिक माप-तौल सत्यापन बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। देश भर के उद्योग, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदनों के एक नए दौर को लेकर अपनी गहरी रुचि दिखाई है। विधिक माप-तौल (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियमावली, 2013 में संशोधन के बाद, जीएटीसी के दायरे को स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, परिवहन, खुदरा, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और उभरते स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों सहित क्षेत्रों में माप-तौल उपकरणों की 23 श्रेणियों को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया है। विभाग ने जीएटीसी के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए पात्र उद्योगों, प्रयोगशालाओं, इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई और परीक्षण सुविधाओं को आमंत्रित करना जारी रखा है। विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एक बार फिर से आवेदन आमंत्रित किए गए, नवीनतम आवेदन विंडो को संभावित आवेदकों से सक्रिय रुचि प्राप्त हुई। पात्र संगठनों से नवीनतम आमंत्रण के बाद कई आवेदन प्राप्त हुए हैं और वर्तमान में विभाग द्वारा संबंधित राज्य विधिक माप-तौल विभागों के परामर्श से प्रक्रिया चल रही है।
निम्नलिखित संदर्भ में आवेदनों की जांच की जा रही है
प्रलेखन की पूर्णता, सत्यापन बुनियादी ढांचे की पर्याप्तता, योग्य तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता तथा मान्यता प्रदान करने से पहले स्थल निरीक्षण।
51 जीएटीसी पहले से ही मान्यता प्राप्त हैं और सक्रिय रूप से विचार के तहत आवेदनों की एक स्वस्थ पाइपलाइन के साथ, जीएटीसी नेटवर्क आने वाले महीनों में और विस्तार करने के लिए तैयार है, जिससे उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध तकनीकी रूप से सक्षम सत्यापन सुविधाओं का आधार व्यापक हो जाएगा।
मुख्य बिंदु
उद्योग, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों से गहरी रुचि सहित जीएटीसी मान्यता के लिए आवेदनों का नया दौर आमंत्रित किया गया है।
प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया चल रही है, राज्य विधिक माप-तौल विभागों के समन्वय से स्थल निरीक्षण और तकनीकी सत्यापन किया जा रहा है। 51 जीएटीसी को पहले ही मान्यता दी जा चुकी है, और अधिक आवेदनों को मंजूरी मिलने के साथ नेटवर्क का और विस्तार होना तय है। कई राज्यों ने संशोधित केंद्रीय ढांचे के साथ तालमेल बिठाते हुए जीएटीसी नियमावली को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया है। सत्यापन के दायरे में 23 श्रेणियों के उपकरणों को शामिल किया गया है, जिसमें पानी, गैस और ऊर्जा मीटर, सांस विश्लेषक, वाहन स्पीडोमीटर, वजन उपकरण और पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन के लिए ईंधन डिस्पेंसर शामिल हैं। विस्तारित नेटवर्क ओआईएमएल प्रमाणन प्राधिकरण के रूप में भारत की स्थिति के अनुरूप, उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करते हुए व्यापार करने में आसानी को मजबूत करता है।
कई राज्यों ने जीएटीसी नियमावली का संशोधित केंद्रीय ढांचे के साथ तालमेल बिठाया
जीएटीसी ढांचे की ओर ध्यान केंद्रित करते हुए केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत करने वाले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, कई राज्यों ने संशोधित केंद्रीय ढांचे के अनुरूप अपने स्वयं की जीएटीसी नियमावली को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया है। राज्य स्तर पर इससे सत्यापन इकोसिस्टम की पहुंच को और गहरा करने, राज्य विधिक माप-तौल विभागों और मान्यता प्राप्त जीएटीसी के बीच सुचारू समन्वय को सक्षम करने और देश भर में व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए तेजी से और अधिक स्थानीय सत्यापन सेवाओं का समर्थन करने की उम्मीद है।
जीएटीसी राज्य विधिक माप-तौल के बुनियादी ढांचे के पूरक
जीएटीसी नेटवर्क का विस्तार भारत के कानूनी माप-तौल इकोसिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए विभाग के मौजूदा प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीकी रूप से सक्षम निजी संस्थानों को निर्दिष्ट वजन और माप-तौल के सत्यापन और पुनरू सत्यापन करने में सक्षम बनाकर, यह पहल राज्य कानूनी माप-तौल विभागों की क्षमता को पूरक बनाती है।
यह विधिक माप-तौल विभागों के अधिकारियों को निम्नलिखित पर अधिक ध्यान देने की अनुमति देता है
बाजार की निगरानीय
जोखिम-आधारित निरीक्षणय
गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ प्रवर्तनय तथा
उपभोक्ता शिकायत निवारण।
सत्यापन में उपकरणों की 23 श्रेणियां शामिल हैं
विस्तारित जीएटीसी ढांचे में माप-तौल उपकरणों की 23 श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं
पानी, गैस और ऊर्जा मीटर, सांस विश्लेषक, वाहनों की गति को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले स्पीडोमीटर, वजन उपकरणय तथा पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन के लिए ईंधन डिस्पेंसर। जैसे-जैसे जीएटीसी का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है, नए अनुप्रयोगों और केंद्रीय ढांचे के साथ राज्य-स्तरीय नियमों के सामंजस्य द्वारा समर्थित, विभाग लगातार एक बड़े, अधिक सुलभ और तकनीकी रूप से सक्षम सत्यापन बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। यह विस्तार कारोबारी सुगमता को बढ़ाने के लिए विधिक माप-तौल प्रणाली के संयुक्त प्रयासों को दर्शाता है, साथ ही साथ उपभोक्ता संरक्षण और रोजमर्रा के वाणिज्यिक लेनदेन में विश्वास को मजबूत करता है। विभाग माप-तौल सत्यापन की एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और आत्मनिर्भर प्रणाली के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, जो व्यापार में निष्पक्षता बढ़ाता है और देश भर में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करता है।
भारत-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास युद्ध अभ्यास 2026 औली और महाजन रेंज में आरंभ
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: भारत-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यास “युद्ध अभ्यास” के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह आज उत्तराखंड के औली विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया। इस अवसर पर सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकी सेना की 11 वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने दोनों पक्षों के 600-600 जवानों वाले प्रतिभागी दलों को संबोधित किया। यह अभ्यास राजस्थान के औली और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी एक ही समय पर आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास का उद्देश्य पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध समूहों के उपयोग के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता में वृद्धि करना है जिसमें पैदल सेना-प्रधान अभियानों पर विशेष बल दिया गया है। इससे अंतर-संचालनीयता सुदृढ़ होगी, सर्वोत्तम परिचालन पद्धतियों का आदान-प्रदान सुगम होगा और संयुक्त योजना तथा क्रियान्वयन को मजबूत बनाया जा सकेगा। इस अभ्यास में प्रौद्योगिकी के समावेश पर प्रमुख रूप से ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान प्रशिक्षण में निगरानी और टोही कार्यों के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग शामिल होगा। साथ ही महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। दोनों सेनाओं के विषय विशेषज्ञ उभरती प्रौद्योगिकियों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हो रहे बदलावों पर भी अपने विचार साझा करेंगे। यह अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा और विभिन्न भूभागों तथा परिचालन संबंधी वातावरणों में समन्वित सैन्य कार्रवाइयां करने की उनकी क्षमता को बढ़ाएगा।
सीएक्यूएम ने एनसीआर में प्रवर्तन और अनुपालन स्थिति की समीक्षा कीय 15 दिनों की रिपोर्टिंग अवधि के दौरान 150 निरीक्षण किए गए
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 139वीं बैठक 14.09.2026 को आयोजित की गई, जिसमें 24.08.2026 से 07.09.2026 की रिपोर्टिंग अवधि के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रवर्तन कार्रवाइयों, निरीक्षणों और अनुपालन स्थिति की समीक्षा की गई। 15 दिनों की रिपोर्टिंग अवधि के दौरान, कुल 150 निरीक्षणों की रिपोर्ट की गई, जिनमें निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) स्थलों पर 7 निरीक्षण, औद्योगिक क्षेत्र में 98 निरीक्षण और डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से संबंधित 45 निरीक्षण शामिल हैं। रिपोर्टिंग अवधि के अंतर्गत, 3 सितंबर 2026 को हरियाणा के नूह जिले में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड की आठ टीमों ने जिला प्रशासन और पुलिस कर्मियों तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के अधिकारियों के साथ मिलकर कुल 35 परिसरों का निरीक्षण किया। इनमें से 13 परिसर नियमों के अनुरूप पाए गए, जबकि 7 इकाइयां बंद पाई गईं और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इनका पुनः निरीक्षण किया जाना है। अनुशंसित कार्रवाइयों में 1 मामले में व्यक्तिगत सुनवाई, 1 मामले में डीजी सेट को सील करना, 7 मामलों में आदेश जारी करना और 6 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाना शामिल है। संबंधित क्षेत्रों द्वारा रिपोर्ट किए गए उल्लंघनों के आधार पर, रिपोर्ट किए गए मामलों में कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इनमें 3 निर्माण एवं विकास परियोजनाओं और 1 औद्योगिक इकाई को बंद करनाय निर्माण एवं विकास स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य इकाइयों में 25 डीजी सेटों को सील करनाय और 1 निर्माण एवं विकास मामले, 2 औद्योगिक मामलों और 10 डीजी सेटों से संबंधित 3 डीजी मामलों में अनुपालन के लिए आदेशध्निर्देश जारी करना शामिल है। 2 औद्योगिक मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) भी प्रस्तावित की गई है। अन्य मामलों में परियोजना प्रस्तावकों को पत्र जारी करने, पुनः निरीक्षण और अभियोजन सहित उपयुक्त कार्रवाई के लिए मामलों की पहचान की गई है। साथ ही, यथोचित मामलों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को भेजने की कार्रवाई भी की जाएगी। पिछली ईटीएफ बैठक के बाद जारी किए गए काम फिर से शुरू करने के आदेशों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। 10.09.2026 तक, पिछली ईटीएफ बैठक के बाद कुल 6 काम फिर से शुरू करने के आदेश जारी किए गए थे, जिनमें 1 इंडस्ट्रियल यूनिट और 5 सीएंडडी साइटें शामिल थीं। राज्य के हिसाब से देखें तो हरियाणा में 3 और उत्तर प्रदेश में 3 आदेश जारी किए गए थे। दिनांक 14.09.2026 तक की अद्यतन संचयी प्रवर्तन स्थिति की भी समीक्षा की गई। आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड ने अब तक एनसीआर में 28,547 इकाइयोंध्परियोजनाओंध्संस्थाओं का निरीक्षण किया है। इन निरीक्षणों के आधार पर 1,829 बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें से अनुपालन के सत्यापन के बाद 1,479 पुनः आरंभ करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा, 126 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी)ध्दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि 224 संस्थाएं पुनः आरंभ करने के आदेश जारी करने के लिए जांच के अधीन हैं। आयोग ने निर्धारित मानदंडों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रवर्तन को सुदृढ़ करने, अनुपालन के समय पर सत्यापन और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इसने औद्योगिक इकाइयों, निर्माण एवं विकास गतिविधियों और डीजी सेट सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में त्वरित प्रवर्तन कार्रवाई, सख्त अनुपालन निगरानी और निरंतर निरीक्षण पर भी बल दिया, ताकि एनसीआर में वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।
व्यक्तिगत लेन-देन और 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन के लिए यूपीआई अभी भी निःशुल्क है
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: नए यूपीआई फ्रेमवर्क का पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूपीआई सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा, चाहे भेजी गई राशि कितनी भी हो। व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान, साथ ही छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाले लेन-देन भी निःशुल्क रहेंगे। इसके चलते, लगभग 96ः पी2एम लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। एमडीआर केवल ₹2,000 से अधिक के निर्दिष्ट व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या एनपीसीआई की ओर से वसूला जाने वाला कोई शुल्क है। यह यूपीआई इकोसिस्टम के संचालन और निरंतर विस्तार में सहयोग के लिए बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है। भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत यूपीआई संचालन समिति की ओर से विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात पेश किया गया यह फ्रेमवर्क यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्कों से बचाने का प्रयास करता है।
क्या निःशुल्क रहेगा
सभी पर्सन-टू-पर्सन लेन-देनरू सभी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) यूपीआई लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे, चाहे ट्रांसफर की गई राशि कितनी भी हो। यूपीआई के माध्यम से पैसा भेजने या प्राप्त करने के लिए लोगों पर कोई लेन-देन शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क या अन्य शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसलिए, कुल लेन-देन मूल्य के 70ः के बराबर यूपीआई लेन-देन एमडीआर फ्रेमवर्क से पूरी तरह बाहर रहेंगे। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतानरू ₹2,000 तक के सभी पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन पर कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई के माध्यम से ऐसे भुगतान करते समय ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। छोटे व्यापारियों को प्राप्त भुगतानरू पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) श्रेणी के अंतर्गत यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स सहित छोटे व्यापारियों को सभी लेन-देनों पर शून्य एमडीआर का लाभ मिलता रहेगा। यह प्रावधान स्ट्रीट वेंडर्स, मोहल्ले की दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाएगा।
एमडीआर में क्या आएगा?
₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेन-देनरू ₹2,000 से अधिक के पी2एम लेन-देन पर ही 0.4ः का मामूली एमडीआर लागू होगा। यह एमडीआर बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान प्रणाली के सभी प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा।
मूलभूत क्षेत्रों में लेन-देन
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम लाभ वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेनदेन ₹5 का एकसमान एमडीआर लागू होगा। यह एकसमान शुल्क महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम लाभ पर चलने वाले कारोबार के लिए लागत निश्चितता प्रदान करेगा।
पूंजी बाजार लेन-देन
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों से संबंधित भुगतानों पर 0.02ः एमडीआर लागू होगा, जो प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित है। यह घटी हुई दर औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा निवेशकों की निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
ग्राहक एमडीआर का भुगतान नहीं करेंगे
एमडीआर व्यापारी भुगतान प्रणाली के अंतर्गत लगने वाला एक शुल्क है। यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर न डालें। यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं को प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। लोगों को असीमित मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा मिलती रहेगी, जिसमें कोई मासिक कोटा, मात्रा प्रतिबंध या मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई सीमा नहीं होगी। बैंकों और एनपीसीआई की ओर से निर्धारित दैनिक लेन-देन सीमाएं, जो आमतौर पर लेनदेन की श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक होती हैं, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के लिए हैं। ये शुल्क लगाने की सीमाएं नहीं हैं।
अधिकांश व्यापारी लेन-देन अप्रभावित रहेंगे
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एमडीआर केवल लगभग 4ः व्यापारिक लेन-देन पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि लगभग 96 प्रतिशत व्यापारिक लेन-देन अप्रभावित रहेंगे, क्योंकि वे या तो ₹2,000 की सीमा से कम हैं या छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं। इसलिए यह फ्रेमवर्क लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों की रक्षा करता है, जबकि बड़े व्यापारी लेन-देन पर सीमित शुल्क लागू करता है।
छोटे व्यापारियों को सहयोग
छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई को प्रोत्साहन देने के लिए एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा। कुल एमडीआर संग्रह के 5ः के बराबर राशि इस कोष में जमा की जाएगी। यह कोष यूपीआई की व्यापक स्वीकृति, निरंतर इस्तेमाल और भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में छोटे व्यवसायों को शामिल करने में सहयोग करेगा।
यूपीआई की निरंतर प्रगति सुनिश्चित करना
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत लागू दरों, परिचालन व्यवस्थाओं और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर यूपीआई संचालन समिति की ओर से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया है। इस रूपरेखा का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करना है, साथ ही लोगों के लिए भुगतान को निःशुल्क बनाए रखना और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा करना है। बड़े व्यापारी लेन-देन से प्राप्त राजस्व बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों सहित भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और सुधार में मदद करेगा। यह फ्रेमवर्क वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट में दी गई सिफारिश के अनुरूप भी है, जिसमें एक व्यवहार्य राजस्व के महत्व पर जोर दिया गया था।
श्रेयस योजना ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को मजबूत किया
यह योजना निःशुल्क कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा, विदेश में अध्ययन और शोध फेलोशिप के लिए सहायता प्रदान करती है
वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक चार घटकों के अंतर्गत 3,509.39 करोड़ रुपये का व्ययय 1.18 लाख से अधिक अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी लाभांवितरू डॉ. वीरेंद्र कुमार
नई दिल्ली, 15 सितम्बर, अभीतक: केंद्र सरकार युवा प्रतिभाओं के लिए उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति योजना (एसएचआरईवाईएएस, श्रेयस) के माध्यम से अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ा रही है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक श्रेयस के चार प्रमुख घटकों के तहत लगभग 3,509.39 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया है और इस अवधि के दौरान इन घटकों के अंतर्गत कुल 1,18,248 लाभार्थियों की संख्या दर्ज की गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह योजना वित्तीय बाधाओं को कम करने और शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों तक पहुंच में सुधार लाने के उद्देश्य से लक्षित उपायों को एक साथ लाती है। उन्होंने आगे कहा कि इसके प्रमुख घटकों के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निरूशुल्क कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए सहायता और उन्नत शोध के लिए फैलोशिप प्रदान की जाती है। डॉ. कुमार ने बताया कि निःशुल्क कोचिंग घटक अंतर्गत प्रतियोगी और व्यावसायिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले आर्थिक रूप से वंचित अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करने और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच इस घटक के अंतर्गत लगभग 145.10 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया और कुल 23,208 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2024-25 में 17.68 करोड़ रुपये का व्यय हुआ, जिससे 2,136 विद्यार्थी लाभांवित हुए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान 9.87 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया और इससे 854 विद्यार्थी लाभांवित हुए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मंत्रालय का उत्कृष्ट शिक्षा घटक देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन कर रहे मेधावी अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह वित्तीय सहायता पात्र विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से संबंधित खर्चों को पूरा करने और अपनी आर्थिक परिस्थितियों से बाधित हुए बिना व्यावसायिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में अध्ययन करने करने में सहायता करती है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक इस घटक के अंतर्गत लगभग 703.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए और कुल 35,237 लाभार्थियों को लाभ मिला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में 1,568 लाभार्थियों के लिए 19.37 करोड़ रुपये वार्षिक व्यय से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 4,742 लाभार्थियों के लिए 117.19 करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज किया गया व्यय इस अवधि में सर्वाधिक था। राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना (एनओएस) को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पात्र अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को विदेश में प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि यह योजना सामाजिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव और उन्नत शैक्षिक अवसरों तक पहुंच का विस्तार करती है। केंद्रीय मंत्री ने सूचित किया कि 2014-15 और 2025-26 तक के चयन वर्षों के दौरान इस योजना के अंतर्गत लगभग 461.57 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 764 लाभार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। विदेश जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या वर्ष 2014-15 में 20 से बढ़कर 2023-24 में सर्वाधिक 114 हो गई। इसके बाद वर्ष 2024-25 में 80 लाभार्थी और वर्ष 2025-26 में 67 लाभार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2025-26 में इस घटक के अंतर्गत 54.89 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफएससी) उच्च शिक्षा और शोध कार्यक्रमों में अध्ययनगत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह फैलोशिप उन्नत शैक्षणिक शोध में भागीदारी को बढ़ावा देती है तथा विद्यार्थियों को अध्यापन, अनुसंधान और अन्य ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में करियर बनाने में सहायता करती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक एनएफएससी के तहत लगभग 2,199.28 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया और कुल 59,039 लाभार्थियों को लाभ मिला। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2025-26 में व्यय बढ़कर 213.45 करोड़ रुपये हो गया, जिससे 4,218 शोधार्थी लाभांवित हुए। उन्होंने कहा कि यह वर्ष 2024-25 की तुलना में वृद्धि दर्शाता है, जब 4,143 लाभार्थियों के लिए 209.50 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया था। उल्लेखनीय है कि अपने चार प्रमुख घटकों के माध्यम से श्रेयस योजना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच से लेकर विदेश में शिक्षा और उन्नत शोध तक शैक्षिक सहायता की एक निरंतर श्रृंखला उपलब्ध कराती है। यह योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित करने तथा सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के युवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक और व्यावसायिक आकांक्षाओं को साकार करने में सक्षम बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
