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संस्कारम पब्लिक स्कूल, झज्जर में सीबीएसई नॉर्थ जोन बालिका वर्ग बॉक्सिंग चैंपियनशिप का भव्य शुभारंभ
झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: संस्कारम पब्लिक स्कूल, झज्जर में सीबीएसई नॉर्थ जोन बालिका वर्ग बॉक्सिंग चैंपियनशिप (CBSE North Zone Boxing Championship – Girls) का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पांच राज्यों से पहुंचे सैकड़ों खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों व अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में विद्यालय परिसर उत्साह व उमंग से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोच हितेश तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति गोयल उपस्थित रहीं।
पांच राज्यों से पहुंचे 400 खिलाड़ी: स्पोर्ट्स एचओडी आनंद यादव
विद्यालय के स्पोर्ट्स एचओडी आनंद यादव जी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस चैंपियनशिप में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर सहित पांच राज्यों से लगभग 300 स्कूलों की करीब 400 बालिका खिलाड़ी भाग ले रही हैं। प्रतियोगिता 29 अगस्त से आरंभ होकर 3 सितंबर तक चलेगी।
प्राचार्या व टीम के कुशल मार्गदर्शन में हो रहा सफल आयोजन
प्रतियोगिता का सफल संचालन विद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति गोयल, स्पोर्ट्स एचओडी आनंद यादव तथा बॉक्सिंग कोच दिव्या के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है। समस्त प्रतिभागी स्कूलों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों व अधिकारियों के स्वागत हेतु विद्यालय परिसर को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे आयोजन स्थल का माहौल और भी भव्य व उत्साहपूर्ण बन गया।
खेल प्रतिभाओं को मिला राष्ट्रीय मंच
उद्घाटन समारोह में विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों व खेल प्रशिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस भव्य आयोजन से क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है। खिलाड़ियों व प्रशिक्षकों ने विद्यालय की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं तथा आतिथ्य-सत्कार की भरपूर सराहना की।
चेयरमैन डॉ महिपाल ने किया स्वागत, दी शुभकामनाएं
संस्कार शिक्षण संस्थान के चेयरमैन डॉ महिपाल जी ने सभी खिलाड़ियों, खेल प्रशिक्षकों तथा अभिभावकों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिता में श्रेष्ठ खेल भावना का प्रदर्शन करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

झज्जर जिला के मतदान केंद्र पर रविवार को बीएलओ के समक्ष मतदाता सूची से संबंधित दावे एवं आपत्तियां दर्ज करते नागरिक।

नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से अपडेट होंगी मतदाता सूची: डीसी’
रविवार को भी मतदान बूथ पर पहुंचे मतदाता, दर्ज कराए दावे-आपत्तियां, अब 30 सितंबर तक नागरिक दर्ज करा सकते हैं दावे आपतियां’
आगामी 6 नवंबर को होगा अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन’

झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के लिए जिला झज्जर में विशेष अभियान जारी है। अभियान के दूसरे दिन रविवार को भी जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मौजूद रहे। इस दौरान नागरिकों ने मतदाता सूची की जांच करने के साथ-साथ नाम जोड़ने, विवरण में संशोधन और अपात्र नाम हटाने से संबंधित दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराईं।
पात्र मतदाताओं को दावे व आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 सितंबर तक अवसर
डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी संशोधित शैड्यूल के अनुरूप 30 सितम्बर तक दावे व आपत्ति दर्ज करने का मौका दिया गया है,जबकि 28 अक्टूबर तक दावे आपतियो का निपटान सुनिश्चित किया जाएगा और 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि वे प्रारम्भिक मतदाता सूची में अपना और परिवार के सभी पात्र सदस्यों का नाम अवश्य जांचें। उन्होंने कहा कि त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती का आधार है और इसे शुद्ध एवं अद्यतन बनाने में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
नाम छूटा है तो फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र लगाकर करें दावा’
डीसी ने बताया कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो आवश्यक दस्तावेज एवं घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर नाम शामिल करवाने के लिए दावा प्रस्तुत किया जा सकता है।
विवरण में गलती है तो फॉर्म-8 से कराएं संशोधन
जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने बताया कि मतदाता सूची में नाम, पता, आयु, फोटो अथवा अन्य विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर फॉर्म-8 के माध्यम से संशोधन के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के साथ निर्धारित दस्तावेज एवं घोषणा-पत्र संलग्न करना आवश्यक है।
अपात्र या मृत मतदाता का नाम हटाने के लिए फॉर्म-7
डीसी ने बताया कि किसी अपात्र, मृत, स्थानांतरित अथवा अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत मतदाता का नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। नागरिक अपने दावे एवं आपत्तियां संबंधित निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (ईआरओ) या सहायक निर्वाचक पंजीयन अधिकारी (एईआरओ) के कार्यालय में जमा करा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है। नागरिक अपने क्षेत्र के बीएलओ, ईआरओ या एईआरओ से संपर्क कर आवश्यक जानकारी एवं सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
वोटर लिस्ट से जुड़ी जानकारी हेल्पलाइन 1950 पर मिलेगी
डीसी ने बताया कि मतदाता सूची से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए नागरिक संबंधित ईआरओ कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 के माध्यम से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। डीसी ने पात्र मतदाताओं से आगामी 30 सितंबर तक दावे व आपत्ति दर्ज कराते हुए त्रुटियां दुरुस्त करने के लिए प्रेरित किया।

जन समस्याओं के समाधान के लिए झज्जर में जिला स्तरीय समाधान शिविर आज’
उपमंडल स्तर पर बेरी, बहादुरगढ़ और बादली लघु सचिवालयों में सुबह 10 से 12 बजे तक आयोजित होंगे शिविर’

झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी समाधान के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा सोमवार 31 अगस्त को जिला मुख्यालय सहित सभी उपमंडलों में समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे। ये शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक लगाए जाएंगे, जहां नागरिकों की शिकायतें सुनकर उनका मौके पर ही निपटान सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तरीय समाधान शिविर का आयोजन लघु सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में डीसी वर्षा खांगवाल की अध्यक्षता में होगा। इस दौरान डीसी विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें सुनते हुए अधिकारियों को समस्याओं के समयबद्ध समाधान के निर्देश देंगी।
तीनों सब डिवीजन में भी लगेंगे समाधान शिविर
उपमंडल स्तर पर बहादुरगढ़ में एसडीएम अभिनव सिवाच, बादली में एसडीएम विशाल कुमार और बेरी लघु सचिवालय परिसर में एसडीएम रेणुका नांदल की अध्यक्षता में उपमंडल स्तरीय समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटान किया जाएगा।

गांगटान में रात्रि ठहराव कार्यक्रम सोमवार को
डीसी वर्षा खांगवाल सुनेगीं समस्याएं
कार्यक्रम में विभागीय स्टॉल व स्वास्थ्य जांच शिविर के माध्यम से मिलेगी योजनाओं की जानकारी
’
झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की पहल पर जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक माह आयोजित किए जाने वाले रात्रि ठहराव कार्यक्रम का आयोजन इस माह सोमवार, 31 अगस्त को गांव गांगटान में स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीसी वर्षा खांगवाल करेंगी। डीसी ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगी तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशासन को गांव स्तर तक पहुंचाकर आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निवारण करना है। एसडीएम बेरी रेणुका नांदल ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा, जहां नागरिकों की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रात्रि ठहराव कार्यक्रम सरकार की महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से अधिकारियों को गांव की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने और विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने का अवसर मिलता है। इससे शासन और जनता के बीच संवाद और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं और अपनी समस्याएं, सुझाव व मांगें प्रशासन के समक्ष रखें, ताकि गांव के सर्वांगीण विकास को और गति मिल सके।

18 सितंबर को झज्जर में होगा राज्य स्तरीय साहित्य एवं पत्रकारिता कार्यक्रम
बाबू बालमुकुंद गुप्त की स्मृति में साहित्य, पत्रकारिता एवं हिंदी चेतना को समर्पित होगा आयोजन
हरियाणा साहित्य एवं सस्कृति अकादमी पंचकुला के सौजन्य से होगा आयोजन’

झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् रेवाड़ी के तत्वावधान में 18 सितंबर को हिंदी पत्रकारिता के मसीहा बाबू बालमुकुंद गुप्त की 119वीं पुण्यतिथि पर जिला झज्जर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। आज झज्जर में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, विभिन्न व्यवस्थाओं तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए की जाने वाली तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के लिए अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारियां निर्धारित की गईं। बैठक की अध्यक्षता परिषद् के संरक्षक नरेश चैहान श्राष्ट्रपूतश् ने की। इस बार झज्जर में होने वाले राज्यस्तरीय कार्यक्रम के संयोजन का जिम्मा वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. जयभगवान शर्मा के मार्गदर्शन में परिषद् महासचिव डॉ प्रवीण खुराना को सौंपा गया। बैठक के बाद राज्य स्तरीय कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रवीण खुराना ने बताया कि ‘साहित्य, पत्रकारिता और हिंदी चेतना’ विषय पर संगोष्ठी होगी। जिसमें साहित्य जगत की ख्यातिप्राप्त हस्तियां भाग लेंगी। उन्होंने कहा कि बाबू बालमुकुंद गुप्त हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्व थे। उनकी स्मृति और साहित्यिक -पत्रकारिता विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से परिषद द्वारा हर वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति का अभूतपूर्व सहयोग रहता है। परिषद् के पदाधिकारी इन आयोजन में शामिल होते हैं। आज की बैठक में बैठक में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एवं साहित्यकार जयभगवान शर्मा, आचार्य रामतीर्थ, डॉ दयानन्द कादयान, डीआईपीआरओ दिनेश कुमार, दलवंती सहरावत, मनोज कुमार खेड़ी खुम्मार, धैर्य खुराना, अजीत कुमार, लक्ष्य, अनिल कुमार सहित परिषद से जुड़े पदाधिकारी, साहित्यकार एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने 18 सितंबर को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
साहित्य सेवा के लिए दिए जाएंगे पांच सम्मान
डॉ. प्रवीण खुराना ने बताया कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता एवं हिंदी सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को पांच प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जाएंगे। इनमें बाबू बालमुकुंद गुप्त कोहिनूर पुरस्कार उर्दू के लिए दिया जाता है। बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता सम्मान, साहित्य पुरस्कार, हरियाणवी सेवा सम्मान तथा हिंदी सेवा सम्मान शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान साहित्य जगत् से जुड़े विभिन्न लेखकों द्वारा रचित करीब एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
विद्यालयों में होंगी साहित्यिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं
डॉ. खुराना ने बताया कि परिषद की ओर से विद्यार्थियों को साहित्य और हिंदी भाषा से जोड़ने के लिए जिले के अलग-अलग विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इनमें कविता लेखन एवं पाठ, चित्रकला, रंगोली तथा साहित्य और हिंदी से जुड़ी अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल रहेंगी। रेवाड़ी में इन प्रतियोगिताओं के संयोजक साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया होंगे। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। परिषद का उद्देश्य इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में हिंदी भाषा, साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति रुचि विकसित करना है।
बैठक में तैयारियों को लेकर सौंपी गई जिम्मेदारियां
बैठक में राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था, अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत, विद्यालयों में प्रतियोगिताओं के आयोजन, साहित्यकारों एवं पत्रकारों से संपर्क, प्रचार-प्रसार, पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। डॉ. प्रवीण खुराना ने कहा कि बाबू बालमुकुंद गुप्त का जीवन साहित्य, पत्रकारिता और हिंदी के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनकी स्मृति में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम साहित्य और पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को हिंदी भाषा और साहित्य से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा। उन्होंने जिले के साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, पत्रकारों एवं हिंदी प्रेमियों से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान किया।

सीएम नायब सैनी के ‘काले कपड़े’ वाले बयान पर गीता भुक्कल का पलटवार
कहा: भाजपा के घोटालों के विरोध में कांग्रेस ने पहने थे काले कपड़े
कांग्रेस विधायकों के साथ धक्का-मुक्की का मामला राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे
हरियाणा की कानून-व्यवस्था पर ध्यान दें मुख्यमंत्री, प्रदेश असुरक्षित श्रेणी में पहुंचा
शिक्षा और आस्था के मंदिर भी सुरक्षित नहीं, युवा बेरोजगारी के चलते धरना देने को मजबूर
विधानसभा में बैंक घोटाले, कानून-व्यवस्था, चिकित्सा, शिक्षा और टूटी सड़कों के मुद्दे उठेंगे
आईटीआई में कर्मचारियों के रिक्त पद भरने की मांग
चमार समाज को लेकर सीएम के बयान पर भुक्कल का विरोध, कहाकृसमाज को बांटने की कोशिश निंदनीय
महंगाई पर बोलींकृगरीब की जेब पर मार, ध्यान भटकाने का प्रयास
रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण
रविवार को झज्जर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विधायक गीता भुक्कल ने सरकार पर साधा निशाना

झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कांग्रेस के काले कपड़े पहनकर किए गए प्रदर्शन को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा सरकार के कथित घोटालों और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों और नेताओं के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की किए जाने की भी उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा की। कांग्रेस विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते यह बात कही। गीता भुक्कल ने कहा कि मुख्यमंत्री को विपक्ष के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने की बजाय प्रदेश की कानून व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा अब असुरक्षित श्रेणी में आ गया है। शिक्षा और आस्था के मंदिर भी आज सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी से परेशान है और रोजगार की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर है, लेकिन सरकार युवाओं की आवाज सुनने की बजाय उन पर लाठीचार्ज कर रही है। विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में बैंक घोटाले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में कानून व्यवस्था, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और टूटी हुई सड़कों की समस्या को भी विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने आईटीआई में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संस्थानों में पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों के साथ की गई धक्का-मुक्की के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कांग्रेस इस मामले को गंभीरता से उठा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष की आवाज दबाने का विरोध करेगी। चमार जाति के स्थान पर मुख्यमंत्री द्वारा मेघवाल का विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर भी गीता भुक्कल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चमार समाज एक प्राचीन और सम्मानित समाज है तथा गुरु ग्रंथ साहिब में भी इसका उल्लेख मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का एजेंडा दलित समाज को बांटने का है। गीता भुक्कल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी को इस मामले को लेकर माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान और सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। महंगाई के मुद्दे पर विधायक ने कहा कि सरकार जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए तरह-तरह के काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने दोस्तों के कर्ज माफ करने के लिए गरीब की जेब पर बोझ डाला जा रहा है। बेरोजगारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश में परेशान है। रोजगार देने के बजाय सरकार युवाओं पर लाठीचार्ज कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार युवाओं के साथ खड़े हैं और उनके अधिकारों एवं रोजगार के मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं। विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा से लेकर सड़क तक जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगेगी।

अवैध देसी पिस्तौल के साथ आरोपी गिरफ्तार, आरोपी पर आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मामले हैं दर्ज’
बहादुरगढ़, 30 अगस्त, अभीतक: पुलिस कमिश्नरेट झज्जर में डीसीपी क्राइम शुभम सिंह के कुशल नेतृत्व में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईए-वन बहादुरगढ़ पुलिस ने अवैध हथियार रखने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से एक अवैध देसी पिस्तौल बरामद हुई है।मामले की जानकारी देते हुए सीआईए-वन बहादुरगढ़ प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि थाना शहर बहादुरगढ़ में तैनात मुख्य सिपाही सोनू की पुलिस टीम 29 अगस्त 2026 को गश्त एवं अपराधों की रोकथाम के लिए बालौर रोड पर मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर खास से सूचना प्राप्त हुई कि अमन निवासी मैन बाजार, बोम्बे वाली गली, बहादुरगढ़ अवैध देसी पिस्तौल लेकर मेला ग्राउंड, नंदी गौशाला बहादुरगढ़ के पास खड़ा है।सूचना को पुख्ता मानते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर निगरानी शुरू की। मुखबिर द्वारा बताए हुलिए के अनुसार एक युवक दिखाई दिया। पुलिस टीम को देखकर वह भागने का प्रयास करने लगा, जिसे पुलिस कर्मचारियों ने कुछ दूरी पर काबू कर लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम अमन निवासी मैन बाजार, बोम्बे वाली गली, बहादुरगढ़ बताया। पुलिस द्वारा नियमानुसार तलाशी लेने पर एक अवैध देसी पिस्तौल बरामद हुई। आरोपी पिस्तौल संबंधी कोई लाइसेंस अथवा परमिट पेश नहीं कर सका। बरामद हथियार को कब्जे में लेकर नियमानुसार सील किया गया तथा आरोपी के खिलाफ थाना शहर बहादुरगढ़ में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि जांच के दौरान आरोपी अमन के खिलाफ पहले भी आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद अदालत बहादुरगढ़ में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सट्टा खाईवाली करते आरोपी को पुलिस ने किया काबू, 750 रुपये व सट्टा पर्ची बरामद
बहादुरगढ़, 30 अगस्त, अभीतक: एंटी नारकोटिक सेल प्रभारी उप निरीक्षक ऋषिपाल ने बताया कि पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए साहिल निवासी रूडकी, जिला रोहतक को सट्टा खाईवाली करने के आरोप में काबू किया है।उन्होंने बताया कि पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी पटेल पार्क, लाइनपार बहादुरगढ़ में सट्टा खाईवाली का कार्य कर रहा है और लोगों को किस्मत आजमाने के लिए एक रुपये के बदले 90 रुपये देने का लालच दे रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को काबू कर लिया।पुलिस टीम ने आरोपी के कब्जे से 750 रुपये की सट्टा राशि, सट्टा पर्ची व पेन बरामद किया। आरोपी के खिलाफ थाना लाइनपार बहादुरगढ़ में मामला दर्ज कर आगामी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

1 किलो 35 ग्राम चरस के साथ हिमाचल प्रदेश निवासी आरोपी गिरफ्तार
झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: पुलिस कमिश्नरेट झज्जर में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईए झज्जर की पुलिस टीम ने एक आरोपी को 1 किलो 35 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस उपायुक्त क्राइम शुभम सिंह के दिशा-निर्देशन में की गई इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए सीआईए झज्जर प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि झज्जर-गुरुग्राम रोड पर एक व्यक्ति नशीला पदार्थ बेचने की फिराक में घूम रहा है।सूचना के आधार पर सीआईए झज्जर की पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए स्थान पर निगरानी की और संदिग्ध व्यक्ति को काबू किया। आरोपी की पहचान काहन सिंह निवासी हिमाचल प्रदेश के रूप में हुई। नियमानुसार राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में आरोपी की तलाशी ली गई, जिसके दौरान उसके कब्जे से 1 किलो 35 ग्राम नशीला पदार्थ चरस बरामद हुआ।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अदालत झज्जर में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस आरोपी से नशीले पदार्थ की सप्लाई के स्रोत तथा नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है।

1 से 14 सितंबर तक चलेगा कुष्ठ रोगी खोजी अभियान, झज्जर में 3.50 लाख लोगों की होगी स्क्रीनिंग’
झज्जर, 30 अगस्त, अभीतक: राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में 1 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की 338 टीमें घर-घर जाकर लगभग 3.50 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी और कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। सिविल सर्जन डॉ मंजू कादयान के मार्गदर्शन में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सभी टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रत्येक घर में पहुंचकर परिवार के सभी सदस्यों की सघन एवं गुणवत्तापूर्ण स्क्रीनिंग करें, ताकि कुष्ठ रोग के छिपे हुए मामलों की समय पर पहचान की जा सके और उनका शीघ्र उपचार शुरू किया जा सके। उप सिविल सर्जन डॉ निधि ने बताया कि कुष्ठ रोग छुआछूत की बीमारी नहीं है। यह किसी व्यक्ति को छूने, उसके साथ बैठने या साथ खाना खाने से नहीं फैलता। उन्होंने आमजन से अपील की कि कुष्ठ रोग से संबंधित किसी भी प्रकार की भ्रांति या सामाजिक भेदभाव से बचें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवाएं। उन्होंने बताया कि शरीर पर हल्के या लाल चकत्ते, कानों अथवा शरीर के अन्य हिस्सों पर गांठें, हाथ-पैर की नसों में झनझनाहट तथा हाथ-पैर की त्वचा में सुन्नपन कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण पाए जाने पर व्यक्ति को चिकित्सकीय जांच अवश्य करवानी चाहिए। डॉ निधि ने बताया कि कुष्ठ रोग पूरी तरह उपचार योग्य है तथा इसकी दवाइयां जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। वर्तमान में जिला झज्जर में 17 कुष्ठ रोगियों का उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छिपे हुए कुष्ठ रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार की शुरुआत तथा रोग से होने वाली विकलांगता की रोकथाम करना है। साथ ही, कुष्ठ रोगियों के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त कर उन्हें सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि घर-घर पहुंचने वाली स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें, परिवार के सभी सदस्यों की स्क्रीनिंग करवाएं और कुष्ठ रोग के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

रेवाड़ी मैराथन 2026: एकजुटता के साथ दौड़ेगा युवा, हारेगा नशा
6 सितंबर को होने वाली मैराथन के लिए 60 हजार के करीब लोगों ने कराया पंजीकरण
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी होंगे मुख्य अतिथि

रेवाड़ी, 30 अगस्त, अभीतक: जिला में 6 सितंबर को आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय हाफ मैराथन-2026 में युवा एकजुटता से दौड़ेंगे और नशे को हराने का संकल्प लेंगे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी रेवाड़ी मैराथन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह मैराथन युवाओं को नशे से दूर रहने के साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि मैराथन से संबंधित तमाम तैयारियां एवं व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 60 हजार के करीब प्रतिभागी मैराथन के लिए अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। उन्होंने जिलावासियों, विशेषकर युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण करवाकर मैराथन में भाग लेने का आह्वान किया। डीसी ने कहा कि रेवाड़ी मैराथन को जन-आंदोलन का रूप देते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं मैराथन में भाग लेने के साथ-साथ अपने परिवार और मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए यह मैराथन एक प्रभावी संदेश देगी।
प्रतिभागियों को दिए जाएंगे ई-सर्टिफिकेट
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि मैराथन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। इसके अलावा 10 किलोमीटर दौड़ के महिला एवं पुरुष वर्ग के विजेताओं को नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। दोनों वर्गों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विजेता को 1 लाख रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 50 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 21 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
प्रतिभागियों के लिए होंगी जरूरी सुविधाएं
डीसी ने बताया कि राज्य स्तरीय हाफ मैराथन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्रतिभागियों के लिए फर्स्ट एड, पेयजल, मेडिकल सुविधा और रिफ्रेशमेंट सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। मैराथन मार्ग पर सुरक्षा की दृष्टि से भी व्यापक प्रबंध किए जाएंगे, ताकि प्रतिभागियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि आयोजन को सफल बनाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मैराथन में बड़ी संख्या में युवाओं, खिलाड़ियों, सामाजिक संगठनों, संस्थाओं एवं विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
रेवाड़ी मैराथन के लिए ऐसे करें पंजीकरण
डीसी अभिषेक मीणा ने नागरिकों से अपील की है कि वे रेवाड़ी मैराथन में भाग लेने के लिए अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। उन्होंने बताया कि मैराथन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए ीजजचेरूध्ध्ूूू.तनदंहंपदेजकतनहेतूत.पदध्रुध्मदध्तमहपेजतंजपवद पर क्लिक करके पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त क्यूआर कोड स्कैन करके भी मैराथन के लिए आसानी से पंजीकरण किया जा सकता है। पंजीकरण के दौरान प्रतिभागी को अपना नाम, माता या पिता का नाम, आयु, राज्य, जिला और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। पंजीकरण पोर्टल पर कंपनी के नाम का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। विभिन्न कंपनियों में कार्यरत कर्मचारी अपनी संबंधित कंपनी का नाम चुनकर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

आवारा पशुओं से दुर्घटना की स्थिति में दयालु-2 योजना के तहत दी जा रही आर्थिक सहायता
योजना का लाभ लेने के लिए घटना के 90 दिनों के भीतर करना होगा ऑनलाइन आवेदन

रेवाड़ी, 30 अगस्त, अभीतक: हरियाणा सरकार द्वारा आवारा पशुओं से हुई दुर्घटना के पीड़ित लोगों को दयालु-2 योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। सडकों पर घूम रहे पशुओं से होने वाली दुर्घटना में किसी भी नागरिक की मृत्यु या दिव्यांगता होने की स्थिति में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालु-2) के तहत एक लाख से पांच लाख रूपए तक आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। डीसी अभिषेक मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि दयालु योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता होने पर संबंधित परिवार को एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, चोट लगने की स्थिति में न्यूनतम 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए परिवार का परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। डीसी ने बताया कि मृत्यु, चोट अथवा दिव्यांगता की स्थिति में योजना का लाभ लेने के लिए घटना के दिन से लेकर 90 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। परिवार पहचान पत्र धारक हरियाणा के निवासी को योजना का लाभ मिलेगा। योजना का लाभ कुत्ता के काटने अथवा आवारा पशुओं जैसे गाय, बैल, सांड, गधा, कुत्ता, नीलगाय, भैंस आदि के कारण हुई दुर्घटना में मृत्युध्चोटध्दिव्यांगता की स्थिति में ही मिलेगा। डीसी ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित आवश्यक दस्तावेजों में मृत्यु के मामले में-मृत्यु प्रमाण पत्र, एफआईआर, डीडीआर की प्रति, जिसमें दर्शाया हो कि दुर्घटना आवारा पशुध्जानवरध्कुत्ते के काटने के कारण हुई है। दिव्यांगता की स्थिति में संबंधित जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारीध्चिकित्सा बोर्ड द्वारा विधिवत जारी किया दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा डिस्चार्ज सारांश, एफआईआरध्डीडीआर की प्रति, जिसमें दर्शाया हो कि दुर्घटना आवारा पशुध्जानवरध्कुत्ते के काटने के कारण हुई है। डीसी ने बताया कि मृत्युध्दिव्यांगता (70 प्रतिशत या अधिक) की स्थिति में आयु 0-12 वर्ष तक 1 लाख रुपये, आयु 12 से 18 तक 2 लाख रुपये, आयु 18 से 25 तक 3 लाख रुपये, आयु 25 से 45 तक 5 लाख रुपये तथा आयु 45 से अधिक 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। दयालु-2 योजना के तहत मामूली चोट की स्थिति में 10 हजार रुपये, कुत्ते के प्रत्येक दांत के निशान पर 10 हजार रुपये तथा घाव के प्रत्येक 0.2 सेमी. पर न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-2996024 पर संपर्क किया जा सकता है।

सीनियर सिटीजंस एवं महिलाओं के हक-हितों को लेकर उठी जोरदार मांगें, सरकार से कार्रवाई का पुरजोर अनुरोध
बैठक में मांगों के समर्थन में महिलाओं-पुरुषों ने पारित किया सर्वसम्मत प्रस्ताव
जनसेवा की आवाज बनकर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान हजारों समस्यापीड़ित लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं: के.के. बंसीवाल
लोकशाही में जन भावनाओं के अनुसार काम किये जाने चाहिएं

रेवाड़ी, 30 अगस्त, अभीतक: राष्ट्रीय सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच के जनहित में जारी मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान के तहत आयोजित संवाद बैठक में सीनियर सिटीजंस और महिलाओं के हक-हितों को लेकर सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की पुरजोर मांगें उठीं। इस सिलसिले में मंच के अभियान को लेकर लोगों ने जोरदार समर्थन व्यक्त किया। स्थानीय महाराणा प्रताप चैक स्थित नेहरू पार्क में आयोजित बैठक में आमंत्रित राष्ट्रीय प्रगतिशील विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान लोक सेवा मंच मुख्य वक्ता बनकर पहुंचे। बैठक की अध्यक्षता सीनियर सिटीजन एवं पार्क सुधार समिति के वरिष्ठ सदस्य के.के. बंसीवाल ने की। इस अवसर पर नगर परिषद की पूर्व प्रधान श्रीमती सरोज भारद्वाज बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद थी। अपने संबोधन में सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान लोक सेवा मंच ने कहा कि मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान को लगभग 8 माह पूरे होने जा रहे हैं जिसके अंतर्गत ज्वलंत जनसमस्याओं के समाधान की आवाज जनहित में लगातार बुलंद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सीनियर सिटीजंस के सामाजिक हालात बहुत कठिनाई में बीत रहे हैं। उन्होंने जनहित में सरकार से देश-प्रदेश में सीनियर सिटीजंस के लिए हेल्पलाइन शुरू करने, संपूर्ण मेडिकल सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराने, कार्यालयों एवं न्यायालयों में सीनियर सिटीजन प्रोटोकॉल तुरंत लागू करने, ट्रेन बस-ट्रेन-एरोप्लेन के किरायों में 70 प्रतिशत तक छूट देने, आवागमन में टोल टैक्स से मुक्त करने, सीनियर सिटीजंस डेडीकेटेड रेजिडेंशियल सेक्टर्स एवं फ्री ओल्डएज होम बनाने का पुरजोर अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार देश एवं समाज की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, इसलिए हर क्षेत्र में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षित हिस्सेदारी तत्काल दिया जाना न्याय संगत है। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकारों से 33 प्रतिशत की बजाय महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण तत्काल तुरंत देने की बात कही। इसके अतिरिक्त बेरोजगार महिलाओं को 5 प्रतिशत ब्याज दर पर 20 करोड रुपए तक का लॉन्ग टर्म लोन, ट्रेन-बस-एरोप्लेन के किराए में 50 प्रतिशत छूट, निःशुल्क मेडिकल सुविधा, डिलीवरी के समय फ्री एंबुलेंस उपलब्ध कराने की भी मांगें बुलंद कीं। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं-पुरुषों ने उपरोक्त सभी मांगों के समर्थन में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करके सरकार से सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। इस अवसर पर कोर कमेटी के सदस्य महेश कौशिक,बीके राम सिंह,राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल,दयाराम आर्य,नंदलाल यादव,विजय सिंह यादव सहित श्रीमती सरोज भारद्वाज, शकुंतला देवी, रामचंद्र अग्घी, श्याम सहगल, के.के.जांगड़ा, ब्रह्मानंद सोनी, सुरेश वर्मा, मीनू बत्रा, मधुसूदन शर्मा आदि ने भी अपने विचार एवं सुझाव रखे। अध्यक्षीय संबोधन में के.के. बंसीवाल ने लोक सेवा मंच के मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान को जनहितकारी मुहिम बताया। उन्होंने कहा कि जनसेवा की बुलंद आवाज बनकर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान हजारों समस्या पीड़ित व न्यायपसंद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। उन्होंने अभियान की सफलता के लिए पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाया। उन्होंने कहा कि मंच की ओर से जनहित में उठाए जा रहे सामाजिक मुद्दों को लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी को उज्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं को दिया जाना वाला सर्वोच्च सम्मान ओली दाराजली दोस्तलिक दिया गया
नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को आज उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम शावकत मिर्जियोयेव द्वारा दोनों देशों के बीच मित्रता को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए ‘‘ओली दाराजली दोस्तलिक’’ (सर्वोच्च मित्रता सम्मान) से सम्मानित किया गया। यह उज्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं के लिए सर्वोच्च सम्मान है। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की 1.4 बिलियन जनता को समर्पित किया और कहा कि यह दोनों देशों और सभ्यताओं के बीच अटूट मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मिर्जियोयेव द्वारा उनके लिए कहे गए प्रशंसा के शब्द भारत और उज्बेकिस्तान की सदियों पुरानी मित्रता और उनकी साझा विरासत को श्रद्धांजलि हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह सम्मान भारत पर उज्बेकिस्तान के साथ वैश्विक दक्षिण साझेदार के रूप में मानवता की भलाई के लिए मिलकर काम करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभाने पर बल देता है। ओली दाराजली दोस्तलिक” सम्मान का प्रदान किया जाना भारत-उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सभ्यतागत सम्बंधों और लगातार मजबूत हो रही व्यापक रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान आधिकारिक वार्ता की
नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति श्री शावकत मिर्जियोयेव से औपचारिक वार्ता की। कुकसारॉय राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर राष्ट्रपति श्री मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री का हार्दिक स्वागत के साथ-साथ औपचारिक अभिनंदन किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्तर पर द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के सभी पहलुओं पर व्यापक और सार्थक चर्चा की, जिनमें व्यापार और निवेश, नवाचार और स्टार्टअप, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा यूपीआई, रक्षा और सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, पर्यटन, अंतरिक्ष और जन-समुदाय आदान-प्रदान शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था में हुई प्रगति की सराहना करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग को मजबूत करने के महत्व को दोहराया। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई और महत्व को दर्शाते हुए, द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। उन्होंने 2030 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य निर्धारित करने पर भी सहमति व्यक्त की और इस संबंध में आर्थिक और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए एक व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सार्थक रूप से आगे बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाली एक व्यवस्था स्थापित करने और अंतर-सरकारी कमीशन को मंत्रिस्तरीय स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने इस बात पर ध्यान दिया कि प्राचीन सभ्यतागत संबंध और समकालीन जन-जन के बीच संबंध इस साझेदारी को और अधिक जीवंत बनाते हैं। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान में योग की लोकप्रियता की सराहना की। इससे पहले उन्होंने उज्बेकिस्तान योग महासंघ द्वारा आयोजित एक योग सत्र का अवलोकन किया। पूर्व-प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की 60वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उज्बेक छात्रों के लिए हिन्दी भाषा हेतु लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति की घोषणा की। उज्बेकिस्तान की यशिल माकोन हरित पहल और भारत की एक पेड़ मां के नाम पहल के बीच समानता के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अरल सागर क्षेत्र में चल रहे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में उज्बेकिस्तान के साथ भारत की साझेदारी की घोषणा की और इस परियोजना के लिए 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया। दोनों नेताओं ने महल के उद्यान में संयुक्त रूप से एक वृक्षारोपण भी किया। वार्ता के बाद, दोनों पक्षों ने संस्कृति, उच्च शिक्षा और अनुसंधान, क्षमता निर्माण, अभिलेखागार, आर्थिक सहयोग, पर्यावरण, पर्यटन, खनन, आयुर्वेद और सह-राज्य संबंधों सहित कई क्षेत्रों को कवर करने वाले समझौता ज्ञापनों और समझौतों का आदान-प्रदान किया। उज्बेकिस्तान में फयाज टेपा और कारा टेपा के बौद्ध स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर संस्कृत चेयर की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन को भी अंतिम रूप दिया गया। समझौता ज्ञापनों और समझौतों की पूरी सूची यहां देखी जा सकती है। राष्ट्रपति श्री मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री के सम्मान में भोज का आयोजन किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति श्री मिर्जियोयेव को उनके सौहार्दपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया।

उपभोक्ता मामले विभाग ने विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की
देश भर में भारतीय मानक समय को एक समान समय संदर्भ के रूप में स्थापित करने के लिए नियम
नियम 180 दिनों के बाद लागू होंगे

नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: उपभोक्ता मामले विभाग ने 27 अगस्त 2026 को विधिक मापविज्ञान(भारतीय मानक समय) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की है। यह नियम आधिकारिक राजपत्र में उनके प्रकाशन की तिथि से 180 दिनों के बाद लागू होंगे। यह नियम कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक और अन्य आधिकारिक उद्देश्यों के लिए पूरे देश में भारतीय मानक समय(आईएसटी) को एक समान समय संदर्भ प्रदान करता है। 180 दिनों की अवधि से सरकारी विभागों, व्यवसायों, संस्थानों और अन्य संगठनों को नियमों के लागू होने से पहले अपनी प्रणालियों में आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा। डिजिटल और प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ एक समान समय संदर्भ की आवश्यकता काफी बढ़ गई है। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, दूरसंचार, रेलवे, विद्युत प्रणाली, कंप्यूटर नेटवर्क और सरकारी रिकॉर्ड सटीक समय और टाइम स्टैम्प पर निर्भर करते हैं। समय के विभिन्न स्रोतों के बीच अंतर इन गतिविधियों के समन्वय और रिकॉर्डिंग को प्रभावित कर सकता है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश भर की महत्वपूर्ण प्रणालियाँ सटीक और एकसमान भारतीय मानक समय(आईएसटी) का उपयोग करें।
साझा समय संदर्भ से निम्नलिखित में सहायता मिलेगी
बैंकिंग और डिजिटल भुगतान लेनदेन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंगय
रेलवे, हवाई अड्डों और अन्य परिवहन प्रणालियों का समन्वयय
दूरसंचार और इंटरनेट नेटवर्क का विश्वसनीय संचालनय
विद्युत प्रणालियों में सटीक समय-पालनय
सरकारी और कानूनी रिकॉर्ड का रखरखावय और आपातकालीन और अन्य समय-संवेदनशील सेवाओं का समन्वय।
भारतीय समय स्रोतों का उपयोग

सरकार भारतीय संस्थानों और विधिक मापविज्ञान प्रयोगशालाओं के माध्यम से पूरे देश में सटीक भारतीय मानक समय(आईएसटी) प्रसारित करने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है। यह नियम विश्वसनीय और सुरक्षित समय प्रसार के लिए भारत की उपग्रह नेविगेशन प्रणाली श्नाविकश्(छंअप्ब्) और समय बताने वाले अन्य स्वीकृत भारतीय स्रोतों के इस्तेमाल का भी प्रावधान है। वर्तमान में, कई प्रणालियां विदेशी उपग्रह-आधारित समय स्रोतों का उपयोग करती हैं। भारतीय समय प्रसार बुनियादी ढांचे के विकास से महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे और बाहरी समय स्रोतों पर निर्भरता कम होगी।
व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन
एक राष्ट्र, एक समय पहल के तहत, जुलाई 2026 में क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला(आरआरएसएल), बेंगलुरु में श्व्हाइट रैबिटश् प्रौद्योगिकी-आधारित भारतीय मानक समय प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क का शुभारंभ किया गया। इस प्रणाली ने बैंकिंग, दूरसंचार, विद्युत, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए भारतीय मानक समय के प्रसार का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। विभाग ने सीएसआईआर-एनपीएल, इसरो, सेबी, एनएसई, बीएसएनएल और अन्य हितधारकों के सहयोग से आरआरएसएल बेंगलुरु और एनएसई चेन्नई के बीच भारतीय मानक समय(आईएसटी) के सुरक्षित प्रसार को भी दिखाया है। नियमों के लागू होने से पहले की 180 दिनों की अवधि हितधारकों को अपनी मौजूदा प्रणालियों की समीक्षा करने, आवश्यक तकनीकी बदलाव करने और कार्यान्वयन की तैयारी करने का समय प्रदान करेगी। विधिक मापविज्ञान(भारतीय मानक समय) नियम, 2026 पूरे देश में समय पर निर्भर प्रणालियों और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए एक समान भारतीय मानक समय(आईएसटी) संदर्भ का आधार प्रदान करेंगे।

राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ छावनी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की 14 विकास परियोजनाओं के लिए भूमि पूजन किया
ये परियोजनाएं जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खेल, स्वच्छता, पार्किंग और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करेंगी
रक्षा मंत्री ने लगभग 4,000 लोगों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की श्मन की बातश् सुनी
रक्षा मंत्री ने कहा- विकसित भारत का अर्थ है बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हर घर में स्वच्छ पानी, युवाओं के लिए अवसर और समावेशी समाज

नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने 30 अगस्त, 2026 को उत्तर प्रदेश की लखनऊ छावनी में 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन किया। इनमें राज्य सरकार के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही 2 परियोजनाएं भी शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रय बहुउपयोगी खेल परिसरय आधुनिक श्मशान घाटय 1500 किलोलीटर भूमिगत जलाशयय पुरानीध्खराब हो चुकी जल आपूर्ति पाइपलाइन का प्रतिस्थापनय एससीएडीए स्वचालन के साथ 8 ट्यूबवेल का निर्माणय एससीएडीए के साथ ओवरहेड टैंकय लखनऊ छावनी में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालयय आरए बाजार माध्यमिक विद्यालय में अतिरिक्त कक्षाओं और शौचालय का निर्माणय रेनबो मॉडल स्कूल में अतिरिक्त कक्षाओं और शौचालय का निर्माणय बहुस्तरीय रोबोटिक कार पार्किंग और वाणिज्यिक परिसरय और विरासत अपशिष्ट-जैव-खनन और जैव-उपचार के लिए ये परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। राज्य सरकार के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही दो परियोजनाएं हैंरू आरए बाजार सिटी पॉलीक्लिनिक और मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर। आज रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने भी लगभग 4,000 लोगों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम सुना। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि ये पहलें छावनी क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खेल सुविधाओं, स्वच्छता, सफाई, जल आपूर्ति और शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार लाने के व्यापक प्रयासों को दर्शाती हैं। उन्होंने यह भी कहा, लखनऊ छावनी का विकास लखनऊ की प्रगति से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से विकास और सुशासन को गति मिल सकती है। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत का अर्थ केवल भव्य परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें ही नहीं है, बल्कि इसका अर्थ यह भी है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर घर में स्वच्छ जल पहुंचे, युवाओं को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें और कोई भी दिव्यांग बच्चा समाज से अलग-थलग महसूस न करे। उन्होंने इस बात को दोहराया कि सरकार विकास के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में प्रत्यक्ष सुधार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। लखनऊ छावनी में कई बाजारों के नाम बदले जाने की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ब्रिटिश काल से जुड़े नामों को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय जीवन की प्रमुख हस्तियों के नामों से बदल दिया गया है। रॉयल आर्टिलरी बाजार का नाम बदलकर एकता बाजार, ब्रिटिश कैवलरी बाजार का नाम उदा देवी बाजार, ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम बदलकर मातादिन वाल्मीकि बाजार और एक अन्य ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम बदलकर मंगल पांडे बाजार कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर, कनेडी बाजार का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी बाजार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भारत की विरासत से जोड़ना और राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रेरित करना है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री श्री ब्रजेश पाठक, उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री श्री असीम अरुणय केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ताय राज्यसभा सांसद श्री दिनेश शर्माय लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खरवालय रक्षा संपदा की महानिदेशक श्रीमती शोभा गुप्ताय एचएएल के सीएमडी श्री रवि केय बीईएल के सीएमडी श्री मनोज जैनय और रक्षा बलों, केंद्र और राज्य सरकारों तथा लखनऊ छावनी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

जयपुर के दो केंद्रों पर तकनीकी व्यवधान से प्रभावित 2,445 उम्मीदवारों के लिए 5 सितंबर 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित की जाएगी
नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) ने निष्पक्ष, सुरक्षित और निर्बाध परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए व्यापक लॉजिस्टिक, तकनीकी, सुरक्षा और श्रमशक्ति व्यवस्था के साथ आज, 30 अगस्त, 2026 को देश भर में नीट-पीजी 2026 परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की। परीक्षा सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 339 शहरों के 1,111 परीक्षा केंद्रों पर 2,73,096 उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की गई थी। परीक्षा के लिए कुल 2,65,980 उम्मीदवार उपस्थित हुए, जिसमें लगभग 2,63,535 उम्मीदवारों के लिए परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। राष्ट्रव्यापी परीक्षा के दौरान व्यापक तौर पर तत्क्षण निगरानी और कड़े सुरक्षा उपाय किए गए थे। परीक्षा के संचालन की निगरानी के लिए कुल 2,527 संकाय सदस्यों को स्वतंत्र एप्रेजर के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके अलावा, डीन, निदेशकों, चिकित्सा अधीक्षकों और वरिष्ठ प्रोफेसरों सहित 700 से अधिक वरिष्ठ संकाय सदस्यों को फ्लाइंग स्क्वाड के सदस्यों के रूप में तैनात किया गया था। समन्वय और निगरानी को मजबूत करने के लिए, देश भर में 16 एनबीईएमएस क्षेत्रीय कमांड केंद्रों को चालू किया गया। परीक्षा केंद्रों को भी सीसीटीवी की लाइव निगरानी में रखा गया था। एनबीईएमएस कमांड सेंटर के द्वारका स्थित मुख्यालय से इसकी लगातार इस पर नजर रखी जा रही थी। एनबीईएमएस और टीसीएस के 190 कर्मियों की एक समर्पित टीम को तत्क्षण निगरानी और देखरेख के लिए तैनात किया गया था। एनबीईएमएस मुख्यालय में समर्पित कमांड सेंटर में, एनबीईएमएस, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, बीईएल, ईसीआईएल और टीसीएस के अधिकारियों ने पूरे दिन परीक्षा प्रक्रिया की निकटतापूर्वक निरंतर निगरानी बनाए रखी। परीक्षा की सुरक्षा को और मजबूत करने और फर्जीवाड़ा को रोकने के उपायों के हिस्से के रूप में, परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों का आधार- संचालित प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक किया गया। सरकारी एजेंसियों ने परीक्षा के सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन के लिए अपना पूरा सहयोग दिया। देश भर में अधिकांश उम्मीदवारों के लिए परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी की गई थी। किंतु आईओएन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा केंद्र, जयपुर, राजस्थान (टीसी नंबर 41682 और 41683) में एक अप्रत्याशित तकनीकी व्यवधान हुआ, जहां परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीसीएस लिमिटेड के कारण परीक्षा केंद्रों पर आंतरिक बिजली आपूर्ति के मुद्दों के कारण 2,445 उम्मीदवारों के लिए परीक्षा पूरी नहीं की जा सकी। प्रभावित उम्मीदवारों को हुई असुविधा को लेकर एनबीईएमएस को गहरा खेद है और यह सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कदम उठाए गए हैं कि उन्हें नीट-पीजी 2026 में उपस्थित होने का समुचित और न्यायसंगत अवसर प्रदान किया जाए। तदनुसार, सभी प्रभावित उम्मीदवारों की पुनः परीक्षा शनिवार, 5 सितंबर, 2026 को दोपहर 3 बजे जयपुर, राजस्थान में आयोजित की जाएगी। स्थान विवरण और परीक्षा से संबंधित अन्य निर्देश संबंधित उम्मीदवारों को अलग से सूचित किए जाएंगे। 339 शहरों में 1,111 केंद्रों पर परीक्षा का सफल आयोजन परीक्षा अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों, संकाय, सुरक्षा एजेंसियों, प्रौद्योगिकी टीमों और राष्ट्रव्यापी क्रियाकलाप में शामिल अन्य हितधारकों के बीच व्यापक समन्वय को दर्शाता है। एनबीईएमएस उम्मीदवारों के सहयोग, धैर्य और विश्वास की सराहना करता है और नीट-पीजी 2026 के आयोजन से जुड़े सभी कर्मियों और संस्थानों के समर्पित प्रयासों को स्वीकार करता है।

उपराष्ट्रपति सजावटी मछली पालन के विस्तार के लिए रणनीतिक कार्ययोजना मिशन रंगीन मछली 2031 जारी करेंगे
द्वीपीय संसाधनों द्वीपीय संसाधनों की अप्रयुक्त क्षमता टिकाऊ ढंग से उपयोग करने पर विशेष जोर

नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सोमवार, 31 अगस्त 2026 को अगत्ती, लक्षद्वीप में भारत सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय का एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर माननीय उपराष्ट्रपति मिशन रंगीन मछली 2031 सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्ययोजना जारी करेंगे। इस आउटरीच कार्यक्रम में केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंहय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल तथा लक्षद्वीप के माननीय प्रशासक श्री प्रफुल्ल खोड़ा पटेल की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मछली पालकों और मछुआरों, जिनमें महिला मछली पालक एवं महिला मछुआरे भी शामिल हैं, की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी। इसके अलावा, सरकार के मत्स्य पालन विभाग, लक्षद्वीप सरकार, मत्स्य पालन क्लस्टर तथा संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। देश की विशाल समुद्री संपदा के बावजूद भारत के व्यापक समुद्री संसाधनों का अभी भी काफी हद तक उपयोग नहीं हो पाया है। 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 22 लाख वर्ग किलोमीटर के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) और 53.1 लाख टन की अनुमानित समुद्री मत्स्य क्षमता के साथ भारत में सतत मत्स्य पालन, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, समुद्री जलीय कृषि (मैरिकल्चर) और नीली अर्थव्यवस्था के विकास की अपार संभावनाएं हैं। लक्षद्वीप इस अप्रयुक्त क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहां लगभग 4 लाख वर्ग किलोमीटर का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) है, जो भारत के कुल ईईजैड का लगभग 17 प्रतिशत है, तथा 4,200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला लैगून है। यह विशाल और संसाधन-संपन्न समुद्री इकोसिस्टम उच्च-मूल्य वाले मत्स्य संसाधनों के दोहन, मैरिकल्चर के विस्तार, तटीय आजीविकाओं के सृजन तथा सतत नीली अर्थव्यवस्था के विकास को गति देने की महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करता है। सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र में एकीकृत और मूल्य श्रृंखला-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपना रही है। इसी रणनीति के अनुरूप, लक्षद्वीप को समुद्री शैवाल की खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित समुद्री शैवाल क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। लक्षद्वीप के द्वीप समुद्री सजावटी मत्स्य संसाधनों से भी समृद्ध हैं, जो समुद्री इकोसिस्टम के संरक्षण के साथ-साथ सतत पालन, निर्यात और आजीविका सृजन की महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करते हैं। आउटरीच कार्यक्रम के दौरान माननीय उपराष्ट्रपति मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को विभिन्न लाभ वितरित करेंगे तथा मिशन रंगीन मछली 2031 सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए रणनीतिक कार्ययोजना जारी करेंगे। यह रणनीतिक कार्ययोजना सजावटी मत्स्य पालन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक अनुपालन के लिए एक समान रूपरेखा प्रदान करेगी। मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) ब्रूडस्टॉक प्रबंधन, प्रजनन, हैचरी संचालन, उत्पादन प्रणालियों, क्वारंटीन, स्वास्थ्य प्रबंधन, ट्रेसेबिलिटी, एक्वेरियम संचालन, हैंडलिंग, परिवहन और व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को मानकीकृत करेंगी। इससे पूरे देश में कार्यप्रणालियों में एकरूपता सुनिश्चित होगी और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को अपनाने को बढ़ावा मिलेगा। ये पहल हितधारकों की क्षमताओं को मजबूत करने, उत्पाद की गुणवत्ता और जैव-सुरक्षा मानकों में सुधार करने, प्रमाणन एवं बाजार तक पहुंच को सुगम बनाने तथा भारत के सजावटी मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत, सुव्यवस्थित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास को समर्थन प्रदान करने में भी सहायक होंगी।
पृष्ठभूमि
भारत लगभग 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) से समृद्ध विशाल एवं विविध समुद्री संसाधन आधार वाला देश है। भारत के ईईजैड में समुद्री मत्स्य संसाधनों की संभावित क्षमता लगभग 58.6 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जो करीब 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है और खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोजगार, आय सृजन तथा निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देती है। भारत वर्तमान में विश्व के प्रमुख मत्स्य पालन और जलीय कृषि उत्पादक देशों में शामिल है तथा वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात किया गया। अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 समुद्री मील के दायरे में केन्द्रित हैं, जबकि अधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में उच्च-मूल्य वाली प्रजातियों, विशेष रूप से टूना और टूना जैसी प्रजातियों, के दोहन की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। सतत समुद्री मत्स्य पालन के रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने भारतीय ईईजैड और उच्च समुद्रों से मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए सक्षमकारी रूपरेखा अधिसूचित की है। इसमें भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा उच्च समुद्रों में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए दिशा-निर्देश, 2025 भी शामिल हैं। लक्षद्वीप समृद्ध समुद्री मत्स्य संसाधनों से संपन्न है, विशेष रूप से येलोफिन टूना और स्किपजैक टूना जैसी उच्च-मूल्य वाली टूना प्रजातियों से, जो द्वीप के समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र की रीढ़ हैं। विशाल और उत्पादक समुद्री जलक्षेत्र से समर्थित ये व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियां सतत मत्स्य दोहन, मूल्य संवर्धन, निर्यात में वृद्धि और आजीविका सृजन की महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रदान करती हैं। इससे लक्षद्वीप को टूना-आधारित मत्स्य पालन और नीली अर्थव्यवस्था के विकास के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

पथ्डैरू भारत की डिजिटल फर्टिलाइजर क्रांति और सब्सिडी प्रबंधन की नई राह
डेटा एनालिटिक्स से उर्वरक प्रबंधन में क्रांति: खपत के पैटर्न से लेकर जिला स्तर तक रखी जा रही पैनी नजर
पथ्डै नेटवक रू 14 करोड़़ आधार-लिंक्ड किसान, 2.5 लाख़ खुदरा विक्रेता और सालाना 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री का एक एकीकृत प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: भारत में फर्टिलाइजर मैनेजमेंट का डिजिटल आधार, श्इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टमश् (पथ्डै) एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इसके तहत कई डिजिटल पहल शुरू की गई हैं, जिसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, फर्टिलाइजर की उपलब्धता में सुधार करना और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन की ज्यादा असरदार और डेटा-आधारित निगरानी को संभव बनाना है। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (छप्ब्) द्वारा उर्वरक विभाग के लिए विकसित और तकनीकी रूप से समर्थित, पथ्डै फर्टिलाइजर इकोसिस्टम के मुख्य चरणों को जोड़ता है- जिसमें उत्पादन, आयात, आवागमन, स्टॉक की उपलब्धता, खुदरा बिक्री और सब्सिडी प्रोसेसिंग शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला यह सिस्टम 14 करोड़ से ज्यादा आधार-लिंक्ड उर्वरक खरीदारों, 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और सालाना लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री के लेन-देन को कवर करता है, साथ ही सालाना लगभग ₹2 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के मैनेजमेंट में भी मदद करता है।
पथ्डै का दायरा ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग से अग्रसर
हाल के वर्षों में, विभाग ने पथ्डै की भूमिका को सिर्फ फर्टिलाइजर ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड करने तक सीमित न रखकर उसका दायरा बढ़ाया है। विभाग का उद्देश्य इसे एक इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग और फैसले लेने में मदद करने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित करना है। अधिकारियों को फर्टिलाइजर के प्रोडक्शन, इंपोर्ट, डिस्पैच, मूवमेंट, स्टॉक और रिटेल बिक्री की एक साथ जानकारी देने के लिए नए डैशबोर्ड और एनालिटिकल टूल बनाए गए हैं। ये टूल राष्ट्रीय, राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर पर मॉनिटरिंग करने में मदद करते हैं, जिससे असामान्य ट्रेंड और सप्लाई से जुड़ी उभरती स्थितियों का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाया जा सकता है। एनालिटिक्स के बढ़ते उपयोग से खरीदारों की विभिन्न श्रेणियों, जमीन के मालिकाना हक, फसलों, जिलों और फर्टिलाइजर के प्रकारों के आधार पर फर्टिलाइजर की खरीद की जांच करना भी संभव हो गया है। इसलिए, पथ्डै के जरिए उपलब्ध बड़ी मात्रा में ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल न सिर्फ बिक्री का रिकॉर्ड रखने के लिए, बल्कि खपत के पैटर्न का पता लगाने और ज्यादा टारगेटेड मॉनिटरिंग व सही जानकारी के आधार पर फैसले लेने में भी किया जा सकता है।
किसान, भूमि और फसल संबंधी जानकारी का एकीकरण
डेटा-आधारित उर्वरक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम पथ्डै का राज्यों तथा अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म द्वारा बनाए गए किसान, भूमि और फसल डेटाबेस के साथ एकीकरण रहा है। हरियाणा में मेरी फसल मेरा ब्यौरा (डथ्डठ) के साथ एकीकरण और उसके बाद एग्रीस्टैक के साथ एकीकरण की दिशा में किए गए कार्य ने उर्वरक लेन-देन को किसान और कृषि संबंधी जानकारी से जोड़ने के लिए तंत्र स्थापित किए हैं। इन पहलों ने उर्वरक खरीदारों का किसान और भूमि अभिलेखों से मिलान करने में बहुमूल्य अनुभव प्रदान किया तथा भूमि और फसल संबंधी जानकारी की उपलब्धता और गुणवत्ता से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों को उजागर किया। इससे खाद की जरूरतों और खपत की बेहतर समझ विकसित करने के लिए खाद के लेन-देन के डेटा को कृषि डेटा के साथ जोड़ने की संभावना का भी पता चला। इन एकीकरणों से मिले अनुभव ने खाद की खरीद को किसानों की जरूरतों से जोड़ने के लिए एक अधिक व्यवस्थित दृष्टिकोण की नींव रखी है।
उर्वरक बिक्री के लिए फ्रेमवर्क में एक अतिरिक्त डिजिटल लेयर
इस अनुभव के आधार पर, उर्वरक बिक्री के लिए फ्रेमवर्क (थ्थ्ै) एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा है, जिसका उद्देश्य मोबाइल ऐप-आधारित उर्वरक बुकिंग प्रणाली को मौजूदा पथ्डै पॉइंट ऑफ सेल (च्वै) इकोसिस्टम के साथ एकीकृत करना है। इस फ्रेमवर्क के तहत, किसान एग्रीस्टैक में बनाए गए अपने आईडी के आधार पर आवश्यक उर्वरक की बुकिंग कर सकता है, जिसके लिए भूमि और स्वामित्व संबंधी विवरणों का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद फत्-आधारित बुकिंग तैयार की जाती है और बुकिंग की जानकारी च्वै डिवाइस पर उपलब्ध होती है, जिससे आवश्यक उर्वरक और अंततः खरीदी गई मात्रा के बीच सत्यापन संभव होता है। फ्रेमवर्क को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे विभाग और भाग लेने वाले राज्य व्यापक कार्यान्वयन से पहले बुकिंग की गतिविधि, भूमि और फसल संबंधी जानकारी, उर्वरक खपत और परिचालन संबंधी मुद्दों का अध्ययन कर सकें। इस पायलट ने एग्रीस्टैक और पथ्डै के बीच एक महत्वपूर्ण नई सत्यापन और विश्लेषणात्मक परत भी तैयार की है। यह फ्रेमवर्क कई पैमानों का विश्लेषण करने में मदद करता है, जैसे कि प्रति हेक्टेयर खाद की खपत, भूमि के अलग-अलग आकार वाले वर्गों में खपत, उत्पाद और फसल के हिसाब से खाद का इस्तेमाल तथा बुकिंग के समय बताई गई खाद की जरूरत और असल में की गई खरीद के बीच का संबंध। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फ्रेमवर्क वास्तविक किसानों को उनकी आकलित आवश्यकताओं के अनुरूप उर्वरक प्राप्त करने और खरीदने में सक्षम बनाता है, साथ ही उर्वरक बिक्री प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और डेटा-आधारित निगरानी लाता है। ऐसा विश्लेषण व्यक्तिगत लेन-देन की निगरानी से आगे बढ़कर कृषि संदर्भ में उर्वरक खपत को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।
उर्वरक की आवागमन की डिजिटल निगरानी और भी मजबूत
इस अवधि के दौरान व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (टस्ज्ै) पहल के माध्यम से उर्वरक की आवागमन की डिजिटल निगरानी को भी सुदृढ़ किया गया है। टस्ज्ै का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में उर्वरक की आवागमन की अधिक स्पष्ट जानकारी प्रदान करना है। डिस्पैच संबंधी जानकारी को वाहन-स्थान संबंधी डेटा के साथ जोड़कर, यह प्रणाली परिवहन के दौरान उर्वरक खेपों की निगरानी करने में सक्षम बनाती है साथ ही देरी और असामान्य आवागमन के पैटर्न की पहचान करने में सहायता कर सकती है। जब इसे पथ्डै में पहले से उपलब्ध गुड्स-इन-ट्रांजिट, डिस्पैच और स्टॉक संबंधी जानकारी के साथ जोड़ा जाता है, तो वाहन ट्रैकिंग विभाग को डिस्पैच बिंदु से गंतव्य तक उर्वरक की आवागमन का अधिक व्यापक डिजिटल दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह विभाग की केवल डिस्पैच उर्वरक की मात्रा की निगरानी करने की क्षमता को ही सुदृढ़ नहीं करता, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में उसकी आवागमन और इच्छित गंतव्य पर उसकी अंतिम उपलब्धता की निगरानी को भी मजबूत करता है।
इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रोसेसिंग से पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा में वृद्धि
पथ्डै फर्टिलाइजर सब्सिडी के मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभा रहा है, जिसमें सब्सिडी का पेमेंट च्वै नेटवर्क के जरिए रिकॉर्ड की गई फर्टिलाइजर की असल बिक्री से जुड़ा होता है। 1 जनवरी 2026 को, सब्सिडी बिलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रसंस्करण और च्थ्डैध्म.ठपसस प्रक्रियाओं सहित वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण की दिशा में आगे का कार्य किया गया। वर्कफ्लो का डिजिटलीकरण मैनुअल हस्तक्षेप को कम करता है, पता लगाने की क्षमता (ट्रेसेबिलिटी) में सुधार करता है और सब्सिडी दावों तथा भुगतानों के विभिन्न चरणों की इलेक्ट्रॉनिक रूप से निगरानी को सक्षम बनाता है। क्ठज् से जुड़े बिलों और ट्रांजैक्शन की जांच-पड़ताल को मजबूत करने के लिए रैंडम वेरिफिकेशन के तरीके और अतिरिक्त एनालिटिकल जांच भी शुरू की जा रही हैं। इन सभी पहलों का मकसद सब्सिडी प्रोसेसिंग को ज्यादा कुशल बनाना और साथ ही मजबूत डिजिटल कंट्रोल और ऑडिट की सुविधा देना है।
पथ्डै उर्वरक प्रबंधन के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में
इसमें हुए बदलाव पथ्डै के विकास में एक अहम कदम हैं। जो प्रणाली शुरू में मुख्य रूप से फर्टिलाइजर की आवागमन, बिक्री और सब्सिडी से जुड़े लेन-देन को मैनेज करने के लिए बनाया गया था, वह अब भारत के फर्टिलाइजर इकोसिस्टम में कई स्टेकहोल्डर्स और डेटासेट को जोड़ने वाला एक इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। उत्पादन, आयात, लॉजिस्टिक्स, स्टॉक, किसान और भूमि संबंधी जानकारी, उर्वरक बुकिंग, खुदरा लेन-देन और सब्सिडी प्रोसेसिंग का बढ़ता इंटीग्रेशन, के साथ-साथ बेहतर डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक क्षमताएं निर्णय लेने वालों को उर्वरक की स्थिति का अधिक व्यापक और समयबद्ध दृष्टिकोण प्रदान कर रही हैं। डथ्डठ और एग्रीस्टैक के माध्यम से किसान और भूमि डेटा के एकीकरण से लेकर उर्वरक बिक्री के लिए फ्रेमवर्क तक की प्रगति, वाहन ट्रैकिंग, उन्नत विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रसंस्करण के साथ, पथ्डै की भूमिका में व्यापक बदलाव को दर्शाती है। प्रौद्योगिकी का उपयोग अब केवल लेन-देन दर्ज करने के लिए ही नहीं, बल्कि यह समझने के लिए भी किया जा रहा है कि उर्वरक कहां उपलब्ध है, यह कैसे आगे बढ़ रहा है, कौन इसे खरीद रहा है, कितनी मात्रा में खपत हो रही है और ये पैटर्न कृषि संबंधी आवश्यकताओं से किस प्रकार संबंधित हैं। यह बदलाव भरोसेमंद डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल को मजबूत कर रहा है, ताकि समय पर फर्टिलाइजर की उपलब्धता पक्की की जा सके, पारदर्शिता बढ़ाई जा सके और भारत के सबसे अहम खेती के इनपुट में से एक का बेहतर और जानकारी-आधारित मैनेजमेंट किया जा सके।

उपराष्ट्रपति ने अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का शुभारंभ किया, केरलम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाया
अरनमुला वल्लमकली केरलम की शाश्वत परंपराओं, भक्ति और एकजुटता की भावना को प्रतिबिंबित करता हैरू उपराष्ट्रपति
परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैंरू अरनमुला वल्लमकली में उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के श्विकास भी, विरासत भीश् के विजन के बारे में बताया

नई दिल्ली, 30 अगस्त, अभीतक: उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज पंबा नदी पर अरनमुला उथ्रित्तथी वल्लमकली का शुभारंभ किया। उपराष्ट्रपति ने इस उत्सव को केरलम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भक्ति और शाश्वत परंपराओं का एक गौरवशाली प्रतीक बताया। केरलम के हाल ही में राज्य का नाम बदलने पर जनता को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में उन्हें हाल ही में समाप्त हुए सत्र के दौरान राज्य का नाम बदलने वाले विधेयक को पारित कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने ओणम के अवसर पर भी शुभकामनाएं दीं। श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ओणम और वल्लासद्या की पवित्र परंपरा से जुड़ा अरनमुला वल्लमकली, टीम वर्क, अनुशासन और खेल भावना का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें खूबसूरती से सजी पल्लियोडम नावें और सौ से अधिक नाविक लयबद्ध तरीके से नौका चलाते हैं। पंबा नदी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह सबरीमाला तीर्थयात्रा का अभिन्न अंग है और आस्था, पवित्रता और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। सबरीमाला की अपनी सात तीर्थयात्राओं को याद करते हुए उन्होंने बताया कि संसद सदस्य के रूप में नामांकन से कुछ समय पहले की उनकी पहली तीर्थयात्रा उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि भगवान अय्यप्पा के आशीर्वाद ने उनकी चुनावी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरनमुला की विरासत का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्राचीन श्री पार्थसारथी मंदिर और प्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त अरनमुला कन्नाडी के बारे में विशेष रूप से बताया। उन्होंने पिछले वर्ष उपराष्ट्रपति आवास पर आयोजित समारोहों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अतिथियों को अरनमुला कन्नाडी भेंट की थी, जिसकी उत्कृष्ट कारीगरी की अतिथियों ने बहुत सराहना की थी। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कलाओं, शिल्पों और ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर बल दिया। यह बताते हुए कि विदेशों में काम करने वाले लोग भी ऐसी प्रिय परंपराओं में भाग लेने के लिए लौटते हैं, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि अरनमुला यह दर्शाता है कि कैसे सांस्कृतिक परंपराएं लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ती रहती हैं। परंपरा और आधुनिकता के साथ-साथ चलने पर जोर देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ष्विकास भी, विरासत भीष् के विजन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत के विविध त्योहार देश की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, हमारी विविधता विभाजन का स्रोत नहीं हैय यह हमारी शक्ति का स्रोत है। कार्यक्रम में केरलम के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, गृह मंत्री श्री रमेश चेन्निथला, उच्च शिक्षा मंत्री श्री रोजी एम. जॉन, जल संसाधन मंत्री श्री मॉन्स जोसेफ, सांसद श्री एंटो एंटनी, अरनमुला के विधायक श्री अभिन वर्की और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

मन की बात की 137वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (30.08.2026)
प्रविष्टि तिथि: 30 AUG 2026 11:36AM by PIB Delhi
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार!

‘मन की बात’ के इस नए एपिसोड में आप सभी का मैं एक बार फिर स्वागत करता हूँ। आप सब जानते हैं कि ये एक ऐसा मंच है जहां हम नए प्रयासों को सामने लाते हैं। देशवासियों के Innovative Ideas पर चर्चा करते हैं। इनमें से कितने ही Ideas ऐसे होते हैं जिनके पीछे लोगों ने जीवन की अथक ऊर्जा लगाई होती है।
साथियो,
कुछ समय पहले social media पर किसी ने लिखा था “आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इतिहास को रोचक बनाने के अपने प्रयास का शुभारंभ कर रहा हूँ।” उन्होंने आगे बताया ये idea बहुत ही simple है। आप इस website पर जाएँ और कोई भी एक वर्ष चुन लें। यहाँ आपको आसानी से पता चलेगा कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था। मुझे भी यह काफी दिलचस्प लगा। मैंने सोचा कि इसके बारे में और अधिक जानकारी ली जाए। मुझे पता चला कि ये काम मुंबई में रहने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री जी ने किया है। मजे की बात ये है कि कृष्णा जी ने website का नाम भी बहुत simple रखा है www.bharatrajya.com उन्होंने जो प्रयास किया है, उसकी जानकारी आप लोगों तक भी जरूर पहुंचनी चाहिए। इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न सीधे श्री कृष्णा जी से ही बात की जाए।
साथियो,
कृष्णा जी हमारे साथ फोन पर जुड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी नमस्ते।
कृष्णा शेषाद्री : नमस्ते sir नमस्ते।

प्रधानमंत्री : भाई, मुझे पता चला है, न आप tech की दुनिया से हो, न आप history teacher हो, फिर भी, आपने technology का प्रयोग करके history की site बना डाली। तो मुझे बहुत उत्सुकता है, ये सब कैसे हुआ?
कृष्णा शेषाद्री: धन्यवाद sir आपसे बात करके बहुत मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है तो sir मेरे बारे अगर मैं थोड़ा बताऊँ, तो sir मैं एक engineer था, फिर मैंने MBA किया, फिर मैं marketing field में चला गया लेकिन ये सब जब भी करता था तब भी मेरे को बचपन से इतिहास (History) में बहुत interest था। तो I always wanted to do something on History, how to make it interesting and मेरे को ये भी लगता था कि हम जैसे History सिखाते हैं उसमें हम बहुत improvement कर सकते हैं उसमें हम बहुत बदलाव लेकर आ सकते हैं History को एक कहानी बनाकर लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी, भारतीय इतिहास का ऐसा कौन-सा पहलू है, जिसके बारे में आपको लगा कि इसकी जानकारी ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को होनी चाहिए ?
कृष्णा शेषाद्री: Sir, अगर हम भारतीय इतिहास जैसे हमारे स्कूलों या कॉलजों में सिखाया जाता है जैसा आप देखते हो वो एक कोई एक empire या कोई एक kingdom उसके दृष्टिकोण से, उसके नजरिए से सिखाया जाता है और वो empires को disproportionate attention भी मिलता है। इस चक्कर में बाकी के बहुत सारे जो हमारे साम्राज्य थे जो महान साम्राज्य थे जैसे cholas, pallavas, karkota dynasty था कश्मीर में Ahoms थे जिन्होंने कम से कम 600 साल असम में अपनी संस्कृति, अपनी values system को बरकरार रखा ये सबके बारे में हम नहीं जानते। तो मैंने सोचा कि कोई ऐसा कोई site बनाएं जो ऐसे महान साम्राज्य को भी लोगों से इनको introduce किया जाए।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आप इतनी मेहनत करते हैं, मैं ऐसे ही आपको hypothetical सवाल पूछता हूँ। अगर आपको Indian History के किसी भी तीन लोगों से बातचीत का अवसर मिले, तो आप किनसे बात करना चाहेंगे और क्यों ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर, तो पहले मैं बात करूंगा, राजाराजा चोला या राजेन्द्र चोला सर जो चोला साम्राज्य के सबसे most powerful या सबसे important राजाओं में से थे, तो मैं उनसे ये जानना चाहूँगा कि पहले उनको ये vision कैसे आया जैसे उन्होंने बृहदेश्वर temple या गंगईकोंडा चोलपुरम जो बड़े बड़े मंदिर हैं, शिवजी के मंदिर हैं, वो execute करने के लिए वो vision कहाँ से आया वो planning कैसे की, उनको वो thought कैसे आया कि हम ऐसा कुछ बना के जाएं जो अगले हजार या दो हजार साल तक दूसरे लोगों को प्रेरित कर सके। तो वो मुझे उनसे जानना है। और दूसरी जो personality हैं ये actually मेरे हिसाब से Indian history में एक बहुत under rated personality है। सर उनका नाम है हेमू, तो हम उनके बारे में ज्यादा-से-ज्यादा Indian इतिहास में दो या तीन line पढ़ते हैं। हमको ये नहीं पता है कि वो जो हेमू जो थे वो एक common man थे, एक साधारण इंसान थे, वो एक व्यापारी थे, उधर से उन्होंने एक empire खड़ा किया और वो not only वो एक empire builder थे वो एक military thinker भी थे, military genius थे जिन्होंने अपने carrier में 23 लड़ाईयाँ लड़ीं उसमें से उन्होंने 22 लड़ाईयां जीतीं, तो उनका thought process कैसा था, और वो कैसे एक आम आदमी से इतने बड़े राजा बने, वो उनका वो journey मैं जानने की बहुत दिलचस्पी रखता हूँ सर। और तीसरी जो है ये this is a very interesting personality, she is a women sir, त्रिभुवन महादेवी, तो ये जो है एक ओडिसा में एक kingdom है जिसका नाम था भौमाकारा dynasty तो इनकी भी कहानी बहुत दिलचस्प है। उन्होंने जब 850 ईस्वी के आसपास जो साल में उनके जो neighbor पाला empire ने, इनके empire पर धावा बोल दिया था सर, और इनके राजा जो इनके husband थे वो उस लड़ाई में शहीद हो गए थे। और इसकी वजह से वो empire बहुत छोटा हो गया और उसके जो सरदार थे, उसके जो leaders थे वो empire छोड़कर जाने लग गए थे तो ये जो त्रिभुवन महादेवी जो lady थी इन्होंने वो सरकार संभाली and she became one of the first independent rulers in the history of India और उन्होंने सरकार को not only stabilize किया but इतना उसको powerful बना दिया कि वो अगले सौ साल तक कलिंगा और वो area में राज करते रहे। तो these are three interesting personalities whom I would like to meet in history sir.
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपको अब लगता है कि इतिहास को जी रहे हैं। आप पूरी तरह इतिहास में डूब चुके हैं। देखिये मैंने भी बड़े उत्सुकता के साथ आपकी site देखी है और मुझे सबसे interesting ये लगा कि आपकी site पर एक ऐसा tab है, जहां लोग corrections और suggestions भी दे सकते हैं। ऐसे constructive feedback के लिए open रहना ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। क्या आपको लोगों से सुझाव मिलना शुरू हुआ है क्या? और आप उन पर कैसे काम करते हैं ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर इन लोगों से बहुत सुझाव आते हैं सर। सुझाव दो प्रकार के आते हैं। एक सुझाव ऐसे आते हैं जो हमको correction suggest करते हैं – इस प्रदेश में, इस time में, इस राष्ट्र में ये राजा थे या इस time में ये युद्ध हुआ था तो ऐसे कुछ suggestion आते हैं। दूसरे suggestion आते हैं कि आप इस website में ये feature भी डाल सकते हैं या वो feature भी डाल सकते हो तो हमको दोनों प्रकार के suggestion आते हैं तो जैसे अगर हमको ऐसा एक suggestion आए कि इस प्रदेश में, इस राजा ने, इस time पे राज किया था तो हम वो suggestion को लेते हैं, तो हमारे जो sources हैं। जैसे हमको किसी ने suggestion में दिया था कि आपने India को तो दिखा दिया अगर प्रदेश के level पर भी दिखा सकते हैं तो और अच्छा होगा तो हमने वो feature implement किया और फिर हमने दूसरे feature आया था जिसमें हमने एक trump card जैसा बनाया था सारे empire के data statistics देके ताकि वो बच्चों तक पहुँच सके तो किसी ने एक suggestion दिया था कि उसको आप एक जगह पर लेकर आइए ताकि हम सब download करके हम सब share कर सके तो वो हम feature implement कर रहे हैं। तो हमे इतना जानना important है कि हम गलती करेंगे, हम क्योंकि हम सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं और वो जानके ही हमने वो correction का tab लगाया ताकि ये हम सबकी site हो और आगे जाके सारे contributions के हिसाब से हम एक ऐसा site बनाए जो अगले कुछ साल तक इतिहास एक मजेदार subject बनाए।
प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपने सचमुच में एक बहुत बड़ा काम किया है। अच्छा History के अलावा आपकी कई सारी Hobbies होगी और भी बहुत कुछ करते होंगे आप ?
कृष्णा शेषाद्री: हाँ, नहीं sir हम थोड़े boring type आदमी हैं sir.
प्रधानमंत्री : हँसते हुए
कृष्णा शेषाद्री: हम technology में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और इतिहास में रखते हैं और जब अब technology और इतिहास मिल गया इसी में हम डूबे रहते हैं पूरा दिन।
प्रधानमंत्री : चलिए कृष्णा जी आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामना है आपने एक अच्छी शुरुआत की है और आपका तरीका भी ऐसा है कि लोग जुड़ेंगे मुझे पूरा विश्वास है मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
साथियो,
कृष्णा जी का ये प्रयास सिर्फ इतिहास के विद्यार्थियों को नहीं, ये हम सबको अपने अतीत को रोचक तरीके से जानने में मदद करेगा। आपके पास भी ऐसे प्रयासों के बारे में जानकारी हो, तो उसे जरूर share करें।
मेरे प्यारे देशवासियो,
‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ यह अभियान इस समय पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका लक्ष्य बिल्कुल साफ है – नशा मुक्त युवा, Drug Free India. बहुत सारे लोग, विशेषकर हमारे युवा बहुत बड़ी संख्या में इसका हिस्सा बन रहे हैं। आखिर यह भारत के युवाओं की health, उनकी happiness और उज्ज्वल भविष्य के लिए ही हमारा सामूहिक संकल्प है।
साथियो,
नशे की लत सिर्फ एक व्यक्ति को अपने लपेटे में नहीं लेती, इसके दुष्परिणाम पूरे परिवार और समाज को भी झेलने पड़ते हैं। मैं उन लोगों की सराहना करूंगा जो drugs के खिलाफ दूसरों को जागरूक करते हैं और नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मदद में आगे आते हैं। नशा मुक्त भारत के लिए क्या आप कोई powerful slogan बना सकते हैं? क्या हमारे young musicians ऐसे songs बना सकते हैं, जिनमें drug free life का message हो? क्या students और theatre groups दिल को छू लेने वाले short plays लिख सकते हैं जिनमें drugs के खतरों के साथ-साथ उनसे बाहर निकलने का रास्ता भी हो। हमारे देश में बेहतरीन content creaters की कमी नहीं हैं। मेरा आग्रह है कि वे अलग-अलग भाषाओं में ऐसा content बनाएं जिससे इस दिशा में समाज को मदद मिले। आप अपने प्रयासों को Hashtag के साथ social media पर भी जरूर share करें। कई बार creative effort formal campaign से ज्यादा असरदार होते हैं। आइए, भारत के युवा को नशे से दूर रखने, नशे से मुक्त रखने – इस पवित्र कार्य में हम सब अपनी भूमिका निभाएं। आप अपने प्रयास को #नशा मुक्त युवा के साथ social media पर भी जरूर share करें।
मेरे प्यारे देशवासियो,
अगस्त के महीने में हमें हर तरफ देशभक्ति के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। इस समय हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र-प्रेम की भावना और प्रबल हो जाती है। ‘National Handloom Day’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ से लेकर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इसे खास बनाते हैं। ‘स्वतंत्रता दिवस’ और ‘National Space Day’ इसके अवसर तो हर देशवासी को गर्व से भर देते हैं। ‘हर घर तिरंगा अभियान’ इस भावना को और मजबूत करता है। ‘वंदे मातरम्’ के डेढ़-सौ वर्ष पूरे होने से यह साल और भी विशेष बन गया है। इस बार 8 करोड़ से अधिक तिरंगा selfie upload की गई और तिरंगे का ये उत्सव केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा – इस साल ‘सूर्यपथ तिरंगा’ के जरिए हमारा तिरंगा दुनिया-भर की एक अनोखी यात्रा पर निकला। Fiji के सुवा में सूरज की पहली किरण के साथ तिरंगा फहराया गया। इसके बाद Asia, Africa, Europe और फिर America के San Francisco तक Indian Missions और Posts पर तिरंगा लहराता गया। आप कल्पना कर सकते हैं, ये दृश्य कितने अद्भुत रहे होंगे। जैसे-जैसे दुनिया-भर में सूरज आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भारतीय तिरंगा भी लहराता गया। ऐसे प्रयास समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं। इनसे देश के साथ भी हमारा जुड़ाव और गहरा होता है। इन प्रयासों में शामिल सभी लोगों को मेरी बहुत-बहुत बधाई।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे शहरों और कस्बों की सड़कों पर रोज सुबह से शाम तक, लाखों महिलाएं अपने-अपने काम में जुटी रहती हैं। कोई सब्जी बेचती है, कोई फल, कोई चाय का ठेला लगाती है, तो कोई फूल, दिये और पूजा की सामग्री बेचती हैं। कई बार, बस थोड़ी सी पूंजी की कमी, इनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोक देती है। लेकिन अब ऐसी लाखों माताओं-बहनों को ‘PM स्वनिधि योजना’ से नई ताकत मिल रही है। ‘महिला सशक्तिकरण’ के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए। ‘PM स्वनिधि योजना’ की लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। यानी देशभर में लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं।
साथियो,
गाजियाबाद की बबीता शर्मा जी, इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। बबीता जी, पूजा की सामग्री का एक छोटा सा stall लगाती थीं। फूल, दिये, अगरबत्ती, नारियल जैसी चीजें बेचकर, वो अपने परिवार की आजीविका में हाथ बंटाती थीं। मेहनत खूब थी, लेकिन कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। ‘PM स्वनिधि’ से उन्हें आर्थिक मदद मिली। उन्होंने अपने stall पर सामान बढ़ाया, कारोबार का विस्तार किया। ग्राहक बढ़े, आमदनी बढ़ी और धीरे-धीरे सड़क किनारे का उनका छोटा सा stall एक दुकान में बदल गया।
साथियो,
बेंगलुरू की टी.एस. निन्गम्मा जी की मिसाल भी बहुत प्रेरक है। निन्गम्मा जी और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा सा काम शुरू किया। काम चल पड़ा, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। निन्गम्मा जी को भी ‘PM स्वनिधि’ से सहयोग मिला। उन्होंने अपनी Cart बेहतर की। सामान थोक में खरीदना शुरू किया और Menu में भी कई नई चीजें जोड़ीं। ग्राहक बढ़े, कमाई बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई। आज वो अपने तीन बच्चों को बेहतर Education देने में सक्षम हुई हैं।
साथियो,
जब एक महिला का कारोबार बढ़ता है, तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है। बच्चों की Education बेहतर होती है, घर की जरूरतें पूरी होती हैं, और महिला के भीतर आत्मविश्वास और मजबूत होता है। यही तो है ‘महिला सशक्तिकरण’ का एक जीवंत रूप। मैं रेहड़ी-पटरी के काम से जुड़ी सभी बहनों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं।
मेरे प्यारे देशवासियो,
स्वच्छता की एक बहुत बड़ी खूबी होती है। जब किसी जगह को स्वच्छ रखने का संकल्प वहां के लोगों का अपना संकल्प बन जाता है, तो बदलाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता। इससे उस जगह की पूरी पहचान ही बदल जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वच्छता के लिए ऐसे प्रयास, हमें निरंतर प्रेरणा देते हैं। उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक गांव है- पटवाई। वहां आकाश और रोहन नाम के दो दोस्तों ने देखा कि उनके आसपास का इलाका गंदगी से भर गया है। बस, फिर क्या था, आकाश और रोहन ने कचरे के बैग उठाए और सफाई के लिए निकल पड़े। धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनके साथ जुड़ने लगे। एक Team भी बन गई। जिसका नाम है- ‘क्लीन-अप पटवाई’। ये युवा अब तक चार गंगा घाटों को साफ कर चुके हैं। एक टन से अधिक Plastic कचरा हटा चुके हैं। इन्होंने कितने ही तालाबों और सार्वजनिक जगहों की सफाई की है।
साथियो,
इस बार श्री अमरनाथ जी की यात्रा में भी, स्वच्छता और जनभागीदारी की ऐसी ही प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। कठिन रास्तों पर, हजारों स्वच्छता कर्मी दिन-रात सेवा में जुटे रहे। इस वर्ष यात्रा के दौरान, 400 Metric टन से ज्यादा कचरे को collect और process किया गया। मुझे इस प्रयास की एक बात विशेष रूप से अच्छी लगी। स्वच्छता के इस अभियान में श्रद्धालु भी भागीदार बने। 16 हजार से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया। 10 हजार से अधिक यात्रियों को ‘Responsible Yatri’ Certificate भी दिया गया। यहां एक बहुत अनोखा प्रयोग भी हुआ। यात्रा में घोड़ों और खच्चरों के गोबर को, Biogas में बदला गया और उसी Clean Energy से, ‘स्वच्छ ज्योत’ प्रज्ज्वलित की गई। यानी बाबा बर्फानी की इस पवित्र यात्रा में, स्वच्छता भी सेवा और आस्था का एक रूप बन गई।
साथियो,
हमारे गाँव हो या शहर, हमारी नदियां हों या तीर्थस्थल। इनकी पहचान हमारे व्यवहार से भी बनती है। और जब स्वच्छता इस व्यवहार में शामिल हो जाती है, उस स्थान की शोभा और बढ़ जाती है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
कभी–कभी हमारा एक छोटा सा शौक, जीवन में एक बड़ी संभावना का रास्ता खोल देता है। नागालैंड के फेक(Phek) जिले की वेसालु पुरो जी की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है । वेसालु जी किसान परिवार में पली-बढ़ीं । बचपन से उन्होंने अपने माता–पिता को खेती करते देखा था और उन्हें खुद फूलों से बहुत लगाव था। साल 2021 में उन्होंने इसी शौक के साथ छोटे स्तर पर फूल उगाने की शुरुआत की। धीरे–धीरे उन्हें इसमें एक संभावना दिखाई देने लगी। उन्होंने देखा कि शादी-विवाह हों या फिर अन्य त्योहार, फूलों की मांग हमेशा बनी रहती है। वेसालु जी ने अपने इस शौक को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इस सफर में उन्हें स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से फूलों की वैज्ञानिक खेती की training मिली, फिर उन्होंने केवल एक चौथाई एकड़ जमीन पर, gladiolus के हजारों पौधे लगाए। पहले ही प्रयास में 5 हजार से ज्यादा फूल खिल उठे। साथियो, ये सफलता वेसालु जी के लिए एक नई शुरुआत बन गई। उन्होंने फूलों की खेती को और आगे बढ़ाया। जो फूल कभी स्थानीय बाजार में रह जाते थे, आज वो नागालैंड से निकलकर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक जा रहे हैं। वेसालु पुरो जी की यात्रा हमें बताती है कि शौक जब मेहनत और सही मार्गदर्शन से जुड़ जाता है, तो वह नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं, जो एक छोटा सा प्रयास शुरू करते हैं और देखते-ही-देखते उनका प्रयास बहुत से लोगों के जीवन में बदलाव का रास्ता बना देता है। ओडिशा के देबरीगढ़ में एक गाँव है ‘धोड़रोकुसुम’। कुछ साल पहले तक इस गाँव की मैथिली भुए जी लगभग हर दिन जंगल जाती थीं – कभी जलावन की लकड़ी लेने, कभी महुआ और केंदु पत्ता चुनने, तो कभी बांस की कोपलें और दूसरी वन उपज लाने। उनके और वहाँ के अनेक परिवारों की बहुत सी जरूरतें इसी जंगल से पूरी होती थीं, लेकिन फिर मैथिली जी देबरीगढ़ Eco–Tourism से जुड़ीं। यहाँ से जंगल के साथ उनका रिश्ता एक नई दिशा में बदल गया। अब जंगल का संरक्षण भी उनकी आजीविका का माध्यम बन गया। साथियो, मैथिली जी के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया। आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं। कोई वन्य-जीवों की सुरक्षा का दायित्व संभाल रही हैं, कोई घास के मैदानों के विकास से जुड़ी हैं, तो कुछ महिलाएं Eco–Tourism activities में योगदान दे रही हैं। साथियो, मैथिली जी और देबरीगढ़ की इन बहनों ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा भी हो सकती है और जीवन में समृद्धि भी आ सकती है। इन सभी बहनों का प्रयास हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।
साथियो,
आज हमारी बेटियों के सपनों की उड़ान, धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच रही है और आपको यह जानकर गर्व होगा कि भारत, ऐसे सपने देखने वाली दुनिया की हजारों बेटियों को एक साथ जोड़ रहा है। इस प्रयास का नाम है Mission ShaktiSAT। इसके माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को Satellite Technology सीखने और innovation के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। 23 अगस्त, National Space Day पर इस मिशन की एक सुंदर तस्वीर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में देखने को मिली। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में Mission ShaktiSAT के दूसरे चरण की शुरुआत हुई। इस अवसर पर दुनिया के अलग-अलग देशों और भारत से आई करीब 100 छात्राएं एक साथ जुटीं। भारत के दूर-दराज क्षेत्रों से चुनी हुई छात्राएं भी इसमें हिस्सा ले रही हैं। इस पूरे प्रयास का लक्ष्य भी बहुत खास है। पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक satellite को Moon की Orbit में भेजने की तैयारी है। साथियो, मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएं आने वाले समय में science, technology और innovation के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी।
मेरे प्यारे देशवासियो,
आजकल Avocado फल की बड़ी धूम है। इस फल को पहले शायद ही कोई जानता था। इसकी value और demand दोनों कम थी, लेकिन आज इसे dining table पर खूब देखा जा रहा है। आज यह health और premium market की पसंद बन गया है। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए भी ये बहुत मददगार है। आंध्र प्रदेश में कडपा के वरदराज जी का उदाहरण है। वे कई वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की खेती कर रहे थे। एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों के farm में avocado की फसल देखी। इसके बाद उन्होंने Youtube से इस पर जानकारी जुटाई। अब तक वे करीब 4 टन avocado का उत्पादन कर चुके हैं। आज वे सीधे स्थानीय दुकानों को इसकी सप्लाई कर रहे हैं। नई फसल, वैज्ञानिक सलाह और सीधी marketing से उनके छोटे से farm की कमाई पूरी तरह बदल गई है। तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चन्द्रशेखरन जी ने आधी हेक्टेयर जमीन पर avocado उगाना शुरू किया। उन्हें इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं और कमाई भी बढ़ी है। कर्नाटक में चिक्कमगलुरु के कुछ किसान भाई-बहनों ने तो coffee plantation के बीच avocado लगाया है। इससे उन्हें coffee और काली मिर्च के साथ अतिरिक्त कमाई भी हो रही है। साथियो, हम शहरों के restaurant में अक्सर avocado toast के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसी avocado के जरिए हमारे innovative किसानों ने कमाई की एक नई recipe ढूंढ ली है। यानि अपने देश के avocado से आपके toast का स्वाद भी बढ़ा और किसानों की आमदनी भी बढ़ गई है।
मेरे प्यारे देशवासियो,
कुछ ही दिनों में 3 सितंबर को हम महानायक उत्तम कुमार जी की जन्म-शताब्दी मनाएंगे। साथियो, उत्तम कुमार जी एक versatile actor थे, जो अपने अभिनय से लोगों के दिलों में रच-बस गए। Film lovers का मानना है कि श्रीमान सत्यजीत रे ने फिल्म ‘नायक-the hero’ की पूरी script महानायक उत्तम कुमार जी को ध्यान में रखकर लिखी थी। श्रीमान सत्यजीत रे ने कहा था कि उनमें dignity के साथ-साथ अद्भुत emotional depth भी था। किरदार को वो जीवंत बनाने के लिए बहुत मेहनत करते थे। उत्तम कुमार जी अपनी सहजता के साथ ही philanthropy के लिए भी जाने जाते थे। उनके जीवन से कभी भी हार न मानने की एक और बड़ी सीख भी मिलती है। उनकी शुरुआती फिल्में बहुत नहीं चलीं, लेकिन उन्होंने अपने काम पर focus बनाए रखा। इसी का परिणाम था कि उन्होंने इतनी ऊंचाई हासिल की। साथियो, मुझे ध्यान है कि जब मैं कोलकाता में road show कर रहा था, तो मैं उत्तम कुमार जी के घर के सामने से भी गुजरा था। वहाँ मुझे एक व्यक्ति ने उनकी एक तस्वीर भी भेंट की थी। मैं एक बार फिर महानायक उत्तम कुमार जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे हमेशा हम सब के दिलों पर राज करते रहेंगे।
महानायक उत्तम कुमार चीरोदिन मानुषेर हृदये राज कोरबेन”
मेरे प्यारे देशवासियो,
हमारे पर्व और त्योहार, हमारी परंपराओं के साथ-साथ, हमें एक-दूसरे से जुडने का भी अवसर देते हैं। आने वाले दिनों में हम और भी कई महत्वपूर्ण पर्व मनाने जा रहे हैं। 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पावन पर्व है। सितंबर में ही हम विश्वकर्मा पूजा भी मनाएंगे। इस अवसर पर अपने आसपास के कारीगरों, शिल्पकारों और विश्वकर्मा साथियों का सम्मान करना चाहिए। कुछ महीनों बाद दीपावली भी आने वाली है, इसकी तैयारियां भी धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं। त्योहारों के इस मौसम में, मैं एक बार फिर, आपसे, vocal for local का आग्रह दोहराऊंगा और vocal for local का मतलब केवल मिट्टी के दीये खरीदना नहीं है, इसका vision बहुत बड़ा है। हम अपने घर के लिए जो भी सामान खरीदते हैं, उसे एक बार जरूर देख लें कि वो भारत में बना हो। भारत के आत्मनिर्भर बनने का मार्ग, भारत में बनी चीजों पर गर्व करने से ही प्रशस्त होगा। इस संदेश को ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है। हमारे creative world के साथियों, influencers और celebrities की भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। मेरा आपसे आग्रह है कि स्वयं भी vocal for local को अपनाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए।
साथियो,
आपके आस-पास भी ऐसे अनेक लोग होंगे, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। आप उनके बारे में ‘मन की बात’ के लिए जरूर लिखिए। आपका भेजा हुआ अनुभव, देश के किसी कोने में, किसी के लिए, नई प्रेरणा बन सकता है। मुझे आपके सुझावों और अनुभवों की प्रतीक्षा है।
बहुत-बहुत धन्यवाद।

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