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एक बार भी नहीं, कभी भी नहीं’कृनशे के खिलाफ युवाओं को डीसीपी धारणा यादव ने दिया सशक्त संदेश
संस्कार यूनिवर्सिटी पाटौदा में नशा मुक्ति अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक, सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे, अपराध, पारिवारिक विघटन और सामाजिक दुष्प्रभावों पर किया विस्तार से संवाद
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी एवं पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के दिशा-निर्देशन तथा पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह के कुशल नेतृत्व में चलाए जा रहे ष्नशा मुक्ति हरियाणाष् अभियान के तहत सोमवार को झज्जर पुलिस द्वारा संस्कार यूनिवर्सिटी, पाटौदा में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (झज्जर) धारणा यादव ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय पहुंचने पर चेयरमैन महिपाल यादव एवं वाइस चांसलर अजीत सिंह ने पुलिस उपायुक्त धारणा यादव का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया और अपने संबोधन में डीसीपी धरणा यादव ने कहा कि ष्नशे के प्रति आपका जवाब हमेशा श्नहींश् होना चाहिएकृएक बार भी नहीं, कभी भी नहीं। यह आपके जीवन का सवाल है।ष् उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या दोस्तों के दबाव में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत व्यक्ति को अपराध, बीमारी और बर्बादी की ओर ले जाती है।उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति को चोरी, सेंधमारी, लूटपाट और कई बार हत्या जैसे गंभीर अपराधों तक पहुंचा देती है। नशा केवल व्यक्ति का भविष्य ही नहीं छीनता, बल्कि उसके परिवार की खुशियां, सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिति भी बर्बाद कर देता है। डीसीपी झज्जर ने विद्यार्थियों को बताया कि कोई भी ऐसा पदार्थ जो मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र को अस्वाभाविक रूप से प्रभावित करे, स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यदि किसी पदार्थ के सेवन से अत्यधिक उत्तेजना, चक्कर, अधिक नींद, भावनाओं पर नियंत्रण खत्म होना या कृत्रिम नशे का एहसास हो, तो उससे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले अधिकांश नशीले पदार्थ अफीम (पोस्ता) से बनाए जाते थे, लेकिन आज पूरी तरह रासायनिक तत्वों से तैयार सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। कई मामलों में इनकी केवल एक खुराक ही व्यक्ति को नशे का आदी बना सकती है। कुछ सिंथेटिक ड्रग्स स्वादहीन होती हैं, जिससे इनकी पहचान करना मुश्किल होता है और ये जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि नशे से बाहर निकलना संभव है, लेकिन इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और पुनर्वास केंद्रों की सहायता आवश्यक होती है। कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने उपचार के बाद नशे को छोड़कर नया जीवन शुरू किया और आज वे दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।डीसीपी धारणा यादव ने कहा कि पुलिस के पास ऐसे अनेक मामले आते हैं, जहां नशे के कारण घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद और तलाक जैसी दुखद परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं। नशे के आदी माता-पिता के बच्चों पर भी इसका गहरा मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में है तो उसे तिरस्कार नहीं, बल्कि सही परामर्श और उपचार के लिए प्रेरित करें। युवा वर्ग अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण में लगाए, क्योंकि यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने तथा समाज को नशा मुक्त बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।




जल संचय-जनभागीदारी 2.0श् अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं नागरिक: डीसी
कैच द रेन-2026 अभियान के तहत वर्षा जल संचयन अपनाकर बढ़ाएं भूजल स्तर
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा- सभी विभाग जल संरक्षण कार्यों में तेजी लाकर अभियान को बनाएं जन-आंदोलन
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रत्येक नागरिक को वर्षा जल संचयन अपनाकर भूजल स्तर बढ़ाने तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्जल संचय-जनभागीदारी 2.0 (कैच द रेन-2026)श् अभियान का उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहित करना, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना है।
जल संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व
डीसी ने जिलावासियों से आह्वान किया कि वे अपने घरों, संस्थानों, स्कूलों, कार्यालयों तथा औद्योगिक इकाइयों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अपनाएं। उन्होंने कहा कि मानसून की प्रत्येक बूंद को सहेजकर भविष्य के जल संकट से काफी हद तक बचा जा सकता है। जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।
जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएं विभाग
डीसी वर्षा खांगवाल ने सभी संबंधित विभागों से कहा कि अभियान के तहत जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। तालाबों के पुनर्जीवन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सोक पिट, चेक डैम तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में तेजी लाई जाए, ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
कैच द रेन-2026 अभियान की सभी गतिविधियां पोर्टल पर अपडेट करें अधिकारी
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कैच द रेन-2026 अभियान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों का रिकॉर्ड समयबद्ध एवं सही तरीके से पोर्टल पर अद्यतन रखा जाए। अपलोड किए गए कार्यों के डेटा का सत्यापन पूरी गंभीरता से किया जाए तथा यदि किसी प्रविष्टि में त्रुटि, डुप्लीकेट रिकॉर्ड, लागत, जियो-कोऑर्डिनेट्स अथवा फोटो संबंधी कोई विसंगति हो तो उसे तत्काल ठीक किया जाए, जिससे अभियान की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों, स्वयं सहायता समूहों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आमजन की सक्रिय भागीदारी से ही जल संरक्षण अभियान को व्यापक सफलता मिल सकती है।
जनजागरूकता से आगे बढे जल संचय-जन भागीदारी 2.0 अभियान
डीसी ने कहा कि सभी विभाग जन जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा दें तथा अधिक से अधिक लोगों को श्जल संचय-जन भागीदारी 2.0श् अभियान से जोड़कर जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि जल संरक्षण आज की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी है। इसलिए हर नागरिक और प्रत्येक विभाग को इस अभियान में पूरी प्रतिबद्धता के साथ योगदान देना चाहिए।



एसआईआर 2026: मतदाता सूची पुनरीक्षण में करें सक्रिय सहयोग, बिना देरी गणना प्रपत्र करें जमा – डीसी
24 जुलाई का इंतजार नहीं, आज ही बीएलओ को दें गणना प्रपत्र या ऑनलाइन करें आवेदन
स्वीप के तहत आयोजित हो रही जागरूकता गतिविधि
डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने किया शेष बचे मतदाताओं से आह्वान
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: भारत निर्वाचन आयोग की ओर से झज्जर जिला के सभी पात्र मतदाताओं से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 अभियान के तहत अपने गणना प्रपत्र बिना किसी देरी के भरकर संबंधित बीएलओ को सौंपने अथवा ऑनलाइन माध्यम से जमा करने की अपील की जा रही है। एसआईआर के अंतर्गत स्वीप के माध्यम से जागरूकता गतिविधियों का भी निरन्तर आयोजन करते हुए मतदाता को प्रेरित किया जा रहा है। डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने कहा कि एस आई आर प्रक्रिया में गणना पत्र जमा कराने व डिजिटाइजेशन की अंतिम तिथि 24 जुलाई का इंतजार करने के बजाय समय रहते प्रक्रिया पूरी करना प्रत्येक मतदाता की जिम्मेदारी है।
आज ही गणना प्रपत्र जमा होने से पुनरीक्षण कार्य होगा तेज
डीसी ने सभी बीएलओ को कहा कि प्राप्त होने वाले सभी गणना प्रपत्रों का तत्काल डिजिटाइजेशन कराया जाए, जिससे मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की आधारशिला है, इसलिए प्रत्येक पात्र मतदाता का सहयोग जरूरी है।
घर बैठे ऑनलाइन भी उपलब्ध है सुविधा
जिला निर्वाचन अधिकारी वर्षा खांगवाल ने बताया कि झज्जर जिला के बेरी, बहादुरगढ़, बादली और झज्जर विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के माध्यम से स्वयं भी ऑनलाइन गणना प्रपत्र भर सकते हैं। इससे समय की बचत होगी और डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी अधिक तेज और सरल होगी।
अधिकारियों को दिए त्वरित डिजिटाइजेशन के निर्देश
डीसी ने सभी निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों एवं बीएलओ को निर्देश दिए कि प्राप्त होने वाले प्रत्येक गणना प्रपत्र का तुरंत डिजिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए। जिन मतदाताओं के प्रपत्र प्राप्त नहीं हो रहे हैं, उनके संबंध में निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक टिप्पणी दर्ज की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से पूरी हो सके। उन्होंने पुनः अपील करते हुए कहा कि जिन मतदाताओं ने अभी तक गणना प्रपत्र जमा नहीं कराया है, वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना तुरंत प्रपत्र भरकर जमा करें और मतदाता सूची के शुद्धीकरण अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
शिक्षण संस्थान में आयोजित हो रही जागरूकता गतिविधि
झज्जर जिला में मतदाताओं को एसआईआर प्रक्रिया में सहभागी बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों में जागरूकता गतिविधियों का आयोजन हो रहा है। स्वीप के जिला नोडल अधिकारी एवं एडीसी जगनिवास ने बताया कि विद्यार्थियों के माध्यम से अभिभावकों तक एसआईआर का संदेश पहुंचाया जा रहा है। वाल पेंटिंग, शपथ कार्यक्रम का आयोजन करते हुए लोगों को विशेष गहन पुनरीक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।



समाधान शिविरों में प्राप्त शिकायतों का हो त्वरित निपटारा: एसडीएम
जिला व सभी उपमंडलों में आयोजित समाधान शिविरों में आमजन की सुनी गई समस्याएं
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: राज्य सरकार की जनहितकारी पहल के तहत आयोजित समाधान शिविरों के क्रम में सोमवार को डीसी वर्षा खांगवाल के मार्गदर्शन में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर में झज्जर के एसडीएम रवि मीणा ने आमजन की शिकायतें सुनीं। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समाधान शिविरों से बढ़ा जनता का भरोसा
एसडीएम रवि मीणा ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। समाधान शिविरों के माध्यम से नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रत्येक शिकायत का संवेदनशीलता के साथ निस्तारण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
लंबित शिकायतों पर रखें विशेष निगरानी
शिविर के दौरान एसडीएम ने विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी शिकायत अनावश्यक रूप से लंबित न रहे तथा प्रत्येक प्रकरण का निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जन शिकायतों का समयबद्ध समाधान ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।
जिला मुख्यालय सहित सभी उपमंडलों में लगाए गए शिविर
उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय के अलावा बेरी, बहादुरगढ़ और बादली उपमंडलों में भी समाधान शिविर आयोजित किए गए, जहां विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई कर उनके शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसे शिविर आयोजित कर आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करेगा।
ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर सीईओ जिला परिषद मनीष कुमार फोगाट, सीटीएम रितु सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
झज्जर लघु सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर के दौरान आमजन की शिकायतें सुनते एसडीएम रवि मीणा।
फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों पर अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन 3 अगस्त तक: डॉ मलिक
कृषि उप निदेशक डॉ सुरेंद्र मलिक ने जिला के किसानों से किया राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का लाभ उठाने का आह्वान
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: कृषि उप निदेशक डॉ सुरेंद्र मलिक ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इच्छुक किसान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर 3 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कृषि उप निदेशक ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य फसल अवशेषों का वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करना है, जिससे पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगे तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। उन्होंने किसानों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने और सरकार की इस लाभकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया।
इन कृषि यंत्रों पर स्कीम के अंतर्गत अनुदान का प्रावधान
कृषि उप निदेशक डॉ सुरेंद्र मलिक ने बताया कि योजना के तहत सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपरध्मल्चर, श्रब मास्टरध्रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एम.बी. प्लाऊ, जीरो टिल सीड फर्टिलाइजर ड्रिल, सुपर सीडर, सरफेस सीडर, स्ट्रॉ बेलर, स्ट्रॉ रेक, क्रॉप रीपर, ट्रैक्टर माउंटेड लोडर तथा ट्रैक्टर ड्रिवन टेडर सहित विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान का प्रावधान है।
किसान केवल एक मशीन के लिए कर सकता है आवेदन
डॉ मलिक ने बताया कि एक परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से केवल एक ही किसान एक मशीन के लिए आवेदन कर सकेगा तथा अनुदान भी केवल एक मशीन पर ही दिया जाएगा। यदि किसी किसान का चयन बेलर के लिए होता है तो उसे स्ट्रॉ रेक तथा रोटरी स्लेशरध्श्रब मास्टर खरीदने की भी अनुमति होगी। उन्होंने बताया कि आवेदन के लिए ष्मेरी फसल मेरा ब्यौराष् पोर्टल पर वर्ष 2025-26 की खरीफ एवं रबी फसलों का पंजीकरण, पहचान पत्र, परिवार पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक खाते का विवरण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित नियमों के अनुसार प्रस्तुत करने होंगे। पात्र किसानों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति (डीएलईसी) द्वारा ड्रॉ ऑफ लॉट्स के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए किसान कार्य दिवसों में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, झज्जर कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।




जनगणना-2027 की तैयारियां तेज : जिला जनगणना पुस्तिका के अपडेटेशन को लेकर प्रशिक्षण शुरू
डीसी वर्षा खांगवाल के मार्गदर्शन में 23 जुलाई तक संवाद भवन में शेड्यूल के अनुरूप कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
झज्जर, 20 जुलाई, अभीतक: डीसी एवं प्रधान जनगणना अधिकारी वर्षा खांगवाल के मार्गदर्शन में जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत सोमवार से जिला जनगणना पुस्तिका (डीसीएचबी) को अपडेट करने के लिए कर्मचारियों का चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संवाद भवन, झज्जर में शुरू हो गया। यह प्रशिक्षण 23 जुलाई तक चलेगा। मास्टर ट्रेनर मोहित कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जिला जनगणना पुस्तिका तैयार करने की प्रक्रिया, डाटा संकलन एवं उसके महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीसीएचबी जिले की एक महत्वपूर्ण संदर्भ पुस्तिका है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, भूमि, बैंकिंग, परिवहन, संपर्क व्यवस्था सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का विस्तृत विवरण संकलित किया जाता है।
विलेज डायरेक्टरी एवं टाउन डायरेक्टरी तैयार करने पर विशेष फोकस
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में विलेज डायरेक्टरी एवं टाउन डायरेक्टरी तैयार करने की प्रक्रिया पर भी विशेष रूप से जानकारी दी जा रही है। विलेज डायरेक्टरी में गांवों की आधारभूत सुविधाओं एवं आवश्यक जानकारियों का संकलन किया जाता है, जबकि टाउन डायरेक्टरी में नगरों से संबंधित प्रशासनिक, सामाजिक एवं आधारभूत सुविधाओं का विवरण शामिल होता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक आंकड़ों के सही, सटीक एवं समयबद्ध संकलन के लिए प्रशिक्षित करना है, ताकि जनगणना-2027 के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय डाटा तैयार किया जा सके।
झज्जर संवाद भवन में सोमवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवारियों एवं फील्डमैन को जिला जनगणना पुस्तिका (डीसीएचबी) के अपडेट करने संबंधी जानकारी देते मास्टर ट्रेनर मोहित कुमार।

विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 अभियान
केवल 4 दिन शेष, सभी मतदाता अपना गणना प्रपत्र संबंधित बीएलओ को अवश्य कराएं जमा : डीसी
रेवाड़ी, 20 जुलाई, अभीतक: डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अभिषेक मीणा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से हरियाणा प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (एसआईआर) अभियान के तहत निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जिला रेवाड़ी में मतदाता सत्यापन का कार्य निर्बाध रूप से जारी है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जिला के बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा शुक्रवार 24 जुलाई तक घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। वहीं मतदान केंद्रों के युक्तिकरण एवं पुनर्व्यवस्था का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा किया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को होगा। इसके बाद शुक्रवार 31 जुलाई से रविवार 30 अगस्त 2026 तक दावे एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। दावों और आपत्तियों का निस्तारण शुक्रवार 31 जुलाई से सोमवार 28 सितंबर 2026 तक किया जाएगा तथा शनिवार 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने आह्वान किया कि जिन मतदाताओं को नाम जोड़ना, हटाना या किसी प्रकार का संशोधन कराना है, वे निर्धारित अवधि में अपना दावाध्आपत्ति अवश्य दर्ज करें।





बकाया कर राशि के निपटान का लाभ उठाने का अंतिम मौका
योजना का लाभ उठाने की अंतिम तिथि 28 सितंबर
रेवाड़ी, 20 जुलाई, अभीतक: हरियाणा सरकार ने विपणन करदाताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए बकाया कर राशि के निपटान के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू की है। योजना की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 है। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2025 में छोटे व्यापारियों को लाभ देने के लिए शुरू की गई एकमुश्त निपटान स्कीम को व्यापारियों ने हाथो-हाथ लिया और उसका 115223 व्यापारियों ने पुरजोर लाभ उठाया। इस स्कीम की अभूतपूर्व कामयाबी को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर निपटान स्कीम लाने का विचार किया है जिसके द्वारा पुराने बकायों को निपटाया जा सके तथा अदालतों में लंबित मुकदमों का समाधान किया जा सके। जीएसटी में कम से कम बकाया राशियों के साथ आगे बढ़ा जाए ताकि जीएसटी संग्रह को बढ़ाने में अधिक से अधिक समय और ध्यान दिया जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त प्रीति चैधरी ने बताया कि सरकार ने 1 जून 2026 से 120 दिनों के लिए 28 सितंबर 2026 तक एक मुश्त निपटान स्कीम, 2026 शुरू की है। जिसके तहत सात कराधान अधिनियमों के तहत निर्धारित बकाया देय राशि के निपटान का प्रावधान है। यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे इस स्कीम में आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। उसका उस वर्ष के लिए उस अधिनियम में संपूर्ण कर, ब्याज एवं जुर्माना राशि माफ हो जाएगी। आवेदक अपने बकाया देय राशि के निपटान के लिए किसी भी अधिनियम में किसी भी वर्ष के लिए आवेदन कर सकता है। पूर्ववर्ती हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत बकाया राशि के निपटान के लिए विशेष छूट उपलब्ध है। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 को 1 अप्रैल, 2003 से हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 के लागू होने के साथ निरस्त कर दिया गया था। हरियाणा सामान्य बिक्री कर के तहत बकाया देय बहुत पुराने हैं, इसलिए 1 लाख से अधिक कर बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। प्रीति चैधरी ने बताया कि फार्म सी, फार्म एफ, फार्म एच, फार्म ई1, फार्म ई2, टैक्स इनवॉइसध्वैट सी-4, वैट डी1, वैट डी2 आदि जैसे वैधानिक प्रपत्रों के न जमा करने के कारण बड़ी संख्या में बकाया राशि देय है। इन मामलों में से कुछ विभिन्न अपील स्तरों पर हैं। इन बकाया को विशेष रूप से लक्षित करने के लिए एक नई छूट प्रस्तावित की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति अब ऐसे प्रपत्र प्रस्तुत करने में सक्षम है, तो उसके कर की मांग उन प्रपत्रों के प्रस्तुत करने से प्राप्त होने वाली छूट की राशि से घटा कर कम कर दी जाएगी, बशर्ते ये प्रपत्र तीन महीने के भीतर सत्यापित हो जाएं। यह लाभ ऐसे फर्जीध्नकली फर्मों को उपलब्ध नहीं होगा जिनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई है। यह लाभ उन वैधानिक प्रपत्रों के लिए भी उपलब्ध नहीं होगा जिन्हें पहले प्राधिकरणों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। यह केवल हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 और केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 से संबंधित बकाया राशि पर लागू होगा। उन्होंने बताया कि स्कीम के तहत हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत प्रदान की गई कर छूट में एक रुपए से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, अन्य मामले में कर छूट का 70 प्रतिशत है। अन्य अधिनियमों के अधीन उपलब्ध छूट में एक रुपये से एक लाख रुपये तक कर छूट का 100 प्रतिशत, 1 लाख से 10 लाख तक 60 प्रतिशत, 10 लाख से 1 करोड़ तक 50 प्रतिशत, 1 करोड़ से 10 करोड़ तक 40 प्रतिशत, 10 करोड़ रुपये से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत, 30 करोड़ रुपये से 60 करोड़ तक 30 प्रतिशत, 60 करोड़ रुपये से अधिक पर 0 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत ब्याज तथा जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी गई है। प्रीति चैधरी ने बताया कि आवेदक को प्रत्येक पूर्ववर्ती स्लैब में दी गई छूट का पूर्ण लाभ उसके बकाया कर राशि की स्लैब तक मिलेगा। बकाया राशि निर्धारित करने वाले किसी भी आदेश के विरूद्ध अपील या मुकदमे में शामिल आवेदक भी लंबित अपीय या मुकदमे को वापस लेने की शर्त के साथ इस स्कीम के तहत आवेदन कर सकते है। निपटान की राशि का भुगतान किस्तों में करने की भी सुविधा स्कीम में दी जा रही है। पांच लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए कोई किस्त नहीं। पांच लाख रुपए से अधिक और पच्चीस लाख रुपए तक के निपटान की राशि के लिए दो समान किस्तें। एक किस्त आवेदन जमा करते समय और दूसरी अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर। पच्चीस लाख रुपए से अधिक के निपटान की राशि के लिए तीन किस्तें होगी। आवेदन जमा करते समय निपटान राशि का 40 प्रतिशत, अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर दूसरी किस्त, निपटान राशि का 30 प्रतिशत और अंतरिम आदेश की तिथि से 120 दिनों के भीतर शेष राशि की तीसरी किस्त। ऐसे मामलों में जहां निपटान के लिए आवेदन सही पाया गया है और स्वीकार कर लिया गया है तो आवेदक के खिलाफ कोई आगे की कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी।
सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन स्कीम के तहत कृषि यंत्रों पर ड्रा आज
ऑनलाइन ड्रा के माध्यम से किया जाएगा लाभार्थियों का चयन
रेवाड़ी, 20 जुलाई, अभीतक: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित समैम स्कीम के तहत कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध करवाने के लिए मंगलवार 21 जुलाई, 2026 को ऑनलाईन ड्रा निकाला जाएगा। डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि योजना के तहत कृषि यन्त्रों पर अनुदान उपलब्ध करवाने के लिए 16 फरवरी तक विभागीय पोर्टल ूूू.ंहतपींतलंदं.हवअ.पद पर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। योजना के तहत विभाग द्वारा जिला रेवाड़ी में 359 गोटावेटर और 109 लेजर लैण्ड लेवलर पर अनुदान देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभागीय पोर्टल पर अन्तिम तिथि तक रोटावेटर के लिए 736 और लेजर लैण्ड लेवलर के लिए 216 सफल आवेदन प्राप्त हुए है। निर्धारित लक्ष्य से अधिक आवेदन होने के कारण मंगलवार 21 जुलाई, 2026 को प्रातरू 11 बजे लघु सचिवालय सभागार कमरा नंबर 203, रेवाड़ी में जिला स्तरीय कार्यकारिणी कमेटी के द्वारा लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन ड्रॉ के माध्यम से किया जाएगा। चयनित किसानों को कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। आवेदन करने वाले सभी किसान 21 जुलाई को प्रातरू 11 बजे होने वाले ऑनलाईन ड्रा में भाग ले सकते है।





समाधान शिविर: सभी समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाएगा सुनिश्चित – एडीसी
एडीसी राहुल मोदी ने सुनी समाधान शिविर में आमजन की समस्याएं
रेवाड़ी, 20 जुलाई, अभीतक: हरियाणा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में जनसेवा को समर्पित समाधान शिविर नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कारगर साबित हो रहे हैं। एडीसी राहुल मोदी ने सोमवार को आयोजित समाधान शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकर आमजन की शिकायतों को सुनते हुए समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया। गांव छुरियावास में रास्ते के निर्माण के लिए पैमाइश करवाने के लिए एडीसी ने बीडीपीओ धारूहेड़ा को निर्माण कार्य शुरू करवाने से पहले पूरे रास्ते की पैमाइश करवाने के निर्देश दिए। गांव बगथला में रास्ते में अतिक्रमण की शिकायत पर एडीसी ने बीडीपीओ धारूहेड़ा को रास्ते से अतिक्रमण हटवाकर निर्माण कार्य पूरा करवाना सुनिश्चित करें। गांव गोठड़ा टप्पा में बीपीएल कॉलोनी की साफ सफाई के लिए एडीसी ने बीडीपीओ खोल को कॉलोनी में साफ सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं गांव में पेयजल की सप्लाई के लिए एडीसी ने जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नहर से स्वच्छ पानी की सप्लाई करवाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त समाधान शिविर में परिवार पहचान पत्र में नाम दर्ज कराने, पेंशन, जमीनी विवाद, बिजली आदि शिकायतें सामने आई जिनका एडीसी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। एडीसी ने शिकायतकर्ताओं को आश्वासन दिया कि सभी समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। एडीसी ने बताया कि जनता व प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए लोगों की समस्याओं का निवारण व सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से अवगत करवाने के लिए जिला व उपमंडल स्तर पर प्रत्येक सोमवार व गुरुवार को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे है ताकि लोगों को एक स्थान पर उनकी समस्याओं को सुनकर उनका निवारण किया जा सके। इस अवसर पर एसडीएम सुरेश कुमार, सीटीएम जितेंद्र कुमार, डीएसपी संजीव कुमार सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
समाधान शिविर में आमजन की समस्याएं सुनते हुए एडीसी राहुल मोदी।

मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना 2.0
एमएमएपीयूवाई के तहत नगर पालिका बावल में 26 जुलाई को अंत्योदय मेला
बावल विधानसभा क्षेत्र के 3074 पात्र लाभार्थियों को दी जाएगी योजनाओं की जानकारी
रेवाड़ी, 20 जुलाई, अभीतक: रेवाड़ी के बावल नगर पालिका परिसर में रविवार, 26 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना (एमएमएपीयूवाई-2.0) के तहत अंत्योदय मेला आयोजित किया जाएगा। अंत्योदय मेला के सफल आयोजन के लिए सोमवार को लघु सचिवालय सभागार में एडीसी राहुल मोदी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में एडीसी ने मेले की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। एडीसी राहुल मोदी ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना 2.0 के तहत अंत्योदय मेले में सभी विभाग समयबद्ध और समन्वित रूप से कार्य करें। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले में आने वाले प्रत्येक पात्र लाभार्थी की प्रभावी रूप से काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने स्टॉल पर संचालित योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और मिलने वाले लाभ की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बैंक प्रतिनिधियों की अनिवार्य उपस्थिति पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी पात्र लाभार्थी उचित मार्गदर्शन के बिना वापस नहीं लौटना चाहिए। एडीसी ने बताया कि मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना-2.0 का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान सभी विभाग अपने-अपने स्टॉल पर पर्याप्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करें तथा लाभार्थियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए पूरी गंभीरता एवं समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि अंत्योदय मेले का उद्देश्य पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी लाभ उपलब्ध कराना है।
एक ही स्थान पर मिलेगी सभी योजनाओं की जानकारी: एडीसी
राहुल मोदी ने कहा कि अंत्योदय मेले के माध्यम से पात्र परिवारों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी, पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेजों के बारे में मार्गदर्शन और विभिन्न सेवाओं का लाभ मिलेगा।
तीन हजार से अधिक परिवारों को किया जाएगा आमंत्रित
एडीसी ने बताया कि बावल विधानसभा क्षेत्र के 18 गांवों व नगर पालिका बावल के वार्डों के कुल 3074 पात्र लाभार्थियों की पहचान की गई है। इन सभी लाभार्थियों को 26 जुलाई को नगर पालिका बावल परिसर में आयोजित अंत्योदय मेले में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम सचिवों व पटवारियों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में भी पूर्व सूचना उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।
बैंकिंग सेवाएं भी कराई जाएंगी उपलब्ध
एडीसी ने कहा कि अंत्योदय मेले में बैंक प्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी, ताकि पात्र लाभार्थियों को स्वरोजगार, ऋण, वित्तीय समावेशन एवं अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया जा सके। बैठक में एसडीएम बावल संजीव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी रेनू बाला, जिला बाल कल्याण अधिकारी वीरेंद्र यादव, बीडीपीओ बावल शुभम, पीओ अर्जुन लाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
अंत्योदय मेला के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते एडीसी राहुल मोदी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अलमस्त बापू लाल बादशाह जी के 43वें वार्षिक मेले में की बतौर मुख्य अतिथि शिरकत
नकोदर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का संबोधन’
अलमस्त बापू लाल बादशाह जी के डेरे पर आयोजित तीन दिवसीय मेले में आना मेरा परम सौभाग्य- मुख्यमंत्री
ये तीन दिवसीय मेला केवल एक उत्सव नहीं है आत्मा से जुड़ाव, दिलों की नजदीकी और रूहानी संदेशों की पुनः स्थापना का प्रयास
इस पावन आयोजन के लिए सभी श्रद्धालुओं, सेवादारों और आयोजकों को हार्दिक शुभकामनाएं- मुख्यमंत्री
भारतवर्ष एक ऐसा देश जहां विविधता में भी है एकता
इसी विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का काम सूफी संतों ने किया- मुख्यमंत्री
नकोदर की यह धरा सिर्फ पंजाब की नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की अमूल्य धरोहर
यह भूमि बुल्ले शाह, बाबा मुराद शाह और श्री अलमस्त बापू लाल बादशाह की जैसी रूहानी शख्सियतों से जुड़ी- मुख्यमंत्री
महान सूफी संत अलमस्त बापू लाल बादशाह जी का जीवन भी प्रेम, सेवा, समानता और इंसानियत की अद्भुत मिसाल
हरियाणा भी सूफी परंपरा से अछूता नहीं- मुख्यमंत्री
जींद, हिसार, मेवात, पलवल, फरीदाबाद और पानीपत जैसे जिलों में कई पीर फकीर आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं
हमारी सरकार ने न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रयास किए बल्कि सांस्कृतिक मेलों और रूहानी कार्यक्रमों को भी दिया बढ़ावा
हमारे युवा पीर फकीरों, संत महात्माओं और ऋषि मुनियों के दिखाए मार्ग को समझें और उसे अपने जीवन में उतारे- मुख्यमंत्री
हमें जात-पात, धर्म, भाषा, क्षेत्रवाद की दीवारें तोड़ कर ऐसे भारत की ओर बढ़ना है जहां हर नागरिक सिर्फ इंसानियत के नाम से पहचाना जाए
यह वार्षिक मेला सदैव इसी प्रकार श्रद्धा, सेवा, भाईचारे और मानवता का देता रहे संदेश ऐसी मेरी कामना- मुख्यमंत्री



राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
सभी उपायुक्त राजस्व से जुड़ी शिकायतों के निवारण संबंधी प्रणाली को प्रभावी बनाएं: मुख्यमंत्री
भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण में तेजी लाने के दिए निर्देश
किसानों को एग्री स्टैक कार्यक्रम से जोड़ने के लिए चलाया जाए विशेष जागरूकता अभियान
चंडीगढ़, 20 जुलाई, अभीतक: हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण तथा नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग की प्रत्येक सेवा पारदर्शी, तकनीक आधारित और निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सुगम सेवाएं मिल सकें। बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त, डीएमसी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग स्थापित कर व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया । इससे बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है तथा विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास और रखरखाव में तेजी आई है। इस तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआईध्यूएक्स डिजाइनर, तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ तथा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित 16 स्वीकृत पद शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने एकीकृत राजस्व पोर्टल (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि यह पोर्टल नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोर्टल में अधिकारियों के लिए सिंगल साइन-ऑन प्रणाली तथा सेवा वितरण एवं लंबित मामलों की रियल टाइम निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है।
राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। जिन आवेदकों के आवेदन अस्वीकृत हुए हैं और यदि वे निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें पुनर्विचार का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। शिकायत डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी आवेदनों के निपटान में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। प्रत्येक अस्वीकृत आवेदन में अस्वीकृति का स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए तथा उसका समुचित रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्वीकृत मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच की जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रक्रियागत त्रुटि या गलत जांच के कारण लाभ से वंचित न रहना पड़े। मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदारों तथा राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि मौके पर ही राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सके
मिशन मोड में होगा भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण
मुख्यमंत्री ने राज्य के भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि अब तक 40.20 करोड़ से अधिक पुराने राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिससे राज्य में डिजिटल भूमि अभिलेख उपलब्ध हो पाया है। ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जबकि राज्य की भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) संरचना को मजबूत करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि राज्य के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को अद्यतन किया गया है तथा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण किया जा चुका है। डिजिटलीकृत अभिलेखों में से 99.5 प्रतिशत से अधिक का प्रथम स्तर का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड तैयार कर लगभग 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं तथा नागरिकों की सुविधा के लिए आईटी हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने पांच लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो अपील प्रणाली से जोड़ा जा चुका है ताकि निर्धारित समय से अधिक लंबित मामलों का स्वतः उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो। डिजिटल पंजीकरण सुधारों से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हो पाया है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि कागज रहित दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूर्णतः एंड-टू-एंड पेपरलेस हो चुकी है तथा लंबित मामलों की निगरानी के लिए सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध है।
सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित हों
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में उचित वेटिंग रूम सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही सभी कार्यालयों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाए तथा डिजिटल स्क्रीन पर टोकन नंबर प्रदर्शित किए जाएं ताकि नागरिकों को व्यवस्थित और सुविधाजनक ढंग से सेवाएं प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि पेपरलेस प्रणाली के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 12,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जियो-रेफरेंस गांवों के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जिलों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि लैंड डिमार्केशन को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों के त्वरित निदान में सिरसा जिले के कार्य की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि राजस्व अभिलेखों की आधार से जोड़ने का कार्य भी तेजी से जारी है। अब तक कुल 1.69 करोड़ अभिलेखों में से 42.55 लाख से अधिक अभिलेख आधार से जोड़े जा चुके हैं, जो कुल अभिलेखों का लगभग 25 प्रतिशत है। इससे भूमि अभिलेख अधिक सटीक होंगे, डुप्लीकेट प्रविष्टियां समाप्त होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं की गति तेज होगी तथा फर्जी भूमि लेन-देन पर प्रभावी रोक लगेगी।
15 अगस्त तक एग्री स्टैक पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश
बैठक में एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि किसानों के एग्री स्टैक आईडी बनवाने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक किसान पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए ताकि अधिक से अधिक किसान भविष्य की डिजिटल कृषि पहलों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि आगामी फसल सीजन में राज्य के सभी गांवों को शत-प्रतिशत कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए डाटा सत्यापन, मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण, जिला स्तर पर क्षमता निर्माण, मोबाइल एप की तैयारी, मॉक सर्वे तथा अगस्त मध्य से राज्यव्यापी सर्वेक्षण प्रारंभ किया जाएगा। वर्ष के अंत तक सर्वेक्षण पूर्ण कर उसका ऑडिट भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऑफलाइन जमाबंदी के लंबित मामलों तथा पटवार सर्किलों के युक्तिकरण की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में यह भी बताया गया कि विभाग ने आधार सीडिंग, ऑटो म्यूटेशन, प्रमाणित प्रतियां, सीमांकन, ऋण प्रविष्टियां तथा उपयोगकर्ता पंजीकरण सहित विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल के लिए विस्तृत संचालन प्रक्रिया (एसओपी) एवं उपयोगकर्ता पुस्तिकाएं तैयार की हैं ताकि पूरे राज्य में इनका एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके
आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की करी समीक्षा’
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को इन योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक सरकारी अस्पताल को निजी अस्पतालों के समकक्ष आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल स्वच्छता, मरीजों की देखभाल और सेवा वितरण के सर्वोच्च मानक स्थापित करें। उन्होंने उपायुक्तों को सरकारी अस्पतालों का नियमित औचक निरीक्षण करने तथा चिकित्सकों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा, सभी उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



तंबाकू नियंत्रण में हरियाणा राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा
12,800 से अधिक शैक्षणिक संस्थान तंबाकू-मुक्त घोषित : डॉ. सुमिता मिश्रा
चंडीगढ़, 20 जुलाई, अभीतक: हरियाणा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली दो तिमाहियों के दौरान राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के तहत उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं, जिसने प्रभावी प्रवर्तन, जागरूकता सृजन, नशा मुक्ति सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से एक तंबाकू-मुक्त समाज बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया है। हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि तंबाकू-मुक्त शैक्षणिक संस्थान (टीओएफईआई) दिशा-निर्देशों के तहत 12,865 शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू-मुक्त घोषित किए जाने के साथ हरियाणा तंबाकू नियंत्रण में अग्रणी राज्यों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तंबाकू नियंत्रण प्रतिज्ञाओं (शपथ) की संख्या के मामले में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है, जो व्यापक जनभागीदारी और मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार तंबाकू-मुक्त गाँव बनाने की दिशा में भी तेजी से प्रगति कर रही है, जिसके तहत 1,128 गाँवों को पहले ही तंबाकू-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए हरियाणा की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि तंबाकू नियंत्रण कानूनों का कड़ाई से पालन कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बनी हुई है। रिपोर्टिंग अवधि के दौरान, कोटपा (ब्व्ज्च्।), 2003 की धारा 4 के तहत 3,848 उल्लंघनकर्ताओं के चालान किए गए, जिससे जुर्माने के रूप में ₹1.82 लाख एकत्र हुए। इसके अलावा, प्रवर्तन एजेंसियों ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत छह मामले दर्ज किए और 33 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का स्टॉक जब्त किया। उन्होंने आगे जानकारी दी कि सभी जिला अस्पतालों और 17 मेडिकलध्डेंटल कॉलेजों में संचालित तंबाकू नशा मुक्ति केंद्रों ने 20,414 तंबाकू उपयोगकर्ताओं को परामर्श और उपचार सेवाएं प्रदान कीं, जिससे उन्हें पेशेवर परामर्श और फार्माकोथेरेपी के माध्यम से तंबाकू छोड़ने में मदद मिली। हरियाणा के राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने कहा कि इन उपलब्धियों को हासिल करने में व्यापक जागरूकता गतिविधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के दौरान, 13,524 शैक्षणिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया, 10,500 से अधिक तंबाकू-मुक्त प्रतिज्ञा सत्र आयोजित किए गए, और राज्य भर में 4,255 स्कूल रैलियां तथा 4,633 जागरूकता प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। उन्होंने आगे कहा कि तंबाकू-मुक्त गाँव पहल के तहत, 1,444 ग्राम सभा बैठकों, 2,247 जागरूकता गतिविधियों और 1,002 ग्राम स्तरीय समन्वय समितियों के गठन ने सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया है। इस कार्यक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक व्यापक डिजिटल पहुंच भी बनाए रखी है, जिससे तंबाकू नियंत्रण पर निरंतर जन जुड़ाव सुनिश्चित हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने कानून के प्रवर्तन को और मजबूत करने, नशामुक्ति सेवाओं का विस्तार करने तथा शैक्षणिक संस्थानों, गाँवों और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू-मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे एक स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त हरियाणा के निर्माण में योगदान दिया जा सके।



लोगों को सुलभ, किफायती और त्वरित न्याय देने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनूठी पहल
22 जिलों और 38 उप-मंडलों में एक साथ विशेष लोक अदालतों का किया आयोजन
9,590 मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से किया गया निपटारा – न्यायमूर्ति दीपक सिबल
चंडीगढ़, 20 जुलाई, अभीतक: लोगों को सुलभ, किफायती और त्वरित न्याय दिलाने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक सिबल ने एक अनूठी पहल की है। जिसके तहत 18 जुलाई को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्टश् के तहत सभी जिलों में एक साथ विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिसमें 9,590 मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया। प्राधिकरण द्वारा यह विशेष पहल से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने और वैकल्पिक विवाद समाधान (।क्त्) तंत्र को मजबूत करने के प्रति हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। इन समझौतों से लंबे समय से लंबित मामलों का त्वरित समाधान संभव हुआ, जिससे पक्षकारों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचने, काफी समय और खर्च बचाने और आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधानों के माध्यम से सौहार्दपूर्ण संबंध बहाल करने में मदद मिली। विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन ने हरियाणा की अदालतों में चेक बाउंस होने के मामलों की लंबित संख्या को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही विवाद समाधान के लिए एक प्रभावी, कुशल और नागरिक-अनुकूल तंत्र के रूप में लोक अदालत संस्था में जनता के विश्वास को भी मजबूत किया है। विशेष लोक अदालतों के दौरान 97,29,66,109 रुपये की राशि का निपटारा किया गया, जो विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान में लोक अदालत तंत्र की प्रभावशीलता को उजागर करता है।

